Tuesday, June 23, 2020

मूंछों पर कोरोना की मार --



एक मित्र हमारे ,
बन्दे सबसे न्यारे।

मूंछें रखते भारी   ,
सदा सजी संवारी ।

कोई छेड़ दे मूंछों की बात ,
फरमाते लगा कर मूछों पर तांव।

भई मूंछें होती है मर्द की आन ,
और मूंछ्धारी , देश की शान ।

जिसकी जितनी मूंछें भारी ,
समझो उतना बड़ा ब्रह्मचारी ।



फिर एक सुहाने सन्डे ,
जोश में आकर , मूंछ मुंडवाकर ,
बन गए मुंछ मुंडे।


मैंने कहा मित्र , अब क्या है टेंशन ,
माना कि साइज़ जीरो का है फैशन।

और फैशन भी है नेनो टेक्नोलोजी का शिकार ,
तो क्या ब्रह्मचर्य को छोड़ इस उम्र में ,
अब बसाने निकले हो घर संसार ।


वो बोला दोस्त , ये फैशन नहीं ,
रिसेशन की मार है ।
जिससे पीड़ित सारा संसार है ।

और मैंने भी मूंछें नहीं कटवाई हैं ,
ये तो खाली कॉस्ट कटिंग करवाई है ।

अरे ये तो घर की है खेती ,
फिर निकल आएगी ।

पर सोचो जिसकी नौकरी छूटी ,
क्या फिर मिल पाएगी ?

वो देखो जो सामने बेंच पर बैठा है ,
अभी अभी पिंक स्लिप लेकर लौटा है ।

और ये जो फुटपाथ पर लेटा है ,
शायद किसी मज़दूर का बेटा है ।

दो दिन हुए शहर से गांव आया है ,
तब से एक टूक भी नहीं खाया है ।

कृषि प्रधान देश में ये जो नौबत आई है,
हमने अपने ही हाथों बनाई है ।

अरे अन्न के भरे पड़े हैं भंडार ,
फिर क्यों मची खाने की दुहाई है !


ग़र देश की जनता में हो अनुशासन ,
लॉक डाउन के नियमों का करें पालन।

हाथ धोते रहें बार  बार ,
बाहर जाएँ तो मास्क पहने हर बार। 

लक्ष्मण रेखा का ना अतिक्रमण हो ,
फिर कभी ना कोरोना का संक्रमण हो।

देश जब कोरोना मुक्त हो जायेगा ,
खुशहली का वो दौर फिर आएगा।

जनता जब भय मुक्त हो जाएगी,
तो भैया ये मूंछें भी तब लम्बी हो जाएँगी ।


माना कि मूंछें मर्द की आन हैं ,
मूंछ्धारी देश की शान हैं ।

मगर इस मंदी की मार से ,
कोरोना से मचे हाहाकार से ,
ग़र सबको मिले मुक्ति ,
तो ये मूंछें , एक नहीं ,
बारम्बार कुर्बान हैं , बारम्बार कुर्बान हैं ।


Monday, April 27, 2020

कोरोना को भगाना है तो घर बैठो और आराम करो --



एक मित्र बोले भैया आजकल कहां दुम दबाकर बैठे हो ,
इस कोरोना के डर से क्यों घर में मुँह छुपाकर रहते हो ।
क्या रखा है बेवज़ह डरने में, कभी मित्रों से मुलाकात करो,
कब तक डर कर घर बैठोगे, कभी मिलकर हमसे बात करो।
हम बोले सुनो मोदी जी को और ३१ मई तक पूर्ण विराम करो ,
कोरोना को भगाना है तो घर बैठो और आराम करो आराम करो।


आराम स्वास्थ्य का शस्त्र है जिससे क्वारेंटाइन होता है,
आराम ही ऐसा अस्त्र है जो कोरोना संक्रमण को खोता है।
आराम शब्द में राम है रहता जो पुरुषों में उत्तम होता है,
आ राम आ राम रटने से तो कोरोना वायरस भी डरता है।
इसलिए मैं कहता हूँ तुम भी घर बैठो कुछ ना काम करो ,
लॉकडाउन का पालन करो और आराम करो आराम करो।


यदि कुछ करना ही है तो घर के छूटे पूर्ण काम करो ,
सुबह शाम आसन लगाकर घर में ही व्यायाम करो।
क्या रखा बाहर जाने में जो मज़ा है घर में रहने में ,
जो खाली रहने में लुत्फ़ है, वो कहाँ आवारा फिरने में ।
मुझसे पूछो मैं बतलाऊँ, है मज़ा सुस्त कहलाने में ,
ज्यादा खाने में क्या रखा जो रखा सीमित खाने में।


मैं यही सोचकर घर से बाहर, कम ही जाया करता हूँ ,
जो गले पड़ने के आदि होते हैं, उनसे कतराया करता हूँ।
दिन में एक बार दूध लेने को घर से बाहर जाया करता हूँ,
पुलिस के डंडे के डर से जल्दी घर वापस आया करता हूँ।
मेरी वॉल पर लिखा हुआ, जो देश प्रेम में कौशल होते हैं,
वे केवल फेसबुक और वाट्सएप्प पर ही सोशल होते हैं।


अब नहीं ऑफिस जाने की चिंता, ये सोचकर आनंद आता है,
पेट्रोल , पार्किंग और प्रदूषण से , मन स्वच्छंद हो जाता है।
सुबह से शाम सारा समय , जब अपना नज़र आता है ,
तो सच कहता हूँ जीने का जैसे , मज़ा निखर आता है।
लेकर हाथ में चाय का प्याला फिर मैं बालकनी में बैठ जाता हूँ ,
धरा पर हरा और स्वच्छ आसमां के नीले रंगों से जुड़ जाता हूँ।


तुम को भी मैं कोरोना से बच कर रहने का ये राज़ बता देता हूँ ,
छींकते खांसते वक्त मुँह पर पकड़ा रखो ये सीख सदा देता हूँ।
मैं आरामी हूँ मुझको तो अब सब बस इसी नाम से जानते हैं ,
किन्तु उनको खांसी से चैन नहीं जो लॉकडाउन को नहीं मानते हैं।
इसीलिए मैं कहता हूँ तुम घर बैठो और मेरी तरह से काम करो ,
दो गज की दूरी रखो सबसे , और आराम करो आराम करो।

Monday, April 13, 2020

लॉकडाउन की जिंदगी --


लॉकडाउन जब हुआ तो हमने ये जाना ,
कितना कम सामां चाहिए जीने के लिए।

तन पर दो वस्त्र हों और खाने को दो रोटी ,
फिर बस अदरक वाली चाय चाहिए पीने के लिए ।

पैंट कमीज़ जूते घड़ी सब टंगी पड़ी बेकार ,
बस एक लुंगी ही चाहिए तन ढकने के लिए ।

कमला बिमला शांति पारो का क्या है करना ,
ये बंदा ही काफी है झाड़ू पोंछा करने के लिए। 

वर्क फ्रॉम होम को वर्क एट होम समझा कर ,
मैडम एक गठरी कपड़े और दे गई धोने के लिए ।

ग़र नहीं कोई जिम्मेदारी और वक्त बहुत है ज्यादा ,
एक फेसबुक ही काफी हैं वक्त गुजारा करने के लिए ।

हैण्ड वाशिंग मुंह पे मास्क रेस्पिरेटरी हाइजीन और,
लॉकडाउन का पालन करो कोरोने से बचने के लिए। 

आदमी तो बेशक हम भी थे काम के 'तारीफ़',
किन्तु घर बैठे हैं केवल औरों को बचाने के लिए। r

   

Monday, March 30, 2020

लॉकडाउन की मज़बूरी --


शोर मचाते
छोटे छोटे बच्चे
'बेघर' नर नारी
'घर' जाने को आतुर
जा रहे थे एक ओर
अपने अपने 'घरों' से निकल।
जाने वालों की कतारें में
हज़ारों की भीड़ देख
आने लगे वापस
जाने को विद्यालय
मिटाने को भूख
सरकारी लंगर में।
भूख और आशियाना
कोरोना पर भारी पड़ गया।
हम खड़े खड़े देखते रहे
सातवें माले की बालकनी से
लॉकडाउन के नाज़ुक
ताले को टूटते हुए।

Wednesday, March 25, 2020

डेढ़ सौ साल पहले लिखी गई कविता आज चरितार्थ हो रही है --


और लोग घरों में बंद रहे
और पुस्तकें पढ़ते सुनते रहे
आराम किया कसरत की
कभी खेले कभी कला का लिया सहारा 
और जीने के नए तरीके सीखे।
फिर ठहरे
और अंदर की आवाज़ सुनी
कुछ ने ध्यान लगाया
किसी ने की इबादत
किसी ने  नृत्य किया
कोई अपने साये से मिला
और लोगों का नजरिया बदला।
लोग स्वस्थ होने लगे 
उनके बिना जो थे नासमझ 
ख़तरनाक़, अर्थहीन, बेरहम 
और समाज के लिए खतरा।
फिर ज़मीं के जख्म भी भरने लगे
और जब खतरा खत्म हुआ 
लोगों ने एक दूसरे को ढूँढा 
मिलकर मृत लोगों का शोक मनाया अंग्रेज़ी
और नया विकल्प अपनाया 
एक नयी दृष्टि का स्वप्न बुना
जीवन के नए रास्ते निकाले
और पृथ्वी को पूर्ण स्वस्थ बनाया
जिस तरह स्वयं को स्वस्थ बनाया।

* एक मित्र से प्राप्त कैथलीन ओ मीरा (Kathleen O'Meara) द्वारा १८६९ में अंग्रेजी में लिखित कविता का हिंदी रूपांतरण।  

Saturday, March 21, 2020

कोरोना और वर्क फ्रॉम होम --


कोरोना का कहर जब शहर में छाया ,
तब हुकमरान ने ये फरमान सुनाया।

कि स्कूल, कॉलेज, ज़िम, क्लब सब होंगे बंद ,
पर हमें तो वर्क फ्रॉम होम का आईडिया बड़ा पसंद आया।

लेकर बुजुर्गी का सहारा हमने अर्ज़ी लगाई,
कि कमज़ोर तो नहीं है ये साठ साल की काया।

इसलिए कोरोना से तो हम कभी ना डरेंगे ,
परन्तु कल से हम वर्क फ्रॉम होम ही करेंगे।

किन्तु पत्नी को देर न लगी ये बात समझते ,
कि घर तो क्या हम तो ऑफिस में भी कुछ काम नहीं करते। 

हम भी वर्क फ्रॉम होम का मतलब तब समझे ,
जब पत्नी ने कहा कि अब ये सुस्ती नहीं चलेगी।

उठो और हाथ में झाड़ू पोंछा सम्भालो,
आज से कामवाली बाई भी वर्क फ्रॉम होम ही करेगी।



Monday, March 16, 2020

इस साल गले मिलने को गले ही नहीं मिले --


हर साल होली पर मिलते थे हर एक से गले,
इस साल गले मिलने वाले वो गले ही नहीं मिले।  

कोरोना का ऐसा डर समाया दिलों में,
कि दिलों में ही दबे रह गए सब शिकवे गिले।

पडोसी पार्क में बुलाते रहे पकौड़े खाने को,
डरे सहमे लोग अपने अपने घरों से ही नहीं हिले।

ना निकली बस्ती में मस्तों की टोली,
ना पिचकारी ना रंग गुलाल ही लगे भले। 

ना रंग बरसे ना भीगी किसी की चुनड़िया,
लेकर गुलाल बुजुर्ग भी बैठे रह गए पेड़ों तले।

गुमसुम से रहे कवि जेब रह गई खाली,
होली के कवि सम्मलेन भी जब कल पर टले।

होलिका तो जल गई होली दहन में ,
ये मुए कोरोना वायरस फिर भी नहीं जले।

जले मगर मकान और दुकानें तो बहुत ''दोस्तों'',
अब दुआ करो कि कोरोना नहीं सद्भावना फूले फले।

Wednesday, March 11, 2020

बुरा ना मानो होली है , टी वी प्रोग्राम्स --


हमें अभी अहसास हुआ कि हम पिछली चार बार से हर वर्ष टी वी पर होली मनाते आये हैं। प्रस्तुत हैं कुछ झलकियां : 




२०१७ की होली , यू पी के एक चैनल पर।






२०१८ की होली, दूरदर्शन के नैशनल चैनल पर। 





२०१९ की होली, आज तक के तेज चैनल पर.




२०२० की होली, CCN DEN चैनल पर।   




साल में एक बार ही सही, टी वी पर प्रोग्राम देना अच्छा लगता है। 


Friday, March 6, 2020

कोई ऐसा काम करो ना , कि गले पड़ जाये कोरोना --


जो जंगली जानवरों को जाल में फंसाते हैं,
फिर उनको अधमरा अधपका खा जाते हैं ,
कोरोना वायरस को वही लोग पसंद आते हैं।

जब यही लोग विदेश के सफ़र पर जाते हैं ,
खुले आम छींक मारने से बाज नहीं आते हैं,
यही लोग हवा में रोग के कीटाणु फैलाते हैं।

जो रोगी बिना हाथ धोये ही हाथ मिलाते हैं ,
दूसरों को ज़बरदस्ती प्यार से गले लगाते हैं ,
वही यारी दोस्ती में दोस्तों को रोग दे जाते हैं।

जो लोग डर कर रोग के लक्षणों को छुपाते हैं,
कोरोना वायरस का टैस्ट कराने से घबराते हैं,
वही संक्रमण को रोकने में बाधा बन जाते हैं।

जो लोग त्रासदी का नाज़ायज़ फायदा उठाते हैं,
चीज़ों की जमाखोरी कर ज्यादा मुनाफ़ा कमाते हैं,
वही व्यापारी देश के असली दुशमन कहलाते हैं।

कोरोना वायरस के नाम से ही लोग घबरा जाते हैं ,
जाने क्यों लोग दहशत में आसानी से आ जाते हैं,
बस स्वास का संक्रमण है डॉक्टर्स यही समझाते हैं। 

होली पर चलो प्यार से नहीं ध्यान से गले लगाते हैं,
ग़र हो जाए सर्दी खांसी बुखार तो मिलने से कतराते हैं,
सात्विक भोजन और नमस्कार ही कोरोना से बचाते हैं।


Wednesday, March 4, 2020

छोटी बह्र की ग़ज़ल --


फ़िल्मी मशहूर हस्तियों और मॉडल्स के परिधान देखकर उपजी ये छोटी बह्र की ग़ज़ल :

वस्र छै गज रंगा ,         ( वस्र = वस्त्र )
तन फिर भी नंगा।

कहने को मैया ,
मैली क्यों गंगा।

मन में रख विग्रह ,       ( विग्रह = वैर / शत्रुता )
कर दें कब दंगा ।

धर्म के हैं गुरु ,
मत लेना पंगा ।

जग में हो अमन ,
मन रहता चंगा।

तज दे हर व्यसन ,
बीड़ी  या   छंगा ।        ( छंगा छाप तम्बाकु )

नोट : मैट्रिक क्रम = २,२,२,२,२ 

Sunday, February 23, 2020

ताऊ को कहीं देखा ?


ताऊ कौन है ?
आजकल फेसबुक पर फिर से ताऊ अवतरित हुए हैं । ये ताऊ साल भर अंतर्ध्यान रहते हैं लेकिन जब जब होली आती है, ये ताऊ फेसबुक की ओर अग्रसर हो लेते हैं। वैसे तो हरियाणा का एक एक बंदा ताऊ ही होता है। लेकिन ये ताऊ स्पेशल है। क्योंकि ये हरियाणवी ताऊ से भी ज्यादा ताऊ हैं । इनकी एक खास बात ये है कि इन्हें ईश्वर अल्लाह की तरह किसी ने आज तक नहीं देखा। दूसरी खास बात ये है कि ये दुनिया मे सिर्फ दो लोगों से डरते हैं , एक ताई से और दूसरे हम से ( कमाल है कोई हम से भी डरता है )।

ताई से डरने का कारण तो खुद ही बता देते हैं, जो है ताई का लट्ठ। वैसे दुनिया मे ऐसा कोई खुदा का बंदा नहीं बना जो पत्नी से ना डरता हो। लेकिन इन्हें ताई के लट्ठ की आदत इस कद्र पड़ गई है कि जब तक दो चार ना खा लें तब तक ना इन्हें भूख लगती है ना प्यास और ना ही नींद आती है। और तो और यदि कब्ज़ हो जाये तो भी इलाज़ ताई का लट्ठ ही करता है। अब तो हमने भी इनके पास नेचुरोपैथी के लिए मरीज़ रेफेर करने शुरू कर दिए हैं।
अब बताते हैं हम से डरने का कारण। हुआ यूं कि एक बार हिमालय पर ट्रेकिंग करते हुए ताऊ से हमारी मुलाकात हो गई। हमने फौरन ताऊ के साथ एक सेल्फी ले ली। तब तो ताऊ ने खुशी खुशी पाउट बनाते हुए फोटो खिंचवा ली लेकिन फिर डर सताने लगा कि कहीं हम फेसबुक पर ना डाल दें । आखिर हमारी आदत से वे भी वाकिफ़ थे।
अब जब ताऊ फिर से रायता फैलाने की धमकी दे रहे हैं तो हमने ताऊ को फोन कर पूछा कि फोटो डाल दूं। तब से ताऊ परेशान घूम रहे हैं , कभी किसी की सिफारिश लगवा रहे हैं कभी किसी की। लगभग आधे पुराने ब्लॉगर्स के फोन आ चुके ताऊ के लिए। इतने फोन तो DMC के होने वाले चुनाव के लिए डॉक्टर्स के भी नही आये। हमने भी सोच लिया है कि इधर ताऊ ने हमारे ब्लॉग पर रायता फैलाया, उधर हमने ताऊ का झुर्रीदार ओरांगउटांग जैसा चेहरा दुनिया को दिखाया। आखिर ताऊ ने कौन सा अपनी शक्ल को पेटेंट करा रखा है।

तो दोस्तो इस बार होली तक शाहीन बाग का धरना खत्म हो ना हो लेकिन ताऊ के उजागर होने की संभावना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। फिलहाल ट्रम्प के दर्शन करिए और ताऊ के लिए इंतज़ार।
नोट: यह होली विशेष पोस्ट ब्लॉगर्स के लिए है। लेकिन नॉन ब्लॉगर्स भी ताऊ से परिचित हो सकते हैं।

Friday, February 7, 2020

कामना करता हूँ कि इस साल के चुनाव में --


कामना करता हूँ कि इस साल के चुनाव में --

सब नेताओं की मुरादें पूरी हों,
ना किसी की इच्छाएं अधूरी हों।

उम्मीदवारों को कम से कम ५% मत मिलें ,
ना जब्त हो, सभी को वापस जमानत मिले।

सर्वोत्तम पार्टी को अच्छा जनमत मिले,
जनमत भी ऐसा कि पूर्ण बहुमत मिले।

जनता को आटा चावल दाल मिले,
और दो रूपये किलो हर माल मिले। 

बेघर को झुग्गी डालने की डगर मिले,
जल्दी ही झुग्गी की जगह पक्का घर मिले। 

अनाधिकृत घर का मालिकाना हक़ मिले,
मालिक को बिजली पानी नेट मुफ्त मिले। 

सब्ज़ी मार्किट में सस्ता प्याज मिले ,
और बैंक खातों में ज्यादा ब्याज मिले।

लेकिन ये सब मिलें ना मिलें,
पर कामना करता हूँ कि --

शहर में शांतिपूर्ण चुनाव हो,
ना कोई सांप्रदायिक तनाव हो।

ना कोई मतदाता भयभीत हो,
और अंतत: लोकतंत्र की जीत हो।

Friday, January 24, 2020

नव वर्ष में एक कवि की कामना --

कामना करता हूँ कि इस नए साल में..
1.
सबकी मुरादें पूरी हों,
ना कोई इच्छाएं अधूरी हों।

बेरोजगारों को नौकरी मिले,
और कुंवारों को छोकरी मिले।

छोकरी भी सुन्दर सुशील और स्वस्थ हो,
कामकाजी और गृह कार्यों में दक्ष हो।

डॉक्टरों को मरीज़ मिलें,
और मरीज़ों को तमीज मिले। 

नेताओं को मत मिले,
और पार्टियों को बहुमत मिले।

जनता को सस्ते प्याज मिलें,
और बैंक में ज्यादा ब्याज मिले।

कवियों का मोटा लिफ़ाफ़ा हो ,
और लिफाफे की रकम में इज़ाफ़ा हो ।

आप कवि सम्मेलन कराते रहें,
और कवि आपको कवितायेँ सुनाते रहें।
2.
 ये सब मिलें ना मिलें , रहें ना रहें, पर सलामत रहे --
 बच्चों की मुस्कान, पंछियों की उड़ान।
फूलों के रंग, अपनों का संग।
बड़ों का दुलार, और भाई भाई का प्यार!

और सलामत रहे--
देश की आज़ादी, वीरों के हौसले फौलादी,।
लोकतंत्र में अटल विश्वास, और रामराज्य की आस !

और कामना करता हूँ कि --
इस वर्ष ये नया साल , करदे दिलों का वो हाल,
कि ढह जायें सब नफरत और मज़हब की दीवारें,
और सर्व धर्म मिल कर पुकारें , मुबारक हो नया साल, मुबारक हो नया साल। 

Wednesday, January 1, 2020

नव वर्ष की शुभकामनायें --



1. 

गुजर गया एक और साल ,
जाते जाते देखो कर गया क्या हाल।
भारत तो कांग्रेस मुक्त हो ना सका ,
पर खांसी मुक्त हो गए केजरीवाल।

दिल्ली में बिजली पानी बसें मेट्रो सब मुफ्त हो गए ,
केजरीवाल मोदी को भूल चुनावों में मस्त हो गए।
रोज देते हैं अख़बारों में चार चार पेज के इश्तिहार,
पर भाजपा और कॉंग्रेस नेता जाने क्यों सुस्त हो गए।

शहर में प्रदुषण पड़ गया सब पर भारी ,
एक बार फिर आई ऑड इवन की बारी।
हम करते रहते सड़क पर खड़े उबर का इंतज़ार,
गाड़ियों में फुर्र से निकल जाती महिलाएं सारी।

दिल्ली में जब ऑड ईवन फिर से आया,
सरकार ने ऐसा मुश्किल फरमान सुनाया। 
पडोसी संग कार में बैठो पर पत्नी संग नहीं,
प्रदुषण घटाने का ये फंडा समझ नहीं आया।   

देश में साल भर रही चुनावों की भरमार,
केंद्र में बनी फिर एक बार मोदी सरकार।
भाजपा की अचानक कई राज्यों में हार हो गई ,
पर हार कर भी सीएम बने खट्टर फिर एक बार। 

प्रियंका का पसीना अमेठी की गलियों में बह गया ,
राहुल का पी एम का सपना फिर भी अधूरा रह गया।
महाराष्ट्र में भाजपा जीत कर भी हार गई जब ,
शिवसेना का ईमान कच्ची दिवार सा ढह गया।

आसाराम बेल की आस में दर दर भटकते रहे ,
चिदंबरम भी १०६ दिन तक जेल में टहलते रहे।
तिहाड़ जेल में नेताओं का आवागमन रहा जारी ,
राम रहीम साल भर जेल में ही हनी हनी रटते रहे।

प्रियंका जोनास का रोमांस साल भर तो रह गया ,
रणवीर सिंह भी दीपिका को पूरे साल सह गया।
रणबीर कपूर ने तो साथ आलिआ का पा लिया ,
पर सलमान इस साल भी कुंवारा ही रह गया।

नीरव मोदी पिछले साल ११००० करोड़ लेकर फरार हो गया ,
RBI का कर्जदारों पर १४ लाख करोड़ रुपया उधार हो गया। 
विजय माल्या ९००० करोड़ डकार कर खुद लंदन में बैठा है ,
पर किंगफिशर का २०२० का रंगीन कैलेंडर तैयार हो गया। 

मोदी जी कैब को का बनाने में कामयाब हो गये ,
देश में प्रदर्शन और झगड़े मगर बेहिसाब हो गए। 
दी दी भी करने लगी क का की की छ छा छी छी ,
गली गली में पत्थरबाज चैम्पियन निशानेबाज़ हो गए। 

पुलवामा अटैक से देश में फिर फैला आतंकवाद ,
वायुसेना ने बालाकोट के आतंकी अड्डे किये बर्बाद।
अभिनन्दन ने ऍफ़ १६ गिराकर तोड़ी पाक हेकड़ी,
जाँबाज जिन्दा लौटा लगाकर नारा भारत जिंदाबाद

इधर चीन भारत की डोकलाम कूटनीति से हारा ,
उधर यू एस ने बगदादी को बिल में घुसकर मारा।
किम जोंग पट्ठा कभी ख़ुशी कभी ग़म गाता रहा ,
पर ट्रम्प को पार्लियामेंट ने ट्रम्प्ड किया करारा।

2.

कामना करता हूँ कि --इस नए साल में ,
सलामत रहे-- बच्चों की मुस्कान, पंछियों की उड़ान।
फूलों के रंग, अपनों का संग।
बड़ों का दुलार, और भाई भाई का प्यार!
और सलामत रहे--
देश की आज़ादी, वीरों के हौसले फौलादी,
लोकतंत्र में अटल विश्वास, और रामराज्य की आस !
और कामना करता हूँ कि --
इस वर्ष ये नया साल , करदे दिलों का वो हाल,
कि ढह जायें सब नफरत और मज़हब की दीवारें,
और सर्व धर्म मिल कर पुकारें , मुबारक हो नया साल, मुबारक हो नया साल। 

जनता जब सुख चैन से सो पायेगी ,
बेटियां भी जब सुरक्षित हो जाएँगी, 
इंसान में जब इंसानियत जागेगी ,
नव वर्ष की कामना तभी शुभ हो पायेगी।