Thursday, February 15, 2018

वेलेंटाइन डे के रोज---


कल सुबह पत्नी बोली पढ़कर अख़बार ,
अज़ी बोलो कितना करते हो हमसे प्यार !

आज वेलेंटाइन डे के रोज ,
बताइये कितने देंगे हमको रोज !

एक का मतलब समझेंगे पहली नज़र में हुआ था प्यार ,
तीन यानि करते थे , करते हो , करते रहोगे बेशुमार।

एक सौ आठ दिए बिना ही किया था शादी का इकरार ,
अब बारह देकर ही कर दो प्यार का इज़हार।

हमने कहा प्रिये , एक और एक सौ आठ
तो भूल जाओ , वो थी गुजरे ज़माने की बात।

बारह में बसा है बस हाल का हाल ,
तीन में दिखते हैं प्रेम के तीनों काल।

शौक से हमारे प्यार को आज़माओ ,
पर प्रिये, रोज बहुत महंगे हैं , आज तीन में ही काम चलाओ।

आतंक की आंधी हो या किम जोंग से डरे ये संसार ,
पर हम तुम्हे करते थे, करते हैं और करते रहेंगे सदा प्यार।

वैलेंटाइन रोज की परिभाषा :

१ रोज  = पहली नज़र में प्यार -- love at first sight
३ = करता था , करता हूँ , करता रहूँगा -- I loved you , I love you , I will love you forever
१२ =  मैं तुम्हे प्यार करता हूँ -- I love you
१०८  मुझसे शादी करोगी   ---- will you marry me







Sunday, February 11, 2018

पकौड़ों की महिमा ---


पकौड़ों में कितना है दम , अब तो ये जान लो ,
हिला कर रख देंगे सबको , अब तो ये मान लो।

चाय की चर्चा पर चाय ने कहा गर्म पकौड़ों से ,
अच्छे दिन ज़रूर आएंगे , अब तो ये मान लो।

जो कहते थे जायेंगे कभी उस बदनाम गली ,
वहीँ छुपे हैं नज़रें चुराकर, अब तो पहचान लो।

बारिश में याद आएंगे पकौड़े आज की शाम को ,
चाय संग ग़ज़ब जुगलबंदी है, अब तो ये मान लो।

होली दीवाली हो या जब कभी खुश घरवाली हो ,
उदर से दिल में उतर जायें , अब तो ये मान लो।

चायवाले हो तुम या फुटपाथ पर पकौड़े बेचने वाले ,
एक दिन राजा बन सकते हो, यदि मन में ठान लो।

ईमानदारी का धंधा कोई गन्दा नहीं होता कभी,
ये भी बस एक रोजगार है , अब तो ये मान लो।

पकौड़ों में इतना है दम , अब तो ये जान लो ,

पकौड़े नहीं किसी से कम , अब तो ये मान लो।  


Tuesday, January 30, 2018

हमारी शादियां और इंडियन स्टेंडर्ड टाइम ...


शादी के कार्ड में लिखे
समय पर जाएँ या न जाएँ ,
लेकिन कार्ड को पढ़कर ज़रूर जाएँ ।
एक शाम हम बिना पढ़े ही चले गए ,
उस दिन ऐसा धोखा खाये थे।
कि शादी में एक की जाना था ,
और बधाई दूसरे को दे आये थे।
दूल्हा भी लगा जाना पहचाना था ,
पर घर आकर कार्ड में देखा,
उस शादी में तो दोपहर को जाना था।  

Wednesday, January 17, 2018

काश कि स्विस बैंकों की एक ब्रांच ऊपर भी होती ...


धन सम्पत्ति जोड़ते रहे जिंदगी भर जोड़कर पाई पाई  ,
बच्चों की जिंदगी बनाने में ही अपनी सारी जिंदगी बिताई। 
एक पल भी ना जी पाए जिंदगी भर कभी खुद के लिए ,
अंत समय में बच्चों ने ही उस धन संपत्ति पर नज़र गड़ाई। 

दुनिया की रीति है कि बच्चों से ही घर बनता है ,
तिनका तिनका जोड़कर बस इक घर बनता है।
कभी एक कमरे में रहता था छै लोगों का परिवार , 
अब बच्चों बिना छै कमरों का घर वीराना लगता है। 

डायबिटीज के मरीज़ हैं , मीठा कभी खा नहीं सकते,
ब्लड प्रैशर भी रहता है , नमक का परहेज हैं रखते।
शरीर का वज़न है भारी , बीवी घी भी खाने नहीं देती,
कुछ करोड़ कमाए थे , वे भी साथ ले जा नहीं सकते।



Wednesday, January 10, 2018

कुछ ऐसा रहा गुजरा साल ---


गुजर गया एक और साल ,
जाते जाते देखो कर गया क्या हाल।
मोदी जी तो मित्रों मित्रों हुंकारते रहे ,
पर एकदम चुप हो गए केजरीवाल।

'आप' साल भर ई वी एम की देते रहे दुहाई ,
गुजरात में कोई भी गुटबंदी काम ना आई। 
यू पी में लड़के करते रहे गलती पे गलती ,
पर पांच राज्यों में सरकार भाजपा ने ही बनाई।

संसद में 'जी एस टी' विधेयक पास हो गया,
पक्ष में वोट देकर भी विपक्ष उदास हो गया। 
सरकार को टैक्स तो देते हैं बस सरकारी नौकर ,
अब बिजनेसमैन के भी टैक्स भरने का इंतज़ाम खास हो गया।

पुराने घोटालों का रहा कोर्ट में बड़ा बोलबाला ,
सी बी आई ने लालू के महलों पर छापा डाला। 
राजा राणी तो पौने दो लाख करोड़ पचा गये ,
पर लालू को ना हज़्म हो पाया चारे का निवाला।

रागा साल भर मोदी राग गाता रह गया ,
करण का जौहर बस नेपीज में बह गया।
विराट अनुष्का की तो इटली में हो गई शादी ,
पर सलमान इस साल भी कुंवारा ही रह गया।


बाबा राजपाल का खुल गया राज ,
राम रहीम का भी छूट गया ताज।
बंद हो गये आश्रम और पाप के डेरे ,
हाथ में मनी है ना साथ में हनी है आज।

क्रिकेट में टीम इंडिया ने सीरीज जीत डाली सारी,
बॉक्सिंग में भी विजेंदर के मुक्के पड़ते रहे भारी। 
सारे फ़िल्मी स्टार पैसे के लिए करते रहे विज्ञापन,
बस सलमान की ''टाइगर जिन्दा है'' की कमाई है जारी। 

कश्मीर में आतंक मचाता रहा नापाक लश्कर ,
सर्जिकल स्ट्राइक में हमने तोड़े पाक के बंकर।
डोकलाम में चीन की मीठी गोली भी काम ना आई,
जब हमारे जांबाज़ छाती तान अड़े रहे चट्टान बनकर।

आई एस आई एस की होती रही करारी हार ,
पर किम जोंग को चढ़ गया न्यूक्लियर बुखार।
पट्ठा बात बात पर बटन दबाने की दे रहा है धमकी,
मानो एक सांड दूसरे सांड को रहा हो ललकार ।

मोदी ने सिखाया सारे विश्व को भारत का योग,
योगी के हाथ में था मुख्यमंत्री बनने का योग।
राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति भी बने भाजपा के ,
पहली बार हुआ है देश में यह अद्भुत संयोग। 

Wednesday, December 27, 2017

स्वास्थ्य रुपी द्रोपदी के पांच पांडव ---


हमारी सेहत द्रोपदी जैसी है जिसकी सुरक्षा पांच पांडवों के हाथों में है।  लेकिन जिस तरह पांडवों की उपस्थिति में भी कौरवों ने द्रोपदी का चीर हरण किया था , और तब श्रीकृष्ण जी ने आकर उसे बचाया था, उसी तरह सेहत के पांच पांडव भी फेल हो सकते हैं , यदि किस्मत रुपी कृष्ण साथ न दे। ये पांच पांडव हैं :
१)  युधिष्ठर -- मेडिटेशन ( ध्यान ) 
२ ) अर्जुन ----योग 
३ ) भीम ------मस्कुलर एक्सरसाइज़ 
४ ) नकुल --- एरोबिक एक्सरसाइज़ 
५ ) सहदेव -- लाफ्टर ( तनाव रहित जीवन )  

आइये देखते हैं इन पांच प्रक्रियाओं का हमारे शरीर पर प्रभाव : 

* मेडिटेशन से हमारा चलायमान चित शांत होकर एकाग्र और तनाव रहित होता है। हमारी सोच में सुधार होता है और हम सात्विक जीवन की ओर अग्रसर होते हैं।  
* योग हमें शारीरिक और मानसिक रूप से अनुशासित बनाता है।  योग द्वारा हम अपनी गतिविधियों को नियंत्रित कर सकते हैं जिससे हमारी कार्यक्षमता पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। 
* मस्कुलर एक्सरसाइज़ जैसे जिम या घर में ही उठक बैठक आदि लगाना एक मेहनत का काम है जिसमे बहुत पसीना बहाना पड़ता है।  लेकिन स्वास्थ्य के लिए यह अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। मस्कुलर एक्सरसाइज़ से हमारे शरीर में कई एंडोर्फिन्स का श्राव होता है जो शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।  
* एरोबिक एक्सरसाइज़ जैसे दौड़ना , साइक्लिंग , तैरना , सीढ़ियां चढ़ना आदि ऐसी कसरतें हैं जिससे हमारा कार्डिओ रेस्पिरेटरी सिस्टम मज़बूत होता है।  स्टेमिना बढ़ता है , साँस फूलना बंद होता है , दिल की धड़कन पर काबू होता है और कोई भी भारी काम आसानी से कर सकते हैं।  
* लाफ्टर यानि हंसना हँसाना जिंदगी का एक अहम् हिस्सा है जो हमें तनाव मुक्त रखता है और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।  

इन पांच कार्य कलापों से आप अपना स्वास्थ्य निश्चित ही बेहतर रख सकते हैं।  लेकिन फिर भी आप सदा निरोग ही रहें , इस बात की गारंटी नहीं दी जा सकती क्योंकि हमारा शरीर पूर्णतया हमारे वश में नहीं है।  यदि किस्मत ख़राब हो तो कभी कभी कुछ लोगों को ऐसी बीमारी लग जाती है जिसका कोई इलाज नहीं होता और कोई कारण भी नहीं होता, जैसे कैंसर।  यदि किस्मत से आप ऐसे रोगों से बचे रहे तो बाकि पांच पांडव रुपी गतिविधियां आपको सदा स्वस्थ रख सकती हैं।  बस इसके लिए चाहिए मन में दृढ निश्चय , लगन , मेहनत का ज़ज़्बा और विश्वास।  

मस्कुलर एक्सरसाइज़ : 

सदियों से शरीर को मज़बूत बनाने के लिए शारीरिक श्रम और कसरत का सहारा लिया जाता रहा है।  जब आधुनिक सुविधाएँ  उपलब्ध नहीं थीं तब अखाड़े , दंगल , कुश्ती आदि के लिए दंड बैठक और मुद्गल जैसी कसरतें ही काम आती थीं।  लेकिन आजकल जिम में तरह तरह के उपकरण उपलब्ध होते हैं जिनसे शरीर की एक एक मांसपेशी की कसरत की जा सकती है।  
मस्कुलर एक्सरसाइज़ सिर्फ मसल्स बनाने के लिए ही काम नहीं आती , बल्कि इससे हमारे शरीर पर और कई तरह से सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।  आइये देखते हैं कि अच्छी मस्कुलर एक्सरसाइज़ से क्या होता है :

* करीब आधे घंटे की कड़ी एक्सरसाइज़ के बाद हमारे शरीर में न्यूरोट्रांसमिटर्स का स्राव बढ़ जाता है जिन्हे एंडोर्फिन्स कहते हैं।  यह रसायन एक दर्द निवारक का काम करता है।  इससे तनाव भी कम होता है और आप अच्छा महसूस करते हैं।  यह एंटी डिप्रेसेंट भी है यानि इससे अवसाद ख़त्म होता है और मूड एलिवेट होता है यानि आप खुश महसूस करते हैं।  
* केटाकोलअमीन्स जिसमे एड्रिनलिन और नॉरएड्रिनलिन शामिल हैं , के श्राव से शरीर में उत्साह और चुस्ती स्फूर्ति आती है। इससे शरीर के हर एक अंग की गतिविधि में तेजी आती है।  
* टेस्टोस्टिरॉन एक मेल हॉर्मोन है लेकिन मेल और फीमेल दोनों में पाया जाता है।  इससे शरीर में ताकत , चुस्ती स्फूर्ति , साहस और पुरुषत्त्व का आभास होता है।  टेस्टोस्टिरॉन के बढ़ने से मर्दाना ताकत में वृद्धि होती है तथा स्तंभन दोष ठीक होता है। यह बालों के लिए भी एक टॉनिक का काम करता है।  

इस तरह कुल मिलाकर फिजिकल एक्सरसाइज़ से तन और मन दोनों में चुस्ती स्फूर्ति महसूस होती है और आप सदा जवान बने रहते हैं। कई तरह के लाइफ स्टाइल से सम्बंधित रोग जैसे डायबिटीज , बी पी , कॉलेस्ट्रॉल आदि  स्वत: ठीक हो जाते हैं या इनमे बहुत लाभ होता है।  इसके लिए कोई आयु सीमा भी नहीं है।  हर आयु का मनुष्य , स्त्री या पुरुष , एक्सरसाइज़ करके स्वस्थ रह सकता है।    
    


Saturday, December 23, 2017

दिल तो अभी बच्चा है जी ...

जिंदगी के तीन पड़ाव -- पूर्वव्यापी।

१) बचपन :

ये दिल तो बच्चा है जी।
दिल तो अभी बच्चा है जी।
जो काम कभी नहीं किये ,
उन्हें करने की इच्छा है जी।

किसी बगिया से आम तोड़ कर लाएं ,
कभी पेड़ से चढ़ अमरुद तोड़ कर खाएं।
गन्ने के खेत से गन्ना चुराकर चूसें ,
कोल्हू के गन्ने का ताज़ा रस पी जाएँ।

पर गांव की नदी में कूदने में गच्चा है जी ,
क्योंकि अपुन तैरने में अभी कच्चा है जी।

२) जवानी :

कभी पब , बार और डिस्को में जाते ,
किसी हसींना को देख सीटी बजाते ।
कभी रात रात भर घर से गायब रहते ,
लेट क्लास का घर में बहाना बनाते ।

काहे अपनी सच्चाई पर इतना गुमान है ,
नेकी छोड़ यार , दिल तो अभी जवान है।

३ ) बुढ़ापा  :

ना किसी से बैर , ना ही किसी से यारी ,
धर्म कर्म करने की उम्र हो गई हमारी।
मोह माया के जाल से मुक्त हो जाएँ ,
ख़त्म हो जाये जब सारी जिम्मेदारी ।

दिल को संभालें वरना, टूटना पक्का है जी ,
दिल ना अब जवान है , न ये बच्चा है जी।