Thursday, June 6, 2019

चलो ज़रा हंस लिया जाये --

१.

अमीर पत्नी गरीब कवि पति से :  मेरे पास कोठी है , बंगला है , गाड़ी है , साड़ी है , हीरे हैं , जवाहरात हैं।  तुम्हारे पास क्या है !
कवि पति : मेरे पास कविता है , रचना है , कल्पना है , गीत है , नगमा है और नज़मा भी है।

कवि जी अब फुटपाथ पर रहते हैं।

२.

लेबर डे पर पत्नी पति से : देखो कल तापमान ४५ को पार कर गया।  अब आप आज ही ऐ सी की सर्विस कराइये , स्विच ख़राब है , वो भी बदलवाना पड़ेगा , और ये ट्यूब लाइट तो जलती ही नहीं।  फ्रिज में सारी बोतलें खाली पड़ी हैं, भर देना।  अच्छा ऑफिस जाते समय ये चैक जमा कराते जाना।  और शाम को सब्ज़ी लेते आना।  कभी कुछ काम भी कर लिया करो। 

बेटा  :  पापा, मज़दूर दिवस की बधाई।

३.

पत्नी ( दूर से चिल्ला कर ) : अज़ी कहाँ हो !
पति :  अब क्या हुआ ! मैं यहाँ बैठा हूँ शांति के साथ।
पत्नी कमरे में आकर : हे भगवान ! मैं तो डर ही गई थी। आप तो अकेले बैठे हैं।  कहाँ है शांति ?
पति : उसी को तो खोज रहा हूँ।

अगले दिन से कामवाली बाई की छुट्टी हो गई।

४.

पति ( बड़े प्यार से ) :  अज़ी आप बुरा ना माने तो मैं एक दो दिन के लिए मायके हो आऊं !
पति : भाग्यवान, तुलसी दस को छोड़कर भला कौन ऐसा पति होगा जो पत्नी के मायके जाने पर बुरा मानेगा !

पत्नी का मायके जाना कैंसिल।  

Wednesday, May 8, 2019

उत्तर भारतियों को उत्तर पूर्व भारतियों से ही कुछ सीख लेना चाहिए --


उत्तर पूर्व भारत के राज्य मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग को पूर्व का स्कॉटलैंड कहा जाता है। समुद्र तल से लगभग ५००० फुट की ऊँचाई पर स्थित शिलॉन्ग एक हिल स्टेशन जैसा ही है। हालाँकि यह उत्तर भारत के हिल स्टेशंस की तरह पहाड़ की ढलान पर नहीं बसा है। सारा शहर लगभग समतल भूमि पर बसा है और चारों ओर छोटी छोटी पहाड़ियां हैं। लगभग सवा लाख की जनसँख्या वाले शहर में गाड़ियों की भीड़ देखकर एक बार तो घबराहट सी होने लगती है। शहर में प्रवेश करने के बाद शहर के मध्य तक पहुँचने में यदि एक घंटा भी लग जाये तो कोई हैरानी नहीं होगी। 




लेकिन गाड़ियों और लोगों की भीड़ भाड़ होने के बावजूद यहाँ कभी ट्रैफिक जैम नहीं होता , न ही किसी को कोई परेशानी होती है। इसका कारण है यहाँ के लोगों में यातायात के नियमों के प्रति जागरूक होना। यहाँ विदेशों की तरह पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दी जाती है ताकि उन्हें सड़क पार करने में कोई कठिनाई न हो। कितना भी भारी ट्रैफिक क्यों न हो, पैदल सड़क पार करने वाले को देखकर गाड़ियां स्वत: ही रुक जाती हैं। यहाँ की सड़कें भले ही कम चौड़ी हों, लेकिन सड़क के दोनों ओर पक्के टाइल्स लगे हुए साफ सुथरे फुटपाथ बने हैं जिन पर पैदल चलने में बहुत सुविधा रहती है। 



यहाँ के निवासियों में महिलाओं की औसत ऊँचाई ५ फुट और पुरुषों की साढ़े पांच फुट नज़र आई।  यानि यहाँ के लोग आम तौर पर कम कद के हैं लेकिन स्वाभाव में सीधे और निश्छल नज़र आये। कहीं भी सडकों के किनारे कूड़े के ढेर नज़र नहीं आये। ज़ाहिर है, यहाँ प्रशासन का कूड़ा प्रबंधन उत्तम दर्ज़े का है। साथ ही यहाँ के निवासी भी सफाई पसंद और स्वच्छता के प्रति जागरूक हैं। बस यही जागरूकता और कर्तव्यपरायणता यदि उत्तर भारत के लोगों में भी आ जाये तो निश्चित ही सरकार का स्मार्ट सिटीज बनाने का सपना अवश्य पूरा हो पायेगा।            

Sunday, May 5, 2019

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व हाथ स्वच्छता दिवस के उपलक्ष में --



मार्केट में सड़क किनारे , जब हमने गाड़ी करी खड़ी ,
और आधी ढकी नाली पर खड़े खोमचे वाले पर नज़र पड़ी। 
कुछ कमसिन नवयौवनाएँ, खीं खीं कर खिलखिलाती,
और सी सी कर चटकारे लेती दी दिखाई। 
तभी कानों में किसी के झगड़ने की आवाज़ आई  
पता चला बुआ और बबुआ में बहस छिड़ गई थी ,
बुआ यानि कोलाई अपनी जिद पर अड़ गई थी ,
शिगैला रुपी बबुआ को झिड़क रही थी ,
कि भैया चांस ख़त्म हो गया तेरा ,
आज तो ये खूबसूरत शिकार है मेरा। 
शिगैला बोला तुम हर बार मुझे हरा जाती हो ,
चार में से तीन शिकार तो तुम्ही मार ले जाती हो। 
हमारा ये बंधन गठबंधन है या ठगबंधन ये तुम जानो। 
लेकिन जब सम्बन्ध है तो , मेरी बस ये बात मानो।   
देखो सामने खड़ी तीन तीन कुड़ियां कुंवारी हैं ,
आज तो इश्क फरमाने की अपनी बारी है। 

खोमचे वाला भी मंद मंद मुस्करा रहा था ,
अपने पोंछा बने गमछे से हाथ पोंछे जा रहा था। 
कभी यहाँ , कभी वहां , जाने कहाँ कहाँ ,
खुजाये जा रहा था। 
और पट्ठा उन्ही हाथों से गोल गप्पे खिलाये जा रहा था । 
फिर जैसे ही उसने ,
फिश पोंड जैसे मटके से कल्चर मिडिया निकाला,
और ज़रा सा अगार मिलाकर कल्चर प्लेट में डाला। 
शिकारियों का शोर और ज्यादा आने लगा  
जाने कहाँ से चचा साल्मोनेला धमका ,
और बुआ बबुआ को समझाने लगा।   
बोला देखो तुम दोनों का दम तो दो चार दिन में निकल जायेगा ,
इश्क मुझे फरमाने दो, मेरा तीन चार हफ्ते का काम चल जायेगा।   

अगले दिन अस्पताल की पी डी में भीड़ बड़ी थी।   
भीड़ के बीच वही नवयौवनाएं बेचैन सी खड़ी थीं।    
एक को शिगैला ने प्यार के जाल में फंसा लिया था
दूसरी पर धारा ३७७ की आड़ में,
कोलाई ने मोहब्बत का जादू चला दिया था।     
दोनों बेचैनी से रात भर करवटें बदलती रही थीं
दीर्घ शंका से ग्रस्त रात भर तबियत मचलती रही थीं।  
तीसरी तीसरे दिन साल्मोनेला संग अस्पताल आई
और जल्दी से ठीक करने की देने लगी दुहाई।  

उस दिन शाम को फिर उसी मार्किट में उसी जगह ,
वही मोमचे वाला खड़ा था।  
उसके कंधे पर वही पोंछा बना गन्दा सा गमछा पड़ा था।  
उसके चेहरे पर वही चिर परिचित मुस्कान नज़र रही थी
उस दिन तीन नहीं चार चार महिलाएं गोल गप्पे खा रही थीं।   
बेशक १३५ करोड़ के विकासशील देश में गोल गप्पे खाना भी मज़बूरी है
लेकिन हाथों के साथ साथ खाने पीने में स्वच्छता अपनाना भी ज़रूरी है।    

हाथों की चंद लकीरों में, बंद है किस्मत हमारी,
गंदे हाथों की लकीरों में, पर बसती हैं बीमारी।
स्वच्छ हो तन मन और , स्वच्छ रहे वातावरण ,
हाथों की स्वच्छता से ही, दूर हों मुसीबतें सारी।   



Saturday, April 27, 2019

काज़ीरंगा नेशनल पार्क , दुनिया का सबसे ज्यादा हरा भरा पार्क --

काज़ीरंगा नेशनल पार्क , दुनिया का सबसे ज्यादा हरा भरा पार्क --


काज़ीरंगा मुख्यतया एक सींग वाले गेंडों के लिए जाना जाता है।  ये घास खाते हुए सड़क किनारे तक आ जाते हैं।

गौहाटी से लगभग सवा दो सौ किलोमीटर और गाड़ी से ५ -६ घंटे दूर ४३० वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है काज़ीरंगा नेशनल पार्क जिसे १९८५ में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्ज़ा दे दिया था और २००६ में सरकार ने इसे प्रोजेक्ट टाइगर के रूप में अपना लिया है। यहाँ विश्व भर में पाए जाने वाले एक सींग वाले गेंडों की संख्या के लगभग दो तिहाई एक हॉर्न वाले गेंडे ( सिंगल हॉर्न राइनो) पाए जाते हैं।  इनके अलावा हाथी, जंगली भैंसे , टाइगर और हिरन भी बहुतायत में पाए जाते हैं। घने जंगल, हरे भरे घास के मैदान, झीलों और पानी के श्रोतों से ओत प्रोत काज़ीरंगा पार्क अनेकों दुर्लभ पक्षियों के लिए भी एक सुरक्षित आवास प्रदान करता है।




घास के मैदानों में घास चरती गायें।

गौहाटी शहर से निकलते ही नेशनल हाइवे ३७ के दोनों और दूर दूर तक फैले घास के मैदानों में हज़ारों की संख्या में गायें घास चरती नज़र आती हैं। सरसरी तौर पर देखने से ऐसा लगता है जैसे ये जंगली जानवर हों। लेकिन पास से देखने पर पता चलता है कि ये पालतु गायें हैं जिनके गले में एक लम्बी रस्सी बांधकर उसे एक खूंटे से बांध दिया जाता है। हर एक गाय उसी दायरे में रहकर दिन भर घास खाती रहती है। इस तरह पूरे रास्ते यह दृश्य दिखाई देता है। इनके सारे दिन घास चरने का नज़ारा देखकर समझ में आता है कि इस कहावत का उद्गम शायद ऐसे ही हुआ होगा जब हम किसी को हर वक्त मुँह चलाते देखकर कहते हैं कि "सारे दिन चरती रहती है।"   


बिहू फेस्टिवल मनाती युवतियां।

इस क्षेत्र में यह एक अजीब नज़ारा दिखाई देता है कि यहाँ गायें बहुत छोटे आकार की होती हैं। यहाँ तक कि गायें बकरी जैसी, बकरी मेमने जैसी और मेमने खरगोश जैसे दिखाई देते हैं। शायद यह खाने में बस घास ही उपलब्ध होने के कारण हो सकता है।  यहाँ पुरुषों और स्त्रियों का कद भी अपेक्षाकृत कम नज़र आता है। ज़ाहिर है, यहाँ देहात में लोग गरीब ज्यादा हैं जिसके कारण पूर्ण पोषण की कमी रहती है।





जंगल में जीप सफारी।




हरा भरा जंगल।


काज़ीरंगा पार्क में हरियाली इतनी ज्यादा है कि आपको एक भी हिस्सा सूखा या रेतीला नज़र नहीं आएगा।  यहाँ की हरियाली देखकर एक और कहावत के चरितार्थ होने की अनुभूति होती है - सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखाई देता है - सचमुच यहाँ हरा रंग इस कदर देखने को मिलता है कि कुछ समय आप रंग शून्य होकर भूल से जाते हैं कि दुनिया में कोई और रंग भी है।


जंगल , झील और हरियाली।




जंगली भैंसों के झुण्ड। 


इस पार्क में प्रवेश के लिए तीन द्वार हैं जो अलग अलग हिस्सों को दर्शाते हैं - पश्चिमी द्वार, मध्य द्वार और पूर्वी द्वार। द्वार पर ही आपको एंट्री टिकट और सफारी के लिए जीप मिल जाएगी। टॉप सीजन के समय एडवांस बुकिंग कराना सही रहता है , हालाँकि ऑनलाइन बुकिंग महँगी पड़ती है। जहाँ गेट पर आपको कुल २५५० रूपये देने पड़ेंगे , वहीँ ऑनलाइन बुकिंग पर ३६०० रूपये देने पड़ते हैं। जीप सफारी में करीब २० किलोमीटर का सफर तय होता है जिसमे आपको पार्क के विभिन्न रूप और वन्य प्राणियों के दर्शन होते हैं। इस पार्क की एक विशेषता यह है कि हरियाली , पेड़ पौधे , पानी की झीलें और दूर पहाड़ियां देखकर आप एक पल के लिए भी बोर नहीं होते। यदि आपका जीप ड्राईवर ज़रा सा भी बातूनी हुआ तो आपको न सिर्फ गाइड करता चलेगा , बल्कि कई दुर्लभ पक्षियों के भी दर्शन कराता रहेगा। 


गेंडा , एक शुद्ध शाकाहारी जीव।




एक सुअरी और अनेक बच्चे।




जंगल में अकेला हाथी अक्सर नाराज़ रहता है और हमला कर सकता है।




जंगल में सभी जीव स्वतंत्र और मज़े में मिल जल कर रहते हैं।




जंगली भैंसे बहुत ताकतवर होते हैं।  इनके सींग भी बहुत बड़े होते हैं।

काज़ीरंगा पार्क जाने के लिए सबसे बढ़िया समय है सर्दियों का, यानि अक्टूबर से अप्रैल तक।  अप्रैल समाप्त होते होते यहाँ बारिश होनी आरम्भ हो जाती है और पार्क को सफारी के लिए बंद कर दिया जाता है। पार्क के पास हाइवे पर वैस्ट और सेंट्रल गेट के पास अनेक होटल और रिजॉर्ट्स बने हैं जो सभी बजट के सैलानियों के लिए उपयुक्त हैं।  यदि आप पैसा खर्च करने में सक्षम हैं तो आपको गेट के पास बने किसी रिजॉर्ट में ठहरना चाहिए।  यह अपने आप में एक अद्भुत अनुभव रहेगा।           


रिजॉर्ट का एक हिस्सा जो खाली पड़ा था लेकिन बहुत हरा भरा था ।

Monday, April 22, 2019

घुमक्कड़ी और स्वास्थ्य --





एक ज़माना था जब नव विवाहित जोड़े पहली बार शादी के बाद हनीमून के बहाने घर से बाहर जाते थे और अक्सर वही उनकी आखिरी सैर होती थी क्योंकि उसके बाद जीवन यापन में इस कद्र व्यस्त हो जाते थे कि घूमने जाने के लिए न समय होता था और न ही संसाधन। उधर गांवों में तो हनीमून कोई जानता ही नहीं था।  उनका आवागमन तो मायके और ससुराल तक ही सीमित होता था।  लेकिन समय के साथ समय बदला,, सम्पन्नता बढ़ी और अब हमारे यहाँ भी युवा वर्ग पर्यटन में दिलचस्पी लेने लगा। अब यहाँ भी विदेशियों की तरह बहुत से लोग समय मिलते ही निकल पड़ते हैं देश विदेश की सैर पर। 

लेकिन ज़ाहिर है कि दूर दराज के क्षेत्र में सैर पर जाने के लिए आवश्यक है कि आप यात्रा करने में सक्षम हों। यानि आपका स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है , तभी आप यात्रा का पूर्ण आनंद ले पाएंगे।  विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के अनुसार स्वस्थ होना महज़ रोगो का न होना नहीं है , अपितु आपका "शारीरिक , मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक" तौर पर सक्षम होना है। जब तक सभी मापदंड पर आप खरे नहीं उतरते , तब तक न आप पूर्ण स्वस्थ हैं और न ही आप यात्रा करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम हैं।

अब प्रश्न यह उठता है कि इन पांच मापदंडों में से सबसे अहम और आवश्यक मापदंड क्या है।

शारीरिक : बेशक शारीरिक रूप से सक्षम होना बहुत आवश्यक है। लेकिन बहुत से लोग कई रोगों से पीड़ित होने के बावजूद यात्रा करने में सक्षम रहते हैं। यहाँ तक कि जो लोग अपाहिज होने के कारण चल नहीं पाते, वे भी परिवार के लोगों की सहायता से यात्रा करने में सफल रहते हैं। हमारे एक मित्र डायबिटीज से पीड़ित हैं , रोज दिन में तीन बार इन्सुलिन के इंजेक्शन लगाते हैं, फिर भी ७० वर्ष के आयु में विदेशों की सैर कर रहे हैं। ज़ाहिर है, शारीरिक परिसीमा उनके आड़े नहीं आती। 

आर्थिक:  पर्यटन के लिए निश्चित ही एक न्यूनतम धन राशि चाहिए।  लेकिन अधिकांश पर्यटक बजट टूरिस्ट होते हैं, यानि वे कम से कम खर्चे में घूमना कर लेते हैं। सैर पर जाने के लिए दिलचस्पी और इच्छा शक्ति चाहिए , बाहरी दुनिया देखने के लिए। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो ५ सितारा होटलों में रहकर देश विदेश भ्रमण करते हैं। ट्रैकिंग का शौक रखने वाले न्यूनतम राशि में दो से तीन सप्ताह पर्वतों की वादियों में सुखद समय व्यतीत कर पाते हैं। ज़ाहिर है, पर्यटन के लिए पैसा तो चाहिए लेकिन हर तरह के बजट के लिए विकल्प मौजूद होते हैं। 

सामाजिक : विदेशी सैलानी अक्सर अकेले यात्रा पर निकल पड़ते हैं।  इससे वे स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद की घुमाई कर पाते हैं। हमारे देश में पति पत्नी बच्चों समेत घूमने की रिवाज़ ज्यादा है।  बच्चे बड़े हो जाएँ तो पति पत्नी दोनों यात्रा पर निकल पड़ते हैं। लेकिन यदि साथ में एक और युगल हो तो निश्चित ही घूमने का मज़ा दुगना हो जाता है।  लेकिन इसके लिए आवशयक है कि मित्र युगल भी समान विचारों और पसंद वाला हो।  वरना घर से बाहर निकलकर तो पति पत्नी भी ज्यादा दिन तक बिना लड़े झगड़े नहीं रह पाते।  आखिर, सबकी पसंद नापसंद अलग अलग होती है।  इसलिए समायोजन बहुत आवश्यक है। 

आध्यात्मिक : विश्व भर में बहुत से पर्यटन स्थलों पर मंदिर , मस्जिद, गुरूद्वारे या चर्च यात्रा कार्यक्रम में शामिल होते हैं।  बिना श्रद्धा के इन स्थानों पर आप असहज महसूस कर सकते हैं।  लेकिन यदि श्रद्धा न भी तो आप वास्तु और शिल्प सौंदर्य देखकर भी लाभान्वित हो सकते हैं।  ज़ाहिर है, इन स्थानों पर जाने के लिए आपका आध्यात्मिक रूप से सम्पूर्ण होना आवश्यक नहीं है। 

मानसिक :  अपने ४२ वर्ष के घुमक्कड़ी के अनुभव से हमने यह जाना और पहचाना है कि पर्यटन के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक और अपरिहार्य है। जो लोग मानसिक रोग से त्रस्त होते हैं, वे तो दुर्भाग्यवश असक्षम होते ही हैं, अन्यथा स्वस्थ लोग भी यदि मानसिक रूप से व्याकुल या व्यथित हों तो पर्यटन एक बोझ सा बन सकता है। किसी बात की चिंता, तनाव या डर आपके मूड को इस तरह प्रभावित करता है कि आप न स्वयं बल्कि दूसरों को भी यात्रा का आनंद उठाने में बाधा साबित हो सकते हैं। घर से बाहर निकलकर कई बार अप्रत्यासित रूप से बाधाएं और मुसीबतें आ जाती हैं जिनसे निपटने के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है।   

निष्कर्ष : यह निकलता है कि एक पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही यात्रा का संपूर्ण आनंद ले सकता है।  कोई भी कमी या बाधा आपके आनंद में विघ्न डाल सकती है।  लेकिन जहाँ बाकि सभी बाधाएं पार की जा सकती हैं  वहीँ मानसिक अस्वस्थता सदा आपके लिए एक नासूर बनाकर रंग में भंग डाल सकती है।  इसलिए जब भी किसी यात्रा पर जाएँ तो मानसिक रूप से नियंत्रित रहकर यात्रा करें ताकि आप यात्रा का सम्पूर्ण आनंद ले सकें।     


Wednesday, March 20, 2019

हैप्पी होली --






होली पर्व है
मस्ती में आने का।

खाने खिलाने का ,
पीने पिलाने का।

हंसने हंसाने का ,
और सबको प्यार से गले लगाने का।

हैप्पी होली !!!!!

Saturday, March 16, 2019

मुक्तक --



कभी सर्जिकल स्ट्राइक को फ़र्ज़ी बता रहे हैं,
पत्थरबाजों की पिटाई पर आंसू बहा रहे हैं।
स्विस बैंकों में अरबों रखने वाले पूछ रहे हैं ,
बताओ खाते में पंद्रह लाख कब आ रहे हैं। 

जंग जीतने को जंगल के सब जीव मिल जाते हैं,
लेकिन शेर को देख सबके होंठ सिल जाते हैं ।
जिनकी फितरत है जितना चाहें उछालें कीचड़
आखिर कमल तो कीचड़ में भी खिल जाते हैं ।


जो मांग रहे हैं आतंकवादियों की मौत के सबूत,
खुद जाकर देख लें अड्डों की तबाही के सबूत ।
फिर भी ग़र शक है अपनी सैनिक कार्रवाई पे ,
जहन्नुम में तो मिल ही जायेंगे ७२ हूरों संग कपूत। 

पानी रोकोगे तो हम हिमालय तोड़ देंगे,
टमाटर रोकोगे तो एटम बम छोड़ देंगे।
हमसे तौबा तौबा करो ऐ हिन्दुस्तानियो,
वरना आतंकी हमारा ही सर फोड़ देंगे। 

Tuesday, March 5, 2019

भारत के नंदन , अभीनंदन , तुम्हे वंदन --



आतंक के ठिकानों की तबाही से मुँह मोड़ना पड़ा ,
नापाक पाक को खुद अपना ही गुरुर तोड़ना पड़ा।
मोदी ने विश्व नेताओं से मिलकर कसा ऐसा शिकंजा ,
अभीनंदन को बिना शर्त सही सलामत छोड़ना पड़ा। 

ना तो इमरान को हिंदुस्तान पर प्यार आया है ,
ना ही उसके मन में शांति का विचार आया है।
बाजवा को याद आ गई सिद्धू की प्यार भरी झप्पी,
ठोको ताली, अभिनन्दन को तो सिद्धू ने बचाया है।

एक तो आतंकियों को पनाह देकर गुनाह कर रहे हो ,
फिर फिदायीन बनाकर कश्मीर को तबाह कर रहे हो।
उस पर कहते हो कि मैं नहीं हूँ शांति नोबल के लायक,
यार तुम तो ऐसे माहौल में भी अच्छा मज़ाक कर रहे हो।

अपने छोटे से विमान से पाकी एफ १६ को गिराया है,
फिर पाक सैनिकों के सामने गर्व से सिर उठाया है।
फैशन के दौर में युवा भूल गए थे मूंछों की शान को,
अभिनन्दन तुम्हारी मूंछों ने सचमुच गज़ब ढाया है।

जो मांग रहे हैं आतंकवादियों की मौत के सबूत,
खुद जाकर देख लें अड्डों की तबाही के सबूत । 
फिर भी ग़र शक है अपनी सैनिक कार्रवाई पे ,
जहन्नुम में तो मिल ही जायेंगे ७२ हूरों संग कपूत। 



Monday, February 11, 2019

कुछ हंसी मज़ाक , कुछ बातें साफ साफ --

जिंदगी के सफर में हमसफ़र अनेक होते हैं ,
कुछ बेवफा, बेगैरत , कुछ बन्दे नेक होते हैं।
अच्छी सूरत देखकर झांसे में ना आओ यारो ,
फेसबुक पर दिखते चेहरे अक्सर फेक होते हैं।

आस्था के बाज़ार में बाबा अनेक होते हैं ,
कुछ रामदेव से संत, कुछ आसाराम से नेक होते हैं।
डेरों के घेरों में नहीं होते सदा सौदे सच्चे ,
गुफाओं में रहने वाले बाबा भी फेक होते हैं।

खुद को खुद पर ही बहुत प्यार आया ,
जब जब डी पी में  नया फोटो लगाया।
असली सूरत तो अपनी तब दी दिखाई ,
जब पहली बार आधार कार्ड हाथ में आया।

क्रिकेट में कर के घोटाला , ललित मोदी तो फरार हुआ ,
बैंकों का नौ हज़ार करोड़ , विजय माल्या पे उधार हुआ।
नीरव मोदी भी डकार गया, देश के ग्यारह हज़ार करोड़,
कुछ हज़ार का क़र्ज़ लेकर बेचारा किसान गुनेहगार हुआ।

वक्त ग़र साथ दे तो आम भी खास बन जाते हैं ,
वक्त बदलते ही रिश्तों के अहसास बदल जाते हैं।
ना कर गुमां इस बेवफ़ा पर, ये किसी की ना हुई ,
कुर्सी छूटते ही राजा भोज भी गंगू दास बन जाते हैं।

स्मार्ट फोन ने ऐसा झमेला कर दिया है , 
इन्सां को भीड़ में भी अकेला कर दिया है। 
जुड़े रहते हैं विश्व भर से हर पल लेकिन , 
अब घरों को तो जैसे तबेला कर दिया है।

कभी सर्जिकल स्ट्राइक को फ़र्ज़ी बता रहे हैं , 
कभी पत्थरबाज़ों की पिटाई पर आंसू बहा रहे हैं।  
स्विस बैंकों के खातों में अरबों रखने वाले पूछते हैं ,  
कि खाते में पंद्रह लाख रूपये कब आ रहे हैं ! 

वो आतंकवादियों का साथ निभाते हैं , 
अपने ही सैनिकों पर पत्थर बरसाते हैं।  
जांबाज़ जुल्मियों संग भी बरतते हैं संयम, 
बाढ़ आने पर वो ही नैया पार लगाते हैं।   






Tuesday, February 5, 2019

सर्दी में बाल कभी मत कटाओ --


आज फिर हमने कटिंग कराई ,
आज फिर अपनी हुई लड़ाई ।

नाई ने पूर्ण आहुति की पुकार जब लगाईं ,
तो हमने कहा , बाल कुछ तो काटो भाई ।

भले ही ले लो जितना तुमको माल चाहिए ,
वो बोला काटने के लिए भी तो बाल चाहिए।

बाहर निकले तो सिर के बीच सर्दी लग रही थी ,
घर जाकर देखा , आधे सिर में बर्फ जम रही थी। 

अब हम समझे कि बाल बचाओ, माल बचाओ ,
समझ जाओ, सर्दी में कभी मत बाल कटाओ ।  

Saturday, February 2, 2019

पहले मुर्गी आई या अंडा --


विदेशों में सडकों पर,
कोई हॉर्न नहीं बजाता।
हॉर्न नहीं बजाता,
क्योंकि वहां आवश्यकता नहीं होती। 
आवश्यकता नहीं होती,
क्योंकि वहां अनुशासन होता है।
अनुशासन होता है,
क्योंकि वहां कानून व्यवस्था अच्छी है।
कानून व्यवस्था अच्छी है,
क्योंकि वहां जनसँख्या कम है।
जनसँख्या कम है,
क्योंकि वहां लोग काम में व्यस्त होते हैं।
काम में व्यस्त होते हैं,
क्योंकि वहां जनसँख्या कम है।
इसी से साबित होता है,
कि पहले मुर्गी आई या अंडा ! 
यह आज तक कोई नहीं समझ पाया।  

Thursday, January 31, 2019

जब अपना खाना खुद ही बनाना पड़ा --


एक दिन एक महिला बोली ,
डॉक्टर साहब,
आप पत्नी पर कविता
क्यों नहीं सुनाते हैं।
हमने कहा , हम लिखते तो हैं ,
लेकिन पत्नी को सुनाने से
घबराते हैं।
एक बार हमने,
पत्नी पर लिखी कविता,
पत्नी को सुनाई।
गलती ये हुई कि,
अपनी को सुनाई।
उस दिन ऐसी मुसीबत आई ,
कि हमें
घर छोड़कर जाना पड़ा।
और तीन दिन तक
अपना खाना,
खुद ही बनाना पड़ा।
तब से हम पत्नी पर लिखी
कविता तो सुनाते हैं ,
लेकिन भूलकर भी
पत्नी के सामने नहीं सुनाते हैं।  

Monday, January 28, 2019

एयर चाइना की एयर होस्टेस -- एक मुक्तक --



एयर चाइना की एयर होस्टेस
बोल कम मुस्करा ज्यादा रही थी,
इंग्लिश में उसकी बातें हमें
कुछ भी समझ में नहीं आ रही थी।

हम थे परेशान और उसकी
पेशानी पर भीआ रहा था पसीना ,
क्योंकि हमारी इंग्लिश भी
कौन सी उसकी समझ में आ रही थी।


Thursday, January 3, 2019

गत वर्ष का एक निष्पक्ष लेखा जोखा --


देखते देखते गुजर गया एक और साल,
जाते जाते देखिये कर गया क्या हाल । 
हम ले रहे थे ऑस्ट्रेलिया में गर्मियों के मज़े,
यहाँ तो सर्दी और प्रदुषण ने कर दिया बेहाल। 

हम तो विदेश में करते रहे मोदीत्त्व का प्रचार,
पर चिंता में डालने लगे चुनावी नतीजों के समाचार।   
भारत तो अभी कांग्रेस मुक्त हुआ भी नहीं था,  
कि उत्तर भारत में भाजपा की ही हो गई हार। 

संसद में राहुल ने मोदी को दी जादु की झप्पी,
मोदी सोचते रह गए ये बालक कैसा है झक्की। 
भाषण तो संसद में जोरदार दिया था राहुल ने,
पर मुई आँख चलने से सरे आम हो गई कच्ची। 

आँख संसद में चल जाये तो हंगामा हो जाता है,
आँख पब्लिक में चल जाये तो मज़मा हो जाता है। 
आँख चलाने का सबब जाकर प्रिया प्रकाश से पूछो,
आँख चल जाये तो अज़नबी भी सेलेब्रिटी हो जाता है। 

सिद्धू ने ठोको ठोको बोलते भाजपा को ही ठोक डाला, 
पंजाब की कांग्रेस में शामिल होकर खेल खेला निराला। 
हमारी सेना तो कश्मीर में लड़ती रही आतंकवादियों से,
उसने इमरान से मिलकर पाकिस्तान ही जिंदाबाद कर डाला। 

दीपिका का दिल रणवीर की मूंछों पर ढह गया,
रणबीर का मन आलिया की मासूमियत में बह गया। 
प्रियंका को भी मिल गया एक फिरंगी बच्चा ,
पर सलमान इस साल भी कुंवारा ही रह गया। 

हनी हनी करते रहे राम रहीम खुले आम,
राम राम रटते रहे रामपाल और आसाराम। 
ना हनी मिली ना राम मिले किसी को भी, 
पर लालू यादव को मिल गया जेल का आराम।    

क्रिकेट में ब्लाइंड और अंडर १९ टीमों ने जीते विश्व कप,
मिताली राज ने महिला टी २० में बनाये रन सबसे अधिक।
दीपा कर्मकार ने जिम्नास्टिक्स में जीता पहला विश्व गोल्ड मैडल,
मैग्ससे अवार्ड लेकर देश की शान बने लद्दाख के सोनम वांगचुक।