top hindi blogs

Saturday, May 25, 2024

तोड़ मरोड़ कर :

 

हमारी परेशानी को तुम क्या समझोगे दोस्त,

हम जब गुजरते हैं कब्रिस्तान से,

तो मुर्दे भी उठकर कहने लगते हैं,

डॉक्टर साहब, एक कविता तो सुनाते जाओ। 

😅

Monday, May 20, 2024

दोहे...

 कमर का नाप राखियो, ज्यों बैल्ट पहन पाय,

कमीज़ भी अटकी रहे, पैंट खिसक ना पाय। 


डाइटिंग एसन कीजिये, वज़न घट नहीं पाय,

आप भी ना भूखा रहे, रात नींद आ जाय। 


झूठ की मैराथन में, जो अव्वल आ जाय,

आज कल राजनीति में, वो नेता कहलाय।


नेता जी दल बदल के, फिर सी एम बन जाय, 

सज्जन सोशल साइट्स पे, बेबात भिड़त जाय। 


नेता जी धांधले में, अगर कभी फंस जाय,

बीवी को सी एम बना, खुद राज करत जाय। 


Monday, May 13, 2024

ले भाई, हो गया हिसाब बराबर...


आजकल साइबर फ्रॉड के केस बहुत नज़र आते हैं,

फ्रॉड करने वाले भी रोज नए नए तरीके अपनाते हैं। 

हम तो सावधानी में इस कदर सावधान हो गए हैं कि,

बीवी की बेवक्त कॉल को भी डर के मारे नही उठाते हैं।


शादियों में सबसे पहले मेजबान को लिफाफा थमाते हैं,

फिर प्लेट पकड़ पंडाल का चक्कर लगा जम कर खाते हैं।

फिर मेजबान को ढूंढ कर, अच्छा जी चलते हैं बोलकर,

मिठाई का डिब्बा देना हो तो दे दो, ये याद दिलाते हैं। 


सरकारी अस्पताल में मरीज़ दिखते हैं बदहाल से,

जेब में किसी के माल नहीं होता, लगते हैं कंगाल से। 

चार बच्चों की अम्मा जब अपनी उम्र बताती है बीस,

तो डॉक्टर को भी पूछना पड़ता है, कितने साल से।


एक बाइक वाला उधर से आ रहा था,

एक रिक्शावाला उधर को जा रहा था। 

एक गाड़ी वाला दोनों से जा टकराया,

वो ग्रीन लाइट जंप करके जा रहा था ।


रोज सोचते हैं सेहत बनाने कल से जिम जाएंगे,

या सुबह शाम पार्क की सैर करने ही चले जाएंगे।

परंतु पत्नी कहती है, घर के काम काज किया करो,

वरना मेरी तरह ही हाथ पैरों के जोड़ जाम हो जाएंगे। 


कुछ सरकारी अफसर दफ्तर खुद लेट आते हैं,

लेकिन पी ए लेट आए तो जमकर डांट लगाते हैं। 

दरअसल अंदर की बात बताएं तो ये वही लोग हैं,

जो घर में सुबह शाम खुद पत्नी से डांट खाते हैं।


उच्च शिक्षा से जिंदगी के कई अहम मुद्दे हल होते हैं,

कभी सुशिक्षित भी जिंदगी के इम्तिहान में विफल होते हैं।

जो लोग शादी को सादी और आशा को आसा बोलते हैं,

वे अक्सर हास्य कवि के रूप में ज्यादा सफल होते हैं। 


हरियाणवी ताऊ खुश रहते हैं रोज हलवा खाकर,

जलेबी और लड्डू खूब उड़ाते हैं शादियों में जाकर।

डायबिटिक भी हों तो आधा किलो लड्डू खाने के बाद,

एक पाव करेला खाकर बोलेंगे, हो गया हिसाब बराबर।














Monday, May 6, 2024

कुछ और मुक्तक...

 समय दिन महीने और साल दिखा देता है, 

जमा घटा गुना और भाग सिखा देता है। 

ये स्मार्ट फोन कुछ ज्यादा ही नौटी हो गया है,

पत्नी की कॉल को भी जंक कॉल बता देता है। 


क्वारेंटिन और डिस्टेंसिंग जैसे शब्द अब यक्ष हो गए,

आइसोलेशन में पति पत्नी के जुदा शयन कक्ष हो गए। 

कोरोना की ऐसी तैसी, पत्नी तो इस बात से खुश है कि,

लॉकडाउन में पति और बेटा गृह कार्यों में दक्ष हो गए। 


गृह कार्य करने से  स्वास्थ्य सुधर जाता है,

जोड़ सलामत रहते हैं, वजन घट जाता है। 

हम भी लॉकडाउन में पतले कैसे हुए,

ये राज़ तो हमें अब समझ में आता है। 


रोज सोचते हैं सेहत बनाने कल से जिम जाएंगे,

या सुबह शाम पार्क की सैर करने ही चले जाएंगे।

परंतु पत्नी कहती है, घर के काम काज किया करो,

वरना मेरी तरह ही हाथ पैरों के जोड़ जाम हो जाएंगे। 


हर साल दीवाली पर ऑड इवन की बात होती है,

दिन भर भारी प्रदूषण और घनी काली रात होती है।

अकेले नहीं पर गाड़ी में पत्नी संग मुंह पर मास्क हो,

सोचता हूं क्या सच में पत्नी इतनी खतरनाक होती है।











Monday, April 29, 2024

कुछ मज़ेदार मुक्तक...


बच्चों को शोर मचाते देख कर झुंझलाने लगे हैं,

बात बात पर संगी साथियों को गरियाने लगे हैं।

किसी भी बात पर कभी बिना बात आता है गुस्सा,

लगता है हम सत्तर साल से पहले ही सठियाने लगे हैं। 


आजकल मैं ना कोई काम करता हूं,

बस दिन भर केवल आराम करता हूं।

जब आराम करते करते थक जाता हूं,

तो सुस्ताने को फिर से आराम करता हूं। 


आज के युवाओं में देशप्रेम की लौ जलती ही नहीं,

पॉश एरिया के मतदान केंद्रों में भीड़ दिखती ही नहीं। 

हम बड़े जोश से मतदान करने गए पर कर ना सके,

अधिकारी बोला, शक्ल आधार कार्ड से मिलती ही नही। 


गर्म कपड़ों को जब अलमारी में रख देते हैं धोकर,

मायूस से देखते हैं जब रोज सुबह उठते हैं सोकर। 

कि सर्दी खत्म होते ही गर्म कपड़े ऐसे वेल्ले हो गए हैं,

जैसे सेवानिवृत होने के बाद होते हैं सरकारी नौकर। 


जाने क्यों कुछ लोग बालों पर खिजाब लगाते हैं,

सिर के सफेद बाल तो अनुभव का अहसास दिलाते हैं,

एक सफेद बालों वाले युवक ने जब हमें अंकल कहा,

तब जाना कि भैया बाल धूप में भी सफेद हो जाते है।


आधुनिकता ने लोगों की जिंदगी को ही मोड़ दिया है,

रहा सहा कोरोना ने आपसी रिश्तों को भी तोड़ दिया है,

घर में पति और बाहर बुजुर्गों की बात कोई नहीं सुनता,

इसलिए हमने तो भैया अब बोलना ही छोड़ दिया है। 














Sunday, April 21, 2024

देश की बढ़ती जनसंख्या...

 जिनके पास नहीं है खाने को दाने,

वे चले हैं बच्चों की फौज बनाने। 

और जिनके पास माल ही माल है,

वो बच्चों के मामले में बिलकुल कंगाल हैं। 


कहीं पर नहीं है खाने के निवाले,

तो कहीं पर नहीं हैं खाने वाले। 

अमीर देश के अमीर लोग बच्चे नहीं जनते,

गरीब देश के गरीब लोग जनने से नहीं थमते। 

विश्व का संतुलन बिगड़ता जा रहा है,

इसीलिए इंसान का सकून छिनता जा रहा है। 


दूसरी ओर:

आज के युवा मस्ती में इस कदर झूल गए हैं,

लगता है जैसे बच्चे पैदा करना ही भूल गए है। 

फिर पचास की उम्र में नैप्पी बदलते नज़र आते हैं,

बच्चे के पिता हैं या दादा, ये हम समझ नही पाते हैं। 

आधुनिकता की दौड़ में अकेले रहना मज़बूरी है,

अकेले ना रहें, इसलिए बच्चे पैदा करना जरूरी है। 

Wednesday, April 17, 2024

छोटे प्रकाशक की व्यथा ...

 बुक स्टॉल पर रखी अपनी पुस्तक जब दिखी,

तो हमने प्रकाशक महोदय से पूछा, कोई बिकी ?


वो बोला, सर स्टॉल पर लोग तो बहुत आते हैं,

परंतु बस आप जैसे लेखक ही आते हैं। 


वे आते हैं, अपनी खुद की किताब उठाते हैं,

फोटो खिंचवाते हैं, और चले जाते हैं। 


भई सारे पाठक तो बड़े प्रकाशकों ने ही हैं निगले, 

एक दिन एक पाठक जी आए, पर वे भी लेखक ही निकले। 


रखे रखे बिन बांटे मिठाइयां कसैली हो गईं हैं,

विमोचन करते करते किताबें भी मैली हो गईं हैं। 


पुस्तक मेले में छोटे प्रकाशक की बड़ी दुर्गति होती है, 

अज़ी हम से ज्यादा तो चाय वाले की बिक्री होती है। 


सोचता हूं अब अगले साल मेले में कतई नहीं आऊंगा,

और आया भी तो बुक स्टॉल नही, टी स्टॉल लगाऊंगा। 


हमने कहा, भैया बड़ी मछली हमेशा छोटी को निगलती है,

पर खुद को छोटी मछली समझना तुम्हारी भारी गलती है। 


अरे छोटे प्रकाशक ही साहित्य की असली सेवा करते हैं,

उन्हीं के सहारे तो हम जैसे नौसिखिए भी लेखक बनते हैं। 


देखना इस साल कमल का फूल देश में फिर खिलेगा,

भैया कर्म करते जाओ, एक दिन फल जरूर मिलेगा।