Saturday, April 27, 2019

काज़ीरंगा नेशनल पार्क , दुनिया का सबसे ज्यादा हरा भरा पार्क --

काज़ीरंगा नेशनल पार्क , दुनिया का सबसे ज्यादा हरा भरा पार्क --


काज़ीरंगा मुख्यतया एक सींग वाले गेंडों के लिए जाना जाता है।  ये घास खाते हुए सड़क किनारे तक आ जाते हैं।

गौहाटी से लगभग सवा दो सौ किलोमीटर और गाड़ी से ५ -६ घंटे दूर ४३० वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है काज़ीरंगा नेशनल पार्क जिसे १९८५ में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्ज़ा दे दिया था और २००६ में सरकार ने इसे प्रोजेक्ट टाइगर के रूप में अपना लिया है। यहाँ विश्व भर में पाए जाने वाले एक सींग वाले गेंडों की संख्या के लगभग दो तिहाई एक हॉर्न वाले गेंडे ( सिंगल हॉर्न राइनो) पाए जाते हैं।  इनके अलावा हाथी, जंगली भैंसे , टाइगर और हिरन भी बहुतायत में पाए जाते हैं। घने जंगल, हरे भरे घास के मैदान, झीलों और पानी के श्रोतों से ओत प्रोत काज़ीरंगा पार्क अनेकों दुर्लभ पक्षियों के लिए भी एक सुरक्षित आवास प्रदान करता है।




घास के मैदानों में घास चरती गायें।

गौहाटी शहर से निकलते ही नेशनल हाइवे ३७ के दोनों और दूर दूर तक फैले घास के मैदानों में हज़ारों की संख्या में गायें घास चरती नज़र आती हैं। सरसरी तौर पर देखने से ऐसा लगता है जैसे ये जंगली जानवर हों। लेकिन पास से देखने पर पता चलता है कि ये पालतु गायें हैं जिनके गले में एक लम्बी रस्सी बांधकर उसे एक खूंटे से बांध दिया जाता है। हर एक गाय उसी दायरे में रहकर दिन भर घास खाती रहती है। इस तरह पूरे रास्ते यह दृश्य दिखाई देता है। इनके सारे दिन घास चरने का नज़ारा देखकर समझ में आता है कि इस कहावत का उद्गम शायद ऐसे ही हुआ होगा जब हम किसी को हर वक्त मुँह चलाते देखकर कहते हैं कि "सारे दिन चरती रहती है।"   


बिहू फेस्टिवल मनाती युवतियां।

इस क्षेत्र में यह एक अजीब नज़ारा दिखाई देता है कि यहाँ गायें बहुत छोटे आकार की होती हैं। यहाँ तक कि गायें बकरी जैसी, बकरी मेमने जैसी और मेमने खरगोश जैसे दिखाई देते हैं। शायद यह खाने में बस घास ही उपलब्ध होने के कारण हो सकता है।  यहाँ पुरुषों और स्त्रियों का कद भी अपेक्षाकृत कम नज़र आता है। ज़ाहिर है, यहाँ देहात में लोग गरीब ज्यादा हैं जिसके कारण पूर्ण पोषण की कमी रहती है।





जंगल में जीप सफारी।




हरा भरा जंगल।


काज़ीरंगा पार्क में हरियाली इतनी ज्यादा है कि आपको एक भी हिस्सा सूखा या रेतीला नज़र नहीं आएगा।  यहाँ की हरियाली देखकर एक और कहावत के चरितार्थ होने की अनुभूति होती है - सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखाई देता है - सचमुच यहाँ हरा रंग इस कदर देखने को मिलता है कि कुछ समय आप रंग शून्य होकर भूल से जाते हैं कि दुनिया में कोई और रंग भी है।


जंगल , झील और हरियाली।




जंगली भैंसों के झुण्ड। 


इस पार्क में प्रवेश के लिए तीन द्वार हैं जो अलग अलग हिस्सों को दर्शाते हैं - पश्चिमी द्वार, मध्य द्वार और पूर्वी द्वार। द्वार पर ही आपको एंट्री टिकट और सफारी के लिए जीप मिल जाएगी। टॉप सीजन के समय एडवांस बुकिंग कराना सही रहता है , हालाँकि ऑनलाइन बुकिंग महँगी पड़ती है। जहाँ गेट पर आपको कुल २५५० रूपये देने पड़ेंगे , वहीँ ऑनलाइन बुकिंग पर ३६०० रूपये देने पड़ते हैं। जीप सफारी में करीब २० किलोमीटर का सफर तय होता है जिसमे आपको पार्क के विभिन्न रूप और वन्य प्राणियों के दर्शन होते हैं। इस पार्क की एक विशेषता यह है कि हरियाली , पेड़ पौधे , पानी की झीलें और दूर पहाड़ियां देखकर आप एक पल के लिए भी बोर नहीं होते। यदि आपका जीप ड्राईवर ज़रा सा भी बातूनी हुआ तो आपको न सिर्फ गाइड करता चलेगा , बल्कि कई दुर्लभ पक्षियों के भी दर्शन कराता रहेगा। 


गेंडा , एक शुद्ध शाकाहारी जीव।




एक सुअरी और अनेक बच्चे।




जंगल में अकेला हाथी अक्सर नाराज़ रहता है और हमला कर सकता है।




जंगल में सभी जीव स्वतंत्र और मज़े में मिल जल कर रहते हैं।




जंगली भैंसे बहुत ताकतवर होते हैं।  इनके सींग भी बहुत बड़े होते हैं।

काज़ीरंगा पार्क जाने के लिए सबसे बढ़िया समय है सर्दियों का, यानि अक्टूबर से अप्रैल तक।  अप्रैल समाप्त होते होते यहाँ बारिश होनी आरम्भ हो जाती है और पार्क को सफारी के लिए बंद कर दिया जाता है। पार्क के पास हाइवे पर वैस्ट और सेंट्रल गेट के पास अनेक होटल और रिजॉर्ट्स बने हैं जो सभी बजट के सैलानियों के लिए उपयुक्त हैं।  यदि आप पैसा खर्च करने में सक्षम हैं तो आपको गेट के पास बने किसी रिजॉर्ट में ठहरना चाहिए।  यह अपने आप में एक अद्भुत अनुभव रहेगा।           


रिजॉर्ट का एक हिस्सा जो खाली पड़ा था लेकिन बहुत हरा भरा था ।

Monday, April 22, 2019

घुमक्कड़ी और स्वास्थ्य --





एक ज़माना था जब नव विवाहित जोड़े पहली बार शादी के बाद हनीमून के बहाने घर से बाहर जाते थे और अक्सर वही उनकी आखिरी सैर होती थी क्योंकि उसके बाद जीवन यापन में इस कद्र व्यस्त हो जाते थे कि घूमने जाने के लिए न समय होता था और न ही संसाधन। उधर गांवों में तो हनीमून कोई जानता ही नहीं था।  उनका आवागमन तो मायके और ससुराल तक ही सीमित होता था।  लेकिन समय के साथ समय बदला,, सम्पन्नता बढ़ी और अब हमारे यहाँ भी युवा वर्ग पर्यटन में दिलचस्पी लेने लगा। अब यहाँ भी विदेशियों की तरह बहुत से लोग समय मिलते ही निकल पड़ते हैं देश विदेश की सैर पर। 

लेकिन ज़ाहिर है कि दूर दराज के क्षेत्र में सैर पर जाने के लिए आवश्यक है कि आप यात्रा करने में सक्षम हों। यानि आपका स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है , तभी आप यात्रा का पूर्ण आनंद ले पाएंगे।  विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा के अनुसार स्वस्थ होना महज़ रोगो का न होना नहीं है , अपितु आपका "शारीरिक , मानसिक, आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक" तौर पर सक्षम होना है। जब तक सभी मापदंड पर आप खरे नहीं उतरते , तब तक न आप पूर्ण स्वस्थ हैं और न ही आप यात्रा करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम हैं।

अब प्रश्न यह उठता है कि इन पांच मापदंडों में से सबसे अहम और आवश्यक मापदंड क्या है।

शारीरिक : बेशक शारीरिक रूप से सक्षम होना बहुत आवश्यक है। लेकिन बहुत से लोग कई रोगों से पीड़ित होने के बावजूद यात्रा करने में सक्षम रहते हैं। यहाँ तक कि जो लोग अपाहिज होने के कारण चल नहीं पाते, वे भी परिवार के लोगों की सहायता से यात्रा करने में सफल रहते हैं। हमारे एक मित्र डायबिटीज से पीड़ित हैं , रोज दिन में तीन बार इन्सुलिन के इंजेक्शन लगाते हैं, फिर भी ७० वर्ष के आयु में विदेशों की सैर कर रहे हैं। ज़ाहिर है, शारीरिक परिसीमा उनके आड़े नहीं आती। 

आर्थिक:  पर्यटन के लिए निश्चित ही एक न्यूनतम धन राशि चाहिए।  लेकिन अधिकांश पर्यटक बजट टूरिस्ट होते हैं, यानि वे कम से कम खर्चे में घूमना कर लेते हैं। सैर पर जाने के लिए दिलचस्पी और इच्छा शक्ति चाहिए , बाहरी दुनिया देखने के लिए। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो ५ सितारा होटलों में रहकर देश विदेश भ्रमण करते हैं। ट्रैकिंग का शौक रखने वाले न्यूनतम राशि में दो से तीन सप्ताह पर्वतों की वादियों में सुखद समय व्यतीत कर पाते हैं। ज़ाहिर है, पर्यटन के लिए पैसा तो चाहिए लेकिन हर तरह के बजट के लिए विकल्प मौजूद होते हैं। 

सामाजिक : विदेशी सैलानी अक्सर अकेले यात्रा पर निकल पड़ते हैं।  इससे वे स्वतंत्र रूप से अपनी पसंद की घुमाई कर पाते हैं। हमारे देश में पति पत्नी बच्चों समेत घूमने की रिवाज़ ज्यादा है।  बच्चे बड़े हो जाएँ तो पति पत्नी दोनों यात्रा पर निकल पड़ते हैं। लेकिन यदि साथ में एक और युगल हो तो निश्चित ही घूमने का मज़ा दुगना हो जाता है।  लेकिन इसके लिए आवशयक है कि मित्र युगल भी समान विचारों और पसंद वाला हो।  वरना घर से बाहर निकलकर तो पति पत्नी भी ज्यादा दिन तक बिना लड़े झगड़े नहीं रह पाते।  आखिर, सबकी पसंद नापसंद अलग अलग होती है।  इसलिए समायोजन बहुत आवश्यक है। 

आध्यात्मिक : विश्व भर में बहुत से पर्यटन स्थलों पर मंदिर , मस्जिद, गुरूद्वारे या चर्च यात्रा कार्यक्रम में शामिल होते हैं।  बिना श्रद्धा के इन स्थानों पर आप असहज महसूस कर सकते हैं।  लेकिन यदि श्रद्धा न भी तो आप वास्तु और शिल्प सौंदर्य देखकर भी लाभान्वित हो सकते हैं।  ज़ाहिर है, इन स्थानों पर जाने के लिए आपका आध्यात्मिक रूप से सम्पूर्ण होना आवश्यक नहीं है। 

मानसिक :  अपने ४२ वर्ष के घुमक्कड़ी के अनुभव से हमने यह जाना और पहचाना है कि पर्यटन के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक और अपरिहार्य है। जो लोग मानसिक रोग से त्रस्त होते हैं, वे तो दुर्भाग्यवश असक्षम होते ही हैं, अन्यथा स्वस्थ लोग भी यदि मानसिक रूप से व्याकुल या व्यथित हों तो पर्यटन एक बोझ सा बन सकता है। किसी बात की चिंता, तनाव या डर आपके मूड को इस तरह प्रभावित करता है कि आप न स्वयं बल्कि दूसरों को भी यात्रा का आनंद उठाने में बाधा साबित हो सकते हैं। घर से बाहर निकलकर कई बार अप्रत्यासित रूप से बाधाएं और मुसीबतें आ जाती हैं जिनसे निपटने के लिए आपका मानसिक रूप से स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है।   

निष्कर्ष : यह निकलता है कि एक पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति ही यात्रा का संपूर्ण आनंद ले सकता है।  कोई भी कमी या बाधा आपके आनंद में विघ्न डाल सकती है।  लेकिन जहाँ बाकि सभी बाधाएं पार की जा सकती हैं  वहीँ मानसिक अस्वस्थता सदा आपके लिए एक नासूर बनाकर रंग में भंग डाल सकती है।  इसलिए जब भी किसी यात्रा पर जाएँ तो मानसिक रूप से नियंत्रित रहकर यात्रा करें ताकि आप यात्रा का सम्पूर्ण आनंद ले सकें।