Wednesday, March 20, 2019

हैप्पी होली --






होली पर्व है
मस्ती में आने का।

खाने खिलाने का ,
पीने पिलाने का।

हंसने हंसाने का ,
और सबको प्यार से गले लगाने का।

हैप्पी होली !!!!!

Saturday, March 16, 2019

मुक्तक --



कभी सर्जिकल स्ट्राइक को फ़र्ज़ी बता रहे हैं,
पत्थरबाजों की पिटाई पर आंसू बहा रहे हैं।
स्विस बैंकों में अरबों रखने वाले पूछ रहे हैं ,
बताओ खाते में पंद्रह लाख कब आ रहे हैं। 

जंग जीतने को जंगल के सब जीव मिल जाते हैं,
लेकिन शेर को देख सबके होंठ सिल जाते हैं ।
जिनकी फितरत है जितना चाहें उछालें कीचड़
आखिर कमल तो कीचड़ में भी खिल जाते हैं ।


जो मांग रहे हैं आतंकवादियों की मौत के सबूत,
खुद जाकर देख लें अड्डों की तबाही के सबूत ।
फिर भी ग़र शक है अपनी सैनिक कार्रवाई पे ,
जहन्नुम में तो मिल ही जायेंगे ७२ हूरों संग कपूत। 

पानी रोकोगे तो हम हिमालय तोड़ देंगे,
टमाटर रोकोगे तो एटम बम छोड़ देंगे।
हमसे तौबा तौबा करो ऐ हिन्दुस्तानियो,
वरना आतंकी हमारा ही सर फोड़ देंगे। 

Tuesday, March 5, 2019

भारत के नंदन , अभीनंदन , तुम्हे वंदन --



आतंक के ठिकानों की तबाही से मुँह मोड़ना पड़ा ,
नापाक पाक को खुद अपना ही गुरुर तोड़ना पड़ा।
मोदी ने विश्व नेताओं से मिलकर कसा ऐसा शिकंजा ,
अभीनंदन को बिना शर्त सही सलामत छोड़ना पड़ा। 

ना तो इमरान को हिंदुस्तान पर प्यार आया है ,
ना ही उसके मन में शांति का विचार आया है।
बाजवा को याद आ गई सिद्धू की प्यार भरी झप्पी,
ठोको ताली, अभिनन्दन को तो सिद्धू ने बचाया है।

एक तो आतंकियों को पनाह देकर गुनाह कर रहे हो ,
फिर फिदायीन बनाकर कश्मीर को तबाह कर रहे हो।
उस पर कहते हो कि मैं नहीं हूँ शांति नोबल के लायक,
यार तुम तो ऐसे माहौल में भी अच्छा मज़ाक कर रहे हो।

अपने छोटे से विमान से पाकी एफ १६ को गिराया है,
फिर पाक सैनिकों के सामने गर्व से सिर उठाया है।
फैशन के दौर में युवा भूल गए थे मूंछों की शान को,
अभिनन्दन तुम्हारी मूंछों ने सचमुच गज़ब ढाया है।

जो मांग रहे हैं आतंकवादियों की मौत के सबूत,
खुद जाकर देख लें अड्डों की तबाही के सबूत । 
फिर भी ग़र शक है अपनी सैनिक कार्रवाई पे ,
जहन्नुम में तो मिल ही जायेंगे ७२ हूरों संग कपूत। 



Monday, February 11, 2019

कुछ हंसी मज़ाक , कुछ बातें साफ साफ --

जिंदगी के सफर में हमसफ़र अनेक होते हैं ,
कुछ बेवफा, बेगैरत , कुछ बन्दे नेक होते हैं।
अच्छी सूरत देखकर झांसे में ना आओ यारो ,
फेसबुक पर दिखते चेहरे अक्सर फेक होते हैं।

आस्था के बाज़ार में बाबा अनेक होते हैं ,
कुछ रामदेव से संत, कुछ आसाराम से नेक होते हैं।
डेरों के घेरों में नहीं होते सदा सौदे सच्चे ,
गुफाओं में रहने वाले बाबा भी फेक होते हैं।

खुद को खुद पर ही बहुत प्यार आया ,
जब जब डी पी में  नया फोटो लगाया।
असली सूरत तो अपनी तब दी दिखाई ,
जब पहली बार आधार कार्ड हाथ में आया।

क्रिकेट में कर के घोटाला , ललित मोदी तो फरार हुआ ,
बैंकों का नौ हज़ार करोड़ , विजय माल्या पे उधार हुआ।
नीरव मोदी भी डकार गया, देश के ग्यारह हज़ार करोड़,
कुछ हज़ार का क़र्ज़ लेकर बेचारा किसान गुनेहगार हुआ।

वक्त ग़र साथ दे तो आम भी खास बन जाते हैं ,
वक्त बदलते ही रिश्तों के अहसास बदल जाते हैं।
ना कर गुमां इस बेवफ़ा पर, ये किसी की ना हुई ,
कुर्सी छूटते ही राजा भोज भी गंगू दास बन जाते हैं।

स्मार्ट फोन ने ऐसा झमेला कर दिया है , 
इन्सां को भीड़ में भी अकेला कर दिया है। 
जुड़े रहते हैं विश्व भर से हर पल लेकिन , 
अब घरों को तो जैसे तबेला कर दिया है।

कभी सर्जिकल स्ट्राइक को फ़र्ज़ी बता रहे हैं , 
कभी पत्थरबाज़ों की पिटाई पर आंसू बहा रहे हैं।  
स्विस बैंकों के खातों में अरबों रखने वाले पूछते हैं ,  
कि खाते में पंद्रह लाख रूपये कब आ रहे हैं ! 

वो आतंकवादियों का साथ निभाते हैं , 
अपने ही सैनिकों पर पत्थर बरसाते हैं।  
जांबाज़ जुल्मियों संग भी बरतते हैं संयम, 
बाढ़ आने पर वो ही नैया पार लगाते हैं।   






Tuesday, February 5, 2019

सर्दी में बाल कभी मत कटाओ --


आज फिर हमने कटिंग कराई ,
आज फिर अपनी हुई लड़ाई ।

नाई ने पूर्ण आहुति की पुकार जब लगाईं ,
तो हमने कहा , बाल कुछ तो काटो भाई ।

भले ही ले लो जितना तुमको माल चाहिए ,
वो बोला काटने के लिए भी तो बाल चाहिए।

बाहर निकले तो सिर के बीच सर्दी लग रही थी ,
घर जाकर देखा , आधे सिर में बर्फ जम रही थी। 

अब हम समझे कि बाल बचाओ, माल बचाओ ,
समझ जाओ, सर्दी में कभी मत बाल कटाओ ।  

Saturday, February 2, 2019

पहले मुर्गी आई या अंडा --


विदेशों में सडकों पर,
कोई हॉर्न नहीं बजाता।
हॉर्न नहीं बजाता,
क्योंकि वहां आवश्यकता नहीं होती। 
आवश्यकता नहीं होती,
क्योंकि वहां अनुशासन होता है।
अनुशासन होता है,
क्योंकि वहां कानून व्यवस्था अच्छी है।
कानून व्यवस्था अच्छी है,
क्योंकि वहां जनसँख्या कम है।
जनसँख्या कम है,
क्योंकि वहां लोग काम में व्यस्त होते हैं।
काम में व्यस्त होते हैं,
क्योंकि वहां जनसँख्या कम है।
इसी से साबित होता है,
कि पहले मुर्गी आई या अंडा ! 
यह आज तक कोई नहीं समझ पाया।  

Thursday, January 31, 2019

जब अपना खाना खुद ही बनाना पड़ा --


एक दिन एक महिला बोली ,
डॉक्टर साहब,
आप पत्नी पर कविता
क्यों नहीं सुनाते हैं।
हमने कहा , हम लिखते तो हैं ,
लेकिन पत्नी को सुनाने से
घबराते हैं।
एक बार हमने,
पत्नी पर लिखी कविता,
पत्नी को सुनाई।
गलती ये हुई कि,
अपनी को सुनाई।
उस दिन ऐसी मुसीबत आई ,
कि हमें
घर छोड़कर जाना पड़ा।
और तीन दिन तक
अपना खाना,
खुद ही बनाना पड़ा।
तब से हम पत्नी पर लिखी
कविता तो सुनाते हैं ,
लेकिन भूलकर भी
पत्नी के सामने नहीं सुनाते हैं।