ज़ाहिर है , मित्रता में कीमत नहीं , भावना महत्त्व रखती है ।
ऐसे ही एक मित्र हमें मिले --श्री राजीव तनेजा जी , जिन्होंने हमारे जन्मदिन पर हमें एक ऐसा ही उपहार देकर दिल जीत लिया ।
तनेजा जी ने सुबह १०-३० बजे हमें जन्मदिन विशेष पर टिप्पणी देकर जन्मदिन की बधाई दी ।
उसके बाद उन्होंने हमारी तब तक लिखी कुल १३४ पोस्ट पढ़ी और सब पर टिप्पणी दर्ज की । अंतिम टिप्पणी रात के ९-०९ बजे लिखकर ही उन्होंने विराम लिया । इस तरह करीब साढ़े दस घंटों में तनेजा जी ने १३४ पोस्ट पढ़ी और १३४ टिप्पणियां लिखी ।
अब यह भी एक विश्व कीर्तिमान ही हो सकता है ।
इसे क्या कहेंगे --किसी के प्रति सच्ची श्रद्धा , स्नेह , मित्रता की भावना या फिर एक जुनून !
कुछ भी हो लेकिन हमें तो श्री तनेजा जी के साहस और समर्पण पर गर्व सा महसूस हो रहा है ।
साथ ही श्रीमती संजू तनेजा जी की सहनशीलता को भी नमन करने का दिल करता है , क्योंकि उस दिन तनेजा जी के ख्यालों में सिर्फ और सिर्फ हम ही हम रहे होंगे ।
तनेजा दंपत्ति से मेरी मुलाकात केवल दो बार हुई है ।
पहली बार हम मिले थे ब्लोगर मिलन में --फरवरी २०१० में ।
बाएं से श्री राजीव तनेजा जी , श्रीमती संजू तनेजा जी , कविता वाचक्नवी जी और एक अन्य मित्र ।चेहरे पर लगातार एक शर्मीली सी मुस्कान लिए तनेजा जी बोलते कम देखे गए , सुनते ज्यादा रहे ।
दूसरी मुलाकात हुई , श्री ललित शर्मा जी के साथ --सी एस ओ आई क्लब में । एक पारिवारिक मिलन के रूप में ।तनेजा जी एक हंसमुख और विनोदी स्वाभाव के व्यक्ति हैं । उनका सेन्स ऑफ़ ह्यूमर ग़ज़ब का है । यह उनके ब्लोग्स को पढ़कर ही पता चलता है । क्योंकि प्रत्यक्ष में वह कम ही बोलते हैं । लेकिन उसकी कमी वह मुस्कराते हुए आपकी बात को ध्यान से सुनकर मन ही मन ग्रहण करते हुए पूरी करते हैं । फिर उसका अच्छी तरह से विश्लेषण करते हैं ।
उनके हास्य से ओत प्रोत लेखों में देश , समाज और वर्तमान परिवेश में फैली कुरीतियों पर करारे व्यंग देखने को मिलते हैं । बेशक वो बहुत सोचते हैं , मनन करते हैं , आस पास की घटनाओं का प्रेक्षण करते हैं । फिर उसी को अपने हलके फुल्के अंदाज़ में लिखे ब्लॉग पोस्ट्स में डालते हैं ।
उनके कुछ ब्लोग्स हैं --हँसते रहो , ज़रा हटके -लाफ्टर के फटके , हँसते रहो --हंसाते रहो ---।
श्री तनेजा जी ने जो उपहार हमें दिया , वह सरसरी निगाह से देखें तो साधारण सी बात लगती है । भला कोई टिप्पणियों का क्या करेगा । लेकिन उसके पीछे जो भावना नज़र आ रही है , वह बेशकीमती है । आजकल कौन किसी के बारे में सोचता है ? किस के पास टाइम है ?
लेकिन एक छोटी सी मुलाकात कभी कभी इतना असर छोड़ जाती है कि इस नश्वर संसार में रहकर भी आदमी की सोच सात्विकी की ओर अग्रसर हो जाती है ।
मैं कई दिन से सोच रहा था कि श्री तनेजा जी को क्या रिटर्न गिफ्ट दी जाये । आज जन्माष्टमी के दिन यह पोस्ट उन्हें समर्पित कर मुझे लगता है कि इसे बढ़िया कोई और गिफ्ट नहीं हो सकती ।
गीता में श्री कृष्ण जी ने कर्म करते रहने को कहा है --लेकिन केवल सत्कर्म । सत्कर्मों का फल भी सर्वोत्तम ही होता है । आज जन्माष्टमी के दिन यदि हम मन में सत्कर्म करने का दृढ निश्चय कर लें , तो शायद यही सबसे बढ़िया जन्माष्टमी का उपहार रहेगा अपने लिए और शुभकामनायें सब के लिए ।

