Wednesday, January 15, 2014

सादा और अनुशासित जीवन , खुश मिज़ाज़ रहना और समय पर टाँका लगाना ही लम्बे स्वस्थ जीवन की कुंजी है ---



आप २५ वर्ष के युवा हों या ५० वर्ष के अधेड़ , मामला जब दिल का आता है तो सभी आयु वर्ग के लोग दिल के टूटने से घायल होते हैं।  जहाँ पहले अलग अलग आयु में दिल टूटने के कारण भी अलग अलग होते थे , वहीँ आजकल ये दूरियां मिट सी गई हैं और हर आयु में दिल की स्थिति नाज़ुक सी ही बनी रहती है।  
यानि आजकल  युवाओं को भी प्रौढ़ आयु वर्ग के रोग लगने लगे हैं।  यह आधुनिक जीवन शैली का ही परिणाम है कि आजकल युवाओं को भी ह्रदयाघात ( हार्ट अटैक ) होने लगे हैं।   

क्यों होता है हृदयाघात : 

कहते हैं पेड़ अपने फल नहीं खाते , नदियां अपना पानी नहीं पीती।  लेकिन यह भी सच है कि रसोइये को भी खाना खाना पड़ता है , डॉक्टर भी बीमार पड़ते हैं। दिल का मामला भी कुछ इसी तरह का होता है।  सारे शरीर को रक्त पहुंचाने वाले दिल को स्वयं के लिए भी रक्त की आवश्यकता होती है।  



यह काम जो नसें करती हैं उन्हें कोरोनरी आर्टरीज कहते हैं।  हृदय से एओर्टा द्वारा रक्त सारे शरीर में जाता है।  इसी से निकलती हैं दो धमनियां जिन्हे दायीं और बायीं कोरोनरी आर्टरी कहते हैं।  ये अलग अलग शाखाओं में बंटकर सारे हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाती हैं। यदि इनमे कहीं भी रुकावट पैदा हो जाये तो रक्त प्रवाह में बाधा आ सकती है जिससे पर्याप्त मात्रा में रक्त हृदय के उत्तकों तक नहीं पहुँच पाता । ऐसे में  ऑक्सीजन और ऊर्ज़ा के भूखे उत्तक चिल्लाने लगते हैं जिसे एंजाइना कहते हैं।

मूलत: एंजाइना हृदय की एक  पुकार है आपको याद दिलाने के लिए कि उसे भी खुराक चाहिए जो पूरी नहीं हो पा रही है।  यदि अब भी आपने नहीं सुना तो यह पुकार सदा के लिए शांत हो जाती है , हार्ट अटैक के रूप में।

एंजाइना के लक्षण : 

अक्सर छाती में बायीं ओर होने वाले दर्द को एंजाइना समझा जाता है।  लेकिन सिर्फ दर्द ही नहीं बल्कि किसी भी तरह की चुभन , जलन या भारीपन भी एंजाइना हो सकता है।  इसके अलावा बायीं ओर दांत में दर्द , कंधे में दर्द या बाजु में होने वाला दर्द भी एंजाइना हो सकता है।  पसलियों के बीच पेट के ऊपरी हिस्से ( एपीगेस्ट्रियम) में होने वाले दर्द या जलन को अक्सर एसिडिटी मान लिया जाता है जबकि यह भी एंजाइना हो सकता है।  दर्द के साथ यदि पसीना भी आ गया है या घबराहट होने लगी है या दिल में धड़कन महसूस हो रही है तो यह एंजाइना होने के स्पष्ट संकेत हैं।

कारण : 

हमारे शरीर की धमनियों में कॉलेस्ट्रॉल का जमाव निरंतर होता रहता है।  यह बचपन से ही आरम्भ हो जाता है। यूँ तो कॉलेस्ट्रॉल शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक पदार्थ है लेकिन इसकी अत्यधिकता भी उतनी ही हानिकारक है।  धमनियों में कॉलेस्ट्रॉल जमने से इनमे अवरुद्ध पैदा होता है जो रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है।  रक्त प्रवाह कम होने से शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।  लेकिन इसका सबसे ज्यादा कुप्रभाव  हृदय पर ही पड़ता है।  हृदय में यह एंजाइना के रूप में सामने आता है।  लेकिन यदि इस तरह की अवरुद्ध धमनी में अचानक कोई रुकावट आ जाये तो हार्ट अटैक हो जाता है। अक्सर ऐसा क्लॉट बनने से होता है।

कारक : 

हृदयाघात में फैमिली हिस्ट्री बहुत महत्त्वपूर्ण है।  यानि यदि आपके परिवार में किसी की मृत्यु हृदयाघात से हुई है या निकट सम्बन्धियों में हृदय रोग है तो आप भी रिस्क पर हैं।  इसके अलावा निष्क्रिय जीवन शैली , मोटापा , हाई बल्ड प्रेशर , डायबिटीज , हाई कॉलेस्ट्रॉल , धूम्रपान ,  मानसिक तनाव आदि ऐसे कारक हैं जो हृदयरोग को बढ़ावा देते हैं।

रोकथाम : 

नियमित व्यायाम , आहार नियंत्रण , नियंत्रित वज़न , बल्ड प्रेशर और शुगर कंट्रोल और तनाव रहित जीवन जीने से हृदयाघात की सम्भावना निश्चित रूप से कम हो जाती है। नियमित रूप से ४५ मिनट की पैदल  यात्रा सबसे बढ़िया व्यायाम है।  खाना उतना ही खाया जाये जितना आवश्यक है।  यानि सिर्फ जीने के लिए खाएं न कि खाने के लिए जीयें ।  मोटा होना सेहतमंद नहीं सेहतबंद होने की निशानी है।  धूम्रपान से हीरो नहीं ज़ीरो होने का रास्ता खुलता है। अंतत : घर का बना खाना ही सर्वोत्तम है, पिज़्ज़ा, बर्गर , मोमोज , नूडल्स आदि तत्काल आहार सेवा जीवन का अंतकाल है।   

उपचार : 

फिर भी यदि एंजाइना हो ही जाये तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।  सबसे पहले ई सी जी किया जायेगा , लेकिन एंजाइना होने पर एंजिओग्राफी लगभग आवश्यक हो जाती है।  इस टेस्ट से धमनी में रुकावट की स्थिति और गम्भीरता का पता चलता है।  यदि रुकावट चिकित्सा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण पायी जाती है तो स्टेंट डालना आवश्यक होता है।

हार्ट अटैक : 

हार्ट अटैक होने पर तुरंत पास के हॉस्पिटल में जाना चाहिए। ऐसे में एक एक मिनट कीमती होता है।  अक्सर हार्ट अटैक धमनी में क्लॉट बनने से अचानक हुई रुकावट के कारण होता है।  ऐसे में इंजेक्शन द्वारा क्लॉट को विघटित करने का प्रयास किया जाता है।  इसे थ्रोम्बोलाइजेशन कहते हैं।  क्लॉट के घुलने से बंद हुई धमनी खुल जाती है और रक्त प्रवाह होने लगता है।  इस तरह हृदय की मांसपेशियाँ मृत होने से बच जाती हैं।  यह कम एक घंटे में हो जाये तो सर्वोत्तम है , हालाँकि ३ घंटे तक भी फायदा होने की सम्भावना रहती है। लेकिन जितना जल्दी किया जायेगा ,  फायदा भी उतना ज्यादा होगा।

आधुनिक अस्पतालों में जहाँ एंजिओग्राफी की सुविधा होती है वहाँ तुरंत स्टेंट डालकर धमनियों को खोल दिया जाता है।  यह एक बढ़िया ईलाज़ है और आजकल बहुत उपयोग में लाया जा रहा है।  लेकिन दो से ज्यादा धमनियों में ब्लॉक होने पर बाईपास सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। हालाँकि , उम्र भर दवाईयों का दास तो फिर भी होना ही पड़ता है।

इसलिए रोकथाम में ही भलाई है।  सादा और अनुशासित जीवन ,  खुश मिज़ाज़ रहना और समय पर टाँका लगाना ही लम्बे स्वस्थ जीवन की कुंजी है।   


24 comments:

  1. सही जानकारी, अगर कोई फ़ायदा उठा ले तो।

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  2. वाह डाक्टर साहब एक महत्वपूर्ण जानकारी वो भी हँसते हँसते , आप स्वस्थ रहे और हँसते रहें , हमे लाभान्वित करते हुये हँसाते भी रहें

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  3. रोकथाम में ही भलाई है-सही परामर्श!

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  4. वाह जी!!! आज तो आपने बहुत ही सरल शब्दों में एक बड़ी समस्या से निपटने का आसान रास्ता बता दिया। आभार

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    1. आसान लगता है , लेकिन अमल मे लाना मुश्किल होता है !

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ६६ वां सेना दिवस और ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  6. इस लेख के लिए आपको साधुवाद !!
    लोगों को पढने की आदत नहीं है, मैं उम्मीद करता हूँ यह लाभदायक लेख सब मन से पढ़ें गे और लाभ उठाएंगे , और फीस तो आपसे लेनी है , हमने पढ़ लिया यह क्या कम है ! :)
    आभार डॉ सर !!

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    1. सही कहा . वैसे भी आजकल ब्लॉग पर कोई झांकता ही नहीं ! :)

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  7. पढ़ेंगे , बात मानेंगे !
    उपयोगी जानकारी !

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  8. डॉ साब, इस पोस्ट के लिए मेरी भी तरफ से आभार

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  9. आभार इस पोस्ट के लिए ... जितना पढ़ो उतना ही अधिक समझ आता है ... बहुत ही उपयोगी .. रोज़ मर्रा की बातें का कैसे ध्यान रखो .. इस सब का सार्थक विवरण है इस पोस्ट में ...

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  10. उपयोगी , ज्ञानवर्धक पोस्ट. आभार इसके लिए .

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  11. इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए आपका आभार!

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  12. उपयोगी सलाह, अमल करेंगे।

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  13. >> पिज़्ज़ा, बर्गर , मोमोज , नूडल्स आदि तत्काल आहार सेवा जीवन का अंतकाल है.

    Every time when i buy maggie or container beans i feel guilty because that time i am buying because of need , not because i like it .
    at the end of day my only aim remains is to cook some thing quick and feed myself :( ...no time to cook food from scratch .....
    Though i am trying to avoid those thing but couldn't succeed fully due to need.

    These days life style has changed drastically ..... One survey occurred in Bangalore last year ... of all school going girl kids from 9 to 13 years of age .
    Outcome of survey was shocking : 84 % girls lacked necessary vitamins and minerals that is required in per day diet . 46 % girls showed symptoms of mild anemia .
    the reason was their mother were giving them maggie or biscuits in breakfast and lunch .

    Thanks for the post ... its a reminder for me to prevent buying fast food.

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    1. Modern fast life does not give enough time for cooking / eating properly . But it is not good to eat all the junk food all the time . You may buy some fast ready to cook food which has fiber in it like oats meal , atta / multi grain bread and eat lots of green salad to compensate for low fiber diet .

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    2. Well, you will be surprised to know that these days these fast food pasta , maggi etc write misleading information on its packets

      http://cookingsecrets.knoji.com/maggi-2-minute-noodles/

      I have seen on maggi packets written source of fiber .... or rich in protein and calcium .. from where and when maggi has become rich in fiber..!!
      some objection must be done legally to prevent putting these misleading information on food packets.

      anyway , but you have raised very good topic of high fiber diet .... I have little confusion between what is high fiber and what is low GI food ?
      is it always true that high fiber food are low GI ? Also i read some where ... if people drink little bit of wine ( some 30 ml ) during or after meal ..it reduces the GI of food taken inside .
      Is it myth or true ?

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    3. diet rich in fiber causes reduction in absorption of glucose . hence it has low GI.
      wine is good for health as it reduces cholesterol in blood.

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    4. Thanks much ! its great help.

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  14. महत्वपूर्ण जानकारी

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  15. How can one person check his cholesterol level without going to hospital ?

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    1. call the technician to your home ! that is the only way !

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  16. Well, i meant is n't any such machine available like BP measurement instrument . anyway , no problem .

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  17. डालडा (आजकल रिफाइंड )और चीनी खाना बंद करेंगे, ९०% ह्रदय की बिमारी से दूर रहेंगे। ये डालडा एशिया के अलावा हर जगह बैन है।

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