Sunday, June 28, 2015

इक हम ही नहीं हैं तन्हा, पत्नि के सताये हुए ---


चार कवि मित्र आपस में बैठे बातें कर  रहे थे । सब अपनी अपनी पत्नी की बातें सुनाने लगे। हालाँकि , यह काम अक्सर महिलाएं किया करती हैं लेकिन कवि ही ऐसे पुरुष होते हैं जो अपनी घरवाली की बातें सरे आम कर सकते हैं।  देखा जाये तो बहुत से कवियों की रोजी रोटी का माध्यम ही यही चर्चा है।
  
1) पहला कवि  :

मेरी पत्नी मुझ से इस कद्र प्यार करती है,
कि रात रात भर जाग कर मेरा इंतजार करती है।

एक रात जब मैं एक बजे तक भी घर नहीं आया,
उसकी नींद खुली तो मेरे मोबाईल पर फोन लगाया।

और बड़े प्यार से बोली -- अज़ी कहाँ हो ,
क्या आज विचार नहीं है घर आने का !

जिसने फोन उठाया वो बोला मेडम ,
भला ये भी कोई वक्त है घर बुलाने का !

इसी कहा सुनी में उसकी बीबी जाग गई
और इतनी लड़ी झगड़ी कि सुबह होते ही घर छोड़कर भाग गई।


2) दूसरा कवि :

मेरी पत्नी तो ऐसा कमाल करती है
कि बात बात पर मिस काल करती है।

लेकिन मेरा फोन एक ही रिंग पर उठाती है,
फिर फोन पर ही मुझे समझाती है।

अज़ी ज़रा बुद्धि का इस्तेमाल कर लिया होता ,
दो पैसे की बचत हो जाती, यदि एक मिस काल कर दिया होता।  


३) तीसरा कवि :

मेरी पत्नी भी बस कमाल करती है ,
मेरा इतना ज्यादा ख्याल रखती है !

कि एक दिन जब मैं जल्दी में मोबाईल घर भूल आया ,
उसकी नज़र पड़ी तो मेरी परेशानी का ख्याल आया।

और ये बात मुझे बताने को फ़ौरन उसने ,
अपने मोबाईल से मेरे मोबाईल पर फोन मिलाया।


४) चौथा कवि :


मेरी पत्नी तो बड़ी हाई टेक हो गई है ,
मोडर्न टेक्नोलोजी में इस कद्र खो गई है !

कि सारी शॉपिंग क्रेडिट कार्ड से करती है ,
सारे बिल भी अपने ही  कार्ड से भरती है।

फिर जब बिल आता है हजारों का,
तो उसकी पेमेंट मेरे कार्ड से करती है।

इस पर भी कहती है--मियां क्यों इतने मायूस हो गए हैं।
एक पैसा तो खर्च नहीं करते, आजकल आप बड़े कंजूस हो गए हैं।    

कवियों की बातें सुनकर हमें यही लगा कि --

इक हम ही नहीं हैं तन्हा, पत्नी के रुलाये हुए ,
और भी हैं ज़माने में , इस ग़म के सताये हुए ! 

नोट : नोट : पति पत्नी एक दूसरे के पूरक होते हैं।  लेकिन थोड़ा हंसी मज़ाक जीवन में रास घोल देता है।  
( कौन सी ज्यादा पसंद आई , ज़रा बताएं ! )


14 comments:

  1. इक हम ही नहीं हैं तन्हा, पत्नी के रुलाये हुए ,
    और भी हैं ज़माने में , इस ग़म के सताये हुए !

    इसे पत्नी जी से दूर ही रखे वर्ना खाना खराब हो सकता.

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    1. हा हा हा ! नहीं , उनके पति भी एक कवि हैं ! :)

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (29-06-2015) को "योग से योगा तक" (चर्चा अंक-2021) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    1. शुक्रिया शास्त्री जी ।

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  3. निर्मल हास्य :) :)

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  4. हा हा मस्त है ... सभी कवियों की पत्नी ऐसी हो जाये तो कविता करना छुड़ा सकती हैं ...
    मज़ा आ गया डॉ साहब इस निर्मल हास्य पर ...

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    1. हा हा हा। शुक्रिया नासवा जी।

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  5. बहुत खूब
    जवाब नहीं आपका
    सच में कवियों की हिम्मत की दाद देनी पडेगी

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    1. हाँ , कवि हिम्मत तो बहुत दिखाते हैं !

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  6. एक कवि के मोबाइल पर , पत्नी की बेलनी तस्वीर नज़र आती है
    कवि का तर्क है इससे फोन चुराने वाले की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है

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  7. जहां तक पत्नी पीढ़ित कवि की बात है तो उसपर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता..औऱ गर्लफ्रैंड को लेकर कविता लिखने की सोचता हूं तो वो सारी गर्लफ्रैंड भी याद आ जाती हैं जिन्हें हम तो गर्लफ्रैंड मानते रहे..पर वो हमें फ्रैंड मानती रहीं..ऐसे में सबको लेकर अलग अलग लाइने लिखना आपके बस की बात है...

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  8. जहां तक पत्नी पीढ़ित कवि की बात है तो उसपर कोई टिप्पणी नहीं कर सकता..औऱ गर्लफ्रैंड को लेकर कविता लिखने की सोचता हूं तो वो सारी गर्लफ्रैंड भी याद आ जाती हैं जिन्हें हम तो गर्लफ्रैंड मानते रहे..पर वो हमें फ्रैंड मानती रहीं..ऐसे में सबको लेकर अलग अलग लाइने लिखना आपके बस की बात है...

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