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Tuesday, November 3, 2015

स्वस्थ और दीर्घायु होने का मन्त्र :

आओ बताऊँ, तुम्हें अस्सी का फंडा,
ये तो है प्यारे , फोकट का ही फंडा !  

वज़न हो ना कभी , अस्सी किलो से भारी,
रहे नीचे कमर भी , अस्सी से.मी. से तुम्हारी !
दिल की धड़कन भी, रहे अस्सी से ही नीचे,
निचला बी पी हो ना , कभी अस्सी से ऊंचे !

ग़र रहना है अस्सी साल तक तुम्हे जिंदा,
अपनाओ अभी तुम सभी अस्सी का फंडा ! 

फास्टिंग ब्लड शुगर , नहीं अस्सी को कूदे ,
एल डी एल वसा भी , न हीं अस्सी को फांदे !
खान पान हो ना कभी जंक फ़ूड सा गन्दा ,
ये तो हैं धन बटोरने का विदेशियों का धंधा !

ग़र रखना है ऊंचा अपने देश का झंडा ,
स्वदेशी अपनाओ , चाहे बंदी हो या बंदा ।  
आओ बताऊँ, तुम्हें अस्सी का फंडा,
यही है प्यारे, स्वस्थ जीवन का फंडा !  

Saturday, October 31, 2015

एक डॉक्टर का करवा चौथ :


एक डॉक्टर का करवा चौथ :

कल चौथ का चाँद था और पार्क में,
खूबसूरती का हुजूम था लगा हुआ ।

कंगन , चूड़ा , पायल , झुमके , हार ,
नई साड़ियों का रंग था बिखरा हुआ।

जिंदगी में ३६४ दिन थे सास के पर ,
कल बहुओं का रूप था निखरा हुआ।

वो तो करती रही प्रसूति सेवा दिन भर , 
जहाँ नन्हे जीवन से रिश्ता गहरा हुआ।

उसने भी देखा और दिखाया व्रताओं को , 
चाँद जब आसमाँ में छत पर उभरा हुआ।

कल फिर हमने उनकी ओर देखा सीधा , 
बिन छलनी के प्यार फिर सुनहरा हुआ।

Friday, October 16, 2015

दाल रोटी खाओ और प्रभु के गुण गाओ ...


राम मिलाई जोड़ी। ये कहावत सिर्फ पति पत्नी पर ही नहीं , खाने पर भी लागु होती है। जैसे दाल- रोटी , दाल- चावल , राज़मा- चावल। लेकिन इसका भी एक वैज्ञानिक कारण होता है।

हमारी शारीरिक संरचना और स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए ९ आवश्यक अमीनो एसिड्स ( essential amino acids) की आवश्यकता होती है। ये एमिनो एसिड्स हमें खाद्य पदार्थों से मिलते हैं। मांसाहार में इन की कोई कमी नहीं होती और वांछित मात्रा खाने से मिल जाती है। लेकिन शाकाहारी भोजन में गेहूं और चावल में लाइसिन नाम के एमिनो एसिड की कमी होती है और मेथिओनिन सहित अन्य सभी एमिनो एसिड्स बहुतायत में होते हैं। जबकि दाल , राज़मा और छोले में लाइसिन बहुतायत में होता है परन्तु मेथिओनिन की कमी होती है।

इस तरह दाल रोटी , दाल चावल , राज़मा चावल आदि के कॉम्बो मील में सभी एमिनो एसिड्स वांछित मात्रा में प्राप्त हो जाते हैं। यही कारण है कि उत्तर भारत में जहाँ गेहूं का उत्पादन ज्यादा होता है और गेहूं की रोटी मुख्य भोजन है , उसे दाल के साथ खाया जाता है।  वहीँ दक्षिण भारत में चावल की खेती ज्यादा होती है और दाल चावल मुख्य भोजन होता है।  हालाँकि पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार भी आवश्यक है।  इसीलिए उत्तर भारतीय खाने में शाकाहारी थाली में ये खाद्य पदार्थ अवश्य होते हैं -- रोटी , चावल , दाल , सब्ज़ी , दही / रायता और सलाद।  इससे न पूर्ण ऊर्जा मिलती है बल्कि सभी घटक जैसे वसा , प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट , विटामिन्स , और खनिज पदार्थ उचित मात्रा में मिलते हैं।

इसीलिए कहते हैं कि दाल रोटी खाओ और प्रभु के गुण गाओ।

Wednesday, October 7, 2015

दा पत्नी रिटर्न्स :


वो पास होती हैं तो फरमान सुनाती हैं,
अज़ी ऐसा मत करना , वैसा मत करना।
ये मत खाना , वो मत खाना।
कुछ खाओ भी तो ज्यादा मत खाना !

वो दूर जाती हैं तो समझाती हैं ,
अज़ी ऐसा करना , वैसा करना ,
ये खा लेना , वो खा लेना ,
कुछ भी खाना ,पर  भूखा मत रहना !

हम तो हर हाल में,
पत्नी का हुक्म बजाते हैं ,
वो दिन को रात भी कहे तो ,
आँख बंद कर रात ही बताते हैं !

वो हो तो मुसीबत , न हो तो और मुसीबत,
पत्नी तो एक दोधारी तलवार होती है।
परन्तु पत्नी पास हो या दूर , सोते जागते,
उसके मन पर पति की ही चिंता सवार होती है।  

Monday, September 28, 2015

वर्ल्ड रेबीज डे ...


आज वर्ल्ड रेबीज डे है।  क्या आप जानते हैं :

* रेबीज एक १०० % फेटल रोग है।  यानि यदि रेबीज हो गई तो मृत्यु निश्चित है।

* लेकिन यह १०० % प्रिवेंटेबल भी है।  यानि इससे पूर्णतया बचा जा सकता है।

* इसका बचाव भी बहुत आसान है। अब पेट में १४ दर्दनाक ठीके नहीं लगाये जाते।

* कुत्ते या बिल्ली आदि के काटने पर महज घाव को बहते पानी और साबुन से १० मिनट तक धोते रहिये। फिर कोई भी एंटीसेप्टिक लगा दीजिये।  पट्टी बिलकुल मत बांधिए ।  

* उसके बाद बस डॉक्टर की शरण में चले जाइये।  आपका काम हो गया।

Monday, September 14, 2015

एक मुक्तक ...


आज सिर्फ एक मुक्तक :

ज़िंदगी के सफ़र में, हमसफ़र अनेक होते हैं,
कोई बेवफ़ा, कुछ बेग़ैरत, कुछ नेक होते हैं ।
इंसान के कर्म ही बनाते हैं इंसान को शैतान,
वर्ना बन्दे जन्म से तो मासूम हरेक होते हैं ।

अब देखें इसी का हास्य रूप :

ज़िंदगी के सफ़र में, हमसफ़र अनेक होते हैं,
कोई बेवफ़ा, कुछ बेग़ैरत, कुछ नेक होते हैं ।
अच्छी सूरत देख कर झांसे में न आओ यारो ,
फेसबुक पर दिखते चेहरे अक्सर फेक होते हैं।  


Wednesday, September 2, 2015

कुछ साल पहले जब हम जवान थे ...


जिंदगी ने कुछ ऐसा मोड़ लिया कि एक अर्से से कोई हास्य कविता नहीं लिख पाए हम । अब फुर्सत मिली है तो प्रस्तुत है , अधेड़ उम्र के हालातों पर एक हास्य कविता :


कुछ साल पहले जब हम प्रमाणित जवान थे ,
सर पर रंगत थी बालों के लहराते खलिहान थे।
याद बहुत आता है वो गुजरा हुआ ज़माना ,
जब अपने घर में हम भी शाहरुख़ ख़ान थे।


सोचते हैं ग़र बालों पर हम भी लगा लें खिज़ाब,
फिर क्या लगा पाओगे , हमारी उम्र का हिसाब।
दिल तो करता है हम भी दें ज़ुल्फ़ों को झटका ,
पर अब सर पर बाल ही कितने बचे हैं ज़नाब।


हेयर ट्रांसप्लांट का कभी मन में बनता है प्लान ,
पर कीमत सुनकर ही  दिल हो जाता है हलकान।
दो बाल भी दिख जाएँ कंघी में तो कहती है पत्नी ,
लो कर दिया सुबह सुबह डेढ़ हज़ार का नुकसान।


इश्क़ और बुढ़ापे में नींद भी कहाँ आती है ,
दोनों में दिल की धड़कन बढ़ जाती है ।
कभी नींद में भी आते थे हसींन ख्वाब ,
अब कम्बख़्त नींद ही ख्वाब में आती है।


बाल ग़र सारे गिर जाएँ तो ग़म नहीं ,
नींद भले आये रातों में हरदम नहीं ।
मूंह में न रहें दांत भी तो मत समझो ,
कि इन चिकने मसूढ़ों में अब दम नहीं।


अंगारों पर राख हो तो आंच कम नहीं होती ,
बुढ़ापे में भी इश्क की आग कम नहीं होती।
मुँह में दांत और पेट में आंत नहीं तो क्या है ,
जीवन की भूख और प्यास कम नहीं होती।


उम्र एक नम्बर होती है , मगर जिंदगी नहीं ,
जिंदगी में खुश रहने पर कोई पाबन्दी नहीं।
हंसने हंसाने का ही दोस्तो नाम है जिंदगी ,
खुल कर हंसो , हंसने पर कोई पाबन्दी नहीं।


जो लोग हँसते हैं, वे अपना तनाव भगाते हैं , 
जो लोग हँसाते हैं, वे दूसरों के तनाव हटाते हैं।  
हँसाना भी एक परोपकारी काम है दुनिया में , 
चलो हास्य कवियों के लिए तालियां बजाते हैं।  


नोट :  इस रचना का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है।