आप २५ वर्ष के युवा हों या ५० वर्ष के अधेड़ , मामला जब दिल का आता है तो सभी आयु वर्ग के लोग दिल के टूटने से घायल होते हैं। जहाँ पहले अलग अलग आयु में दिल टूटने के कारण भी अलग अलग होते थे , वहीँ आजकल ये दूरियां मिट सी गई हैं और हर आयु में दिल की स्थिति नाज़ुक सी ही बनी रहती है।
यानि आजकल युवाओं को भी प्रौढ़ आयु वर्ग के रोग लगने लगे हैं। यह आधुनिक जीवन शैली का ही परिणाम है कि आजकल युवाओं को भी ह्रदयाघात ( हार्ट अटैक ) होने लगे हैं।
कहते हैं पेड़ अपने फल नहीं खाते , नदियां अपना पानी नहीं पीती। लेकिन यह भी सच है कि रसोइये को भी खाना खाना पड़ता है , डॉक्टर भी बीमार पड़ते हैं। दिल का मामला भी कुछ इसी तरह का होता है। सारे शरीर को रक्त पहुंचाने वाले दिल को स्वयं के लिए भी रक्त की आवश्यकता होती है।
यह काम जो नसें करती हैं उन्हें कोरोनरी आर्टरीज कहते हैं। हृदय से एओर्टा द्वारा रक्त सारे शरीर में जाता है। इसी से निकलती हैं दो धमनियां जिन्हे दायीं और बायीं कोरोनरी आर्टरी कहते हैं। ये अलग अलग शाखाओं में बंटकर सारे हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाती हैं। यदि इनमे कहीं भी रुकावट पैदा हो जाये तो रक्त प्रवाह में बाधा आ सकती है जिससे पर्याप्त मात्रा में रक्त हृदय के उत्तकों तक नहीं पहुँच पाता । ऐसे में ऑक्सीजन और ऊर्ज़ा के भूखे उत्तक चिल्लाने लगते हैं जिसे एंजाइना कहते हैं।
मूलत: एंजाइना हृदय की एक पुकार है आपको याद दिलाने के लिए कि उसे भी खुराक चाहिए जो पूरी नहीं हो पा रही है। यदि अब भी आपने नहीं सुना तो यह पुकार सदा के लिए शांत हो जाती है , हार्ट अटैक के रूप में।
एंजाइना के लक्षण :
अक्सर छाती में बायीं ओर होने वाले दर्द को एंजाइना समझा जाता है। लेकिन सिर्फ दर्द ही नहीं बल्कि किसी भी तरह की चुभन , जलन या भारीपन भी एंजाइना हो सकता है। इसके अलावा बायीं ओर दांत में दर्द , कंधे में दर्द या बाजु में होने वाला दर्द भी एंजाइना हो सकता है। पसलियों के बीच पेट के ऊपरी हिस्से ( एपीगेस्ट्रियम) में होने वाले दर्द या जलन को अक्सर एसिडिटी मान लिया जाता है जबकि यह भी एंजाइना हो सकता है। दर्द के साथ यदि पसीना भी आ गया है या घबराहट होने लगी है या दिल में धड़कन महसूस हो रही है तो यह एंजाइना होने के स्पष्ट संकेत हैं।
कारण :
हमारे शरीर की धमनियों में कॉलेस्ट्रॉल का जमाव निरंतर होता रहता है। यह बचपन से ही आरम्भ हो जाता है। यूँ तो कॉलेस्ट्रॉल शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक पदार्थ है लेकिन इसकी अत्यधिकता भी उतनी ही हानिकारक है। धमनियों में कॉलेस्ट्रॉल जमने से इनमे अवरुद्ध पैदा होता है जो रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है। रक्त प्रवाह कम होने से शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लेकिन इसका सबसे ज्यादा कुप्रभाव हृदय पर ही पड़ता है। हृदय में यह एंजाइना के रूप में सामने आता है। लेकिन यदि इस तरह की अवरुद्ध धमनी में अचानक कोई रुकावट आ जाये तो हार्ट अटैक हो जाता है। अक्सर ऐसा क्लॉट बनने से होता है।
कारक :
हृदयाघात में फैमिली हिस्ट्री बहुत महत्त्वपूर्ण है। यानि यदि आपके परिवार में किसी की मृत्यु हृदयाघात से हुई है या निकट सम्बन्धियों में हृदय रोग है तो आप भी रिस्क पर हैं। इसके अलावा निष्क्रिय जीवन शैली , मोटापा , हाई बल्ड प्रेशर , डायबिटीज , हाई कॉलेस्ट्रॉल , धूम्रपान , मानसिक तनाव आदि ऐसे कारक हैं जो हृदयरोग को बढ़ावा देते हैं।
रोकथाम :
नियमित व्यायाम , आहार नियंत्रण , नियंत्रित वज़न , बल्ड प्रेशर और शुगर कंट्रोल और तनाव रहित जीवन जीने से हृदयाघात की सम्भावना निश्चित रूप से कम हो जाती है। नियमित रूप से ४५ मिनट की पैदल यात्रा सबसे बढ़िया व्यायाम है। खाना उतना ही खाया जाये जितना आवश्यक है। यानि सिर्फ जीने के लिए खाएं न कि खाने के लिए जीयें । मोटा होना सेहतमंद नहीं सेहतबंद होने की निशानी है। धूम्रपान से हीरो नहीं ज़ीरो होने का रास्ता खुलता है। अंतत : घर का बना खाना ही सर्वोत्तम है, पिज़्ज़ा, बर्गर , मोमोज , नूडल्स आदि तत्काल आहार सेवा जीवन का अंतकाल है।
उपचार :
फिर भी यदि एंजाइना हो ही जाये तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सबसे पहले ई सी जी किया जायेगा , लेकिन एंजाइना होने पर एंजिओग्राफी लगभग आवश्यक हो जाती है। इस टेस्ट से धमनी में रुकावट की स्थिति और गम्भीरता का पता चलता है। यदि रुकावट चिकित्सा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण पायी जाती है तो स्टेंट डालना आवश्यक होता है।
हार्ट अटैक :
हार्ट अटैक होने पर तुरंत पास के हॉस्पिटल में जाना चाहिए। ऐसे में एक एक मिनट कीमती होता है। अक्सर हार्ट अटैक धमनी में क्लॉट बनने से अचानक हुई रुकावट के कारण होता है। ऐसे में इंजेक्शन द्वारा क्लॉट को विघटित करने का प्रयास किया जाता है। इसे थ्रोम्बोलाइजेशन कहते हैं। क्लॉट के घुलने से बंद हुई धमनी खुल जाती है और रक्त प्रवाह होने लगता है। इस तरह हृदय की मांसपेशियाँ मृत होने से बच जाती हैं। यह कम एक घंटे में हो जाये तो सर्वोत्तम है , हालाँकि ३ घंटे तक भी फायदा होने की सम्भावना रहती है। लेकिन जितना जल्दी किया जायेगा , फायदा भी उतना ज्यादा होगा।
आधुनिक अस्पतालों में जहाँ एंजिओग्राफी की सुविधा होती है वहाँ तुरंत स्टेंट डालकर धमनियों को खोल दिया जाता है। यह एक बढ़िया ईलाज़ है और आजकल बहुत उपयोग में लाया जा रहा है। लेकिन दो से ज्यादा धमनियों में ब्लॉक होने पर बाईपास सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। हालाँकि , उम्र भर दवाईयों का दास तो फिर भी होना ही पड़ता है।
इसलिए रोकथाम में ही भलाई है। सादा और अनुशासित जीवन , खुश मिज़ाज़ रहना और समय पर टाँका लगाना ही लम्बे स्वस्थ जीवन की कुंजी है।



