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Monday, March 26, 2018

पति पत्नी इक दूजे से पूरे होते हैं ---



मैसाज कराकर बॉडी का मन में हरियाली हो गई ,
मैसाज के चक्कर में पर म्हारी घरवाली खो गई।

इत् उत् जाने कित कित ना ढूंढा पर हम हार गए,
इंतज़ार में उनके हम तीन कप कॉफी डकार गए।

तन का तनाव किया था जो कम फिर बढ़ने लगा,
अब तन के साथ मन पर भी संताप चढ़ने लगा।

हमने मुनादी करा दी कि एक अनहोनी हो गई है ,
किसी को दिखे तो बताओ हमारी पत्नी खो गई है।

आखिर मिली साड़ी की दुकान पर खड़ी थी उदास ,
क्योंकि फोन उनके पास था और कार्ड़ हमारे पास।

हमारे पास नहीं था मोबाईल तो फोन कैसे करती ,
उनके पास नहीं था कार्ड तो खरीदारी कैसे करती।

इसीलिए पति पत्नी इक दूजे के बगैर अधूरे होते हैं ,
सच तो यही है कि पति पत्नी इक दूजे से पूरे होते हैं।


Friday, July 7, 2017

जब टाइमिंग ख़राब हो तो टाइम भी ख़राब आ जाता है ---


कहते हैं , मनुष्य का टाइम ( समय ) खराब चल रहा हो तो सब गलत ही गलत होता है।  लेकिन हमें लगता है कि यदि आपकी टाइमिंग ( समय-निर्धारण ) ख़राब हो तो भी सब गलत ही होता है। अब देखिये एक दिन डिनर करते समय हमने सोचा कि श्रीमती जी को अक्सर शिकायत रहती है कि हम उनके बनाये खाने की तारीफ़ कभी नहीं करते। क्योंकि उस दिन दोनों का मूड अच्छा था तो हमने सोचा कि चलो आज बीवी को मक्खन लगाया जाये।
यह सोचकर खाते खाते हमने कहा -- भई वाह ! क्या बात है , आज तो सब्ज़ी बड़ी टेस्टी बनी है।
पत्नी ने बिना कोई भाव भंगिमा दिखाए कहा -- अच्छा !
हमने कहा -- हाँ भई , और दाल की तो बात ही क्या है , बहुत ही विशेष स्वाद आ रहा है। जी चाहता है , आपके हाथ चूम लूँ।
अब तक पत्नी के सब्र का बांध जैसे टूट सा गया था।  तुनक कर बोली -- क्या बात है , आज बड़ी तारीफें हो रही हैं ! इससे पहले तो आपने कभी खाने की तारीफ नहीं की।
हमने कहा -- भई हमने सोचा है कि आप जब भी अच्छा खाना बनाया करेंगी , हम तारीफ ज़रूर किया करेंगे।
अब पत्नी बिफर कर बोली -- तारीफ़ गई भाड़ में । दाल सब्ज़ी मैंने नहीं , नौकरानी ने बनाई हैं।
यह सुनकर हमारे तो होश उड़ गए।
हमने खींसें निपोरते हुए कहा -- ओह सॉरी डार्लिंग। हमने सोचा कि चलो आपकी शिकायत दूर कर दें कि हम कभी तारीफ़ नहीं करते।  लेकिन हमें क्या पता था !  शायद तारीफ करने की टाइमिंग गलत हो गई। वैसे ऐसा कुछ नहीं है आज के खाने में , बस सो सो है। बल्कि कुछ टेस्ट है ही नहीं , बकवास बना है। वो तो मैं तुम्हे खुश करने के लिए कह रहा था।
हमने सोचा कि शायद पलटी मारने से काम चल जाये।
लेकिन तभी पत्नी दहाड़ी --   मैं जानती हूँ , आप मेरे खाने की तारीफ कभी नहीं करेंगे। मैं ही बेवक़ूफ़ हूँ जो रोज रोज खाना बनाने में खटती रहती हूँ।  आपको मेरा बनाया खाना क्या , मैं ही अच्छी नहीं लगती।  मैं जा रही हूँ मायके।
और अब कान खोल कर सुन लो , आज का खाना भी मैंने ही बनाया था।
हमारे तो पैरों के नीचे से जैसे धरती ही खिसक गई और सोचा -- लगता है , टाइमिंग ही नहीं, ये तो टाइम ही खराब चल रहा है।      

   

Sunday, September 8, 2013

सच्चा मन का मीत --- एक वृद्धावस्था प्रेम वार्तालाप ....


कई साल पहले की बात है। बैठे बैठे यूँ ही विचार आया कि जब पति पत्नी ७० साल पार कर जाते हैं , तब उनका प्रेम वार्तालाप कैसा होता होगा ! कल्पना शक्ति का सहारा लेकर कुछ यूँ ख्याल आए :
  
  १ ) पति :

प्रिये याद करो वो दिन,
जब तुम्हारी एक हंसी पर, हम हुए थे फ़िदा ।
अब बदल गया वो मंज़र ,
अब ना मूंह में दांत रहे, ना वो हसीं अदा 

जिन आँखों में झलकते थे मोती,
अब मोतिया देता है दिखाई 

सुन लेती थी तुम दिल की धड़कन भी दूर से
अब कानों में मशीन लगी पर, आवाज़ भी  दे सुनाई 

काली लहराती सावन की घटा सी थी तुम्हारी जुल्फें
अब खोला करों  इनको , रामसे फिल्म्स की नायिका देती हो दिखाई 


२ ) पत्नी :  ( एक के बदले तीन ) :


कभी रात रात भर करते थे मीठी बातें,
अब बात बात पर करते हो लड़ाई 

दिखाते थे नाईट शो में जेम्स बांड की फ़िल्में 
अब चुपके से अकेले में देखते हो जलेबी बाई  

रोज सुबह शाम लगाते थे जिसके चक्कर
अब उस गली का नाम तक याद नहीं 

उड़ाते थे गुलाब जामुन , ज़लेबी कभी हलवा
अब करेले के सिवाय कुछ सवाद नहीं 

कभी शेरों के शिकार की सुनाते थे दास्ताँ
अब सत्यम के शेयरों में सब गँवा कर बैठे हो 

दावा करते थे खाने का सीने पे गोलियां
मियां अब गोलियां खाकर ही जीते हो 

जिन सांसों में समाई थी यौवन की खुशबु
अब गार्लिक पर्ल्स की गंध आती है 

और ये साँस भी मुई अब तो 
बिना इन्हेलर के कहाँ आती है ।

कभी दिल की नस नस में बसे थे हम
सुना है अब वहां स्टेंट निवास करते हैं.

फिर भी सनम हर हाल में हम तो
बस तुम्ही पर विश्वास रखते हैं.  

३ ) 

जीवन के सब उपवन , जब मुरझा जाते हैं
तब पति पत्नी ही बस , इक दूजे संग रह जाते है 

यौवन की तपन हो या , वृधावस्था की शीत 
हर पल साथ निभाए जा , सच्चा मन का मीत 

   

Monday, December 19, 2011

अवैध यौन संबंधों में कानून द्वारा लिंग भेद - एक परिचर्चा !

जब भी किसी ब्लॉग पर सामाजिक दृष्टिकोण से कोई सार्थक और उपयोगी लेख प्रकाशित होता है तो उसे समाचार पत्रों की सुर्ख़ियों में जगह मिल जाती है । इससे उस लेख की उपयोगिता लाखों लोगों की नज़र में आने से और भी बढ़ जाती है ।

इसी तरह यदि समाचार पत्रों में कोई लेख पसंद आए तो उसे क्यों न ब्लोगर्स के सन्मुख प्रस्तुत कर एक सार्थक चर्चा की जाए ताकि उसका प्रभाव अधिकाधिक हो सके ।

इसी विचार से आज प्रस्तुत है हिंदुस्तान टाइम्स के रविवारीय संस्करण में ( ११-१२-२०११) प्रकाशित सत्य प्रकाश जी के लेख पर एक चर्चा

लेख का विषय था - अवैध यौन संबंधों में कानून द्वारा लिंग भेद

Indian Adultery Law :

इस कानून के अनुसार एक विवाहित पुरुष और महिला के बीच , जो पति पत्नी नहीं हैं , अवैध यौन सम्बन्ध होने पर पुरुष को कानून के अंतर्गत अपराधी माना जायेगा लेकिन महिला को नहीं ।

इस सम्बन्ध को अपराध इसलिए माना गया है ताकि विवाह का पवित्र रिश्ता सुरक्षित रह सके ।

पुरुष के अपराधी होने का कारण है,क्योंकि कानून की नज़र में पत्नी को पति की ज़ागीर / संपत्ति माना जाता है । यदि कोई गैर पुरुष किसी दूसरे पुरुष की पत्नी के साथ यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह उसकी निजी संपत्ति में दखलअंदाजी करता है । इसलिए उस पर केस बनता है ।

इस तरह के अवैध सम्बन्ध में पति तो अपराधी है लेकिन पत्नी नहीं

एक हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय महिला आयोग भी इसे सही मानता हैउनका यह भी कहना है कि इस तरह के अवैध सम्बन्ध को गैर कानूनी ही माना जाये
उधर कुछ लोगों की यह राय है कि कानून में पति पत्नी दोनों बराबर होने चाहिए ।

भारतीय कानून क्या कहता है ?

भारतीय दंड संहिता की धारा ४९७ के अंतर्गत यदि एक विवाहित व्यक्ति किसी दूसरी विवाहित महिला के साथ बिना उसके पति की रज़ामंदी के यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह दोषी माना जायेगा जिसके लिए उसे कैद की सजा हो सकती है । ऐसे में उस महिला पर कोई अभियोग नहीं लगेगा ।
साथ ही धारा १९८ के अंतर्गत एक पति दूसरे पति पर आरोप लगा सकता है लेकिन अपनी पत्नी पर नहीं ।
यानि पत्नी इस आरोप से फ्री है ।

दूसरे देशों में :

ज्यादातर यूरोपियन देशों में एडलट्री अपराध नहीं माना जाता । वहां इस मामले में लिंग भेद भी नहीं है । और कोई सजा भी नहीं । हालाँकि तलाक की नौबत आ सकती है ।
उधर इस्लामिक देशों में इसे घोर अपराध माना जाता है और महिला को पुरुष से ज्यादा दोषी समझा जाता है ।

धार्मिक पहलु :

सभी धर्मों में इसे पाप माना जाता है । इस्लाम में तो इसके लिए सख्त सज़ा का प्रावधान है ।

अब कुछ सवाल उठते हैं आम आदमी के लिए :

* क्या इस मामले में स्त्री पुरुष में भेद भाव करना चाहिए ?
* यदि पति की रज़ामंदी से उसकी पत्नी से रखे गए सम्बन्ध गैर कानूनी नहीं हैं तो क्या वाइफ स्वेपिंग जायज़ है ?
* क्या इस कानून में बदलाव की ज़रुरत है ?

पति पत्नी के सम्बन्ध आपसी विश्वास पर कायम रहते हैंकानून भले ही ऐसे मामले में पत्नी को दोषी मानता हो , लेकिन व्यक्तिगत , पारिवारिक , सामाजिक और नैतिक तौर पर ऐसे में दोनों को बराबर का गुनहगार माना जाना चाहिए

हमारा स्वस्थ नैतिक दृष्टिकोण ही हमारे समाज के विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है