दिल्ली से नॉयडा जाने वाले मार्ग पर सेक्टर १५-१६ के सामने सड़क और यमुना पुश्ते के बीच लगभग एक किलोमीटर से ज्यादा लम्बे ८२ एकड़ क्षेत्र में बना है -- राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल --जिसका उद्घाटन १४ अक्टूबर २०११ में तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी ने किया था । एक अरसे तक विवादों में घिरा यह स्थल आखिर अब जनता के लिए खुल गया है। मात्र १० रूपये का प्रवेश शुल्क देकर प्रवेश करते ही नज़र आता है यह राष्ट्रीय दलित स्मारक। पूरे क्षेत्र को तीन भागों में बांटा गया है जिसके ३६ एकड़ वाले में पहले खंड में बना है यह स्मारक जिसका डोम ४० मीटर ऊंचा है।
गुलाबी रंग के पत्थरों से बना यह भवन दो चबूतरों पर बनाया गया है।
मुख्य गुम्बद के अंदर स्थापित हैं तीन मूर्तियां -- डॉक्टर भीम राव आंबेडकर , श्री कांशी राम और मायावती जी की कांस्य मूर्तियां।
मुख्य गुम्बद के बाहर वाले कमरों में सामाजिक परिवर्तन हेतु संघर्षरत महापुरुषों की भव्य प्रतिमायें स्थापित की गई हैं। चित्र में मायावती अपने मात पिता के साथ।
पिछले कक्ष से ।
साइड कक्ष से नज़ारा।
स्मारक के दोनों ओर दस दस हाथियों की प्रतिमाएं कतार में बनाई गई हैं जो स्वागत की मुद्रा में दिखाई गई हैं।
उत्तर और दक्षिण दोनों दिशाओं में कांस्य से बने ५२ फुट ऊंचे सुन्दर फव्वारे बने हैं।
यहाँ भी हाथियों की मूर्तियां बहुतायत में देखने को मिलती हैं।
फव्वारे से भवन की ओर।
प्रवेश द्वार के पास छोटी सी केन्टीन भी है जहाँ ५ से लेकर १५ रूपये में खाने पीने का सामान उपलब्ध है। ज़ाहिर है , यहाँ आम आदमी का पूरा ख्याल रखा गया है।
पहले खंड से दूसरे और तीसरे खंड में जाने के लिए यह लगभग एक किलोमीटर लम्बी पगडंडी बनी है। दूसरे खंड में हरियाली युक्त उपवन बनाया गया है।
३३ एकड़ में बने तीसरे खंड में एक और प्रतीक स्थल बना है जिसके मध्य में १०० फुट ऊंचा ग्रेनाइट से बना स्तम्भ है। इसके चारों ओर ११ संतों की कांस्य की १८ फुट ऊंची प्रतिमाएं बनी हैं।
स्तंभ का आधार।
इस स्थल के सामने बहुत सुन्दर और हरा भरा पार्क है। दूर क्षितिज में नॉयडा की भव्य व्यवसायिक इमारतें नज़र आ रही हैं।
वापस प्रवेश द्वार पर लौटकर। स्मारक के सामने बहुत बड़ा ग्रेनाइट में बना अहाता है जो शाम के समय शीशे की तरह चमक रहा था।
इस स्थल के निर्माण में अनुमानत: ७०० करोड़ रुपया खर्च हुआ बताते हैं। बेशक इसके पक्ष और विपक्ष में बहुत से भिन्न विचार सुनने को मिलेंगे। लेकिन एक बात तय है कि मायावती जी ने अपने कार्यकाल में दलितों के संघर्ष और उनके प्रति सामाजिक रवैये में परिवर्तन की दिशा में सराहनीय कार्य किया है जिसे अंतत : सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी। हमारे लिए तो यह स्थान एक बढ़िया पर्यटक स्थल साबित हुआ। लेकिन गर्मियों में निश्चित ही यहाँ आने के लिए बहुत साहस बटोरना पड़ेगा।











