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Tuesday, August 30, 2011

उसका ग़म देखा तो , मैं अपना ग़म भूल गया --




हेयर कटिंग सैलून की
आरामदेह कुर्सी पर
बैठा ,
मैं ईर्ष्या रहा था
बाजु में बैठे युवक की
लहलहाती ,
ज़ुल्फ़ों को देखकर ।

तभी
हमारा केश खज़ाना देख,
दूसरी ओर बैठे
एक हम उम्र के चेहरे पर ,
वही भाव उभर आए ।

उसका ग़म देखा तो ,
मैं अपना ग़म भूल गया ।

नोट : फोटो भाई राजेन्द्र स्वर्णकार ने संवार कर दी है .




Saturday, July 3, 2010

प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है ----

आजकल सचिन तेंदुलकर के बाल बहुत सुर्ख़ियों में हैंघुंघराले बालों को सीधा कराकर जैल से सैट कर, विश्व कप फुटबाल मैच देखते हुए ज़नाब किसी हॉलीवुड हीरो से कम नहीं लग रहे थेसुना है अब सब युवा उनकी हेयर स्टाइल की नक़ल कर रहे हैं

आदमी
के सर पर बाल --हों तो मुश्किल , हों तो और भी मुश्किल

यदि सर पर बाल हैं तो कटवाना भी पड़ेगा नहीं कटवाए तो आदि मानव से लगने लगेंगे अब कटवाने के लिए पहले मन पसंद नाई होना चाहिए फिर पसंद की स्टाइल होनी चाहिए अंत में नतीज़ा पसंद नहीं आया तो कुछ नहीं कर सकते सिवाय इसके कि अगली बार नाई बदल लें

बचपन में जब गाँव में रहते थे , दादाजी का खानदानी नाई --नत्थू नाई ही बाल काटता था लेकिन वो कौन सा फैशन के बाल काटता था पकड़ा , बैठाया और घुमा दी मशीन कच कच बाल कटाते समय अपनी तो हालत कुछ ऐसी होती थी ----

बस फर्क इतना था कि उसके हाथ में कैंची नहीं , कच कच वाली मशीन होती थी जो देखते देखते गंजा कर देती थी

वक्त गुज़रा , हमने स्कूल छोड़ा कॉलिज में गए उधर दादाजी भी नहीं रहे अब कोई नहीं टोकता था , लम्बे बालों के लिए

उधर ७० के दशक में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का बोल बाला था फिल्मों में उनके बालों का फैशन --लम्बे बाल , कान ढके हुए , गर्दन पर बालों का गुच्छा ---सब नौजवान अपना रहे थे

कॉलिज के अंतिम वर्ष में पढ़ाई का बोझ कुछ ज्यादा ही था इसलिए बालों का बोझ कुछ कम किया , मूंछे काट कर लेकिन सर के बाल अभी भी लम्बे ही थे


डॉक्टर बनने के बाद पैसे भी मिलने लगे थे ८० के दशक में अंग्रेजी फिल्मों का भी प्रभाव पड़ने लगा था इसलिए शक्ल में मिला जुला परिवर्तन आया जिसमे हिंदी और इंग्लिश दोनों फिल्मों का असर दिखाई देता था

क्या ज़माना था --काली घनी लम्बी मूंछों की दिशा नीचे की ओर होती थी

इंटर्नशिप के बाद समय आया हाउस जॉब का एक साल का जॉब जो पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए आवश्यक होता था

हमने फिर एक बार शक्ल बदली अब दाढ़ी भी बढ़ा ली और स्टाइल से काटकर दाढ़ी को मूंछों के साथ मिलाकर कुछ ऐसा रूप निकल कर आया ---



आज दाढ़ी है , मूंछें हैं , और ही सर पर इतने बाल हैं

आजकल जब मैं कंघी करता हूँ तब बच्चे बड़ा हँसते हैं कहते हैं --पापा , सर पर चार बाल हैं और आधे घंटे से कंघी करने में लगे हुए हो

मैं कहता हूँ -- बेटा , प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है

अब जिसके सर पर घनी जुल्फें हैं वे तो हाथ मारकर भी स्टाइल मार लेते हैं
लेकिन हमें तो चार बालों की जिओग्राफिकल लोकेशन को ध्यान में रखते हुए अग्रिम योजना बनाकर उसे ध्यानपूर्वक कार्यान्वित करना पड़ता है
आखिर सब समय समय की बात है पहले सर पर बाल ज्यादा दिखते थे , अब खाल ज्यादा दिखती है

खैर हमने सोचा क्यों किसी डॉक्टर से परामर्श लिया जाएलेकिन हेयर स्पेशलिस्ट तो कोई होता नहींफिर सोचा अपने त्वचा रोग विभाग के हैड से बात की जाएलेकिन उनके हैड पर तो हमसे भी दो बाल कम हैंअगर उनके पास कोई इलाज़ होता तो पहले अपना करते

फिर हमें नज़फगढ़ के नवाब , विरेंद्र सहवाग का ख्याल आयाभई शादी के बाद उड़े उनके बाल फिर वापस गएपता चला कि उन्होंने हेयर ट्रांसप्लांट कराया है

लेकिन अपनी तो हालत पतली हो गई जब पता चला कि एक बाल की कीमत ७५० रूपये हैअब हमने सोचा कि चलो दो चार हज़ार रूपये अपने ऊपर खर्च कर लिए जाएँ तो क्या बुराई हैलेकिन हिसाब लगाया तो देखा कि इतने में तो बस - बाल ही लग पाएंगे

अब अगर कंघी में एक दो बाल दिख जाते हैं तो पत्नी कहती है, लो कर दिया हज़ार पंद्रह सौ का नुकसान

अब आप ही बताएं -- है कोई तेल, लोशन , करीम , लेप , दवा , दुआ , टूना , टोटका या काला, पीला ,लाल ,हरा --जादू , जो उड़े हुए बालों को वापस ला दे