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Monday, November 26, 2012

घर के कुछ काम तो ऑफिस में करने दीजिये ---


बहुत समय से हास्य काविता लिखने का समय और विषय नहीं मिल रहा था. हालाँकि दीवाली पर उपहारों के आदान प्रदान पर लिखने का बड़ा मूड था. इस बार अवसर मिल ही गया. आप भी आनंद लीजिये : 


जब भी दीवाली, सर पर चढ़ आती है 
साहब के दिल की, धड़कन बढ़ जाती है।   

जाने इस बार कितनी गिफ्ट्स आयेंगी 
कम रह गई तो घर में, क्या इज्ज़त रह जाएगी।

दीवाली की गिफ्ट्स का फंडा भी सिंपल होता है 
भई यह तो अफसरों का, स्टेटस सिम्बल होता है।   

पिछले साल दीवाली पर हो गया ट्रांसफर
दीवाली  की गिफ्ट,  आधी रह गई घटकर।  

पहले जो लोग तीन तीन पेकेट लेकर आये थे
अब वो तीन महीने से नज़र तक नहीं आये थे।   

लेन देन का तो सारा हिसाब ही खो गया 
ऊपर से पत्नी का भी मूड ख़राब हो गया।   

तुनक कर बोली -- यदि दफ्तर में और टिक जाते 
तो निश्चित ही दस बीस पेकेट, और मिल जाते ।   

गिफ्ट की संख्या रूपये की कीमत सी घट गई 
अज़ी पड़ोसी के आगे अपनी तो नाक ही कट गई।   

आप यहाँ हारे नेता से अकेले पड़े हैं 
पड़ोसी के द्वार पर देखो, दस बन्दे खड़े हैं।   

बाजु वाले शर्मा जी भी बने बैठे हैं शेर 
घर के आगे लगा है, खाली डिब्बों का ढेर।  

सा'ब को अब फिर लग रहा था घाटे का डर
इस बार फिर आ गया था, ट्रांसफर का नंबर।   

मन में ऊंचे नीचे राजसी विचार आने लगे 
सपने में फिर रंग बिरंगे, उपहार आने लगे।    

नए दफ्तर में सा'ब ने शान से मिठाई मंगवाई 
फिर सारे स्टाफ को बुलाकर, शान से दी बधाई।   

सूट बूट पहनकर बैठे लगाकर रेशमी टाई  
पर ताकते रह गए, गिफ्ट एक भी ना आई।   

बैठे रहे अकेले कुर्सी पर लेते हुए जम्हाई  
खाली एस एम् एस पर ही मिलती रही बधाई।    

खीज कर सा'ब ने अपने पी ऐ को डांट लगाई
उसने जब बताया , तो ये बात समझ में आई।

जो कोंट्रेक्टर सप्लायर दफ्तर में चक्कर लगाते थे
वही तो दीवाली पर मोटी मोटी गिफ्ट लेकर आते थे।    

लेकिन अब  बेचारे सारे क़र्ज़ में धंसे पड़े है 
डॉलर के चक्कर में सबके पैसे फंसे पड़े है।  

इनकी सेवाओं का तो हम पर ही क़र्ज़ है 
सर आपका लेने का नहीं , देने का फ़र्ज़ है।

पुरुषों को दवा दारू की दो  घूँट देनी चाहिए 
महिलाओं को लेट आने की, छूट देनी चाहिए।

घर के कुछ काम तो ऑफिस में करने दीजिये
खुद भी करिए हमें भी, मनमानी करने दीजिये।

सरकारी नौकर तो बेचारा बेसहारा होता है ,
दफ्तर में बॉस और घर में बीबी का मारा होता है।

यह सुनकर बॉस का दिल भावनाओं से भर आया,
इसलिए सारे स्टॉफ को बुलवाकर लंच  करवाया।


कभी दीवाली पर मिलना, मिलकर बातचीत करना 
और भेंट का आदान प्रदान, दिलों में भरता था प्यार।  
अब घर बैठे ही मोबाईल या नैट पर  करते हैं चैट,  
और दीवाली के उपहार, बन कर रह गए हैं व्यापार।   


नोट : कृपया इसे कवि की कल्पना ही समझें . इसका सम्बन्ध किसी भी जीवित या अजीवित व्यक्ति या घटना से नहीं है.  

Sunday, November 7, 2010

दीवाली के आफ्टर इफेक्ट्स और साइड इफेक्ट्स---

यह दीवाली भी चली गई और रह गए दीवाली के आफ्टर इफेक्ट्स और साइड इफेक्ट्स

उपहार :

* दफ्तर के बड़े बाबू का हुआ बड़ा खराब मूढ़ दीवाली पर।
दीवाली से एक महीना पहले फर्टाइल सीट से हो गया ट्रांसफर

दीवाली के उपहारों की संख्या १०% रह गई घटकर


* दीवाली गिफ्ट्स का हाल भी ब्लॉग पोस्ट पर टिप्पणियों जैसा होता है ।
एक हाथ दे , एक हाथ ले

* जो माल कभी नहीं बिकता , वो दीवाली पर आसानी से निकल जाता है ।
बस पैकेजिंग सुन्दर होनी चाहिए ।


* दीवाली गिफ्ट्स तभी तक सुन्दर लगती हैं , जब तक पेपर में लिपटी रहती हैं ।
उसके बाद खोदा पहाड़ , निकला चूहा ।

बधाईयाँ :

पहले देते थे लोग बधाईयाँ मिलकर
अब बनाकर भेज देते हैं मोबाइल पर
ग्रुप एस एम् एस ।


दीवाली पर जगमगाहट :

दीवाली से पहले

दीवाली की सुहानी संध्या

दीवाली के बाद

दीवाली से अगले दिन की वीरानी भोर

जाने कितनी सांसें समय से पहले ही थम जाएँगी
जब साफ़ हवा में सांस ले सकें
वो सुबह जाने कब आएगी ?

क्यों नहीं मना सकते
हम दीवाली बिना शोर शराबा और प्रदूषण के ?


कुछ इस तरह ।

आखिर लक्ष्मी जी को भी तो यही पसंद है ।


Thursday, September 2, 2010

श्री राजीव तनेजा --एक विश्व कीर्तिमान ऐसा भी !

आज जन्माष्टमी है । यानि भगवान श्री कृष्ण जी का जन्मदिन । यूँ तो श्री कृष्ण जी को कई नामों से जाना जाता है जैसे किशन , कान्हा , कन्हैया , श्याम , देवकीनंदन , गोपाल ---। और श्री कृष्ण जी के अनुरागी भी बहुत रहे जैसे मीरा ,राधा , गोपियाँ ----। लेकिन एक नाम जो ज़ेहन में आता है वो है सुदामा का । सुदामा कृष्ण के बचपन के मित्र । सुदामा का कृष्ण जी को चावल का उपहार देना भला कोई कैसे भूल सकता है ।

ज़ाहिर है , मित्रता में कीमत नहीं , भावना महत्त्व रखती है

ऐसे ही एक मित्र हमें मिले --श्री राजीव तनेजा जी , जिन्होंने हमारे जन्मदिन पर हमें एक ऐसा ही उपहार देकर दिल जीत लिया ।

तनेजा जी ने सुबह १०-३० बजे हमें जन्मदिन विशेष पर टिप्पणी देकर जन्मदिन की बधाई दी ।

उसके बाद उन्होंने हमारी तब तक लिखी कुल १३४ पोस्ट पढ़ी और सब पर टिप्पणी दर्ज की । अंतिम टिप्पणी रात के ९-०९ बजे लिखकर ही उन्होंने विराम लिया । इस तरह करीब साढ़े दस घंटों में तनेजा जी ने १३४ पोस्ट पढ़ी और १३४ टिप्पणियां लिखी ।

अब यह भी एक विश्व कीर्तिमान ही हो सकता है

इसे क्या कहेंगे --किसी के प्रति सच्ची श्रद्धा , स्नेह , मित्रता की भावना या फिर एक जुनून !

कुछ भी हो लेकिन हमें तो श्री तनेजा जी के साहस और समर्पण पर गर्व सा महसूस हो रहा है ।
साथ ही श्रीमती संजू तनेजा जी की सहनशीलता को भी नमन करने का दिल करता है , क्योंकि उस दिन तनेजा जी के ख्यालों में सिर्फ और सिर्फ हम ही हम रहे होंगे ।

तनेजा दंपत्ति से मेरी मुलाकात केवल दो बार हुई है ।

पहली बार हम मिले थे ब्लोगर मिलन में --फरवरी २०१० में ।


बाएं से श्री राजीव तनेजा जी , श्रीमती संजू तनेजा जी , कविता वाचक्नवी जी और एक अन्य मित्र ।
चेहरे पर लगातार एक शर्मीली सी मुस्कान लिए तनेजा जी बोलते कम देखे गए , सुनते ज्यादा रहे ।


दूसरी मुलाकात हुई , श्री ललित शर्मा जी के साथ --सी एस ओ आई क्लब में । एक पारिवारिक मिलन के रूप में ।

तनेजा जी एक हंसमुख और विनोदी स्वाभाव के व्यक्ति हैं । उनका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर ग़ज़ब का है । यह उनके ब्लोग्स को पढ़कर ही पता चलता है । क्योंकि प्रत्यक्ष में वह कम ही बोलते हैं । लेकिन उसकी कमी वह मुस्कराते हुए आपकी बात को ध्यान से सुनकर मन ही मन ग्रहण करते हुए पूरी करते हैं । फिर उसका अच्छी तरह से विश्लेषण करते हैं ।

उनके हास्य से ओत प्रोत लेखों में देश , समाज और वर्तमान परिवेश में फैली कुरीतियों पर करारे व्यंग देखने को मिलते हैं । बेशक वो बहुत सोचते हैं , मनन करते हैं , आस पास की घटनाओं का प्रेक्षण करते हैं । फिर उसी को अपने हलके फुल्के अंदाज़ में लिखे ब्लॉग पोस्ट्स में डालते हैं ।

उनके कुछ ब्लोग्स हैं --हँसते रहो , ज़रा हटके -लाफ्टर के फटके , हँसते रहो --हंसाते रहो ---।

श्री तनेजा जी ने जो उपहार हमें दिया , वह सरसरी निगाह से देखें तो साधारण सी बात लगती है । भला कोई टिप्पणियों का क्या करेगा । लेकिन उसके पीछे जो भावना नज़र आ रही है , वह बेशकीमती है । आजकल कौन किसी के बारे में सोचता है ? किस के पास टाइम है ?

लेकिन एक छोटी सी मुलाकात कभी कभी इतना असर छोड़ जाती है कि इस नश्वर संसार में रहकर भी आदमी की सोच सात्विकी की ओर अग्रसर हो जाती है ।

मैं कई दिन से सोच रहा था कि श्री तनेजा जी को क्या रिटर्न गिफ्ट दी जाये । आज जन्माष्टमी के दिन यह पोस्ट उन्हें समर्पित कर मुझे लगता है कि इसे बढ़िया कोई और गिफ्ट नहीं हो सकती ।

गीता में श्री कृष्ण जी ने कर्म करते रहने को कहा है --लेकिन केवल सत्कर्मसत्कर्मों का फल भी सर्वोत्तम ही होता हैआज जन्माष्टमी के दिन यदि हम मन में सत्कर्म करने का दृढ निश्चय कर लें , तो शायद यही सबसे बढ़िया जन्माष्टमी का उपहार रहेगा अपने लिए और शुभकामनायें सब के लिए