Tuesday, October 1, 2019

मोटर वाहन अधिनियम लागु हो रहा है धीरे धीरे --


जो दौड़ते थे ८० -९० पर , सरकने लगे हैं धीरे धीरे।
मेरे शहर के लोग आखिर, बदलने लगे हैं धीरे धीरे।

हाथ में लटकाकर हेलमेट, उड़ती थी हवा में ज़ुल्फ़ें,
गंजे सर भी अब तो हेलमेट,पहनने लगे हैं धीरे धीरे।

डंडे के डर से मदारी, नचाता है अपने बन्दर को ,
चालान के डर से इंसान, सरकने लगे हैं धीरे धीरे। 

ड्रंक ड्राइविंग का ख़ौफ़, रहता था ११ बजे के बाद ,
मदिरा छोड़ अब फ्रूट जूस , गटकने लगे हैं धीरे धीरे।

देर से ही सही मोटर वाहन अधिनियम आया तो ,
धीरे धीरे ही सही लोग, सुधरने लगे हैं धीरे धीरे।

4 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (02-10-2019) को    "बापू जी का जन्मदिन"    (चर्चा अंक- 3476)     पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  2. सार्थक असर हुआ है पर विरोध भी बहुत है ।
    हम सामायिक विषय पर सुंदर प्रस्तुति।

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  3. सार्थक व सुन्दर सृजन
    सादर

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