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Saturday, July 23, 2022

प्रेशियस चाइल्ड की देखभाल --

आज फिर हमने कटिंग कराई,

आज फिर अपनी हुई लड़ाई।

हमनें कहा नाई से,

बाल ज़रा कुछ तो काटो भाई।


ले लो भले ही जितना माल चाहिए,

वो बोला,

काटने के लिए भी तो बाल चाहिए।

सिर पर चार बाल हैं, क्या छाटूँ,

समझ नहीं आता किसे छोडूं किसे काटूं।


जब पैसे देने की बारी आई,

तो हमने दलील सुनाई,

कि अब पैसे भी अनुपात में ही लो भाई।

वो बोला, जनाब

कीमत तो चार बाल की भी पूरी देनी पड़ती है,

आखिर प्रेशियस चाइल्ड की देखभाल

तो सबसे ज्यादा करनी पड़ती है।

Tuesday, February 5, 2019

सर्दी में बाल कभी मत कटाओ --


आज फिर हमने कटिंग कराई ,
आज फिर अपनी हुई लड़ाई ।

नाई ने पूर्ण आहुति की पुकार जब लगाईं ,
तो हमने कहा , बाल कुछ तो काटो भाई ।

भले ही ले लो जितना तुमको माल चाहिए ,
वो बोला काटने के लिए भी तो बाल चाहिए।

बाहर निकले तो सिर के बीच सर्दी लग रही थी ,
घर जाकर देखा , आधे सिर में बर्फ जम रही थी। 

अब हम समझे कि बाल बचाओ, माल बचाओ ,
समझ जाओ, सर्दी में कभी मत बाल कटाओ ।  

Wednesday, September 2, 2015

कुछ साल पहले जब हम जवान थे ...


जिंदगी ने कुछ ऐसा मोड़ लिया कि एक अर्से से कोई हास्य कविता नहीं लिख पाए हम । अब फुर्सत मिली है तो प्रस्तुत है , अधेड़ उम्र के हालातों पर एक हास्य कविता :


कुछ साल पहले जब हम प्रमाणित जवान थे ,
सर पर रंगत थी बालों के लहराते खलिहान थे।
याद बहुत आता है वो गुजरा हुआ ज़माना ,
जब अपने घर में हम भी शाहरुख़ ख़ान थे।


सोचते हैं ग़र बालों पर हम भी लगा लें खिज़ाब,
फिर क्या लगा पाओगे , हमारी उम्र का हिसाब।
दिल तो करता है हम भी दें ज़ुल्फ़ों को झटका ,
पर अब सर पर बाल ही कितने बचे हैं ज़नाब।


हेयर ट्रांसप्लांट का कभी मन में बनता है प्लान ,
पर कीमत सुनकर ही  दिल हो जाता है हलकान।
दो बाल भी दिख जाएँ कंघी में तो कहती है पत्नी ,
लो कर दिया सुबह सुबह डेढ़ हज़ार का नुकसान।


इश्क़ और बुढ़ापे में नींद भी कहाँ आती है ,
दोनों में दिल की धड़कन बढ़ जाती है ।
कभी नींद में भी आते थे हसींन ख्वाब ,
अब कम्बख़्त नींद ही ख्वाब में आती है।


बाल ग़र सारे गिर जाएँ तो ग़म नहीं ,
नींद भले आये रातों में हरदम नहीं ।
मूंह में न रहें दांत भी तो मत समझो ,
कि इन चिकने मसूढ़ों में अब दम नहीं।


अंगारों पर राख हो तो आंच कम नहीं होती ,
बुढ़ापे में भी इश्क की आग कम नहीं होती।
मुँह में दांत और पेट में आंत नहीं तो क्या है ,
जीवन की भूख और प्यास कम नहीं होती।


उम्र एक नम्बर होती है , मगर जिंदगी नहीं ,
जिंदगी में खुश रहने पर कोई पाबन्दी नहीं।
हंसने हंसाने का ही दोस्तो नाम है जिंदगी ,
खुल कर हंसो , हंसने पर कोई पाबन्दी नहीं।


जो लोग हँसते हैं, वे अपना तनाव भगाते हैं , 
जो लोग हँसाते हैं, वे दूसरों के तनाव हटाते हैं।  
हँसाना भी एक परोपकारी काम है दुनिया में , 
चलो हास्य कवियों के लिए तालियां बजाते हैं।  


नोट :  इस रचना का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है।

Wednesday, July 25, 2012

मूंह से निकली बात , कमान से निकला तीर और सर के उड़े बाल -- कभी वापस नहीं आते ?



जैसे किसान को अपनी लहलहाती फसल को देख कर और पिता को अपने ज़वान होते बेटे को देख कर आनंद आता है, वैसे ही एक पुरुष के सर पर काली जुल्फों की छटा देख कर आनंद आता है .
कॉलिज के दिनों में जब अपनी बुल्लेट पर बिना हेलमेट के बैठकर धड़ धड़ करते हुए मोटरसाईकल दौड़ाते थे , तब सर सर करती हवा सर के बालों के साथ अठखेलियाँ करती तो खुद को किसी फिल्म स्टार से कम नहीं समझते--- एक रास्ता है जिंदगी , जो थम गए तो कुछ नहीं .

फिर धीरे धीरे सर पर बालों की आबादी ऐसे कम होती गई जैसे देश में ईमानदार लोगों की . जहाँ पहले दिन में बस तीन बार बालों में कंघी करते थे , अब हर तीस मिनट बाद करनी पड़ती है . अब तो कंघी करते समय बच्चे भी हँसते हुए कहते हैं -- पापा , सर पर चार तो बाल हैं , और आधे घंटे से लगे हुए हैं कंघी करने में . ऐसे में हम तो यही कहते हैं -- बेटा , प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है .

लेकिन हर बार जब हेयर कटिंग के लिए जाते हैं तो हज्ज़ाम को यही कहना पड़ता है -- भाई बस थोड़े से यहाँ वहां काटने हैं . वो भी मुस्कराता हुआ कहता है -- बाबूजी , समझ गया . लेकिन जल्दी ही उसकी मुस्कराहट ,झुंझलाहट में बदल जाती है क्योंकि जिस काम को वह दो मिनट का काम समझ रहा था , उसमे उसे आधा घंटा लग जाता है . कभी यहाँ से , कभी वहां से काटते काटते अक्सर हमारे बाल थोड़े से ही रह जाते हैं . घर जाते हैं तो यही सुनना पड़ता है -- पट्ठे बना दिए पट्ठे ने .

इस बार जैसे ही हम कुर्सी पर बैठे बाल कटवाने के लिए , बायीं ओर की कुर्सी पर बैठा एक ख़ुदा का बंद शुरू हो गया अपने मोबाईल पर जोर जोर से गप्पें मारने . लगता है हम हिन्दुस्तानियों को बात बात पर शोर मचाने की बड़ी ख़राब आदत है . सारे समय उसकी चपड़ चपड़ सुनते रहे . अंत में उसने मोबाईल पर एक सन्देश पढ़कर सबको खबर दी -- यहाँ भूकंप आया है . अब तक हम गर्दन घुमाने की हालत में आ चुके थे . घूम कर उसे देखा तो पाया की एक २४ -२५ साल का काला कलूटा , भारी भरकम राक्षस सा दिखने वाला लड़का फेस पैक लगाये बैठा था . उसे देख कर मन हुआ की कहूँ -- भूकंप नहीं भाई , यह तो आपने अपना पैर ज़मीन पर पटका है . लेकिन उसका डील डौल , चेहरे पर झलकती क्रूरता और मानसिक दिवालिया देख कर हमने अपने सेन्स ऑफ़ ह्यूमर पर नियंत्रण रखना ही सही समझा .


सैलून से बाहर निकले तो एक बार फिर वही लुटे लुटे से महसूस कर रहे थे . सोचा , आखिर कब तक ऐसे हाथ पर हाथ रखे बैठे रहेंगे . दिल ने कहा -- कुछ करते क्यों नहीं, कुछ लेते क्यों नहीं . लेकिन हमें ध्यान आया पिछली बार भी मन में ठान लिया था कुछ करने का और पहुँच गए थे अपने अस्पताल के त्वचा रोग विभाग के अध्यक्ष के पास किसी नुश्खे की तलाश में . लेकिन जब उनकी चमकती चाँद देखी, तो बिना कुछ कहे , करे और लिए ही वापस आ गए थे .
फिर याद आया नज़फगढ़ का नवाब -- वीरेन्द्र सहवाग . कैसे उन्होंने कुछ दिन टीम से बाहर रहने का फायदा उठाते हुए अपनी खोई हुई बहार वापस पा ली थी . लेकिन पत्नी जी ने बताया -- जानते हैं उनके पुनर्रोपित एक एक बाल की कीमत ७५० रूपये है . यह सुनकर हमारी तो लुटिया ही डूब गई . सोचा सब कुछ लुटा कर वापस भी आए तो क्या पाएंगे . हालाँकि श्रीमती जी अब भी जब कभी सुबह कंघी करने के बाद कंघी में दो बाल देख लेती हैं तो कहती हैं -- लो कर दिया ना सुबह सुबह १५०० /- का नुकसान .

रोज होते इस नुकसान की चिंता में घुले जा रहे हम इस बार दृढ निश्चय कर चुके थे कुछ करने का .
तभी हमें ध्यान आया , जब हम नए नए डॉक्टर बने थे तब हमारे एक साथी को दिल्ली के एक पौश इलाके में नई नई खुली एक क्लिनिक में ३०,००० रूपये मासिक सैलरी पर काम मिला था जबकि हमें मिलते थे मात्र २००० /-. उस क्लिनिक में किसी नई तकनीक से सर के उड़े बालों को दोबारा पाने की गारंटी दी जाती थी . खर्चा मात्र ६००० -१००००/ -. वह तो बाद में पता चला -- वह कोई जादुई इलाज नहीं बल्कि एक दवा थी जिसे घोलकर सर पर लगाया जाता था .


हालाँकि उस दवा का इस्तेमाल हम भी अनमने से कई बार कर चुके हैं . लेकिन शायद दिल से न करने की वज़ह से फायदा नहीं हुआ . यही सोचकर हम पहुँच गए केमिस्ट के पास और मांगी वो दवा . केमिस्ट ने पूछा -- २% या ५ & ? अब हमने यह तो सोचा ही नहीं था , सो पूछा -- दोनों में क्या फर्क है ? ज़वाब दिया पास खड़ी एक सुन्दर सी , नवयौवना ने -- अक्सर २ % को ही रिकोमेंड किया जाता है -- मैंने भी २ % ही इस्तेमाल किया है . ५ % वाली से चक्कर आ सकते हैं . उसकी भोली अदा पर मन ही मन मुस्कराते हुए हमने भी बड़े भोलेपन से उसका शुक्रिया अदा किया और पूछा -- कितना फायदा हुआ ? वो बोली -- जब तक लगाते रहो तब तक तो फायदा होता है . हमने भी २ % वाली एक शीशी खरीदी और सजा दिया अपने कमरे में .


अब रोज सुबह नहा धोकर जब श्रीमती जी इश्वर की स्तुति कर रही होती हैं , तब हम शीशी खोलकर अपने उजड़े चमन की सेवा सुश्रुवा में लगे होते हैं . साथ ही श्रीमती जी से भी अनुरोध करते हैं -- अपनी प्रार्थना के साथ , भगवान से दो चार बाल हमारे लिए भी मांग लें .

अब देखते हैं -- हमारी सेवा और श्रीमती की प्रार्थना कब और कितना रंग लाती है !






हालाँकि डरते भी हैं --कहीं ज्यादा रंग ले आई और ऐसे हो गए तो ! यह उसी दवा का साइड इफेक्ट है .

अंत में , पूर्व प्रकाशित एक क्षणिका :

हेयर कटिंग सैलून की
आरामदेह कुर्सी पर बैठा
मैं ईर्षा रहा था ,
बाजु में बैठे युवक की लहलहाती
ज़ुल्फों को देख कर .
तभी , हमारा केश खज़ाना देख
दूसरी ओर बैठे
एक हम उम्र के चेहरे पर
वही भाव उभर आए .
उसका ग़म देख कर , मैं अपना ग़म भूल गया !

नोट : दवा का नाम मुफ्त में नहीं बताया जायेगा . कीमत आप स्वयं निर्धारित कर लें .




Saturday, July 3, 2010

प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है ----

आजकल सचिन तेंदुलकर के बाल बहुत सुर्ख़ियों में हैंघुंघराले बालों को सीधा कराकर जैल से सैट कर, विश्व कप फुटबाल मैच देखते हुए ज़नाब किसी हॉलीवुड हीरो से कम नहीं लग रहे थेसुना है अब सब युवा उनकी हेयर स्टाइल की नक़ल कर रहे हैं

आदमी
के सर पर बाल --हों तो मुश्किल , हों तो और भी मुश्किल

यदि सर पर बाल हैं तो कटवाना भी पड़ेगा नहीं कटवाए तो आदि मानव से लगने लगेंगे अब कटवाने के लिए पहले मन पसंद नाई होना चाहिए फिर पसंद की स्टाइल होनी चाहिए अंत में नतीज़ा पसंद नहीं आया तो कुछ नहीं कर सकते सिवाय इसके कि अगली बार नाई बदल लें

बचपन में जब गाँव में रहते थे , दादाजी का खानदानी नाई --नत्थू नाई ही बाल काटता था लेकिन वो कौन सा फैशन के बाल काटता था पकड़ा , बैठाया और घुमा दी मशीन कच कच बाल कटाते समय अपनी तो हालत कुछ ऐसी होती थी ----

बस फर्क इतना था कि उसके हाथ में कैंची नहीं , कच कच वाली मशीन होती थी जो देखते देखते गंजा कर देती थी

वक्त गुज़रा , हमने स्कूल छोड़ा कॉलिज में गए उधर दादाजी भी नहीं रहे अब कोई नहीं टोकता था , लम्बे बालों के लिए

उधर ७० के दशक में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का बोल बाला था फिल्मों में उनके बालों का फैशन --लम्बे बाल , कान ढके हुए , गर्दन पर बालों का गुच्छा ---सब नौजवान अपना रहे थे

कॉलिज के अंतिम वर्ष में पढ़ाई का बोझ कुछ ज्यादा ही था इसलिए बालों का बोझ कुछ कम किया , मूंछे काट कर लेकिन सर के बाल अभी भी लम्बे ही थे


डॉक्टर बनने के बाद पैसे भी मिलने लगे थे ८० के दशक में अंग्रेजी फिल्मों का भी प्रभाव पड़ने लगा था इसलिए शक्ल में मिला जुला परिवर्तन आया जिसमे हिंदी और इंग्लिश दोनों फिल्मों का असर दिखाई देता था

क्या ज़माना था --काली घनी लम्बी मूंछों की दिशा नीचे की ओर होती थी

इंटर्नशिप के बाद समय आया हाउस जॉब का एक साल का जॉब जो पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए आवश्यक होता था

हमने फिर एक बार शक्ल बदली अब दाढ़ी भी बढ़ा ली और स्टाइल से काटकर दाढ़ी को मूंछों के साथ मिलाकर कुछ ऐसा रूप निकल कर आया ---



आज दाढ़ी है , मूंछें हैं , और ही सर पर इतने बाल हैं

आजकल जब मैं कंघी करता हूँ तब बच्चे बड़ा हँसते हैं कहते हैं --पापा , सर पर चार बाल हैं और आधे घंटे से कंघी करने में लगे हुए हो

मैं कहता हूँ -- बेटा , प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है

अब जिसके सर पर घनी जुल्फें हैं वे तो हाथ मारकर भी स्टाइल मार लेते हैं
लेकिन हमें तो चार बालों की जिओग्राफिकल लोकेशन को ध्यान में रखते हुए अग्रिम योजना बनाकर उसे ध्यानपूर्वक कार्यान्वित करना पड़ता है
आखिर सब समय समय की बात है पहले सर पर बाल ज्यादा दिखते थे , अब खाल ज्यादा दिखती है

खैर हमने सोचा क्यों किसी डॉक्टर से परामर्श लिया जाएलेकिन हेयर स्पेशलिस्ट तो कोई होता नहींफिर सोचा अपने त्वचा रोग विभाग के हैड से बात की जाएलेकिन उनके हैड पर तो हमसे भी दो बाल कम हैंअगर उनके पास कोई इलाज़ होता तो पहले अपना करते

फिर हमें नज़फगढ़ के नवाब , विरेंद्र सहवाग का ख्याल आयाभई शादी के बाद उड़े उनके बाल फिर वापस गएपता चला कि उन्होंने हेयर ट्रांसप्लांट कराया है

लेकिन अपनी तो हालत पतली हो गई जब पता चला कि एक बाल की कीमत ७५० रूपये हैअब हमने सोचा कि चलो दो चार हज़ार रूपये अपने ऊपर खर्च कर लिए जाएँ तो क्या बुराई हैलेकिन हिसाब लगाया तो देखा कि इतने में तो बस - बाल ही लग पाएंगे

अब अगर कंघी में एक दो बाल दिख जाते हैं तो पत्नी कहती है, लो कर दिया हज़ार पंद्रह सौ का नुकसान

अब आप ही बताएं -- है कोई तेल, लोशन , करीम , लेप , दवा , दुआ , टूना , टोटका या काला, पीला ,लाल ,हरा --जादू , जो उड़े हुए बालों को वापस ला दे