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Thursday, October 4, 2018

एक दिल , कई अफ़साने :


दिल धड़कता है तो समझो,
जीवन का संचार है।

दिल जोर से धड़कता है तो समझो,
किसी से हुआ प्यार है।

दिल फड़फड़ाता है तो समझो, 

बंदा दिल का बीमार है।

दिल धड़कना बंद कर दे तो 

बाय बाय नश्वर संसार है।

दिल बड़ा नाज़ुक होता है ,

ये सदा टूटने को तैयार है।

दिल का रखो पूरा ध्यान, 

यही तो जीवन का आधार है।

Saturday, December 23, 2017

दिल तो अभी बच्चा है जी ...

जिंदगी के तीन पड़ाव -- पूर्वव्यापी।

१) बचपन :

ये दिल तो बच्चा है जी।
दिल तो अभी बच्चा है जी।
जो काम कभी नहीं किये ,
उन्हें करने की इच्छा है जी।

किसी बगिया से आम तोड़ कर लाएं ,
कभी पेड़ से चढ़ अमरुद तोड़ कर खाएं।
गन्ने के खेत से गन्ना चुराकर चूसें ,
कोल्हू के गन्ने का ताज़ा रस पी जाएँ।

पर गांव की नदी में कूदने में गच्चा है जी ,
क्योंकि अपुन तैरने में अभी कच्चा है जी।

२) जवानी :

कभी पब , बार और डिस्को में जाते ,
किसी हसींना को देख सीटी बजाते ।
कभी रात रात भर घर से गायब रहते ,
लेट क्लास का घर में बहाना बनाते ।

काहे अपनी सच्चाई पर इतना गुमान है ,
नेकी छोड़ यार , दिल तो अभी जवान है।

३ ) बुढ़ापा  :

ना किसी से बैर , ना ही किसी से यारी ,
धर्म कर्म करने की उम्र हो गई हमारी।
मोह माया के जाल से मुक्त हो जाएँ ,
ख़त्म हो जाये जब सारी जिम्मेदारी ।

दिल को संभालें वरना, टूटना पक्का है जी ,
दिल ना अब जवान है , न ये बच्चा है जी।

Monday, November 28, 2011

दिल और दिमाग की द्वंद्ध में किसकी सुनें ?

अक्सर किसी को कहते सुना होगा--क्या करें , दिल नहीं मानताइन्सान के दिल और दिमाग में एक द्वंद्ध हमेशा चलता रहा हैदिल कुछ और कहता है , दिमाग कुछ औरऔर हम सोचते रहते हैं कि दिल की माने या दिमाग की

वैसे तो हमारे शरीर में दिल यानि हृदय का काम शरीर में रक्त का संचार बनाये रखना हैलेकिन यहाँ दिल से तात्पर्य है --अंतर्मन , ज़ेहन , या हमारी चेतना

इस दिल का काम है हमें सही दिशा दिखानाहमें सही रास्ते पर चलाना


लेकिन दिमाग यानि मष्तिष्क एक कंप्यूटर की तरह काम करता है जिसमे भावनाएं होती हैं , संवेदनाएंवह नाप तोल कर कुछ का कुछ बनाने में सक्षम होता हैइसीलिए दिमाग सच को झूठ , झूठ को सच --सत्य को असत्य और असत्य को सत्य बना सकता है

यह दिमाग ही है जिसकी वज़ह से आज तक कोई बड़ा आदमी कोई भी जुर्म करके भी जीवन भर जेल में नहीं रहायहाँ वकीलों का दिमाग काम करता है

दिमाग ही मनुष्य को बुरे कामों की ओर ले जाता हैऔर तर्क वितर्क से उसे सही भी ठहरा देता है

लेकिन दिमाग प्रैक्टिकल भी होता हैवह भावनाओं के आवेश में नहीं बहतावह स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता रखता है
जबकि दिल अक्सर भावनाओं में बहकर कभी कभी गलत निर्णय ले सकता है

ऐसे में सवाल उठता है कि --दिल की माने या दिमाग की

आम तौर पर तो यही कहा जाता है कि जो दिल कहे , वही काम करना चाहिए
लेकिन कहते हैं --दिल तो पागल होता हैहमेशा दिल की मानने में हानि भी हो सकती है

अब आप ही बताइए , क्या किया जाये --दिल की माने या दिमाग की ?

Tuesday, September 27, 2011

जब दिल की धड़कन बढ़ने लगे और रुकने का नाम ना ले ---

बचपन में गाँव में जब भी कोई बीमार होता तो वैद्ध को बुलाया जाता दूर से आता था , इसलिए आने पर बच्चों को साथ में दिखा दिया जाता । बच्चे के नाखून देखकर वैद्ध जी बड़ी शान से बताते --इसको खून की कमी है --इसके पेट में कीड़े हैं उसकी बात सोलह आने सच होती । वैसे भी गाँव के बच्चों में पेट में कीड़े अक्सर हो जाते हैं , खुले में सौच करने की वज़ह से ।

थोड़े बड़े हुए तो नाड़िया वैद्ध के बारे में जाना । बहुत पहुंचे हुए वैद --सिर्फ नाड़ी देखकर ही सारी बिमारियों का इलाज करने वाले । सोचकर ही हैरानी होती थी --यह ऐसे कैसे जान लेते हैं सब

डॉक्टर बने तो पता चला --नाड़ी देख कर क्या पता चलता है । और क्या नहीं ।

नाड़ी यानि पल्स --डॉक्टर आम तौर पर रेडियल पल्स का इस्तेमाल करते हैं , रोगी के रोग के बारे में जानने के लिए । इसे हाथ के अंगूठे से थोडा ऊपर उंगली से महसूस किया जाता है ।

नाड़ी से क्या पता चलता है ?

* नाड़ी की गति --सामान्य या तेज या धीमी .
* नाड़ी की नियमितता .
* वोल्यूम और पल्स प्रेशर .
* विशेष किस्म की पल्स .

गति :

फास्ट पल्स ( टेकिकार्डिया ) यानि नाड़ी का तेज चलना इसके मुख्य कारण होते हैं :

* बुखार --आम तौर पर एक डिग्री फारेन्हाईट तापमान बढ़ने से पल्स १० तक बढ़ जाती है ।
* खून की कमी --एनीमिया .
* हाईपरथायरायडिज्म --इसमें सोते हुए भी पल्स तेज चलती है ।
* नर्वसनेस , बेचैनी, डर
* हाई या लो बी पी
* डीहाईडरेशन ( शरीर में पानी की कमी )
* एक्सरसाइज
* सिगरेट और शराब का अत्यधिक सेवन
* विशेष हृदय रोग

स्लो पल्स के कारण :

* हाईपोथायरायडिज्म
* एथलीट्स
* कुछ दवाईयों का असर जैसे बीटा ब्लोकर्स
* हार्ट ब्लॉक तथा अन्य हृदय रोग
* पोइजनिंग
* टायफोइड ( मियादी बुखार )

इस तरह नाड़ी से मुख्य रूप से सिर्फ नाड़ी का तेज या धीमा होना ही जाना जा सकता है । यह जानकारी कुछ रोगों के निदान में सहायक सिद्ध होती है ।
लेकिन एक जनरल फिजिशियन इससे ज्यादा कुछ नहीं जान सकता । हालाँकि कार्डियोलोजिस्ट कुछ विशेष परिस्थितयों में हृदय रोग से सम्बंधित जानकारी जुटा सकते हैं ।

अब आप ही सोचिये कि एक वैद्ध जो अक्सर अंगूठा छाप या दो चार क्लास पास होता था , उसे नाड़ी देख कर क्या पता चलता होगा

लेकिन हमारी जनता भी इतनी भोली रही है कि बस
वैद्ध जी ने कहा और हमने मान लिया । हालाँकि उपचार में विश्वास भी बहुत काम आता है लेकिन उसके लिए भी कोई तो आधार होना चाहिए ।
विशेष :

अक्सर लोगों को कहते सुनते हैं कि --दिल धड़कने लगा । अब यह किसी सुंदरी को देख कर हो या किसी भयंकर दृश्य को देख कर । लेकिन अचानक दिल की धड़कन महसूस होने लगती है । वैसे तो दिल तब तक धड़कता है जब तक साँस है । लेकिन साँस की तरह दिल की धड़कन का भी तभी पता चलता है , जब यह अचानक तेज हो जाये । इसे पैल्पिटेशन ( palpitation) कहते हैं ।

यदि यह लगातार रहे और अपने आप ठीक हो तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिए क्योंकि यह किसी गंभीर रोग का लक्षण हो सकता है


Sunday, January 24, 2010

दिल दा मामला है----- कुछ ते करो जतन----- ,

दिल दा मामला है , दिल दा मामला है
कुछ ते करो जतन ,
तौबा खुदा दे वास्ते, कुछ ते करो जतन ----
दिल दा मामला है ,
दिल ---दा ------है।

युवा दिलों की धड़कन , गुरदास मान द्वारा गाया ये रोमांटिक गाना हम बरसों से सुनते रहे हैं

लेकिन आज हम दिल के उस चैंबर की बात नहीं कर रहे, जिसमे रोमांस रहता है। बल्कि उस चैंबर की बात करेंगे जिससे सांस चलती रहती है, जिंदगी चलती रहती है।

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं लेफ्ट वेंट्रिकल की, दिल का वो चैंबर जो सारे शरीर को रक्त प्रवाह द्वारा शक्ति प्रदान करता है। लेकिन ज़रा सोचिये यदि शक्ति दाता ही शक्ति विहीन हो जाये तो क्या होगा।

तो हार्ट अटैक होगा यानि हृदयाघात

वही हार्ट अटैक जिसके बारे में कुछ दिन पहले डॉ अरविन्द मिश्रा ने लिखा था ---

वेटिंग लिस्ट वाले बैठे हैं ,तत्काल सेवा वाले चले जा रहे ....


आइये देखते हैं , हार्ट अटैक होता क्यों है ---

पूरे शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले को भी ऊर्जा की ज़रुरत होती है। और हार्ट को यह ऊर्जा मिलती है रक्त प्रवाह से , जो मिलता है दो धमनियों द्वारा जिन्हें कहते हैं ---कोरोनरी आर्टरीज

लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी जो हृदय के सामने और बाएं हिस्से यानि लेफ्ट वेंट्रिकल को रक्त सप्लाई करती है और राईट कोरोनरी जो दायें वेंट्रिकल को।

अब यदि इन आर्टरीज में कहीं रुकावट आ जाये तो हृदय के उस हिस्से में रक्त संचार बंद हो जाता है और हृदय की मांस पेशियाँ दम तोड़ देती हैं यानि वो हिस्सा बेकार हो जाता है। इसी को हार्ट अटैक कहते हैं।

हार्ट अटैक का मुख्य कारण लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी में रुकावट होना है, जिससे लेफ्ट वेंट्रिकल का एक हिस्सा काम करना बंद कर देता है

क्यों होती है रुकावट :

हमारे रक्त में मौजूद वसा जो कोलेस्ट्रोल के रूप में होता है , धीरे धीरे हृदय की धमनियों में जमता रहता है। यूँ तो कोलेस्ट्रोल शरीर की कई गति विधियों के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी अत्यधिक मात्रा हानिकारक होती है।
कोलेस्ट्रोल का धमनियों में जमना --पलौक कहलाता है।

जब यह पलौक धमनी को इतना बंध कर देता है की मसल्स की ओक्सिजन डिमांड पूरी नहीं हो पाती तो मसल्स चीखना शुरू कर देती हैं यानि छाती में दर्द शुरू हो जाता है , जिसे एंजाइना कहते हैं।

अक्सर एंजाइना तब होता है जब हम कोई भारी काम करते हैं जैसे ---सीढियाँ चढ़ना, दौड़ना, साइकल चलाना आदि।
यदि धमनी में ७० % रुकावट हो तो भारी काम करने पर दर्द होता है। लेकिन ९० % रुकावट होने पर बिना भारी काम के दर्द होने होने लगता है। ऐसी स्थिति में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी ज़रूरी हो जाती है।

हार्ट अटैक के लक्षण :

सीने में दर्द, बायीं तरफ ,विशेषकर भारी काम करने पर। यह दर्द बाएं कंधे, बाजू या ज़बड़े में भी हो सकता है।
साथ में पसीना आना
घबराहट और बेचैनी
दिल में धड़कन महसूस होना

ये सभी लक्षण हैं एंजाइना के। ऐसे में यदि धमनी में रुकावट १००% हो जाये तो हार्ट अटैक हो जाता है

ऐसा कब हो सकता है :

अत्यधिक ठण्ड, तनाव, डर , अत्यधिक ख़ुशी या ग़म , इस तरह के हालातों में धमनी में अचानक स्पाज्म हो सकता है जिसकी वज़ह से पूर्ण रुकावट हो जाती है।
इसके अलावा पलौक का टूटना, या कहीं से ब्लड क्लौट आकर वहां फंसने से भी अटैक हो सकता है।

आइये देखते हैं की इस आकस्मिक विपदा से कैसे बचा जाये ---ज़रा इस चित्र को देखिये :


यह फ्लो डायग्राम साभार प्रस्तुत किया है, प्रोफ़ेसर श्रीधर द्विवेदी जी ने , विभागाध्यक्ष --चिकित्सा विभाग एवम अध्यक्ष प्रिवेंटिव कार्डियोलोजी क्लिनिक, जी टी बी हॉस्पिटल, दिल्ली।

घ्यान रखिये की :

हार्ट अटैक आजकल २० से ३० साल की उम्र के युवकों को भी होने लगा है
एथिरोस्क्लेरोसिस ( धमनियों में कोलेस्ट्रोल का जमना ) बचपन से ही शुरू हो जाता हैइसलिए बच्चों को भी जंक फूड्स से बचना चाहिए
महिलाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं
अक्रिय जीवन शैली आदमी की दुश्मन और सक्रियता लाभकारी साबित होती है
सात्विक जीवन दीर्घकालीन सुखमय जीवन की कुंजी है

खुदा दे वास्ते सही, अपने वास्ते और अपनों के वास्ते, भाई ज़रा दिल का ध्यान रखिये

यह लेख आपको कैसा लगा , बताइयेगा ज़रूर।

Thursday, December 3, 2009

दिल दा मामला है----- कुछ ते करो जतन----- ,

दिल दा मामला है , दिल दा मामला है
कुछ ते करो जतन ,
तौबा खुदा दे वास्ते, कुछ ते करो जतन ----
दिल दा मामला है ,
दिल ---दा ------है।

युवा दिलों की धड़कन , गुरदास मान द्वारा गाया ये रोमांटिक गाना हम बरसों से सुनते रहे हैं

लेकिन आज हम दिल के उस चैंबर की बात नहीं कर रहे, जिसमे रोमांस रहता है। बल्कि उस चैंबर की बात करेंगे जिससे सांस चलती रहती है, जिंदगी चलती रहती है।

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं लेफ्ट वेंट्रिकल की, दिल का वो चैंबर जो सारे शरीर को रक्त प्रवाह द्वारा शक्ति प्रदान करता है। लेकिन ज़रा सोचिये यदि शक्ति दाता ही शक्ति विहीन हो जाये तो क्या होगा।

तो हार्ट अटैक होगा यानि हृदयाघात

वही हार्ट अटैक जिसके बारे में कुछ दिन पहले डॉ अरविन्द मिश्रा ने लिखा था ---

वेटिंग लिस्ट वाले बैठे हैं ,तत्काल सेवा वाले चले जा रहे ....


आइये देखते हैं , हार्ट अटैक होता क्यों है ---

पूरे शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले को भी ऊर्जा की ज़रुरत होती है। और हार्ट को यह ऊर्जा मिलती है रक्त प्रवाह से , जो मिलता है दो धमनियों द्वारा जिन्हें कहते हैं ---कोरोनरी आर्टरीज

लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी जो हृदय के सामने और बाएं हिस्से यानि लेफ्ट वेंट्रिकल को रक्त सप्लाई करती है और राईट कोरोनरी जो दायें वेंट्रिकल को।

अब यदि इन आर्टरीज में कहीं रुकावट आ जाये तो हृदय के उस हिस्से में रक्त संचार बंद हो जाता है और हृदय की मांस पेशियाँ दम तोड़ देती हैं यानि वो हिस्सा बेकार हो जाता है। इसी को हार्ट अटैक कहते हैं।

हार्ट अटैक का मुख्य कारण लेफ्ट कोरोनरी आर्टरी में रुकावट होना है, जिससे लेफ्ट वेंट्रिकल का एक हिस्सा काम करना बंद कर देता है

क्यों होती है रुकावट :

हमारे रक्त में मौजूद वसा जो कोलेस्ट्रोल के रूप में होता है , धीरे धीरे हृदय की धमनियों में जमता रहता है। यूँ तो कोलेस्ट्रोल शरीर की कई गति विधियों के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी अत्यधिक मात्रा हानिकारक होती है।
कोलेस्ट्रोल का धमनियों में जमना --पलौक कहलाता है।

जब यह पलौक धमनी को इतना बंध कर देता है की मसल्स की ओक्सिजन डिमांड पूरी नहीं हो पाती तो मसल्स चीखना शुरू कर देती हैं यानि छाती में दर्द शुरू हो जाता है , जिसे एंजाइना कहते हैं।

अक्सर एंजाइना तब होता है जब हम कोई भारी काम करते हैं जैसे ---सीढियाँ चढ़ना, दौड़ना, साइकल चलाना आदि।
यदि धमनी में ७० % रुकावट हो तो भारी काम करने पर दर्द होता है। लेकिन ९० % रुकावट होने पर बिना भारी काम के दर्द होने होने लगता है। ऐसी स्थिति में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी ज़रूरी हो जाती है।

हार्ट अटैक के लक्षण :

सीने में दर्द, बायीं तरफ ,विशेषकर भारी काम करने पर। यह दर्द बाएं कंधे, बाजू या ज़बड़े में भी हो सकता है।
साथ में पसीना आना
घबराहट और बेचैनी
दिल में धड़कन महसूस होना

ये सभी लक्षण हैं एंजाइना के। ऐसे में यदि धमनी में रुकावट १००% हो जाये तो हार्ट अटैक हो जाता है

ऐसा कब हो सकता है :

अत्यधिक ठण्ड, तनाव, डर , अत्यधिक ख़ुशी या ग़म , इस तरह के हालातों में धमनी में अचानक स्पाज्म हो सकता है जिसकी वज़ह से पूर्ण रुकावट हो जाती है।
इसके अलावा पलौक का टूटना, या कहीं से ब्लड क्लौट आकर वहां फंसने से भी अटैक हो सकता है।

आइये देखते हैं की इस आकस्मिक विपदा से कैसे बचा जाये ---ज़रा इस चित्र को देखिये :


यह फ्लो डायग्राम साभार प्रस्तुत किया है, प्रोफ़ेसर श्रीधर द्विवेदी जी ने , विभागाध्यक्ष --चिकित्सा विभाग एवम अध्यक्ष प्रिवेंटिव कार्डियोलोजी क्लिनिक, जी टी बी हॉस्पिटल, दिल्ली।

घ्यान रखिये की :

हार्ट अटैक आजकल २० से ३० साल की उम्र के युवकों को भी होने लगा है
एथिरोस्क्लेरोसिस ( धमनियों में कोलेस्ट्रोल का जमना ) बचपन से ही शुरू हो जाता हैइसलिए बच्चों को भी जंक फूड्स से बचना चाहिए
महिलाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं
अक्रिय जीवन शैली आदमी की दुश्मन और सक्रियता लाभकारी साबित होती है
सात्विक जीवन दीर्घकालीन सुखमय जीवन की कुंजी है

खुदा दे वास्ते सही, अपने वास्ते और अपनों के वास्ते, भाई ज़रा दिल का ध्यान रखिये

यह लेख आपको कैसा लगा , बताइयेगा ज़रूर।