Tuesday, July 16, 2019

उफ़्फ़ ये दिल्ली की सड़कें --

1.

सोते हुए आदमी ने जागते हुए आदमी से कहा ,
जाग जाओ।
जागते हुए आदमी ने सोते हुए आदमी से कहा ,
भाग जाओ।
ना जागता हुआ आदमी जागा ,
ना सोता हुआ आदमी भागा।
मैं सहमा सहमा , डरा डरा ,
सड़क पर खड़ा खड़ा देखता रहा।
जागते हुए आदमी को सोते हुए ,
और सोते हुए आदमी को भागते हुए।
मेरे जैसे और भी खड़े  थे अनेक ,
खड़े खड़े ये तमाशा देखते हुए।
हाथ में उठाये हुए स्मार्ट फोन
बन्दूक और तलवार की तरहाँ । 

2.

सड़क पर लम्बी लम्बी गाड़ियों के बीच, 
चला जा रहा था मस्त एक बाइक वाला, 
बाइक पर पांच गैस सिलेंडर टिकाये ।  

दूसरा जो शक्ल और अक्ल से दूधिया था,
ड्राइव किये जा रहा था टेढ़ा मेढ़ा होकर , 
बाइक की साइड में दो दो ड्रम लटकाये।  

तीसरा जो सब्ज़ीवाला था, स्कूटी पर, 
जैसे सरक रहा था , बस किसी तरह, 
आगे पीछे तीन तीन बोरियां अटकाए।  

बाइक वालों को बड़ी गाड़ियों वाले भी, 
देखते ही खुद साइड दिए जा रहे थे ,
उन बाइक वालों के बिना हॉर्न बजाये।  

दिल्ली की सडकों पर रोड़ रेज बहुत है, 
किन्तु सड़क पर यह समाजवाद देखकर ,
हमारी आँखों में कम्बख्त आंसू भर आये।  



1 comment:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में शुक्रवार 19 जुलाई 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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