Wednesday, November 3, 2010

दीवाली और आज के रावण के दस रूप ---

एक बार फिर दीवाली पास आ गई है । वातावरण में पर्व का उत्साह दिखाई दे रहा है । लेकिन साथ ही जगह जगह पुलिस के बैरिकेड इस बात का अहसास दिला रहे हैं कि पांच साल पहले जो हादसा हुआ था दीवाली पर , वह फिर न हो जाए । उधर दिल्ली की मुख्य मंत्री महोदया ने फिर दिल्ली वालों से अपील की है कि दीवाली बिना पटाखों के मनाएं, ताकि इससे होने वाले शोर और प्रदूषण से बचा जा सके ।

इस अवसर पर लिखी एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ ।

रावण वध कर विजयी भव , जब श्री राम अयोध्या आए थे ,
अधर्म पर धर्म की जीत पर, तब सबने घी के दीप जलाये थे

दीवाली का पर्व अब हो गया है धुआं धुआं ,
खोये का स्वाद भी खो गया है जाने कहाँ ,
नहीं लगती अब पटाखों की आवाज़ मधुर
जब से धमाकों में घुली है, चीख पुकार यहाँ

अब बदल गया है पर्व ये , दीवाली का पावन ,
तब कण कण में थे राम , अब जन जन में है रावण

और कौन हैं ये रावण ?

काम, क्रोध, मद , लोभ, में डूबी गहन आबादी ,
महंगाई , प्रदूषण और भ्रष्टाचार की बर्बादी ,
मासूमों का खून बहाते आतंकवादी ,
धर्म , प्रान्त और जात पात पर विष पिलाते अवसरवादी

पावन मात्रभूमि को जिसने किया कुरूप ,
यही हैं वो आज के रावण के दस रूप

किन्तु रावण भी हम हैं , और हमीं हैं राम ,
जो अंतररावण को मारे , वही कहलाए श्री राम

आइये आज यह संकल्प लें कि हम इस वर्ष भी दीवाली बिना पटाखों के मनाएंगे ताकि अपना शहर ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचा रहे

ताकि अस्थमा और दिल के रोगी सकून से रह सकें और पूर्णतया स्वस्थ लोग भी स्वस्थ रह सकें


आप सब को दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें



47 comments:

  1. किन्तु रावण भी हम हैं , और हमीं हैं राम ,
    जो अंतररावण को मारे , वही कहलाए श्री राम ।
    सत्य वचन
    बहुत ही बढ़िया ,रचना है...

    आपकी इस अपील में शामिल हैं हम भी..
    आपको भी दीपावली की शुभकामनाएं

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  2. आदरणीय दराल साहब,

    धनतेरस की शुभकामनाएं आपको

    "शुभ दीपावली"

    और अब आपकी इस रचना की बात

    पूरा सच आसानी से बयान कर दिया आपने बेहद सहजता और सरलता से [आज ये ऐसी दूसरी रचना है जिसमें इतनी आसानी से सच को शब्दों में बुना पाया है|पहली रचना दिगंबर नासवा जी की थी]

    रही पटाखों की बात

    हम पूरा प्रयास करेंगे की सभी को ये बात समझा सकें
    हर तरह के सन्दर्भ [धार्मिक, अध्यात्मिक, वैज्ञानिक] इस बारे में तैयार कर लिए है

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  3. आपसे सहमत हूँ !

    आपको और आपके परिवार में सभी को धनतेरस और दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

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  4. नहीं लगती अब पटाखों की आवाज़ मधुर
    जब से धमाकों में घुली है, चीख पुकार यहाँ ।

    बहुत सही लिखा है ...पूरी रचना अच्छा सन्देश देती हुई ...

    दीपावली की शुभकामनायें

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  5. बहुत सुंदर और आशावादी... अबस रोशनी की यह रवायत चलती रहे

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  6. आपको और आपके परिवार को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

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  7. आइये आज यह संकल्प लें कि हम इस वर्ष भी दीवाली बिना पटाखों के मनाएंगे ताकि अपना शहर ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचा रहे ।

    ताकि अस्थमा और दिल के रोगी सकून से रह सकें और पूर्णतया स्वस्थ लोग भी स्वस्थ रह सकें ।


    आप सब को दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें ।

    बहुत प्रासंगिक और ग्राह्य संदेश...।

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  8. संकल्प ले लिया भैया!
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामना!

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  9. सार्थक... प्रासंगिक संकल्प की बात.....

    आपको भी दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें

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  10. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपको और आपके परिवार में सभी को दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ! !

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  11. बहुत सही!!




    सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

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  12. प्रेम से करना "गजानन-लक्ष्मी" आराधना।
    आज होनी चाहिए "माँ शारदे" की साधना।।
    --
    आप खुशियों से धरा को जगमगाएँ!
    दीप-उत्सव पर बहुत शुभ-कामनाएँ!!

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  13. हर कोई अंतर्मन में झांके, वहीं राम मिलेंगे और वहीं रावण...ज़रूरत बस अपने राम को हमेशा जगाए रखने की है, रावण का स्वयं ही वध होता रहेगा...

    दीपावली की बहुत बहुत बधाई...

    सीनियर दराल सर के जल्दी स्वस्थ होने की कामना...

    जय हिंद...

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  14. रावण के यह दस रुप ही मनुष्य के दुख का कारण बनते हैं जो इन पर विजय पा लेता है वह कालजयी हो जाता है और इतिहास में दर्ज हो कर अमर हो जाता है।

    सुंदर कविता है भाई साहब

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
    ढेर सारी बधाई।

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  15. बढ़िया रचना ! अपना रावन कोई नहीं देखना चाहता !
    शुभकामनायें

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  16. अच्छे और बुरे...दोनों तरह के व्यक्तित्व हमारे अंदर ही होते हैं...ये तो हमारे विवेक पर निर्भर करता है कि वो किसे बाहर आ...उभरने का मौक़ा देता है...
    बढ़िया...सीख देती रचना

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  17. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  18. आज के रावण की सटीक पहचान बताई है आपने ....दीवाली की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

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  19. बिलकुल सही लिखा है.....

    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  20. दिवाली का सन्देश शायद प्राचीन हिन्दुओं के सांकेतिक शब्दों में "तमसो मा ज्योतिर्गमय,,,आदि" समझा जा सकता है...यानि दीपावली को संकेत समझ ज्ञान के उजाले से अज्ञान के अँधेरे को दूर कर, अंततोगत्वा, निराकार ब्रह्म (अमृत, शिव) तक पहुंचना,,, त्रेता के पुरुषोत्तम राम समान सीता के साथ विवाह कर,,,जिनके माथे को हर अवस्था में ठंडा रखने के लिए सांकेतिक चाँद और गंगा है, उस अमृत गंगाधर शिव का धनुष तोड़, यानि पृथ्वी पर मानव रूप में सत्य-असत्य की माया को भेद,,, न कि रावण समान 'ज्ञानी', अथवा पढ़ा-लिखा, बन किन्तु माया में उलझे रह जीवन व्यतीत कर (त्रिशंकु समान 'न इधर के न उधर के')...

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  21. दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें।
    सुन्दर संदेश देती सार्थक रचना के लिये हार्दिक बधाई।

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  22. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

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  23. दीपावली पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं....

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  24. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें !

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  25. आज रावण तो हमारे चारो ओर खडे हे, अगर इन्हे मारना हे तो सब से पहले हमे राम बनाना होगा, बहुत सुंदर आरती, धन्यवाद
    आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामाएं

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  26. दीवाली पर दराल जी ओर परिवार को हार्दिक शुभकामनायें !!

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  27. सुन्दर सन्देश । आजकल हम पर्व केवल अपने मनोरंजन के लिये ही मनाते हैं पर्व की मूल भावना से तो कोसों दूर है। आपको सपरिवार दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें।

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  28. प्रदूषण मुक्त दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

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  29. समयानुकूल सार्थक पोस्ट!

    दीपावली के इस शुभ बेला में माता महालक्ष्मी आप पर कृपा करें और आपके सुख-समृद्धि-धन-धान्य-मान-सम्मान में वृद्धि प्रदान करें!

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  30. हम बदलेंगे युग बदलेगा!

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  31. आपको समस्त परिवार सहित
    दीपावली की बहुत बहुत हार्दिक शुभ-कामनाएं
    धन्यवाद
    संजय कुमार चौरसिया

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  32. आप को सपरिवार दीपावली मंगलमय एवं शुभ हो!
    मैं आपके -शारीरिक स्वास्थ्य तथा खुशहाली की कामना करता हूँ

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  33. दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें ।

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  34. दीपावली की असीम-अनन्त शुभकामनायें.

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  35. अनुभव और ज्ञान जो बांटे,वह सही मायनों में स्वयं प्रकाशित है। शुभकामनाएँ।

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  36. इस दीपावली के शुभ अवसर पर आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाये

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  37. बच्‍चे सवाल कर रहे हैं कि आपलोगों ने सब कर लिया और हमारी बारी आई तो रोक-टोक, उन्‍हें तो कुछ न कुछ समझा लिया, खुद को क्‍या समझाउं.

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  38. राहुल सिंह जी , यही कि जो गलती हम करते आये हैं , अपने बच्चों को नहीं करने देंगे ।
    वैसे आजकल बच्चे काफी समझदार हो गए हैं और वो मात पिता को समझाते हैं ।

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  39. काम, क्रोध, मद , लोभ, में डूबी गहन आबादी ,
    महंगाई , प्रदूषण और भ्रष्टाचार की बर्बादी ,
    मासूमों का खून बहाते आतंकवादी ,
    धर्म , प्रान्त और जात पात पर विष पिलाते अवसरवादी ।

    अभी अभी जितेन्द्र जौहर जी के ब्लॉग पे कुछ ऐसी ही रचना पढ़कर आई ....हमें अपने अन्दर के कलुष को मिटाना चाहिए ...और कलुष kya है ..? .काम, क्रोध, मद , लोभ यही न ....?

    आपकी post hamesha ek swasth soch deti है ....

    शुक्रिया दराल जी .....!!

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  40. शुक्रिया हरकीरत जी ।
    आज सही सोच की ही कमी है ।
    इत्तेफाक से जब तक आपकी टिप्पणी आती है , तब तक मेरी एक और पोस्ट तैयार हो चुकी होती है ।
    अब अगली पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देना मत भूलियेगा । और अग्रिम आभार ।

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  41. दराल जी,सही लिखा है.बधाई!

    दीवाली का पर्व अब हो गया है धुआं धुआं ,
    खोये का स्वाद भी खो गया है जाने कहाँ ,
    नहीं लगती अब पटाखों की आवाज़ मधुर
    जब से धमाकों में घुली है, चीख पुकार यहाँ ।

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  42. आपको एवं आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें!

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  43. आपकी पोस्ट मनोरंजक और ज्ञानवर्धक दोनों होती है..हर एक पोस्ट में आप कुछ ना कुछ जानकारी भरी, मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी बातों को प्रस्तुत करते है....आज भी बेहद उम्दा विचार लिए आपकी पोस्ट ..सार्थक ब्लॉगिंग के लिए बहुत बहुत बधाई..

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  44. Dr.Saheb,
    Aapki kavita aur vyakt vichaar sabke palan karne ke liye they;lekin shayad adhiktar logon ne sirf taareef hee ki hogi palan nahee hi kiya hoga.Hamne to keval 31 aahutiyon ka vishesh havan kiya,patakha to KROORTA kadyotak hai,hamare yahan koyee nahi istemal karta hai.
    Jagrookta bhare lekh ke liye DHANYWAD.

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  45. जो अंतर रावण को मारे , वही कहलाये श्रीराम ...
    सुन्दर !

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