आदमी के सर पर बाल --हों तो मुश्किल , न हों तो और भी मुश्किल ।
यदि सर पर बाल हैं तो कटवाना भी पड़ेगा । नहीं कटवाए तो आदि मानव से लगने लगेंगे । अब कटवाने के लिए पहले मन पसंद नाई होना चाहिए । फिर पसंद की स्टाइल होनी चाहिए । अंत में नतीज़ा पसंद नहीं आया तो कुछ नहीं कर सकते सिवाय इसके कि अगली बार नाई बदल लें ।
बचपन में जब गाँव में रहते थे , दादाजी का खानदानी नाई --नत्थू नाई ही बाल काटता था । लेकिन वो कौन सा फैशन के बाल काटता था । पकड़ा , बैठाया और घुमा दी मशीन कच कच । बाल कटाते समय अपनी तो हालत कुछ ऐसी होती थी ----
बस फर्क इतना था कि उसके हाथ में कैंची नहीं , कच कच वाली मशीन होती थी जो देखते देखते गंजा कर देती थी ।वक्त गुज़रा , हमने स्कूल छोड़ा । कॉलिज में आ गए । उधर दादाजी भी नहीं रहे । अब कोई नहीं टोकता था , लम्बे बालों के लिए ।
उधर ७० के दशक में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का बोल बाला था फिल्मों में । उनके बालों का फैशन --लम्बे बाल , कान ढके हुए , गर्दन पर बालों का गुच्छा ---सब नौजवान अपना रहे थे ।
कॉलिज के अंतिम वर्ष में पढ़ाई का बोझ कुछ ज्यादा ही था । इसलिए बालों का बोझ कुछ कम किया , मूंछे काट कर । लेकिन सर के बाल अभी भी लम्बे ही थे ।
डॉक्टर बनने के बाद पैसे भी मिलने लगे थे । ८० के दशक में अंग्रेजी फिल्मों का भी प्रभाव पड़ने लगा था । इसलिए शक्ल में मिला जुला परिवर्तन आया जिसमे हिंदी और इंग्लिश दोनों फिल्मों का असर दिखाई देता था ।
क्या ज़माना था --काली घनी लम्बी मूंछों की दिशा नीचे की ओर होती थी ।इंटर्नशिप के बाद समय आया हाउस जॉब का । एक साल का जॉब जो पोस्ट ग्रेजुएशन करने के लिए आवश्यक होता था ।
हमने फिर एक बार शक्ल बदली । अब दाढ़ी भी बढ़ा ली और स्टाइल से काटकर दाढ़ी को मूंछों के साथ मिलाकर कुछ ऐसा रूप निकल कर आया ---

आज न दाढ़ी है , न मूंछें हैं , और न ही सर पर इतने बाल हैं ।
आजकल जब मैं कंघी करता हूँ तब बच्चे बड़ा हँसते हैं । कहते हैं --पापा , सर पर चार बाल हैं और आधे घंटे से कंघी करने में लगे हुए हो ।
मैं कहता हूँ -- बेटा , प्रेसियस चाइल्ड की देखभाल ज्यादा करनी पड़ती है ।
अब जिसके सर पर घनी जुल्फें हैं वे तो हाथ मारकर भी स्टाइल मार लेते हैं ।
लेकिन हमें तो चार बालों की जिओग्राफिकल लोकेशन को ध्यान में रखते हुए अग्रिम योजना बनाकर उसे ध्यानपूर्वक कार्यान्वित करना पड़ता है ।
आखिर सब समय समय की बात है । पहले सर पर बाल ज्यादा दिखते थे , अब खाल ज्यादा दिखती है ।
खैर हमने सोचा क्यों न किसी डॉक्टर से परामर्श लिया जाए । लेकिन हेयर स्पेशलिस्ट तो कोई होता नहीं । फिर सोचा अपने त्वचा रोग विभाग के हैड से बात की जाए । लेकिन उनके हैड पर तो हमसे भी दो बाल कम हैं । अगर उनके पास कोई इलाज़ होता तो पहले अपना न करते ।
फिर हमें नज़फगढ़ के नवाब , विरेंद्र सहवाग का ख्याल आया । भई शादी के बाद उड़े उनके बाल फिर वापस आ गए । पता चला कि उन्होंने हेयर ट्रांसप्लांट कराया है ।
लेकिन अपनी तो हालत पतली हो गई जब पता चला कि एक बाल की कीमत ७५० रूपये है । अब हमने सोचा कि चलो दो चार हज़ार रूपये अपने ऊपर खर्च कर लिए जाएँ तो क्या बुराई है । लेकिन हिसाब लगाया तो देखा कि इतने में तो बस ४-६ बाल ही लग पाएंगे ।
अब अगर कंघी में एक दो बाल दिख जाते हैं तो पत्नी कहती है, लो कर दिया हज़ार पंद्रह सौ का नुकसान ।
अब आप ही बताएं -- है कोई तेल, लोशन , करीम , लेप , दवा , दुआ , टूना , टोटका या काला, पीला ,लाल ,हरा --जादू , जो उड़े हुए बालों को वापस ला दे ।

