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Thursday, October 15, 2020

पत्नी और कविता --

 

एक दिन एक महिला बोली, 

आप पत्नी विषय पर कविता क्यों नहीं सुनाते हैं ! 


हमने कहा हम पत्नी पर कविता लिखते तो हैं, 

पर सुनाने से घबराते हैं।  


एक बार पत्नी पर लिखी कविता पत्नी को सुनाई , 

गलती ये हुई कि अपनी को सुनाई।  


उस दिन ऐसी मुसीबत आई कि हमें घर छोड़कर जाना पड़ा , 

और सारा दिन फुटपाथ पर बिताना पड़ा। 


तब से हम पत्नी विषय पर कविता तो सुनाते हैं , 

पर अपनी को भूलकर भी नहीं सुनाते हैं।   

  

Monday, November 18, 2019

पत्नी पर एक गंभीर विचार विमर्श --



वो पास होती है तो फरमान सुनाती है।
अज़ी ऐसा मत करना , वैसा मत करना ,
ये मत खाना , वो मत खाना ,
कुछ भी खाना पर ज्यादा मत खाना।

वो दूर होती है तो समझाती है ,
अज़ी ऐसा करना , वैसा करना ,
ये खा लेना , वो खा लेना ,
कुछ भी खाना पर भूखा मत रहना।

हम तो हर हाल में ,
बस पत्नी का हुक्म बजाते हैं।
वो दिन को रात भी कहे तो ,
आँख बंद कर रात ही बताते हैं।

वो , हो , तो मुसीबत,
ना हो तो और बड़ी मुसीबत।
पत्नी तो एक दोधारी तलवार होती है।
परन्तु पत्नी पास हो या दूर,
सोते जागते उसके मन पर बस ,
पति और बच्चों की ही चिंता सवार होती है। 


Thursday, June 6, 2019

चलो ज़रा हंस लिया जाये --

१.

अमीर पत्नी गरीब कवि पति से :  मेरे पास कोठी है , बंगला है , गाड़ी है , साड़ी है , हीरे हैं , जवाहरात हैं।  तुम्हारे पास क्या है !
कवि पति : मेरे पास कविता है , रचना है , कल्पना है , गीत है , नगमा है और नज़मा भी है।

कवि जी अब फुटपाथ पर रहते हैं।

२.

लेबर डे पर पत्नी पति से : देखो कल तापमान ४५ को पार कर गया।  अब आप आज ही ऐ सी की सर्विस कराइये , स्विच ख़राब है , वो भी बदलवाना पड़ेगा , और ये ट्यूब लाइट तो जलती ही नहीं।  फ्रिज में सारी बोतलें खाली पड़ी हैं, भर देना।  अच्छा ऑफिस जाते समय ये चैक जमा कराते जाना।  और शाम को सब्ज़ी लेते आना।  कभी कुछ काम भी कर लिया करो। 

बेटा  :  पापा, मज़दूर दिवस की बधाई।

३.

पत्नी ( दूर से चिल्ला कर ) : अज़ी कहाँ हो !
पति :  अब क्या हुआ ! मैं यहाँ बैठा हूँ शांति के साथ।
पत्नी कमरे में आकर : हे भगवान ! मैं तो डर ही गई थी। आप तो अकेले बैठे हैं।  कहाँ है शांति ?
पति : उसी को तो खोज रहा हूँ।

अगले दिन से कामवाली बाई की छुट्टी हो गई।

४.

पति ( बड़े प्यार से ) :  अज़ी आप बुरा ना माने तो मैं एक दो दिन के लिए मायके हो आऊं !
पति : भाग्यवान, तुलसी दस को छोड़कर भला कौन ऐसा पति होगा जो पत्नी के मायके जाने पर बुरा मानेगा !

पत्नी का मायके जाना कैंसिल।  

Thursday, January 31, 2019

जब अपना खाना खुद ही बनाना पड़ा --


एक दिन एक महिला बोली ,
डॉक्टर साहब,
आप पत्नी पर कविता
क्यों नहीं सुनाते हैं।
हमने कहा , हम लिखते तो हैं ,
लेकिन पत्नी को सुनाने से
घबराते हैं।
एक बार हमने,
पत्नी पर लिखी कविता,
पत्नी को सुनाई।
गलती ये हुई कि,
अपनी को सुनाई।
उस दिन ऐसी मुसीबत आई ,
कि हमें
घर छोड़कर जाना पड़ा।
और तीन दिन तक
अपना खाना,
खुद ही बनाना पड़ा।
तब से हम पत्नी पर लिखी
कविता तो सुनाते हैं ,
लेकिन भूलकर भी
पत्नी के सामने नहीं सुनाते हैं।  

Wednesday, February 17, 2016

पत्नी वो होती है जो ---


पत्नी वो होती है जो ,
बोल बोल कर, पति की बोलती बंद कर दे ,
फिर बोले कि आप कुछ बोलते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो  ,
पहले बच्चे को खिला खिला कर बीमार कर दे ,
फिर डॉक्टर से कहे कि ये कुछ खाता क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
शॉपिंग तो पति के कार्ड से  करे, उनके कार्ड से ही सारे बिल भरे ,
फिर पति से शिकायत करे कि आप कुछ खर्च करते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
शादी  या पार्टी के लिए सजने संवरने में खुद घंटों लगाये ,
पर लेट होने पर पति से कहे कि आप जल्दी तैयार होते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
बीस रूपये की सब्ज़ी खरीदे , और दस की हरी मिर्च धनिया मुफ्त ले ,
फिर पति से कहे कि खाली हाथ खड़े हो, आप कुछ पकड़ते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
ऑड दिन भी ईवन नंबर की गाड़ी चलाये , पति को करे बाय ,
और कहे कि आप एक ऑड नंबर की गाड़ी खरीदते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
घर पर रहे तो पति से कहे , ये मत खाना वो मत खाना ,
पर मायके से आये तो कहे कि आप पीछे से कुछ खाते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
जिंदगी होती है पर जीने नहीं देती, नशा होती है पर पीने नहीं देती ,
लेकिन जब पति पीकर घर आये तो कहे कि आप समझते क्यों नहीं !

पत्नी वो होती है जो ,
जिसकी सब बातें मांफ होती हैं, जो चुपके से कान में कहती है ,
मैं बहुत बोर करती हूँ ना , पर आप कभी बोर होते क्यों नहीं ! !



Wednesday, October 7, 2015

दा पत्नी रिटर्न्स :


वो पास होती हैं तो फरमान सुनाती हैं,
अज़ी ऐसा मत करना , वैसा मत करना।
ये मत खाना , वो मत खाना।
कुछ खाओ भी तो ज्यादा मत खाना !

वो दूर जाती हैं तो समझाती हैं ,
अज़ी ऐसा करना , वैसा करना ,
ये खा लेना , वो खा लेना ,
कुछ भी खाना ,पर  भूखा मत रहना !

हम तो हर हाल में,
पत्नी का हुक्म बजाते हैं ,
वो दिन को रात भी कहे तो ,
आँख बंद कर रात ही बताते हैं !

वो हो तो मुसीबत , न हो तो और मुसीबत,
पत्नी तो एक दोधारी तलवार होती है।
परन्तु पत्नी पास हो या दूर , सोते जागते,
उसके मन पर पति की ही चिंता सवार होती है।  

Sunday, June 28, 2015

इक हम ही नहीं हैं तन्हा, पत्नि के सताये हुए ---


चार कवि मित्र आपस में बैठे बातें कर  रहे थे । सब अपनी अपनी पत्नी की बातें सुनाने लगे। हालाँकि , यह काम अक्सर महिलाएं किया करती हैं लेकिन कवि ही ऐसे पुरुष होते हैं जो अपनी घरवाली की बातें सरे आम कर सकते हैं।  देखा जाये तो बहुत से कवियों की रोजी रोटी का माध्यम ही यही चर्चा है।
  
1) पहला कवि  :

मेरी पत्नी मुझ से इस कद्र प्यार करती है,
कि रात रात भर जाग कर मेरा इंतजार करती है।

एक रात जब मैं एक बजे तक भी घर नहीं आया,
उसकी नींद खुली तो मेरे मोबाईल पर फोन लगाया।

और बड़े प्यार से बोली -- अज़ी कहाँ हो ,
क्या आज विचार नहीं है घर आने का !

जिसने फोन उठाया वो बोला मेडम ,
भला ये भी कोई वक्त है घर बुलाने का !

इसी कहा सुनी में उसकी बीबी जाग गई
और इतनी लड़ी झगड़ी कि सुबह होते ही घर छोड़कर भाग गई।


2) दूसरा कवि :

मेरी पत्नी तो ऐसा कमाल करती है
कि बात बात पर मिस काल करती है।

लेकिन मेरा फोन एक ही रिंग पर उठाती है,
फिर फोन पर ही मुझे समझाती है।

अज़ी ज़रा बुद्धि का इस्तेमाल कर लिया होता ,
दो पैसे की बचत हो जाती, यदि एक मिस काल कर दिया होता।  


३) तीसरा कवि :

मेरी पत्नी भी बस कमाल करती है ,
मेरा इतना ज्यादा ख्याल रखती है !

कि एक दिन जब मैं जल्दी में मोबाईल घर भूल आया ,
उसकी नज़र पड़ी तो मेरी परेशानी का ख्याल आया।

और ये बात मुझे बताने को फ़ौरन उसने ,
अपने मोबाईल से मेरे मोबाईल पर फोन मिलाया।


४) चौथा कवि :


मेरी पत्नी तो बड़ी हाई टेक हो गई है ,
मोडर्न टेक्नोलोजी में इस कद्र खो गई है !

कि सारी शॉपिंग क्रेडिट कार्ड से करती है ,
सारे बिल भी अपने ही  कार्ड से भरती है।

फिर जब बिल आता है हजारों का,
तो उसकी पेमेंट मेरे कार्ड से करती है।

इस पर भी कहती है--मियां क्यों इतने मायूस हो गए हैं।
एक पैसा तो खर्च नहीं करते, आजकल आप बड़े कंजूस हो गए हैं।    

कवियों की बातें सुनकर हमें यही लगा कि --

इक हम ही नहीं हैं तन्हा, पत्नी के रुलाये हुए ,
और भी हैं ज़माने में , इस ग़म के सताये हुए ! 

नोट : नोट : पति पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं।  लेकिन थोड़ा हंसी मज़ाक जीवन में रास घोल देता है।  
( कौन सी ज्यादा पसंद आई , ज़रा बताएं ! )


Tuesday, January 13, 2015

ज्यादा बोलने की आदत तो हमे है नहीं ...


एक दिन एक महिला बोली ,

डॉक्टर साहब , मेहरबानी कीजिये ,
और कोई अच्छी सी दवा दीजिये ! 

मेरे पति रात मे बहुत बड़बड़ाते हैं ! 
लेकिन वो क्या बोलते हैं, हम समझ नहीं पाते हैं ! 

हमने दवा लिख कर कहा, यदि आप ये दवा सुबह शाम लेंगे, 
तो आपके पति अवश्य ही नींद मे बड़बड़ाना बंद कर देंगे ! 

वो बोली नहीं डॉक्टर साहब , आप फीस भले ही दुगना कर दें ,
लेकिन दवा ऐसी दीजिये कि वो साफ साफ बोलना शुरू कर दें !

उनके बड़बड़ाने से हम बिल्कुल भी नहीं घबराते हैं ,
लेकिन पता तो चले कि वे नींद मे किस को बुलाते हैं ! 

हमने कहा बहन जी , हमारी दुआ उनके लिये है , 
लेकिन ये दवा उनके लिये नहीं, आपके लिये है ! 

हम आपके पति का हौसला बिना दवा के ही बुलंद कर देंगे , 
आप उन्हे दिन मे बोलने दें , वे रात मे बड़बड़ाना खुद ही बंद कर देंगे ! 

Monday, August 8, 2011

यदि (घर की) बॉस सताए , तो किसे बताएं --

पिछली पोस्ट में हमने कहा --यदि बॉस सताए तो हमें बताएं।
बहुत से ब्लोगर बंधुओं ने पूछा कि पुरुषों के लिए सुरक्षा
के क्या उपाय हैं। सवाल भी जायज़ है क्योंकि शोषण तो पुरुषों का भी हो सकता है , बल्कि यूँ कहिये होता है । अब देखा जाए तो पुरुषों का उत्पीड़न तो घर से ही शुरू हो जाता है । शायद ही कोई पुरुष हो जो पत्नी का सताया हुआ न हो ।

ऐसी ही एक दास्तान सुनाते हैं , एक हास्य कविता के माध्यम से ।
अब इसमें कहीं आपको अपना ही स्वरुप नज़र आये तो हैरान मत होइए :

पांच सौ का नोट
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एक बात मुझे हरदम सताती है
मेरी पत्नी मुझसे ज्यादा कमाती है,
लेकिन जब भी अवसर पाती है
मेरी जेब साफ़ कर जाती है।

बीबियों की ये पुरानी आदत है
ऐसा बड़े बूढ़े बताते हैं ,
और मेरी तरह लाखों नौज़वान
रोज पत्नी के हाथों लुट जाते हैं ।

पर मैं अपनी जेब में रखता हूँ
पांच सौ का एक नोट और थोड़े छुट्टे ,
और कोशिश करता हूँ कि
सप्ताहांत तक भी ये नोट , न टूटे ।

लेकिन जब भी कोई दूध वाला
पेपर या केबल वाला , घंटी बजाता है ,
मेरा वो पांच सौ का नोट ,
बीबी की बदौलत , सौ में बदल जाता है ।

इस पर भी पत्नी मुझे समझती है
घर की मुर्गी दाल बराबर ,
और ऊपर से मुझे समझाती है
प्यार से ये बात बताकर ।

कि शाकाहारी भोजन में
दाल भी ज़रूरी है ,
क्योंकि प्रोटीन की मात्रा
तो इसी में पूरी है ।

यह सुनकर मैं अपना
सर खुजलाता हूँ ,
और दिल बहलाने के लिए
कविता लिखने बैठ जाता हूँ ।

एक दिन मैंने पत्नी से कहा
डाइटिंग वाइटिंग छोडो , थोडा वेट बढाओ ,
वो बोली खुद की सोचो
कद्दू जैसे दिखते हो, अपना पेट घटाओ ।

मैंने कहा, सरकारी नौकर का पेट कहाँ
पेट तो नेताओं का होता है ,
धरा पर नेता ही एकमात्र प्राणी है
जो भर पेट खाता है , फिर भी भूखा होता है ।

पत्नी बोली, क्यों बोर करते हो
सोने दो , मुझे नींद आ रही है ,
मैंने कहा , प्रिय सो जाओ
मुझे भी कविता याद आ रही है ।

वो चौंकी तो मैंने कहा
मैंने कविता लिखी है , ज़रा सुन लो ,
चाहो तो बदले में
तुम भी थोड़े बहुत पैसे धुन लो ।

वो झट से बोली ,
पांच सौ दोगे तो सुन लेंगे,
मैंने कहा रहने दो
हम कोई सस्ता कस्टमर ढूढ़ लेंगे ।

और देखिये आज
फ्री में आपको सुना रहा हूँ ,
और साथ ही
पूरे पांच सौ बचा रहा हूँ ।

वैसे अब मैं भी पत्नी रूप को
कुछ कुछ समझने लगा हूँ ,
और जेब में पांच सौ के बजाय
सौ सौ के ही नोट रखने लगा हूँ ।

एक जगह लिखा था
यदि पत्नी सताए तो हमें बताएं ,
हमने सोचा
चलो इन्हें भी आजमायें ।

जाकर देखा तो पत्नी पीड़ितों की
लम्बी कतार लगी थी ,
मैं ये सोचकर वापस आ गया
उस शायर ने सही बात कही थी

दुनिया में कितना ग़म है ,
और मेरा ग़म कितना कम है ।

इसीलिए कहता हूँ
हर हाल में मुस्कराते चले जाओ ,
और ग़म हर फ़िक्र को
धुएं में नहीं , हंसी में उड़ाते जाओ ।

नोट : यहाँ यह बात साफ़ करनी ज़रूरी है कि पांच सौ का नोट रखना पड़ता है गाड़ी में तेल डलवाने के लिए और छुट्टे चाय के लिएलेकिन चाय पीने के लिए नहीं बल्कि चाय पानी के लिए
यह अलग बात है कि आज तक कभी खर्च करने की ज़रुरत नहीं पड़ी ।



Wednesday, October 6, 2010

वो हंसती हैं तो----

वो
हंसती हैं
तो
खिल उठते हैं
खुशबू लिए
३२ किस्म के फूल।

वो
मुस्कराती हैं
तो
झनझना उठते हैं
दिल की
वीणा के तार ।

थिरकने लगते हैं
लबों पर
हजारों हसीन तराने ।

वो
उदास होती है
तो
उठता है
दर्द सीने में
ज्यों
सिकुड़ गई हों
नसें
दिल
की दीवारों में



ये हैं वो , जिनका आज जन्मदिन है ।