HAMARIVANI

www.hamarivani.com

Tuesday, June 16, 2009

पालतू आदमी की होती है बस यही पहचान,
गले में स्वर्ण माला,
दायें हाथ की "तीसरी ऊँगली में स्वर्ण मुद्रिका,
होठों पे झूठी मुस्कान,
उसके सिर पर सींघ नही होते,
न होती है उसकी पूँछ,
उसकी पहचान होती है, चेहरे पर लगी…
एक नन्ही सी मूँछ!


- कवि नीरज मलिक

रंग मंच के कलाकार श्री shahnawaz ने अपने sheron से sabko khoob gudgudaya.
सलामत रहे--
बच्चों की मुस्कान,
पंछियों की उड़ान,
फूलों के रंग,
अपनों का संग,
बड़ों का दुलार,
और भाई भाई का प्यार!
सलामत रहे--

देश की आज़ादी,
वीरों के हौसले फौलादी,
लोकतंत्र में अटल विश्वास,
और रामराज्य की आस!

yours truely
 

कुछ और झलकियाँ
:

Monday, June 15, 2009

रोज दे के उसको प्रपोज किया यार मैने,
तब से तो रोज रोज रोज दे रहा हूँ मैं ॥
मुरझाई प्यार की लता न पल्लवित हुई,
यूरिया में डोज ग्लूकोज दे रहा हूँ मैं॥

- कवि बृजेश द्विवेदी




गाँधी नेहरु ने देश बचाया
 वो ही असली नेता थे।
तो क्या शेखर बोस भगत केवल बस अभिनेता थे॥
उनको फूल चढ़ाये तुमने जो सत्ता के ग्राहक थे।
उनको जाने क्यू भूल गये जो आजादी के वाहक थे॥

- कवि कुलदीप ललकार

जात - धर्म के नाम पे, भाई-भाई को मार,
मानव-धर्म भूल रहा, ये वहसी संसार,
मंदिर, मस्जिद, गुरद्वार, माँगे सभी मुराद,
मैं माँगू संसार में, शाँति का प्रसाद,
- कवि टी॰ एस॰ दराल


लोकसभा चुनाव का अंजाम देखिए
यूपीए की जीत का सम्मान देखीए
राहूल जी का चल गया शबाब देखीए
अडवानी जी का टूट गया ख्वाब देखीए
लालू जी भी आ गये ON ROAD देखीए
उठ बैठता है किस ओर देखीए
- कवि हरमिन्द्र पाल

 
एक ने दूजे को बताया
तेरी बीवी को सांप ने काट खाया
पहला बोला इस सांप ने कइयों को काट खाया होगा
और मौत के घाट पहूँचाया होगा
अब कंठी हो गई होगी इसकी खाली
मेरी बीवी से जहर मरवाने आया होगा।
- कवियित्री बलजीत 'तन्हा'


जहाँ कहीं भी नई रोशनी छाई है
जहां कही भी जीवन की सच्चाई है
दुनिया वाले चाहें उसको धर्म कहें
सच कहता हूँ भारत की परछाई है
- कवि राजेश चेतन

Sunday, June 14, 2009

दिल्ली मेडिकल ऐसोसिअशन द्वारा ७ जून को डी एम ए हॉल में एक हास्य कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसका संचालन करने का सौभाग्य मुझे मिला. इस अवसर पर कवि राजेश चेतन और कवि कुलदीप ललकार समेत १० कवियों ने भाग लिया. प्रस्तुत हैं उसी अवसर की कुछ झलकियाँ :
"मैं फूल ले के चला
वो त्रिशूल ले के आ गये
रोमेंटिक क्लाईमेट था, मैं भी अपटूडेट था
उस दिन तो सारा मामला भी सेट था
मेरे प्रेम की अमर ज्योति को बुझा गये॥"

- कवि अनीश भोला




उसके रोम - रोम में विष का संचार कर जात हूँ
मुझे खाने वाला नही करता,
किसी कि जी-हजूरी और जय-जयकार,
राजाओं का राजा मेरा नाम है - राज दरबार
एक-एक बाद -एक, एक के बाद एक
नही आता खाने वाला, मुझे खाने से बाज
और एक दिन दुनिया मे वो जाता है लाईलाज,

- कवि स्पर्श जैन

Friday, June 12, 2009

पुण्य स्मृति में --

सारा जीवन दे रहे, हंसियों की बौछार

सबों रुलाकर चल दिये, त्याग कर संसार



मौत से डरकर सदा, जीवन दिया बिताय

हुआ मौत से सामना, झटसे गले लगाय



आवें जो संसार में, चलते एक दिन जाएं

सत्कर्मों के रास्ते, दिलों राज कर जाएं

Wednesday, June 10, 2009

आठ जून की सुबह काव्य जगत में एक बेहद दुखद समाचार लेकर आई जब पता चला कि सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग कवि श्री ओमप्रकाश आदित्य, श्री नीरज पुरी और श्री डाल सिंह गुर्जर असंभावित एवम आकस्मिक दुर्घटना में हमेशा के लिए हमसे दूर चले गए. हम तो दिल्ली मेडिकल एसोसियेशन द्वारा पहली बार आयोजित हास्य कवि सम्मेलन की सफलता पर संतुष्टि का अहसास ही कर रहे थे कि तभी ये दुःख भरा समाचार सुनकर मनो वज्रपात सा हो गया. श्री ओमप्रकाश आदित्य के हास्य- व्यंग से परिपूर्ण छंद हम सालों से सुनते आये हैं और आनंदविभोर होते रहे हैं. उनकी सरल और सोम्य वाणी सदा हमारी यादों में बसी रहेगी. इस दुःख की घडी में सारा शोकाकुल कवि परिवार एक है और हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वो दिवंगत आत्मा को अपने चरणों में स्थान प्रदान करे.