Thursday, November 7, 2019

शादी करवा के मारे गए --एक हास्य कविता --


एक दिन एक हास्य कवि से हो गई मुलाकात,
अवसर देख कर मैं करने लगा उनसे बात।

मैंने कहा ज़नाब आप सारी दुनिया को हंसाते हैं ,
लेकिन खुद कभी हँसते हुए नज़र नहीं आते हैं।

क्या बता सकते हैं आप इस चक्कर में कब फंसे थे ,
और दिल खोलकर आखिरी बार कब हँसे थे। 

वो बोले, ज़रूर बता सकता हूँ मैं इस चक्कर में कब फंसा था ,
मैं आखिरी बार दिल खोलकर अपने शादी वाले दिन हंसा था।

भला क्या बताऊँ वो दिन मेरे लिए कैसा था,
बस यूँ समझ लो बिलकुल ९/११ जैसा था।

मैंने कहा ज़नाब आप ऐसे विचार क्यों रखते हैं,
और पत्नी को ऐसी मुसीबत क्यों समझते हैं।

वो बोले यार तुम भी कमाल करते हो ,
शादी शुदा होकर ये सवाल करते हो।

क्या आपको पत्नी कभी नहीं लगती अच्छी ,
वो बोले नहीं भाई , ये बात नहीं है सच्ची। 

एक दिन बड़ी अच्छी लगी थी जब वो बोली,
मैं एक सप्ताह के लिए मायके जा रही हूँ।

पर दिल पर चोट सी लगी जब अगले दिन बोली,
अज़ी मैं आज शाम को ही घर वापस आ रही हूँ।

एक ही दिन का विरह उन्हें तो खलने लगा था ,
पर मैं कैसे बताता, मेरा दिल तो तभी लगने लगा था।

मैंने कहा, मान लीजिये आपकी पत्नी भाग जाये,
तो ऐसे में आप क्या करेंगे उपाय।

वो झट से बोले, अब तो मानकर ही दिल समझाना पड़ेगा,
वरना मुझे पता है, ये कष्ट तो जिंदगी भर उठाना पड़ेगा।

पर ऐसा हुआ कभी तो मैं दिल से नहीं दिमाग से काम लूंगा,
और भगाने वाले को दस हज़ार रूपये इनाम दूंगा।

साथ ही ये बात भी हम उसे ज़रूर समझायेंगे ,
कि भैया रख ले, तेरे बुरे दिनों में काम आएंगे।

पर देखिये एक बात आपको भी बतलाऊंगा ,
कुछ भी हो जाये पुलिस में रिपोर्ट नहीं लिखवाऊंगा।

पिछली बार लिखवाई थी, संकट के ऐसे बदल छाये,
नालायक नामुराद, ढूंढ कर घर वापस ले आये।

बोले देखिये, अब सुपरदारी पर आपके पास छोड़ रहे हैं ,
संभाल कर रखियेगा, आप बार बार कानून तोड़ रहे हैं।

मैंने कहा यार, मेरे जीवन में अभी तो आने लगी थी बहार,
फिर क्यों पकड़ लाये इस मुसीबत को फिर एक बार।

कविवर, अपने अनुभवों की माला के कुछ मोती लुटा दीजिये,
और देश के कुंवारों को शादी के कुछ गुर बता दीजिये।

बोले मैं तो अब अगले जन्म में कुंवारा ही रहना चाहूंगा ,
लेकिन देश के कुंवारों को बस यही कहना चाहूंगा।

कि बेटा जिंदगी में शादी एक बार ज़रूर कराना ,
वरना जिंदगी भर बिना वजह ही पड़ेगा पछताना।

शादी करके आपकी हालत जो होगी सो होगी,
पर कम से कम पछताने की एक वजह तो होगी।

""एक दूल्हे की किस्मत सही वक्त पर जाग गई ,
फेरों से पहले दुल्हन खिड़की से कूदकर भाग गई।
दूल्हा भी कौन सा दूध का धुला और सीधा सादा था ,
पिछली शादी में वो खुद घोड़ी के साथ भागा था।""


4 comments:

  1. बढ़िया हास्य कविता है।

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (०९ -११ -२०१९ ) को "आज सुखद संयोग" (चर्चा अंक-३५१४) पर भी होगी।

    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    -अनीता सैनी

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  3. हा हा हा हा बहुत मजेदार रचना बहुत अच्छा व्यंग लिखा आपने कविता के लिए कहीं भी नहीं टूटी एक के बाद एक मजेदार पंक्तियां आपने जोड़ी

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