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Friday, May 31, 2024

विश्व धूम्रपान रहित दिवस:


सिगरेट पीते थे हमदम, हम दम भर कर,

अब हरदम हर दम पर, दम निकलता है। 


गुटखा खाते थे सनम, मुंह में चबा चबा कर,

अब खाने के लिए भी, मुंह ही नहीं खुलता है।

Tuesday, October 10, 2017

अभी से सचेत जाइये , वरना फिर आप ही कहेंगे , ये डॉक्टर बहुत लूटते हैं ---

दो सत्य लघु कथाएं :   
१ )
कॉलेज के दिनों में हमें भी धूम्रपान की आदत लग गई थी। दिसंबर १९८३ में मारुती गाड़ियां आने के बाद दिल्ली में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।  १९९० में जब हमारी पहली गाड़ी मारुती ८०० आई तब तक दिल्ली में लगभग दस लाख वाहन हो चुके थे और उत्सर्जन पर कोई भी नियंत्रण न होने के कारण दिल्ली में लगातार बढ़ता हुआ वायु प्रदुषण चरम सीमा पर पहुँच गया था। तब न PUC होते थे और न ही गाड़ियों में उत्सर्जन मानक। ऐसे में अक्सर शाम के समय दिल्ली के मुख्य चौराहों पर धुंए का बादल सा छा जाता था।  ऐसे ही एक दिन जब हमने दिल्ली के सबसे ज्यादा व्यस्त चौराहों  में से एक ITO पर रैड लाइट होने पर स्कूटर रोका तो देखा कि धुआं इतना ज्यादा था कि अपनी ही साँस कड़वी सी लग रही थी।  तभी हमने देखा कि एक और स्कूटरवाला आकर रुका और रुकते ही उसने तुरंत जेब से निकाल कर सिगरेट जलाई।  यह देखकर हमें लगा कि यह कैसा बंदा है , बाहर का धुआं कम था जो यह सिगरेट का धुआं भी फेफड़ों में भर रहा है ! तभी हमें दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ और उसके बाद हमने फिर कभी धूम्रपान नहीं किया।  अभी इतवार को जब हमने अपना PFT कराया तो बिलकुल नॉर्मल निकला। 
२ )
एक बार गौतम बुद्ध कहीं जा रहे थे थे।  रास्ते में डाकू उंगलीमाल आ गया।  वह लोगों को लूट कर उनकी एक उंगली काट कर अपने गले में माला बनाकर पहनता था। जैसे ही उसने बुद्ध को देखा तो जोर से बोला -- ठहर जा।  बुद्ध ने कहा -- मैं तो ठहर गया , तू कब ठहरेगा ! अंत में जब गौतम बुद्ध ने उसे बात का मर्म समझाया तो वह सदा के लिए लूटपाट को छोड़कर शरीफ इंसान बन कर रहने लगा ।

आज दिल्ली में उस समय की दस गुना यानि करीब एक करोड़ गाड़ियाँ हैं।  कई कारणों से दिल्ली में प्रदुषण दशहरे के बाद ही बढ़ने लगता है।  इस भयंकर वायु प्रदुषण से बदलते मौसम में लाखों लोगों को स्वास रोग होने लगते हैं।  कृपया सिर्फ एक मिनट साँस रोककर देखिये कि आपको कैसा लगता है। हम जीवन भर साँस लेते रहते हैं लेकिन कभी उसका पता नहीं चलता।  जिसे दमा जैसी साँस की बीमारी होती है , उसे एक एक साँस के लिए न सिर्फ अथक प्रयास करना पड़ता है बल्कि घोर कष्ट भी उठाना पड़ता है।  स्वास रोग न जात पात देखता है , न धर्म। आपकी क्षणिक मिथ्या ख़ुशी दूसरों के लिए जीवन भर का रोग न बने , इतना प्रयास तो हम कर ही सकते हैं। अभी से सचेत जाइये , वरना फिर आप ही कहेंगे , ये डॉक्टर बहुत लूटते हैं।       

Monday, September 8, 2014

इट'स वेरी ईज़ी तो स्टॉप स्मोकिंग , एंड आइ हॅव डन इट सो मेनी टाइम्स ---


युवावस्था मे , विशेषकर कॉलेज के दिनों मे, मूँह मे सिगरेट लगाना मित्रों के संग एक शौक के रूप मे आरंभ होता है ! लेकिन जल्दी ही यह शौक एक लत बन जाता है ! आरंभ के दिनों मे मूँह मे धुआँ भरकर उड़ाना अच्छा लगता है लेकिन जल्दी ही समझ मे आ जाता है या मित्रों द्वारा समझा दिया जाता है कि सिगरेट पीने का सही तरीका क्या है ! यानि धुआँ मूँह मे भरकर गहरी सांस लेते हुए धुएं को फेफड़ों मे भरना पड़ता है ! धीरे धीरे निकोटीन अपना प्रभाव दिखाने लगती है और एक और मासूम युवक धूम्रपान की लत का शिकार हो जाता है ! 

हमारे फेफड़ों मे जाने वाले धुएं मे मौजूद कार्बन के कण फेफड़ों की कोशिकाओं मे जमकर अपना घर बना लेते हैं ! यदि वर्षों तक धूम्रपान किया जाता रहा तो काफी मात्रा मे कार्बन जमा होकर फेफड़ों को गला देता है जिससे हमारी सांस लेने की प्रक्रिया मे बाधा उत्पन्न होने लगती है ! यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस , ब्रोंकिओकटेसिस , दमा , टी बी और कैंसर जैसे भयंकर रोगों को जन्म देती है ! अन्तत: फेफड़े इतने कमज़ोर हो जाते हैं कि एक एक सांस लेने के लिये भी दम लगाना पड़ता है ! सिगरेट के धुएं मे मौजूद निकोटिन ना सिर्फ लत लगाकर मज़बूर कर देती है बल्कि हमारे शरीर की कई प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करती है जैसे ब्ल्ड प्रेशर और हृदय गति का बढ़ना जिससे धीरे धीरे हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाती है !  

वर्षों पहले दिल्ली के आई टी ओ चौराहे पर लाल बत्ती पर स्कूटर पर इंतज़ार करते हुए हमने देखा कि वहां बहुत ज्यादा वायु प्रदूषण था ! उस समय दिल्ली मे वायु प्रदूषण अपने जोरों पर था ! धुआँ इतना ज्यादा था कि सांस लेने मे भी कड़वाहट महसूस हो रही थी ! तभी साथ मे खड़े हुए एक और स्कूटर वाले ने सिगरेट निकाली और सुलगाकर आराम से कश लगाने लगा ! यह देखकर हमे अचानक यह महसूस हुआ कि हम तो धुएं से पहले ही परेशान हैं और यह शख्श सिगरेट पिये जा रहा है ! क्या बाहर धुएं की कमी है जो और धुआँ फेफड़ों मे भर रहा है ! 
यह विचार आते ही हमारे ज्ञान चक्षु खुल गए , हमे दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ और हमे ऐसी विरक्ति हुई कि उसके बाद हमने कभी सिगरेट को हाथ नहीं लगाया ! 

धूम्रपान से ऐसे ही एक झटके मे निज़ात पाई जा सकती है ! बस द्रढ निश्चय और पक्का इरादा चाहिये ! वर्ना एक बहुत बड़े मेडिसिन के प्रोफ़ेसर ने कहा था : इट'स वेरी ईज़ी तो स्टॉप स्मोकिंग , एंड आइ हॅव डन इट सो मेनी टाइम्स ! 


Friday, May 31, 2013

इट्स वेरी ईजी टू स्टॉप स्मोकिंग , एंड आई हैव डन इट सो मेनी टाइम्स ---


धूम्रपान रहित दिवस पर आज प्रस्तुत है , एक पूर्व प्रकाशित रचना। अस्पताल एक धूम्रपान निषेद्ध क्षेत्र होता है। फिर भी लोग बीड़ी सिग्रेट पीते नज़र आते हैं। कानून की दृष्टि में यह अपराध है जिसमे १०० से ५०० रूपये तक का जुर्माना किया जा सकता है। ऐसे ही अभियान के दौरान जब लोगों को धूम्रपान करते पकड़ा, तब लोगों ने धूम्रपान करने के क्या क्या बहाने बताये, इसी पर लिखी है यह हास्य- व्यंग कविता।        



अस्पताल के प्रांगण में, ओ पी डी के आँगन में
जेठ की धूप में जले पेड़ तले,
कुछ लोग आराम कर रहे थे ।
करना मना है ,फिर भी मजे से धूम्रपान कर रहे थे ।

एक बूढ़े संग बैठा उसका ज़वान बेटा था
बूढा बेंच पर बेचैन सा लेटा था ।

साँस भले ही धोंकनी सी चल रही  थी
मूंह में फिर भी बीड़ी जल रही थी ।

बेटा भी बार बार पान थूक रहा था
बैठा बैठा वो भी सिग्रेट फूंक रहा था ।

एक बूढा तो बैठा बैठा भी हांफ रहा था
और हांफते हांफते साथ बैठी बुढिया को डांट रहा था ।

फिर डांटते डांटते जैसे ही उसको खांसी आई
उसने भी जेब से निकाल, तुरंत बीड़ी सुलगाई।

मैंने पहले बूढ़े से कहा बाबा , अस्पताल में बीड़ी पी रहे हो
चालान कट जायेगा,
वो बोला बेटा, गर बीड़ी नहीं पी, तो मेरा तो दम ही घुट जायेगा ।

डॉ ने कहा है, सुबह शाम पार्क की सैर किया करो
और खड़े होकर लम्बी लम्बी साँस लिया करो ।

लम्बे लम्बे कश लेकर वही काम कर रहा हूँ ।
खड़ा खड़ा थक गया था , लेटकर आराम कर रहा हूँ ।

मैंने बेटे से कहा --भई तुम तो युवा शक्ति के चीते हो
फिर भला सिग्रेट क्यों पीते हो ?

वो बोला बाबा की बीमारी से डर रहा हूँ
सिग्रेट पीकर टेंशन कम कर रहा हूँ ।

मैंने कहा भैये -
टेंशन के चक्कर में मत पालो हाईपरटेंशन
वरना समय से पहले ही मिल जाएगी फैमिली पेंशन ।

एक बोला मुझे तो बीड़ी बिल्कुल भी नहीं भाती है
पर क्या करूँ इसके बिना टॉयलेट ही नहीं आती है ।

दूसरा बोला सर बिना पिए, मूंह में बांस हो जाती हैं
एक दो सिग्रेट पी लेता हूँ, तो गैस पास हो जाती है ।

एक युवक हवा में धुएं के गोल गोल छल्ले बना रहा था
पता चला वो लड़का होने की ख़ुशी में ख़ुशी मना रहा था ।

कुछ युवा डॉक्टर भी सिग्रेट के कश भर रहे थे ,
मूंह में सिग्रेट दबा गर्ल फ्रेंड को इम्प्रेस कर रहे थे।


कुछ लोग ग़म में पीते हैं , कुछ पीकर ख़ुशी मनाते हैं ।
कुछ लोग दम भर पीते हैं , फिर दमे से छटपटाते हैं ।

भले ही जेब में पैसे नहीं रिक्शा लायक घर जाने को।
लेकिन बण्डल माचिस ज़रूर मिलेगी बीड़ी सुलगाने को।   

ये धूम्रपान की आदत , आसानी से कहाँ छूटती है
पहले सिग्रेट हम फूंकते हैं , फिर सिग्रेट हमें फूंकती है।


नोट : किसी ने कहा है -- इट्स वेरी ईजी टू स्टॉप स्मोकिंग , एंड आई हैव डन इट सो मेनी टाइम्स।  






Tuesday, May 31, 2011

धूम्रपान--पहले सिग्रेट हम फूंकते हैं , फिर सिग्रेट हमें फूंक जाती है ।

आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस है । सरकारी कार्यालयों में प्रति वर्ष मई के आखिरी सप्ताह को धूम्रपान विरोधी सप्ताह मनाया जाता है । इस सप्ताह में हमारे अस्पताल में विशेष दस्ते का गठन किया जाता है , जो अस्पताल में धूम्रपान करते पाए गए लोगों का चालान काट कर जुर्माना करता है और धूम्रपान के प्रति जनता को जागरूक करता है ।

ऐसे ही कई दौरों पर हमने जो दृश्य देखे और लोगों को धूम्रपान करने के जो बहाने बनाते सुना , वह प्रस्तुत है , इस पूर्वप्रकाशित रचना में ।


अस्पताल के प्रांगण में
ओ पी डी के आँगन में
जेठ की धूप में जले
पेड़ तले,
कुछ लोग आराम कर रहे थे ।
करना मना है ,
फिर भी मजे से
धूम्रपान कर रहे थे ।

एक बूढ़े संग बैठा उसका ज़वान बेटा था
बूढा बेंच पर बेचैन सा लेटा था ।

साँस भले ही धोंकनी सी चल रही थी
मूंह में फिर भी बीड़ी जल रही थी ।

बेटा भी बार बार पान थूक रहा था
बैठा बैठा वो भी सिग्रेट फूंक रहा था ।

एक बूढा तो बैठा बैठा भी हांफ रहा था
और हाँफते हाँफते भी अपनी बुढिया को डांट रहा था ।

डांटते डांटते जैसे ही उसको खांसी आई
उसने भी जेब से निकाल, तुरंत बीड़ी सुलगाई।

मैंने पहले बूढ़े से कहा बाबा ,
अस्पताल में बीड़ी पी रहे हो ,चालान कट जायेगा
वो बोला बेटा , गर बीड़ी नहीं पी
तो मेरा तो दम ही घुट जायेगा ।

डॉ ने कहा है -
सुबह शाम पार्क की सैर किया करो
खड़े होकर लम्बी लम्बी साँस लिया करो ।

लम्बे लम्बे कश लेकर वही काम कर रहा हूँ ।
खड़ा खड़ा थक गया था , लेटकर आराम कर रहा हूँ ।

मैंने बेटे से कहा --भाई तुम तो युवा शक्ति के चीते हो
फिर भला सिग्रेट क्यों पीते हो ?

वो बोला बाबा की बीमारी से डर रहा हूँ
सिग्रेट पीकर टेंशन कम कर रहा हूँ ।

मैंने कहा भैये -
टेंशन के चक्कर में मत पालो हाईपरटेंशन
वरना समय से पहले ही मिल जाएगी फैमिली पेंशन ।


एक बोला मुझे तो बीड़ी बिलकुल भी नहीं भाती है
पर क्या करूँ इसके बिना टॉयलेट ही नहीं आती है ।

दूसरा बोला सर
मैं तो तभी पीता हूँ जब पेट मे बात खास हो जाती हैं
एक दो सिगरेट पी लेता हूँ,  तो गैस पास हो जाती है ।

एक युवक हवा में धुएं के छल्ले बना रहा था
पता चला वो लड़का होने की ख़ुशी में ख़ुशी मना रहा था ।


कुछ लोग ग़म में पीते हैं , कुछ पीकर ख़ुशी मनाते हैं ।
लेकिन अपनी और परिवार की जिंदगी दांव पर लगाते हैं

ये धूम्रपान की आदत , आसानी से कहाँ छूट पाती है
पहले सिग्रेट हम फूँकते हैं , फिर सिग्रेट हमे फूंक जाती है ! 

धूम्रपान से होने वाली हानि के बारे में चाहें तो यहाँ पढ़ सकते हैं । Link

Monday, May 31, 2010

क्या करूँ कंट्रोल नही होता ---विश्व तम्बाकू रहित दिवस पर एक रचना ----

लोकोपयोगी व्याखानमाला के उद्घाटन पर बाएं से --डॉ एन के अग्रवाल - अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षिक , डॉ पी कालरा -प्रधानाचार्य यू सी एम् एस , श्री जयदेव सारंगी --स्पेशल सेक्रेटरी , डॉ भट्टाचार्जी --निदेशक स्वास्थ्य सेवाएँ , और डॉ एस द्विवेदी --विभाग अध्यक्ष काय चिकित्सा



क्या करूँ कंट्रोल नही होता ---

आज विश्व भर में विश्व तम्बाकू रहित दिवस मनाया जा रहा है। क्यों न जो लोग धूम्रपान करते हैं , आज के दिन प्रण करें कि आज के बाद वो कभी धूम्रपान नही करेंगे। दिल्ली जैसे शहर में जहाँ प्रदूषण पर तो नियंत्रण किया जा रहा है, वहीं धूम्रपान पर अभी तक विशेष प्रभाव नही पड़ा है।
तम्बाकू और धूम्रपान से सम्बंधित कुछ तथ्य :-

* सबसे पहले कोलंबस ने १४९२ में दक्षिण अमेरिका के निवासियों को धूम्रपान करते देखा था।
*भारत में इसका सेवन १६ वीं शताब्दी में शुरू हुआ।

*विश्व में ११० करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं।
*विश्व में प्रतिवर्ष ५०,००० करोड़ सिग्रेट और ८००० करोड़ बीडियाँ फूंकी जाती हैं।
*धूम्रपान से हर ८ सेकंड में एक व्यक्ति की म्रत्यु हो जाती है।
* ५० लाख लोग हर साल अकाल काल के गाल में समां
जाते हैं।
*सिग्रेट के धुएं में ४००० से अधिक हानिकारक तत्व और ४० से अधिक कैंसर उत्त्पन करने वाले पदार्थ होते हैं।

*भारत में ४०% पुरूष और ३% महिलायें धूम्रपान करती हैं।
*भारत में मुहँ का कैंसर विश्व में सबसे अधिक पाया जाता है और ९०% तम्बाकू चबाने से होता है।

धूम्रपान और तम्बाकू से होने वाली हानियाँ :-


*हृदयाघात, उच्च रक्त चाप, कोलेस्ट्रोल का बढ़ना, तोंद निकलना, मधुमेह , गुर्दों पर दुष्प्रभाव ।
*स्वास रोग _ टी बी , दमा, फेफडों का कैंसर ,गले का कैंसर आदि।
* पान मसाला और गुटखा खाने से मुहँ में सफ़ेद दाग, और कैं
सर होने की अत्याधिक संभावना बढ़ जाती है।

श्रोतागण

लोग धूम्रपान करते क्यों हैं?
कहते हैं पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए । वैसे तो ये बात शराब के लिए कही गई है लेकिन बीड़ी सिग्रेट पर भी उतनी ही लागू होती है । लोग कैसी कैसी हालातों में भी धूम्रपान करते हैं और क्या क्या बहाने बनाते हैं , ज़रा देखिये इस हास्य -व्यंग कविता में ।


अस्पताल के प्रांगण में
पी डी के आँगन में
जेठ की धूप में जले, पेड़ तले
कुछ लोग आराम कर रहे थे ।
करना मना है , फिर भी मजे से धूम्रपान कर रहे थे ।

एक बूढ़े संग बैठा उसका ज़वान बेटा था
बूढा बेंच पर इत्मीनान से लेटा था ।
साँस भले ही धोंकनी सी चल रही थी
मूंह में फिर भी बीड़ी जल रही थी ।

बेटा भी बार बार पान थूक रहा था
बैठा बैठा वो भी सिग्रेट फूंक रहा था ।


एक बूढा तो बैठा बैठा भी हांफ रहा था
साथ बैठी बुढिया को जोर जोर से डांट रहा था ।
हांफते हांफते डांटते डांटते जैसे ही उसको खांसी आई
उसने भी जेब से निकाल, तुरंत बीड़ी सुलगाई।

मैंने कहा बाबा , अस्पताल में बीड़ी पी रहे हो
चालान कट जायेगा
वो बोला बेटा , गर बीड़ी नहीं पी
तो मेरा तो दम ही घुट जायेगा ।

डॉ ने कहा है -
सुबह शाम पार्क की सैर किया करो
खड़े होकर लम्बी लम्बी साँस लिया करो ।
लम्बे लम्बे कश लेकर वही काम कर रहा हूँ ।
खड़ा खड़ा थक गया था , लेटकर आराम कर रहा हूँ ।

मैंने बेटे से कहा --भाई तुम तो युवा शक्ति के चीते हो
फिर भला सिग्रेट क्यों पीते हो ?
वो बोला बाबा की बीमारी से डर रहा हूँ
सिग्रेट पीकर टेंशन कम कर रहा हूँ ।

मैंने कहा भैये -टेंशन के चक्कर में मत पालो हाइपर्तेन्शन
वर्ना समय से पहले ही लेनी पड़ जाएगी फैमिली पेंशन ।



एक बोला मुझे तो बीडी बिलकुल भी नहीं भाती है
पर क्या करूँ इसके बिना टॉयलेट ही नहीं आती है ।

दूसरा बोला सर मैं तो रात में पीता हूँ जब पत्नी और सास सो जाती है
एक दो सिगरेट पी लेता हूँ तो गैस पास हो जाती है ।

एक युवक गोल गोल हवा में धुएं के छल्ले बना रहा था
वो लड़का होने की ख़ुशी में खुशियाँ मना रहा था ।

कुछ लोग ग़म में पीते हैं , कुछ पीकर ख़ुशी मनाते हैं ।
कुछ लोग दम भर पीते हैं , फिर दमे से छटपटाते हैं ।
उड़ाकर बीडी सिगरेट के धुएं का ज़हर
अपनी और पूरे परिवार की जिंदगी , दांव पर लगाते हैं ।

ये धूम्रपान की आदत , आसानी से कहाँ जा पाती है
पहले सिग्रेट हम पीते हैं , फिर सिग्रेट हमें खा जाती है ।



दोस्तों धूम्रपान छोड़ने के लिए सिर्फ़ और सिर्फ़ इच्छा शक्ति की आवश्यकता होती है।
जरा सोचिये , बड़े बड़े शहरों में जहाँ बहुत सा धुआं हम पहले ही साँस के साथ खींचते हैं, फ़िर भला सिग्रेट के धुएं की कहाँ जरूरत रह जाती है। एक बार छोड़ कर देखिये , आप कितना परिवर्तन महसूस करेंगे अपनी जिंदगी में।