मौसम के मामले में दिल्ली की दो बातें मशहूर हैं -- दिल्ली की सर्दी और दिल्ली की गर्मी। इस समय दिल्ली में गर्मी चरम सीमा की ओर अग्रसर है। ऐसे में दिल्ली वाले निकल पड़ते हैं , ठन्डे देशों/ प्रदेशों की ओर एक दो सप्ताह की छुट्टी पर। लेकिन आप कहाँ जाते हैं , यह आपकी हैसियत पर निर्भर करता है। आइये देखते हैं , दिल्ली वालों की हैसियत का लेखा जोखा :
१ ) आम आदमी : सर्दी हो या गर्मी , करीब ९० % लोग घर से बाहर निकल ही नहीं पाते। यदि जाते भी हैं तो बच्चों के नाना नानी या दादा दादी के पास। ये वे लोग होते हैं , जिनके लिए रोजी रोटी कमाना ही एक उपलब्धि होती है।
२ ) आम से ज़रा सा ऊपर : ये वे मिडल क्लास लोग होते हैं जो जिंदगी को सीमित दायरे में रहकर लेकिन भरपूर जीना चाहते हैं। इन्हें हर वर्ष गर्मियों में किसी ने किसी हिल स्टेशन पर जाना होता है, तरो ताज़ा होने के लिए। इनमे ज्यादातर हम जैसे सरकारी कर्मचारी आते हैं।
३ ) छोटे मोटे बिजनेसमेन : ये लोग निकलते हैं साउथ ईस्ट एसियन देशों की ओर जैसे थाईलेंड , होंगकोंग और मलेसिया आदि।
४ ) निओ रिच और बड़े बाप के बेटे : जाते हैं स्विट्जर्लेंड , पेरिस , लन्दन या इटली के युरोपियन टूर पर। ज़ाहिर है , इनमे वे लोग ज्यादा होते हैं जिनके पास दो नंबर का पैसा ज्यादा होता है।
५ ) रियल रिच या खानदानी रईश : ये वे लोग होते हैं जो हर साल एक नयी रोमांचक जगह की तलाश में निकल पड़ते हैं जैसे केन्या , अलास्का , साउथ अफ्रीका , रोमानिया आदि।
गर्मी जब हद से ज्यादा बढ़ जाती है तब हम तो पहाड़ों के सपने देखने लग जाते हैं। ऐसे में जाने से पहले ही ठंडक का अहसास होने लगता है। यकीन न हो तो आप भी देखिये, कुछ हिल स्टेशंस के नज़ारे और महसूस कीजिये पहाड़ों की ठंडी हवाओं को।
उत्तर भारत के हिल स्टेशन :
१ ) मसूरी -- पर्वतों की रानी -- दिल्ली से करीब २७५ किलोमीटर।
समुद्र ताल से ऊंचाई -- ६ ० ० ० फीट।
स्टर्लिंग रिजॉर्ट मसूरी।
मसूरी से करीब ३० किलोमीटर -- धनोल्टी जहाँ सुरखंडा देवी का मंदिर है जहाँ तक एक किलोमीटर की चढ़ाई है। लेकिन जून में भी बादलों से ढका रहता है।
धनोल्टी से आगे आप जा सकते हैं चम्बा -- जहाँ नया टिहरी शहर और टिहरी डैम बना है।
२ ) मनाली :
दिल्ली से ६५० किलोमीटर दूर। यहाँ आप जा सकते हैं -- रोहतांग पास जिसकी ऊंचाई है १ ४ ० ० ० फीट। यह लेह को जाने वाला रास्ता भी है ।
सोलंग वैल्ली -- जहाँ पैरा ग्लाइडिंग का आनंद लिया जा सकता है।
इसके अलावा उत्तर में शिमला और नैनीताल अन्य अत्यंत मशहूर हिल स्टेशन हैं।
दक्षिण भारत :
१ )ऊटी :
२ ) कोडाई
ऊटी -- यहाँ आपको खड़े पहाड़ नज़र नहीं आयेंगे। लेकिन नज़ारा बेहद खूबसूरत मिलेगा।
बोटेनिकल गार्डन ऊटी।
ऊटी से बाहर मैसूर के रास्ते में बहुत सुन्दर पहाड़ और घाटियाँ , झीलें और वन हैं।
ऊंचाइयों पर :
कश्मीर को जन्नत कहते हैं। लेकिन लेह लद्दाख भी कम सुन्दर नहीं।
लेह-- टॉप ऑफ़ द वर्ल्ड डेज़र्ट का जन्नत।
साथ ही बर्फ से ढके पहाड़। कोई कैसे इसे चीनियों के हाथों में सोंप सकता है।
उत्तर पूर्वी भारत :
दार्जिलिंग :
मिरिक लेक -- हमें यह झील अभी तक देखी सबसे सुन्दर झील लगी।
गंगटोक : छंगु लेक। यह प्राकृतिक झील गंगटोक से करीब ५ ० किलोमीटर दूर पहाड़ों पर बनी है। यहाँ से नाथुला पास थोड़ी दूर पर है। नाथुला पास से चीन शुरू हो जाता है। यहाँ सीमा पर तैनात आप चीनी सैनिकों से हाथ मिला सकते हैं।
यहाँ काफी ठण्ड पड़ती है। अब तक निश्चित ही आपको भी ठण्ड लगनी शुरू हो चुकी होगी। इसलिए इस सफ़र को यहीं समाप्त करते हैं। और आगे की तैयारी करते हैं।










