अपने बड़ों का सम्मान करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा रही है। सम्मान करने के तरीके भी अनेक हैं ।
सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है , हाथ जोड़कर संबोधन करना जैसे --
नमस्ते , नमस्कार , गुड मोर्निंग , राम राम या जय राम जी की । साथ में यदि सम्बन्ध का विशेषण भी लगा दें जैसे --
दादाजी , पिताजी , चाचा जी , या फिर आंटी जी --तो सोने पे सुहागा हो जाता है ।
लेकिन एक और भी तरीका है --पैर छूना । बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करना न सिर्फ एक अच्छा आचरण माना जाता है बल्कि पारस्परिक पारिवारिक प्यार बनाये रखने में भी सहायक सिद्ध होता है ।
पैर छूने के भी अनेक तरीके हैं ।
आम तौर पर झुककर पैरों या जूतों को हाथ लगाकर सम्मान दिया जाता है । लेकिन बस थोडा सा झुककर हाथ नीचे ले जाकर भी यह रस्म पूरी हो जाती है । विशेष रूप से पंजाबी परिवारों में यह नज़ारा अक्सर देखा जाता है कि मुंडा ज़रा सा झुककर बोलता है --पैयाँ पैना । और हो गया काम । लेकिन यह भी न किया जाए तो बुजुर्ग अवश्य बुरा मान जाते हैं ।
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यह रिवाज़ हरियाणा में नहीं है । यानि वहां कोई किसी के पैर नहीं छूता । हालाँकि नमस्ते या राम राम कह कर सम्मान ज़रूर दिया जाता है। इस पर बुजुर्ग भी कहता है --
राम राम भाई ।लेकिन पुराने ज़माने में जब हम बच्चे थे , तब की बात याद आती है । उन दिनों में जब कोई नई नवेली दुल्हन आती तो घर की सभी बड़ी औरतों जैसे दादी , ताई , चाची आदि के पैर दबाकर आशीर्वाद प्राप्त करती ।
यहाँ गौर करने की बात यह है कि बहु पैर नहीं छूती थी बल्कि कई मिनट तक पैर दबाती थी जैसे मेसाज करते हैं । साथ ही बुजुर्ग महिला एक लम्बा सा आशीर्वाद देती यह कहकर --
सदा सुहागन रहो , दूधों नहाओ , पूतों फलो, और न जाने क्या क्या । यह आशीर्वाद हमें तो एक कविता सी लगती थी जिसे मैं बड़े शौक और तन्मयता से सुनता था । अक्सर महिलाएं हमारी हरकत पर हंसती भी , लेकिन हम कोई मौका नहीं छोड़ते ।
अब शायद ये रिवाजें वहां भी ख़त्म हो चुकी हैं । लेकिन अभी भी गाँव में बुजुर्ग महिलाएं सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद ज़रूर देती हैं । और सच मानिये , यह अनुभव मन को बहुत शांति प्रदान करता है । ठीक उसी तरह जैसे किसी धार्मिक समारोह में पंडित जी जब हमारे माथे पर टीका लगाते हैं तो एक परम आनंद की अनुभूति होती है ।
इसका कारण है माथे पर जहाँ टीका लगाया जाता है , वह हमारी चेतना का केंद्र बिंदु होता है । इसी बिंदु के पीछे मष्तिष्क में
पीनियल बॉडी नाम का एक छोटा सा अंग होता है । यह एक
एंडोकराइन ग्लैंड होती है जिससे
मेलाटोनिन नाम का हॉर्मोन उत्पन्न होता है । मेलाटोनिन का रोल मनुष्य में ज्यादा नहीं है लेकिन पशुओं में यह सिर्कार्दियन रिदम को कंट्रोल करता है जो प्रजनन से सम्बंधित होता है ।
पीनियल ग्लैंड हमारे मष्तिष्क के ठीक मध्य में ब्रेन के दोनों हिस्सों के बीच मौजूद होती है । यह ब्रेन का अकेला ही ऐसा हिस्सा है जो एक ही होता है जबकि बाकि सारे हिस्से डबल होते हैं ।
पीनियल बॉडी को थर्ड आई ( तीसरी आँख ) भी कहा जाता है । धार्मिक रूप से यह विश्वास माना जाता है कि हमारे शरीर में हमारी आत्मा का निवास पीनियल बॉडी में ही होता है । इसीलिए केरल के आयुर्वेदिक मेसाज में तेल की धार माथे के मध्य छोड़ी जाती है ।
मेडिटेशन करने के लिए भी हमें अपना ध्यान इसी बिंदु पर केन्द्रित करना होता है ।
पंडित लोग भी इसी बिंदु पर टीका लगाते हैं । महिलाएं भी बिंदी इसीलिए इसी बिंदु पर लगाती हैं !