Sunday, October 31, 2010

हवा में लटका मनुष्य, और हाथ से आती फूलों की खुशबू --यह क्या है ?

मनुष्य सदा ही जादू और चमत्कारों से अचंभित होता रहा है । मेरा मानना है कि दुनिया में चमत्कार कोई नहीं होता । किसी भी क्रिया का जब तक हम राज़ नहीं जान लेते तभी तक वह रहस्य बना रह सकता है । एक बार राज़ खुलने के बाद सारा पर्दाफाश हो जाता है ।

लेकिन इसी रहस्य का फायदा कुछ लोग बड़ी खूबी से उठा लेते हैं

चंद रोज़ पहले टी वी पर न्यूज में ऐसा ही एक चमत्कार दिखाया जा रहा था । जर्मनी के एक महाशय एक हाथ के सहारे दीवार पर हवा में लटक कर तमाशा दिखा रहे थे । कुछ इस तरह --

देखकर वास्तव में बड़ी हैरानी हो रही थी । वह व्यक्ति साफ़ हवा में लटका हुआ नज़र आ रहा था । लेकिन यकीन नहीं हो रहा था । हम जैसों को हो भी नहीं सकता । ज़रूर कोई राज़ होगा । जानने की उत्सुकता थी । इसलिए पूरा एक घंटे का कार्यक्रम देखना पड़ा ।

खैर फिर दिखाया गया कि किस तरह नकली साज़ सामान के साथ पूरी तैयारियां करके पूरा ताम झाम किया गया था । यहाँ सब कुछ नकली था । लेकिन देखने में हैरान कर देने वाला करतब।

चिली के दो भाई भी यही करतब दिखाते हैं ।

कार्यक्रम में मौजूद मेहमान जादूगरों ने बताया कि जादू वास्तव में एक कला है जिसमे विज्ञानं , गणित , इंजीनियरिंग , योग और साधना का प्रयोग किया जाता है ।

मूल रूप से जादू जादूगर के क्रिया कलापों का कमाल होता है

इसे आँखों का धोखा भी कहा जा सकता है

अक्सर जादूगर आपको अपनी बातों में इतना उलझा लेते हैं कि उनके हाथ क्या कर रहे हैं , उससे आपका ध्यान हट जाता है

मंच पर दिखाया गया जादू वास्तव में यंत्रों और मशीनों का खेल है

कुछ लोग इसे सम्मोहन भी कहते हैं । हालाँकि मेडिकल सम्मोहन ( हिप्नोटिज्म) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे एक स्पेशलिस्ट ही कर सकता है और इसमें सब्जेक्ट का सहयोग आवश्यक होता है ।

निश्चित ही , किसी जादूगर द्वारा सम्मोहन नहीं किया जा सकता

लेकिन एक घटना ऐसी है जिसका राज़ मैं आज तक नहीं जान सका ।

कुछ साल पहले हम मनाली में स्टर्लिंग रिजॉर्ट्स में छुट्टियाँ मना रहे थे । एक दिन शाम को एक्टिविटीज डिपार्टमेंट ने एक जादूगर का शो कराया । यूँ तो जादूगर कोई सड़क छाप सा ही दिख रहा था । उसने करतब भी ऐसे ही छोटे मोटे दिखाए । लेकिन अंत में एक करतब देखकर मैं आज तक हैरान हूँ ।

उसने वहां मौजूद सभी लोगों को कहा --आप एक फूल का ध्यान कीजिये और अपने साथ बैठे व्यक्ति के हाथ पर अपना हाथ उल्टा रखकर रगड़िये ।
हमने भी ऐसा ही किया ।
फिर उसने कहा --अब अपने हाथ को सूंघिए ।

और यह क्या --अपने हाथ में से उसी फूल की खुशबू रही थी जो हमने सोचा था

वह खुशबू काफी देर तक आती रही ।
हम तो पूरे तैयार होकर बैठे थे कि कहीं जादूगर की चाल को पकड़ सकें । लेकिन इस वाकये ने तो हमें हैरत में डाल दिया ।
यह राज़ तो हम आज तक नहीं जान सके

यह कैसी मनोवैज्ञानिक चाल थी ?

42 comments:

  1. शायाद AXN चैनल है या कोई और, उनमे एक कार्यक्रम आता है जिसमे इस तरह के जादू का पर्दाफाश लिया जाता है. बाकी जादू अपने आप में एक हुनर है और हाथों की सफाई भी एक कला के रूप में देखी जा सकती है. यूँ तो देखा जाए तो या पूरी दुनिया ही अपने आप में चमत्कार है ... बाकी सब मानने न मानने की बात है ....

    रोचक पोस्ट, लिखते रहिये ....

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  2. ये मायुआ है ... मनोविज्ञान है .. जादू है या क्या है .... डाक्टर साहब जब आप नहीं समझ पाए जो मनोविज्ञान समझ सकते हैं तो हमारे जैसे क्या समझेंगे ...

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  3. जादू चाहे कुछ भी हो लेकिन व्‍यक्ति को हैरत में जरूर डाल देते हैं। बस आनन्‍द लिजिए और ज्‍यादा खोजबीन में आनन्‍द मत समाप्‍त कीजिए।

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  4. डा. साहिब, सन '५० के लगभग हमारे स्कूल में भी यही खुशबू से सम्बंधित जादू दिखाया गया था...
    मेरी नज़र में तो सबसे बड़ा चमत्कार मानस पटल पर चित्रों के रूप में स्वप्न का दिखना है (जबकि सिनेमा की उत्पत्ति तो हाल ही मैं संभव हुई है), केवल मानव के ही नहीं अपितु 'तुच्छ प्राणियों' में भी - और वो भी अनादि काल से,,, जबकि हम मानते हैं कि जीवों में उत्पत्ति 'समय' के साथ हुई है! क्या यह दर्शाता है कि चमत्कार दिखाने वाले जादूगरों का गुरु समय के परे है, यानी समय ही सबसे बड़ा चमत्कार है? और शायद तथाकथित कलियुग, अथवा कलयुग, में अन्य मशीन आदि का सहारा लिया जाना भी खेल अथवा लीला का ही भाग है? इत्यादि, इत्यादि...

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  5. रोचक घटना ...सब सम्मोहन की माया है ...

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  6. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (1/11/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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  7. सराहनीय पोस्ट।...रोचक तरीके से प्रस्तुत किया है आपने...धन्यवाद।

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  8. आप ही थोड़ा और शोध करके बताओ..हम तो नहीं समझ पा रहे कि वो क्या था.

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  9. मनुष्य की दिमागी कमजोरियों का लाभ उठाते हैं जादूगर ...
    अब घूमते पंखे को ही लीजिये इसके सभी ब्लेड अलग अलग हैं मगर स्पीड पकड़ते ही सम मिलते हुए दीखते हैं .
    दिमाग बहुत बारीक प्रेक्षण नहीं कर पाता-जादूगर इसे जानते हैं ..और वे ध्यान विकर्षण में भी माहिर हैं ..उनके हाथ कुछ और कर रहे होते हैं और उसी समय वे आपको दिखाते कुछ और होते हैं ...और सहसा ही माजरा बदल जाता है ..
    सुगंध भी जानी पहचानी होती है और मानव मन बहुत कम आप्शन रखता है इत्रों की
    जायदातर लोग गुलाब सोचते हैं ,फिर खस ,चमेली, बेला बस
    आपने भी कमल का इतर थोड़े ही सोचा होगा !

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  10. मज़ाल जी , यह न्यूज २४ चैनल दिखा रहा था ।
    समीर जी और अरविन्द जी , मैंने बहुत कोशिश की कि दिमाग को काबू में रखकर प्रभावित न होने दिया जाये । लेकिन एक अदने से जादूगर ने फेल कर दिया ।
    खैर किसी psychiatrist से ही पूछते हैं इसका राज़ ।

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  11. नवम्बर,2000 में पीसी सरकार जूनियर ने आगरा तमाम पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की मौजूदगी में ताजमहल को गायब कर दिखाया था और सबकी छीछालेदारी करने वाले तमाम अखबारों ने अगले दिन इसे मुखपृष्ठ पर छापा था। मुझे यह तो नहीं पता कि वह कैसे संभव हुआ,केवल इतना कहना चाहता हूँ कि असली जादू और चमत्कार वह है जो आध्यात्मिकता में घटता है।

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  12. bahut badhiyaa.
    (waise, mujhe bhi kuch soojh nahi rahaa hain.)
    thanks.
    WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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  13. 'प्रकृति' के पिटारे में इतने जादू हैं कि उन सबको समझने के लिए एक जीवन काफी नहीं है :) एक छोटा सा चाँद भी कभी-कभी महाकाय सूर्य के आगे आ पृथ्वी पर कुछ देर के लिए संध्या के आगमन के जैसे संकेत दे पक्षियों को तो भटका ही देता है ('महाभारत' में भी कुछ ऐसे ही दृश्य का वर्णन जयद्रथ के अर्जुन के हाथों मारा जाना दर्शाता है, जब 'कृष्ण' की माया से सूर्यास्त समझ वो खुले स्थान में आ गया, अज्ञानता वश?)...

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  14. स्वामी विवेकानंद के अनुसार हम जैसा सोचते है वैसा ही बन जाते हैं .इसी उक्ति का सहारा लेकर जादूगर आदि व्यक्ति की सोच को नियंत्रित (मिस्मेरिजम )के जरिये करते हैं .जो जिस फूल की सुगंध आदि के बारे में सोच रहा होगा उसे वैसा ही एहसास हुआ होगा .

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  15. स्वामी विवेकानंद के अनुसार हम जैसा सोचते है वैसा ही बन जाते हैं .इसी उक्ति का सहारा लेकर जादूगर आदि व्यक्ति की सोच को नियंत्रित (मिस्मेरिजम )के जरिये करते हैं .जो जिस फूल की सुगंध आदि के बारे में सोच रहा होगा उसे वैसा ही एहसास हुआ होगा .

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  16. वाकई कई दफे बहुत वारीकी से देखने के वाद भी कोई चीज समझ में नहीं आती तो उसे जादू, सम्मोहन, हाथ की सफाई, टिृक फोटोग्राफी कह दिया जाता है लेकिन यह खुशबू वाली बात तो रहस्य ही है हां अलवत्ता यह कहा जासकता है कि चूंकि फूल के वारे में सोचना भी आपका ही था और खुशवू भी आप ही ले रहे थे । उसी वक्त आप किसी और को हाथ सुघांते और पूछते कि यह काहे की खुशवू है। क्योंकि उसको तो पता नहीं था कि आपने किस फूल के वाबत सोचा है।

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  17. bhai ji ram-ram........ye hindustaan hai....yahan har karishma (kapoor nahi) aasan hai..

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  18. इसी को तो कहते हैं जादूगरी .... या फिर कुछ लोग बाबा का चमत्कार कहेंगे :)

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  19. बृजमोहन जी , आपकी बात सही है । यदि किसी और का हाथ सूंघते या सुंघाते तो शायद बता नहीं पाते ।
    लेकिन हमने तो कोशिश की थी कि हम धोखे में न आयें । फिर भी ऐसा हो नहीं सका ।

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  20. सच मे जादू एक विद्या है जिसे आम आदमी नही समझ सकता सम्मोहन दुआरा भी जादू दिखाया जाता है। कुछ तो है---- दीपावली की शुभकामनायें।

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  21. हर व्यक्ति में कुछ न कुछ विशेष गुण 'प्राकृतिक' तौर पर पाए जाते हैं,,, जिसके पीछे मानव मस्तिष्क में बहुत कुछ छुपा होना है, और जिसे समझ पाना कठिन है (इस लिए आप डॉक्टर हो, में इन्जेनिअर, और वो जादूगर था) ...उदाहरण के तौर पर हमारे पिताजी बताते थे कि कैसे उनके बचपन के समय हमारे पहाड़ी कस्बे में थोड़े से लोग होते थे, और सभी एक दूसरे को जानते थे,,,उन दिनों डाकघर में एक डाकिया होता था जो शाम तक बस से आई डाक सौर्ट कर रख देता था और अगले दिन उन्हें बांटता था... उसे नींद में चलने की 'बीमारी' थी (सोम्नैम्बुलिस्म) जिस कारण कभी-कभी ऐसा होता था कि वो नींद में ही रात को डाक बाँट आता था और अगले दिन डाकघर में पहुँच परेशान हो जाता था कि सौर्ट की हुई चिट्ठियाँ कहाँ गयीं? डाक अधिक नहीं होती थी और उसे जुबानी याद होता था इस कारण वो फिर घर-घर पता करने जाता था कि उनको पत्र मिले या नहीं?! [और हमारे बड़े ताऊजी को नींद नहीं आने की 'बीमारी' (इन्सौम्निया) थी, वो रात को बत्ती बुझा ३-४ घंटे ऐसे ही लेटे रहते थे जब अन्य परिवार के सदस्य गहरी नींद में सोये होते थे,,, और मेरा साढ़े तीन वर्षीय नाती अधिकतर सभी कार के मॉडेल के नाम जनता है और उसे एक नज़र ही देख सही बता देता है! ]...

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  22. आदरणीय दराल साहब,

    मैंने इस बारे में ऐसे ही छोटी मोटी खोज की थी.... अधिकतर स्टेज शोज जैसी जगहों पर जब ये चीजें दिखाई जाती हैं तो उस जगह मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्टर की बनावट के सहयोग से गायब होने आदि के करतब दिखलाये जाते हैं [आमतौर पर ]
    जहां तक सम्मोहन की बात है प्रत्यक्ष रूप में तो नहीं कहूँगा पर किसी ना कसी रूप में ये भी जादूगरी में शामिल तो है [इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता ]

    एक नमक में अगर कहा जाये की ये खाने का टेस्ट बढ़ने वाला नमक है, इसमें कुछ ख़ास है और उसके सेम्पल बाँट दिए जाएँ तो मुझे लगता है आधे से ज्यादा लोग उस नमक को अन्य नमक से अलग ही बताएँगे
    [अनुभव से कह रहा हूँ ]

    खैर .. एक पोस्ट बनाई है दीपावली पर .. एक बार पढ़ लीजियेगा .. आपको पसंद आएगी [पहले से जानता हूँ ]
    और हाँ .. आपको और आपके सभी पाठकों को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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  23. दीपावली की शुभकामनायें।

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  24. सही कहा जे सी जी । मस्तिष्क को समझ पाना सचमुच बड़ा कठिन है । हम तो आज तक नहीं समझ पाए ।
    गौरव इसे suggestion कहते हैं । इससे आपउसी में विश्वास करने लगते हैं जो आपके दिमाग में बिठाया गया है । कहीं न कहीं जादूगर भी इसी विद्या का इस्तेमाल करते हैं ।
    रजनीश जी , आपको भी दीवाली की शुभकामनायें ।

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  25. लीजिये आपने याद किया और हम हाजिर हैं .....
    जी हाँ ये जादूगरी हाथ की सफाई ही है ...कुछ वैज्ञानिक सम्मिश्रणों से भी ये चमत्कार दिखाए जाते हैं जैसे सिक्के को मुट्ठी में बंद करने से भभूत पैदा हो जाना ...जिसमें सिक्के के नीचे कोई सम्मिश्रण लगा होता है जो हथेली का गर्म स्पर्श पा भभूत जैसा कुछ पैदा करदेता है .....
    आपके मामले में हो सकता है आप जहां बैठे हों कुर्सी पर या बेंच पर जहां आप हाथ रखते हों वहाँ पहले से ही कोई इत्र लगा हो ....जैसा कि अरविन्द जी ने कहा आपने भी कमल का फूल तो न सोचा होगा ...गुलाब , चमेली जैसा ही कुछ सोचा होगा ...मगर खुशबू थी ...अधिकतर लोग पिछलग्गू होते हैं एक ने कहा 'हाँ' तो सभी वही कहने लग पड़ते हैं ....जब मूर्तियों ने दूध पीना शुरू किया तो जिनकी नहीं पीती थी वे भी मानने को तैयार ही नहीं थे कि दूध नीचे गिर रहा है ....मैंने उन्हें दिखाने की कोशिश भी की कि दूध तो नीचे बह गया है पर उन्होंने मुझे नास्तिक समझ वहाँ से हटा दिया ...ये सारी अंधभक्ति , अंधश्रद्धा ,अंधविश्वाश की बाते हैं ....!!

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  26. .

    आश्चर्यजनक जादू। निश्चय ही मनोवैज्ञानिक प्रभाव है।

    .

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  27. हरकीरत जी , मूर्तियों का दूध पीना तो हमें भी मास हिस्टीरिया ही लगा था । भला मूर्ति भी कहीं दूध पी सकती है ।
    लेकिन ये खुशबू वाली बात से तो लगता है कि हम भी सम्मोहित ही हो गए । न चाहते हुए भी ।

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  28. डा. साहिब, मुझे वो किस्सा नहीं भूलता जब कुछेक दशक पहले मेरे पड़ोस में रहने वाली एक ३-४ वर्षीया लड़की एक दिन मुझे घर से बाहर निकल बाज़ार जाते समय सीढियों पर ही मिली, जब वो धोबी के पास कपडे ले जा रही थी और शायद किताब पढ़ कर आ रही थी, मुझे देखते ही बोली "श से शलगम"...मैंने यह सोचते हुए कि उसे अभी यह शब्द नहीं मालूम होगा अपने मन ही मन में कहा "ब से बलगम",,,और मुझे वो चमत्कार ही लगा जब उसने कहा "ब से तो बत्तख होता है!" मैं सोच में पड़ गया कि वो कमाल मेरे मस्तिष्क का था या उसके? क्या बिन बोले ही कोई आपके मन में विचार डाल सकता है, आदि?

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  29. हाँ .. हरकीरत जी की बात में दम है , वहां मौजूद चीजों में ही गड़बड़ होती है इस बात का तो यकीन था
    पर इस तरह से नहीं सोचा था

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  30. दराल सर,
    अपुन तो इस जादू के मुरीद हैं-

    मेरे ख्वाबों की तस्वीर है तू,
    बेखबर मेरी तकदीर है तू,
    तू किसी और की हो ना जाना,
    कुछ भी कर जाऊंगा मैं दीवाना,
    तू हां कर या ना कर,
    जादू तेरी नज़र....

    जय हिंद...

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  31. आप सब को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
    हम आप सब के मानसिक -शारीरिक स्वास्थ्य की खुशहाली की कामना करते हैं.

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  32. सभी को दीपावली की शुभ कामनाएं!

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  33. " अपने साथ बैठे व्यक्ति के हाथ पर अपना हाथ उल्टा रखकर रगड़िये @ लो सारा राज इसी मे तो है । अगर बिना हाथ रगडे या कहीं टच किये बगैर खुशबू पैदा की जाती तो कुछ रहस्य जैसी बात भी होती ।
    ताजमहल गायब करने और मंच से हाथी गायब करने और रेल गायब करने जैसे खेलो मे मिरर कर्टेन वाला जादू होता है । इन सभी जादू के डिटेल्स आपको अन्यत्र मिल जायेंगे ।

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  34. आज दिनांक 8 नवम्‍बर 2010 के दैनिक जनसत्‍ता में संपादकीय पेज 6 पर समांतर स्‍तंभ में आपकी यह पोस्‍ट कला का कमाल शीर्षक से प्रकाशित हुई है, बधाई। स्‍कैनबिम्‍ब देखने के लिए जनसत्‍ता पर क्लिक कर सकते हैं। कोई कठिनाई आने पर मुझसे संपर्क कर लें।
    गगनांचल में देखिए बलॉग की दुनिया का नक्‍शा : नक्‍शे में आपके नैननक्‍श
    हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग खुशियों का फैलाव है

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  35. शुक्रिया अविनाश जी । देख लिया है । ज्यों का त्यों छाप दिया है ।
    जनसत्ता का आभार इस योग्य समझने के लिए ।
    और आपका आभार बताने के लिए ।

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  36. अचानक इस विषय पर मीडिया में काफी दिलचस्पी पैदा हो गई है । यह दिलचस्पी भी दिलचस्प है ।

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  37. डा साहिब, मेरे घर में कई वर्ष पहले एक सरदारजी अपने कुछेक चमचों के साथ आये जिन्होंने मुझे कहा कि सरदारजी के ऊपर माता आती है! और मुझे एक रंग और एक फूल सोचने के लिए बोला,,, और मैंने सरदारजी को कागज़ के टुकड़ों पर कुछ लिखते देखा... उनको पहले गंभीरता पूर्वक न ले मैंने पहले तुरंत गोभी का फूल सोचा! किन्तु फिर मुझे लगा यह मज़ाक सही न होगा और कुछ सोचने के बाद रजनी गंधा फूल का चुनाव किया,,,और अब उसने कागज़ पर सही फूल का नाम और रंग लिखे दिखा दिए!
    अपनी टिप्पणी में छोटी बच्ची के माध्यम से घटित वृत्तांत के पश्चात मैंने सोचा कि मेरे फूल का नाम बदलने में सरदारजी का हाथ हो सकता है! (योगी क्या-क्या करने में समर्थ हैं यह मैंने योगानंद की किताब में भी पहले पढ़ा हुआ था)...

    उपरोक्त पृष्ठभूमि के सन्दर्भ में, संभव है कि उस जादूगर ने कुछ हद तक अपने विचार एक स्थान विशेष में एकत्रित जनता के मन में डालना सीख लिया हो और कुर्सियों के हैंडल में पहले ही कोई रसायन लगा दिया हो,,,किन्तु आपके विवरण से यह खुलासा नहीं होता कि क्या उपस्थित जनता ने एक ही खुशबू सोची थी? या भिन्न-भिन्न? जब एक ही खुशबू हो तो यह करना सरल होता!

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  38. आज बड़े दिन बाद आया। पिछली कुछ पोस्टें भी पड़ीं। चित्रकथा पर आपने काफी अच्छे चित्र लगाए हैं। तकरीबन रोज गुजरता हूं वहां से। रुक कर देखने का कभी समय नहीं मिला, या यूं कहें कि रुके ही नहीं कभी। जब से पार्क बन रहा था तब से बाहर से ही सोचता रहा की जाउंगा खैर कोई बात नहीं। इतने पार्क हैं दिल्ली में कि पूछिए नहीं। चटपटी अंदाज में बीमारियों के बारे में बताया काफी अच्छा लगा। दीवाली की काफी देर से बधाई दराल सर।

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