जब भी किसी ब्लॉग पर सामाजिक दृष्टिकोण से कोई सार्थक और उपयोगी लेख प्रकाशित होता है तो उसे समाचार पत्रों की सुर्ख़ियों में जगह मिल जाती है । इससे उस लेख की उपयोगिता लाखों लोगों की नज़र में आने से और भी बढ़ जाती है ।
इसी तरह यदि समाचार पत्रों में कोई लेख पसंद आए तो उसे क्यों न ब्लोगर्स के सन्मुख प्रस्तुत कर एक सार्थक चर्चा की जाए ताकि उसका प्रभाव अधिकाधिक हो सके ।
इसी विचार से आज प्रस्तुत है हिंदुस्तान टाइम्स के रविवारीय संस्करण में (
११-१२-२०११)
प्रकाशित सत्य प्रकाश जी के लेख पर एक चर्चा । लेख का विषय था -
अवैध यौन संबंधों में कानून द्वारा लिंग भेद । Indian Adultery Law :इस कानून के अनुसार एक विवाहित पुरुष और महिला के बीच , जो पति पत्नी नहीं हैं , अवैध यौन सम्बन्ध होने पर पुरुष को कानून के अंतर्गत अपराधी माना जायेगा लेकिन महिला को नहीं ।
इस सम्बन्ध को अपराध इसलिए माना गया है ताकि विवाह का पवित्र रिश्ता सुरक्षित रह सके ।
पुरुष के अपराधी होने का कारण है,क्योंकि कानून की नज़र में पत्नी को पति की ज़ागीर / संपत्ति माना जाता है । यदि कोई गैर पुरुष किसी दूसरे पुरुष की पत्नी के साथ यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह उसकी निजी संपत्ति में दखलअंदाजी करता है । इसलिए उस पर केस बनता है ।
इस तरह के अवैध सम्बन्ध में पति तो अपराधी है लेकिन पत्नी नहीं । एक हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय महिला आयोग भी इसे सही मानता है । उनका यह भी कहना है कि इस तरह के अवैध सम्बन्ध को गैर कानूनी ही न माना जाये । उधर कुछ लोगों की यह राय है कि कानून में पति पत्नी दोनों बराबर होने चाहिए ।
भारतीय कानून क्या कहता है ? भारतीय दंड संहिता की धारा ४९७ के अंतर्गत यदि एक विवाहित व्यक्ति किसी दूसरी विवाहित महिला के साथ बिना उसके पति की रज़ामंदी के यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह दोषी माना जायेगा जिसके लिए उसे कैद की सजा हो सकती है । ऐसे में उस महिला पर कोई अभियोग नहीं लगेगा ।
साथ ही धारा १९८ के अंतर्गत एक पति दूसरे पति पर आरोप लगा सकता है लेकिन अपनी पत्नी पर नहीं ।
यानि पत्नी इस आरोप से फ्री है ।
दूसरे देशों में : ज्यादातर यूरोपियन देशों में एडलट्री अपराध नहीं माना जाता । वहां इस मामले में लिंग भेद भी नहीं है । और कोई सजा भी नहीं । हालाँकि तलाक की नौबत आ सकती है ।
उधर इस्लामिक देशों में इसे घोर अपराध माना जाता है और महिला को पुरुष से ज्यादा दोषी समझा जाता है ।
धार्मिक पहलु :सभी धर्मों में इसे पाप माना जाता है । इस्लाम में तो इसके लिए
सख्त सज़ा का प्रावधान है ।
अब कुछ सवाल उठते हैं आम आदमी के लिए :* क्या इस मामले में स्त्री पुरुष में भेद भाव करना चाहिए ?
* यदि पति की रज़ामंदी से उसकी पत्नी से रखे गए सम्बन्ध गैर कानूनी नहीं हैं तो क्या वाइफ स्वेपिंग जायज़ है ?
* क्या इस कानून में बदलाव की ज़रुरत है ?
पति पत्नी के सम्बन्ध आपसी विश्वास पर कायम रहते हैं । कानून भले ही ऐसे मामले में पत्नी को दोषी न मानता हो , लेकिन व्यक्तिगत , पारिवारिक , सामाजिक और नैतिक तौर पर ऐसे में दोनों को बराबर का गुनहगार माना जाना चाहिए । हमारा स्वस्थ नैतिक दृष्टिकोण ही हमारे समाज के विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है ।