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Monday, March 13, 2023

मॉडर्न भिखारी --

 

सामने आया एक युवा भिखारी , 

बोला, बाबूजी बहुत बड़ी है लाचारी।  

ज़रा मेहरबानी कीजिये, 

बहुत भूख लगी है , 

खाने को कुछ पैसे दे दीजिये।  


मैंने कहा, हट्टे कट्टे हो ,

कुछ काम क्यों नहीं करते हो।  

वैसे भी मेरे पास छुट्टे नहीं हैं।  

वो बोला, चिंता मत कीजिए,

मैं कैशलेस काम करता हूँ, 

आप पेटीएम या गूगल पे कर दीजिए।   


Wednesday, March 5, 2014

सड़कों पर खेलती , कलाबाज़ी खाती जिंदगियां ----


जैसे ही गाड़ी चौराहे पर रुकी , वही मैले कुचैले बच्चे व्यस्त हो गए कलाबाज़ी दिखाने मे . तभी सड़क के दूसरी ओर एक गाड़ी आकर रुकी . ड्राईवर की सीट पर गाड़ी मे बैठे मालिक ने एक बच्चे को ईशारा किया और एक गोल सा पैकेट निकाला . लगभग पांच साल की उस बच्ची ने बड़ी हसरत भरी निगाहों से पैकेट को देखा और अपने नन्हे हाथों मे थाम लिया . फिर वहीं सड़क के बीचों बीच बैठ गई फुटपाथ के किनारे पर . हम उत्सुकतावश बड़े ध्यान से बच्ची की गतिविधियों को  देखने लगे . उसने भी जल्दी ही हमे उसे देखते हुए देख लिया . यह देखकर वह थोड़ी सी सहम गई . अब वह असमंजस मे थी कि पैकेट खोले या नहीं . लेकिन उसके साथ साथ अब तक हमे भी उत्सुकता होने लगी थी कि पैकेट मे क्या हो सकता है , हालांकि हमे कुछ कुछ आभास हो रहा था .  


कुछ झिझकते हुए उसने धीरे धीरे पैकेट खोला जैसे अक्सर दीवाली पर हम गिफ्ट के पैकेट खोलते हैं . जैसा कि अनुमान था , पैकेट मे करीने से पैक की गई चार रोटियाँ थी सब्ज़ी के साथ . उसने एक हाथ से सब्ज़ी मे से हरी मिर्च निकाली और मछली की तरह लटकाया और फेंक दिया . फिर उसने हमारी ओर देखा , हम अभी भी उसे एकटक देख रहे थे . वह फिर शरमाई . इस बीच देखने का लुका छिपी का यह खेल यूं ही चलता रहा . अन्तत: उसने हिम्मत कर रोटियों का हिसाब किया . अब उसके दोनो हाथों मे दो दो रोटियाँ थीं और दोनो पर सब्ज़ी रखी थी . वह उठी और ट्रैफिक के बीच हमारी गाड़ी के पीछे खड़ी गाड़ियों के बीच भीख मांगने की असफल कोशिश करते हुए अपने चार वर्षीय भाई के पास पहुंच गई . बच्चे की रोटियों से ज्यादा पैसों मे रुचि नज़र आ रही थी . 

ट्रैफिक सिग्नल की बत्ती हरी हुई और हम आगे बढ़ गए यह सोचते हुए कि क्या शाम के चार बजे बच्चों को भूख रही होगी !  

Saturday, December 24, 2011

शनि देव को मनी क्यों चाहिए --एक सवाल !

शनिवार का दिन सड़कों पर थोडा सकूं का दिन होता है । ज्यादातर सरकारी कार्यालय इस दिन बंद होते हैं ।
लेकिन चौराहों पर इस दिन एक विशेष नज़ारा देखने को मिलता है । हर चौराहे पर दर्ज़नों बच्चे जय शनिदेव कहते हुए भीख मांगते नज़र आते हैं ।


इस फोटो में दिखाई दे रहा यह सवा छै फुट का नौज़वान अक्सर काले लिबास में भीख मांगता है । आज जाने क्यों अपना ट्रेड मार्क लिबास छोड़कर सफ़ेद पर उतर आया ।

कार में शीशे बंद कर बैठे हमारे जैसे संभ्रांत व्यक्तियों के लिए इसे हाथ के इशारे से निज़ात पाना आसान हो जाता है ।
लेकिन इसके डील डौल और कद काठी को देखकर ही दो पहियाँ सवारों की जेब में हाथ चला जाता है ।


दूसरे चौराहे पर तैनात यह नौज़वान भी पहले वाले का भाई लगता है ।
हाथ में डोंगा जिसमे एक त्रिशूल रखा रहता है । डोंगे में थोडा सा सरसों का तेल , कभी कभी फूल माला लटकती हुई , साथ में नींबू और हरी मिर्च की लड़ी बनाकर लटका लिया जाता है ।

ज्यादातर डोंगे में सिक्के डालने वाले साईकल , स्कूटर या मोटरसाईकल सवार ही होते हैं ।
कभी किसी कार वाले को सिक्का डालते हुए नहीं देखा ।

हम कभी चौराहे पर किसी को भीख नहीं देते , ही कोई खरीदारी करते हैं आखिर कोई तो हो जो कानून का पालन करे

लेकिन अक्सर सोचता हूँ कि ऐसा क्यों कि भीख देने वाले निम्न आय वाले लोग ही होते हैं क्या उन्हें अपना स्तर ऊंचा उठाने के लिए दान करना पड़ता है ?
और शनि देव का क्या महत्त्व है ?
डोंगे में तेल , त्रिशूल , नीम्बू और हरी मिर्च के पीछे क्या धारणा है ?
ये लोग कौन हैं जो शनि के नाम पर भीख मांगते हैं ?

शायद ज्ञानी लोग इन सवालों के ज़वाब दे पायें !


Monday, August 2, 2010

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे---ये भी खूब रही

दिल्ली का ट्रैफिक । साठ लाख वाहन । जिंदगी की भाग दौड़ । सुबह सुबह सब भागने में व्यस्त। ऐसे में क्या क्या दृश्य देखने को मिलते हैं । ज़रा आप भी देखिये ।


द्रश्य १ :

एक चौराहे पर एक गाड़ी वाले ने तीन स्कूटर्स , चार मोटर साईकल्स , दो साईकल रिक्शा और पांच पैदल आदमियों को टक्कर मार दी ।

गाड़ी वाला ग्रीन लाईट ( हरी बत्ती ) जम्प कर रहा था ।

दृश्य २ :

एक चौराहे पर एक युवक ने रैड लाईट जम्प की और ग्रीन लाईट पर दूसरी ओर से आती एक महिला की गाड़ी ठोक दी ।
पुलिस दोनों को पकड़ कर थाने ले गई । थाने में युवक के नेता पिता ने महिला को डांट पिलाई --मैडम आपको दिखता नहीं है । जब वो रैड लाईट जम्प कर रहा था , तो आप रुकी क्यों नहीं ।

दृश्य ३ :

अमेरिका , कनाडा जैसे देशों में लाइसेंस बड़ी मुश्किल से मिलता है । नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है ।
ऐसे देश का नियम पालक लाइसेंस धारी पूर्वी दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी एक किलोमीटर भी नहीं चला सकता , यह मेरा दावा है ।

दृश्य ४ :

चौराहे पर एक स्कूटर वाले ने एक भिखारी को एक रुपया भीख में दिया । भिखारी बिगड़ कर बोला --बाबू इसे आप ही रखो । मेरा दिवालिया निकलवाओगे क्या ।

अंत में :

एक बूढ़े भिखारी से मैंने कहा , बाबा
आज दायाँ , कल तो बायाँ हाथ बढाया था ।
भिखारी बोला बेटा , बूढा हो गया हूँ
अब याद नहीं रहता , कल किस हाथ में पलस्तर चढ़ाया था ।

कहिये , कैसी रही ।

Wednesday, April 28, 2010

पता ही नही चलता कि भिखारी कौन और दाता कौन है---

कहते हैं --एक मच्छर आदमी को क्या से क्या बना देता हैइसी तरह एक छोटी सी पिन कंप्यूटर का बेडा गर्क कर देती हैये तो हमने अभी जानाअब हुआ यूँ कि हम ज़नाब की सफाई करने बैठे और की बोर्ड का तार निकाल कर जब दोबारा डालने लगे तो ज़रा चक्कर खा गएलगे अक्ल के बैल दोड़ानेलेकिन अपनी तो बुद्धि चकरा गई और समझ ही नहीं आया कि ये कैसे डलेगाकई दिन तक कोशिश करते रहे , कईयों से सलाह भी ली लेकिन वही ढाक के तीन पातआखिर स्पेशलिस्ट के पास ले जाना पड़ाऔर पता चला कि हमने अपनी होर्स पावर का प्रयोग करते हुए लीड की एक छोटी सी पिन तोड़ दी थी , जिसकी वज़ह से वो काम नहीं कर रहा था
अब हमें तो यही समझ आया कि भई अनजान रास्ते पर चलते समय लापरवाही नहीं, सावधानी बरतनी चाहिएवर्ना एक गलत कदम बड़ी मुसीबत में डाल सकता है आपकोअब पिछले सप्ताह मैंने ब्लोगिंग कम करने की सलाह क्या दी , अपनी तो ब्लोगिंग ही बंद हो गई


अभी कुछ दिन पहले अखबार में पढ़ा कि भीख दोगे तो सजा मिलेगी। रोड रेगुलेशंस १९८९, के नियम २२ (अ) के अंतर्गत आपको १०० रूपये जुर्माना हो सकता है। यानि एक रुपया भीख दोगे तो १०० रूपये की चपत लगेगी। अब मैंने तो ये ज्ञान सप्त.२००२ में ही पा लिया था तो मैंने तो डर कर भीख देना बंद कर दिया। पर लगता है कि दिल्ली वाले बहुत बहादुर लोग हैं। तभी तो रेड लाइट पर गाड़ी रोकते ही भिखारियों का एक सैलाब सा आ जाता है। और भिखारी भी ऐसे कि गलती से आपने एक बार उनकी तरफ़ देख लिया तो फ़िर बिना कुछ लिए पीछा नही छोड़ने वाले। इसका उपाय मैंने तो ये खोजा है कि बिना उनकी तरफ़ देखे हाथ हिला कर इशारा करो कि--- जा-जा। वो अपने आप समझ जाते हैं कि ये खडूस कुछ नही देने वाला। लेकिन आजकल भिखारी भी बड़े हाई -टेक्क हो गए हैं। कई बार तो पता ही नही चलता कि भिखारी कौन और दाता कौन है।

एक चौराहे पर जब मैं रुका और नजर घुमाई ,
फुटपाथ पर खड़े एक भिखारी ने
जेब से मोबाईल निकाला और कॉल लगाई।

और उधर से बौस पुकारा, दीनानाथ
आज तुम्हारी वी आई पी रूट पर ड्यूटी है।
भिखारी बिगड़ गया और बोला सौरी,
मेरी सी एल लगा देना , आज मेरी छुट्टी है।

नही बौस , वी आई पी ड्यूटी से मेरा लॉस हो जाएगा भारी,
अरे नेताओं से क्या मिलेगा , वो तो ख़ुद ही हैं भिखारी
जब भी चुनाव होते हैं , ये हाथ जोड़ खड़े होते हैं,
और इस गठबंधन के ज़माने में चुनाव भी तो रोज होते हैं।


बौस बोला भैया ऐसा सोचना भी
तुम्हारी भारी गलती है।
अब नेता भी समझदार हो गए हैं ,
इसलिए गठबंधन की सरकारें ज्यादा चलती हैं