क्वारेन्टीन और डिस्टेंसिंग जैसे शब्द अब यक्ष हो गए हैं ,
आइसोलेशन में पति पत्नी के जुदा शयन कक्ष हो गए हैं ।
कोरोना ने लोगों की जिंदगी में कर दिया ऐसा करेक्शन ,
कि युवा ही नहीं बूढ़े भी अब गृह कार्यों में दक्ष हो गए हैं ।
लॉक डाउन के दिन रात तो नाकाम बीते हैं,
पर कोरोना ने सिखा दिया कि कैसे जीते है
जो लोग गर्मियों में भी नहाने से कतराते थे
अब ऐसे सुधरे कि दूध को भी धोकर पीते हैं।
कोविड जैसे कष्ट भरे दिन सदी में एक बार आते हैं,
लेकिन इंसा की आदतों को सुधार जाते हैं
सुधर तो हम भी इस कदर गए यारो,
कि जब भी जाते हैं किचन में, दो चार बर्तन धोकर हो आते हैं।

