Monday, September 14, 2015

एक मुक्तक ...


आज सिर्फ एक मुक्तक :

ज़िंदगी के सफ़र में, हमसफ़र अनेक होते हैं,
कोई बेवफ़ा, कुछ बेग़ैरत, कुछ नेक होते हैं ।
इंसान के कर्म ही बनाते हैं इंसान को शैतान,
वर्ना बन्दे जन्म से तो मासूम हरेक होते हैं ।

अब देखें इसी का हास्य रूप :

ज़िंदगी के सफ़र में, हमसफ़र अनेक होते हैं,
कोई बेवफ़ा, कुछ बेग़ैरत, कुछ नेक होते हैं ।
अच्छी सूरत देख कर झांसे में न आओ यारो ,
फेसबुक पर दिखते चेहरे अक्सर फेक होते हैं।  


4 comments:

  1. फेसबुक के मोहपाश से बचना मुश्किल से नामुमकिन होता जा रहा है. ऐसे में अच्छी नसीहत.

    आपको हिंदी दिवस पर शुभकामनायें.

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  2. हास्य रूप ज्यादा पसंद आया :)

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    1. हास्य तो हमेशा पसंद ही होता है। :)

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