हेयर कटिंग सैलून की
आरामदेह कुर्सी पर
बैठा ,
मैं ईर्ष्या रहा था
बाजु में बैठे युवक की
लहलहाती ,
ज़ुल्फ़ों को देखकर ।
तभी
हमारा केश खज़ाना देख,
दूसरी ओर बैठे
एक हम उम्र के चेहरे पर ,
वही भाव उभर आए ।
उसका ग़म देखा तो ,
मैं अपना ग़म भूल गया ।
नोट : फोटो भाई राजेन्द्र स्वर्णकार ने संवार कर दी है .




