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Friday, November 1, 2013

दीवाली के मच्छरों पर एक सामाजिक शोध कविता ---


दीवाली पर मच्छरों की भरमार पर प्रस्तुत है एक पूर्व प्रकाशित रचना :




एक दिन हमारी कामवाली बाई
सुबह सुबह घर आते ही बड़बड़ाई ।

बाबूजी, ये द्वार पर कौन मेहमान खड़े हैं ,
हैं तो लाखों करोड़ों, पर सब बेज़ान पड़े हैं ।

ये कहाँ से आते हैं, क्यों आते हैं,
हम तो समझ ही नहीं पाते हैं ।

और इनका नाज़ुक मिजाज़ देखिये ,
रोज रूपये की तरह लुढ़क जाते हैं ।

मैंने कहा बेटा, ये बिन बुलाये मेहमान जो बेज़ान हो गए हैं,
ये स्वतंत्र भारत के वो नागरिक हैं जो अपनी पहचान खो गए हैं ।

इनका तो जन्म लेना भी कुदरत की बड़ी माया है ।
क्योंकि इनके लघु जीवन पर प्रदूषण की पड़ी छाया है ।

प्रदुषण से परिवर्तित इनका अस्तित्त्व हो गया है ।
इसीलिए नेताओं की तरह इनका भी व्यक्तित्व खो गया है ।

उस दिन शाम रौशन होते ही वो फिर आ गए ।
दीवाने परवाने से हर विद्धुत शमा पर छा गए ।

मैंने पूछा -- आप कौन हैं
कहाँ से आए हैं, और क्यों आए हैं ?

उनमे से एक जो ज्यादा ख़बरदार था,
शायद उस झुण्ड का सरदार था ।

बोला --हम उत्तर भारत से आए हैं,
रोजी रोटी की तलाश में, दिल्ली के आसरे ।

हमने कहा आइये, आपका स्वागत है,
अरे हम नहीं हैं बेरहम बेशर्म बावरे ।

हम दिल्लीवाले दिल वाले हैं, मेहमान नवाज़ी के साये में पाले हैं ।
तभी तो दिल्ली के द्वार सभी के लिए खुले हैं ।

लेकिन यह तो बताईये, आप रोज रोज क्यों चले आते हैं ?
वो बोला हम तो इंसानी सभ्यता की चकाचौंध से खिंचे चले आते हैं ।

लेकिन इस रौशन दुनिया को
इतना असभ्य और मतलबपरस्त पाते हैं ।

कि जल कर राख ना हो जाये अपनी ही लौ में शमा ,
इसलिए हम तो पतंगा बन, खुद ही पस्त हो जाते हैं ।

देखिये ये जो हमारी खेप अभी उड़कर आई है ।
ये सही में मच्छर नहीं, देश में बढती महंगाई है ।

सामने वाली लाईट पर जो इनकी भरमार है ।
वह दरअसल देश में फैला हुआ भ्रष्टाचार है ।

और जो ज़मीं पर बिखरा इनका सामान है ।
वो असल में इंसान का गिरा हुआ ईमान है ।

अरे हमें मच्छर समझना आपका भ्रम है ।
क्योंकि हम मच्छर नहीं इंसान के बुरे कर्म हैं ।

जिस दिन इंसान में इंसानियत जाग जायेगी !
हमारी ये नस्ल लुप्त हो खुद ही भाग जायेगी !

Saturday, October 27, 2012

मौसम और मच्छरों की मार -- डेंगू बुखार ...


देश में , विशेषकर दिल्ली, एन सी आर और मुंबई में डेंगू बुखार के बढ़ते प्रकोप से और यश चौपड़ा की अकस्मात् मृत्यु से डेंगू बुखार से सावधान रहना समय की मांग है. इस वर्ष बरसात  का मौसम देर तक चलने की वज़ह से डेंगू भी देर से फैला है. जनता को जागरूक करने के लिए सरकार ने काफी प्रयास किये हैं जिनमे रेडियो , टी वी आदि पर विज्ञापन के अलावा अस्पतालों में रोगियों को पर्चे बांटे जाते हैं जिनमे डेंगू से बचाव के तरीके बताये जाते हैं . आइये जानते हैं , डेंगू से कैसे बचाव किया जा सकता है : 

डेंगू बुखार एक वायरल बुखार है जो एडीज इजिप्टाई नाम के मच्छर के काटने से फैलता है. डेंगू का वायरस मच्छर की लार से मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है और रक्त में फैलकर अपना प्रभाव दिखाता है. अक्सर यह मच्छर  साफ़ लेकिन स्टेगनेंट पानी में पाया जाता है . यह दिन के समय काटता है .  

डेंगू बुखार के लक्षण : 

डेंगू बुखार तीन तरह से प्रस्तुत होता है. 

१)  डेंगू बुखार : तेज बुखार , सर दर्द , आँखों के पीछे दर्द , जोड़ों और मांस पेशियों में दर्द और शरीर पर लाल दाने आदि आम लक्षण होते हैं . अक्सर इसे अन्य वायरल फीवर से अलग पहचानना मुश्किल होता है. लेकिन खांसी और जुकाम , गला ख़राब आदि नहीं होता.  

२) डेंगू हेमरेजिक फीवर : इसमें बुखार के साथ शरीर से रक्त श्राव होने लगता है जैसे उलटी में खून , पेशाब में खून या नाक से रक्त श्राव आदि. यह तभी होता है जब रक्त में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है . यह डेंगू का एक चिंताज़नक लक्षण है और रोगी को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है.  

३) डेंगू शॉक सिंड्रोम :   इस अवस्था में बुखार के बाद रोगी का ब्लड प्रेशर अचानक बहुत कम हो जाता है जिससे सभी अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है . यह एक इमरजेंसी होती है . यदि तुरंत सही इलाज उपलब्ध न हो तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है. यह डेंगू का सबसे ख़राब रूप है.     

डेंगू बुखार में निम्न परिस्थितियों में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है जब डॉक्टर से परामर्श करना अनिवार्य होता है : 

* बच्चे , बूढ़े और गर्भवती महिलाएं , डायबिटिज , क्रॉनिक लीवर या किडनी रोग . 
* अचानक पेट में तेज दर्द , लगातार उल्टियाँ , रक्त श्राव , लो ब्लड प्रेशर , बेहोशी या गफ़लत की हालत. 
* जाँच करने पर ब्लड प्रेशर में बदलाव , नाड़ी की गति का अत्यधिक तेज होना , प्लेटलेट्स की संख्या २०००० से कम होना और रक्त श्राव . 

डेंगू होने पर क्या करें :   

* बुखार के लिए सिर्फ पेरासिटामोल की गोली ही लें . एस्प्रिन और अन्य दर्द निवारक दवाओं का सेवन न करें . 
* उचित मात्रा में पानी और अन्य तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए ताकि पानी की कमी न हो. 
* उपरोक्त खतरे के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें .   
* नीम हकीम और चमत्कारिक डॉक्टरों के चक्कर में न पड़ें . उचित अस्पताल में ही इलाज कराएँ .
* डेंगू का न ही कोई उपचार है , न कोई वैक्सीन। लेकिन सपोर्टिव इलाज से ही रोगी पूर्णतया ठीक हो जाते हैं।

निदान :  

* आम तौर पर डेंगू रोगी के लक्षण देखकर ही पता चल जाता है विशेषकर जब बुखार के साथ रैश भी नज़र आए। 
* प्लेटलेट काउंट्स --    डेंगू बुखार में  प्लेटलेट्स  संख्या सामान्य से कम हो जाती है। लगातार गिरती संख्या डेंगू के पक्ष में जाती है . यदि 20, 000  से कम हो तो अस्पताल में भर्ती हो जाना चाहिए। 10000 से नीचे प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की ज़रुरत पड़ती है।   
* एलाइजा टेस्ट और डेंगू सिरोलोजी : आई जी एम् एंटीबोडीज का रक्त में पाया जाना डेंगू का एक्टिव इन्फेक्शन दर्शाता है। जबकि आई जी जी एंटीबोडीज का होना पुराना संक्रमण दर्शाता है।

डेंगू से बचाव के तरीके : 

* सबसे ज़रूरी है घर के आस पास साफ सफाई रखना और कहीं भी पानी जमा न होने देना। कूलर , बर्तन , गमले आदि में पानी जमा न होने दें।  गर्मियों में कूलर में सप्ताह में एक बार एक बड़ा चम्मच टेमीफौस ग्रेनुल्स डालें या फिर मिटटी का तेल भी डाल सकते हैं।
* दिन में पूरी बाजु की कमीज़ पहने। जहाँ तक हो सके शरीर को ढक कर रखें।
* मच्छर मार दवा का स्प्रे भी लाभदायक रहता है।

नोट: डेंगू होने पर घबराएँ नहीं। जब तक ऊपर बताये गए गंभीर लक्षण नज़र नहीं आते , तब तक घर में रह कर भी इलाज़ कराया जा सकता है। डेंगू में प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की ज़रुरत तभी पड़ती है जब प्लेटलेट काउंट्स 10000 से कम हो या  रक्त श्राव होने  लगे। बचाव के लिए प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की ज़रुरत नहीं  होती।

डेंगू और चिकनगुनियामें थोडा सा ही अंतर होता है .चिकनगुनिया में जोड़ों में दर्द ज्यादा होता है और लम्बे समय तक रह सकता है। दोनों का इलाज एक जैसा ही है। 



Friday, November 4, 2011

हम मच्छर नहीं इंसान के बुरे कर्म हैं--



पिछले
कुछ वर्षों से दीवाली के आस पास एक अजीबोग़रीब नज़ारा देखने को मिल रहा हैदशहरे और दीवाली के मध्य काल में दिल्ली में लाखों करोड़ों महीन मच्छर लाईट के सामने जाते हैं और सुबह सब के सब ज़मीन पर बिखरे नज़र आते हैंहमारी लिफ्ट के सामने से कम से कम एक डोंगा भर ये मच्छर हम रोज उठाकर फेंकते हैं
लेकिन आश्चर्यज़नक रूप से दीवाली के बाद पूर्ण रूप से गायब हो जाते हैं

इसी पर हमने एक अनुमानित शोध कार्य किया जो प्रस्तुत है एक कविता के रूप में :

)

एक दिन कामवाली बाई
घर आते ही बड़बड़ाई ।

बाबूजी , ये द्वार पर कौन मेहमान खड़े हैं ,
हैं तो लाखों करोड़ों , पर सब बेज़ान पड़े हैं ।

ये कहाँ से और क्यों आते हैं
हम तो समझ नहीं पाते हैं ।

ऊपर से इनका नाज़ुक मिजाज़ देखिये ,
रोज सेंसेक्स की तरह लुढ़क जाते हैं ।

मैंने कहा बेटा , ये बिन बुलाये मेहमान
जो बेज़ान हो गए हैं ,
ये स्वतंत्र भारत के वो नागरिक हैं
जो अपनी पहचान खो गए हैं ।

इनका जन्म लेना भी
कुदरत की बड़ी माया है ।
इनके लघु जीवन पर पड़ी
ग्लोबल वार्मिंग की छाया है ।

ग्लोबल वार्मिंग से इनके जींस में
परिवर्तन हो गया है ।
इसीलिए कुछ नेताओं की तरह इनका भी
अस्तित्त्व ही खो गया है ।

)

उस दिन शाम रंगीन होते ही
वो फिर आ गए ।
दीवाने परवाने से
हर विद्धुत शमा पर छा गए ।

मैंने पूछा --आप कौन हैं
कहाँ से आए हैं , क्यों आए हैं ?

उनमे से एक जो ज्यादा ख़बरदार था
शायद उस झुण्ड का सरदार था ।

बोला --हम उत्तर भारत से आए हैं
रोजी रोटी की तलाश में, दिल्ली के आसरे ।

हमने कहा --आइये, आपका स्वागत है
अरे हम नहीं हैं बेरहम बेशर्म बावरे ।

हम दिल्लीवाले दिल वाले हैं
मेहमान नवाज़ी के साये में पाले हैं ।
तभी तो दिल्ली के द्वार
सभी के लिए खुले हैं ।

लेकिन यह तो बताईये
आप रोज क्यों चले आते हैं ?
वो बोला --हम तो इंसानी सभ्यता की
चकाचौंध से खिंचे चले आते हैं ।

लेकिन इस रौशन दुनिया को
इतना असभ्य और मतलबपरस्त पाते हैं ।

कि कहीं राख न हो जाये जलकर
अपनी ही लौ में शमा ,
इसीलिए पतंगा बन
खुद ही पस्त हो जाते हैं ।

देखिये ये जो हमारी खेप
अभी उड़कर आई है ।
ये मच्छर नहीं,
देश में बढती महंगाई है ।

सामने वाली लाईट पर
जो इनकी भरमार है ।
वह दरअसल देश में
फैला भ्रष्टाचार है ।

और जो ज़मीं पर बिखरा
इनका सामान है ।
वो असल में इंसान का
गिरा हुआ ईमान है ।

हमें मच्छर समझना
आपका भ्रम है ।
क्योंकि हम मच्छर नहीं
इंसान के बुरे कर्म हैं ।


नोट : यह रचना तब लिखी थी जब मुंबई में उत्तर भारतीयों पर हमले हो रहे थे