Monday, March 26, 2018

पति पत्नी इक दूजे से पूरे होते हैं ---



मैसाज कराकर बॉडी का मन में हरियाली हो गई ,
मैसाज के चक्कर में पर म्हारी घरवाली खो गई।

इत् उत् जाने कित कित ना ढूंढा पर हम हार गए,
इंतज़ार में उनके हम तीन कप कॉफी डकार गए।

तन का तनाव किया था जो कम फिर बढ़ने लगा,
अब तन के साथ मन पर भी संताप चढ़ने लगा।

हमने मुनादी करा दी कि एक अनहोनी हो गई है ,
किसी को दिखे तो बताओ हमारी पत्नी खो गई है।

आखिर मिली साड़ी की दुकान पर खड़ी थी उदास ,
क्योंकि फोन उनके पास था और कार्ड़ हमारे पास।

हमारे पास नहीं था मोबाईल तो फोन कैसे करती ,
उनके पास नहीं था कार्ड तो खरीदारी कैसे करती।

इसीलिए पति पत्नी इक दूजे के बगैर अधूरे होते हैं ,
सच तो यही है कि पति पत्नी इक दूजे से पूरे होते हैं।


2 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (27-03-2017) को "सरस सुमन भी सूख चले" (चर्चा अंक-2922) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' ० २ अप्रैल २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आमंत्रण में आपको 'लोकतंत्र' संवाद मंच की ओर से शुभकामनाएं और टिप्पणी दोनों समाहित हैं। अतः आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

    निमंत्रण

    विशेष : 'सोमवार' ० २ अप्रैल २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच अपने सोमवारीय साप्ताहिक अंक में आदरणीय 'विश्वमोहन' जी से आपका परिचय करवाने जा रहा है।


    अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

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