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Wednesday, April 15, 2026

Such is life dearies...

 They say, you live only once,

And that once is like an ounce.

That ounce goes for a bounce.


You don't even realize,

That you can get a surprise,

When your life is cut to size.


So many things you desire,

To attain the hights you aspire,

And touch the sky before you expire.


One moment, you are the boss,

Don't even know the impending loss,

Very next moment your life goes for a toss.


Life's struggle is intense,

What matters is the tense,

Only living in present, makes the sense. 

Tuesday, April 7, 2026

हंसने की फरियाद...

 एक महफिल में

कविता सुनाने की जब फरमाइश आई,

हमने अपनी बेस्ट हास्य कविता सुनाई।

पर उस दिन तो मैं ऐसा फंसा,

श्रोता एक भी ना हंसा।

फिर ख्याल आया कि आजकल

हास्य कविता सुनाते ही कौन हैं।

शायद इसीलिए सब श्रोता मौन हैं। 

यही सोचकर हमने दर्जनों चुटकले भी सुनाए,

पर श्रोता ज़रा भी ना मुस्कराए।


भई हंसते भी कैसे, सब घबराए थे,

अपनी अपनी पत्नी संग जो आए थे।

और पत्नियां सब चुप बैठी थीं,

जाने किस टेंशन में ऐंठी थीं।

शायद पति ने झुमके दिला दिए सस्ते,

फिर बिना पत्नी की परमिशन के

भला कैसे हंसते।

हमने निर्णय लिया कि पहले महिलाओं को समझाएंगे,

फिर हम ही समझ गए कि भैया जो पत्नी के सामने हंस सके

ऐसे पति कहां से आयेंगे।


हमारी भी प्रॉब्लम ये कि हम हास्य कवि,

ठहाकों की फरियाद नहीं करते।

बाकी कवियों की तरह

तालियों के लिए हुंकार नहीं भरते।

कि जो सच्चा देशभक्त है

वो अगली पंक्ति पर तालियां जरूर बजाएगा।

हमने सोचा, अब मजा आएगा,

चलो बोलते हैं,

भाइयों बहनों चाचा काका,

अगले जोक पर ठोको ठहाका।

पर हाय रे किस्मत, जोक किसी को ना जँचा,

क्योंकि श्रोता फिर एक ना हंसा।


अब हमने महिलाओं की ओर रुख किया

और प्रश्न किया,

कृपया हाथ उठाएं जिस जिस के पति ने 

लॉकडाउन में झाड़ू पोंछा लगाया,

पत्नियां भी सभी पतिव्रता निकली

एक ने भी हाथ नहीं उठाया।

खाली गया ये भी जो तंज था कसा,

क्योंकि श्रोता अब भी एक ना हंसा।


भई हंसते भी कैसे,

कोई अपनी या अपनों की बीमारी से त्रस्त हैं,

कोई बेरोजगार है तो कोई जॉब के तनाव से ग्रस्त है।

इस मृत्युलोक में सुखी लोग नज़र ही कहां आते हैं,

इसीलिए हम तो सबको यही समझाते हैं।

कि उम्र एक नम्बर है, नम्बर ज़िंदगी नहीं,

जिंदगी में खुश रहने पर कोई पाबंदी नहीं। 

हंसने हंसाने का ही दोस्तो नाम है जिंदगी,

खुल कर हंसो, हंसने में कोई शर्मिंदगी नहीं। 


क्योंकि जब आप हंसते हैं तब अपना तनाव हटाते हैं,

जो लोग हंसाते हैं वे दूसरों के तनाव मिटाते हैं,

हंसना हंसना भी एक लाभकारी काम है दुनिया में,

इसलिए हम तो सदा हंसी की ही दवा पिलाते हैं। 

Monday, February 16, 2026

डाइटिंग के इफेक्ट्स...

 डाइटिंग का कमाल:

क्या सुनाऊँ तुमको मैं अपनी दर्दीली दास्तान,

जब से हमने शुरू किया सात्विक भोजन प्लान'।


जलेबी समोसे सब हुए बीते कल की बात,

अब भोजन में मिलती है बस उबली घास पात।


रोज सुबह चाय में 'ग्रीन-टी' का सेवन करता हूँ,

यूँ समझो कि बिना मिठास बस कड़वी घूँट भरता हूँ।


कभी मन करता है खा लूं , मक्खन मार के पराठा",

पर मेन्यू में मिलता है सलाद बेस्वाद और पाठा।


जिम जाने के ख्याल से ही मेरा जिस्म दुखने लगता था,

ट्रेडमिल पर दौड़ते ही मेरा दिल दौड़ने लगता था।


पड़ोसी के घर से जब आती थी हलवे की खुशबू,

दिल कहता था चल पड़ोसी को राम राम कर तू।


अब तो सपने में भी मुझे रसगुल्ले नज़र आते हैं,

किंतु सपने भी भला कहीं हकीकत बन पाते हैं।


पर वेट घटा, पेट घटा, सिक्स एब्स पेट पर आ गए,

सिगरेट शराब सब छूटी, जब वेगन डाइट पर आ गए।


हमारे इस डाइट प्लान ने यारो कर दिया ऐसा कमाल,

बी पी, शुगर, कॉलेस्ट्रोल से मुक्त हो गए डॉ  दराल। 

Monday, October 27, 2025

देसी विदेशी।

 जेब में रूमाल, हाथ में घड़ी, और

पैंट की बैक पॉकेट में पर्स नजर आए,

तो समझ जाओ कि बंदा हिंदुस्तानी है।


ऊंची बिल्डिंग को ऊंट की तरह सर उठाकर देखे,

और उंगली हिलाकर मंजिलें गिनता नजर आए,

तो समझ जाओ कि.... भाई


पार्किंग या सड़क पर खड़ी गाड़ी,

और काले शीशे देखते ही कंघी करने लग जाए,

तो समझ जाओ कि बंदा...


मौसम सुहाना हो खिली खिली सी धूप हो ,

और नई शर्ट पैंट बैल्ट पहनकर पार्क में घूमने जाए,

तो समझ जाओ कि.... बाऊ


मॉल में घूमते हुए हर चीज को ताके झांके,

और हर शख्स को घूरता नज़र आए

तो समझो कि....


जेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार कर रहा हो,

और बस या गाड़ी को आते हुए देखते ही रुक जाए,

तो समझ जाओ कि... पट्ठा


बस स्टेंड पर किसी के साथ खड़ा हो और

बस के आते ही चलो चलो बोलने लग जाए,

तो समझ जाओ...ये इंसान


किसी काउंटर पर लाइन लगी हो,

और बेझिझक सबसे आगे पहुंच जाए,

तो समझो कि....


हाथ में सेल्फी स्टिक लेकर वीडियो बनाए

और ओटवा को ओटावा बोलता नजर आए,

तो समझ जाओ ....


बंदा हिंदुस्तानी हो,

और सामने से बिना मुस्कराए अकड़ कर निकल जाए,

तो समझ जाओ कि बंदा पक्का हिंदुस्तानी है। 

Friday, October 10, 2025

उस दिन इतवार था ...

 उस वर्ष इतवार था। 


पति बोला, आज हमारा भी व्रत रखने का विचार है।

पत्नी बोली, साथ निभाओगे हमें इसका पूरा एतबार है। 

पर सोचती हूं, दफ्तर में गुपचुप समोसे कैसे खाओगे,

भूल गए क्या, इस वर्ष तो करवा चौथ के दिन इतवार है। 🌷🌷

Wednesday, September 17, 2025

 पेशे से जो पुश्तैनी हलवाई है,

उसको भी शुगर का पंगा निकला।

गए थे कराने गंजेपन का इलाज़,

डॉक्टर बेचारा खुद ही गंजा निकला।


जो नेता देने आया था भाषण,

अरे देखो वो तो हकला निकला।

सफेद लिबास में जो दिखा दानवीर,

काले धन का वो पुतला निकला।


बहुत करता है वो बाहर दिखावा,

घर के अंदर तो कड़का निकला।

दूर से दिखी काली जुल्फों की घटा,

पास से देखा तो वो लड़का निकला।


मशक्कत से उगाया गमले में धनिया,

सब्जियों के साथ मुफ्त का निकला।

क्या लेकर आया था क्या लेकर जाएगा,

बाबा का ये प्रवचन तो 1500 का निकला।


जिसे कमज़ोर समझ दिखाई अकड़,

उसका हाथ तो बड़ा तगड़ा निकला।

ये जो बहस करते दिखते हैं नेता टीवी पर,

अंत में वो बिना बात का झगड़ा निकला।

Friday, September 5, 2025

शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं।

 यूं तो औपचारिक शिक्षा ज्ञान हमें स्कूल और कॉलेज से प्राप्त होता है, जो आज के वैज्ञानिक युग में अत्यंत महत्वपूर्ण भी है। फिर भी अनौपचारिक ज्ञान हमें अपने मात पिता और घर के बुजुर्गों से प्राप्त होता है, जिसका महत्व भी कदाचित कम नहीं होता। क्योंकि यही वो ज्ञान है जो हमें दुनियादारी सिखाता है। दुनिया में रहने के लिए दुनियादारी का ज्ञान भी आवश्यक है, वरना लोग आपको भोला समझते है। 

अक्सर कामकाजी मात पिता के पास समय नहीं होता बच्चों को यह ज्ञान देने के लिए। दादा दादी के पास समय भी होता है और अनुभव का ज्ञान भी । लेकिन आज के ज़माने में बच्चों के साथ न तो दादा दादी होते हैं, न ही दादा दादी के पास बच्चे जिन्हें वे कुछ सिखा सकें। 

दुनिया में ऐसे भी लोग होते हैं जिन्हें न तो स्कूल कॉलेज की शिक्षा मिली, न ही बुजुर्गों का साथ। फिर भी कुछ लोग अपने बल बूते पर मेहनत कर ज्ञान हासिल करते हैं और जिंदगी में सफल भी होते हैं। उनकी ज़िंदगी ही उनका सबसे बड़ा शिक्षक साबित होती है। हालांकि ऐसे लोग विरले ही होते हैं। 

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को नमन और सभी शिक्षकों, अभिभावकों और बुजुर्गों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं। 🌷🌷