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Monday, December 28, 2020

कैसे कैसे सुधरा इंसान कोरोना काल में --

 

1.

क्वारेन्टीन और डिस्टेंसिंग जैसे शब्द अब यक्ष हो गए हैं ,

आइसोलेशन में पति पत्नी के जुदा शयन कक्ष हो गए हैं ।

कोरोना ने लोगों की जिंदगी में कर दिया ऐसा करेक्शन ,

कि युवा ही नहीं बूढ़े भी अब गृह कार्यों में दक्ष हो गए हैं ।

2.

लॉक डाउन के दिन रात तो नाकाम बीते हैं,

पर कोरोना ने सिखा दिया कि कैसे जीते हैं ।

जो लोग गर्मियों में भी नहाने से कतराते थे ,

अब सर्दियों में भी दिन में दो बार नहाते हैं। 

3.

जो काम ट्रम्प नही कर पाया है,

वो जसिंडा ने कर के दिखाया है ।

हम भी जिंदगी भर नही डरे इतना,

जितना इस कोरोना ने डराया है ।

4.

जिन सांसों से महका करता था घर,

उन्हीं सांसों से अब लगने लगा है डर ।

कोरोना तो भैया मच्छर का भी बाप निकला ,

गुड नाइट ना नाइट क्वीन करती है असर।

5.

लोग कहते हैं मैं भगवान हूँ ,

दिल से अब भी नौजवान हूं ।

पर मांफ करना भाई कोरोना,

तेरे लिए तो मैं बूढ़ा इंसान हूं ।

6.

ग़म के काले बादल अभी और छाएंगे,

जो जीवन को तहस नहस कर जाएंगे।

लेकिन खुशियों का सूरज फिर चमकेगा,

ग़म ना कर गुजरे अच्छे दिन फिर आएंगे।



6 comments:

  1. वर्तमान समय के बारे में रोचक पंक्तियाँ।

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  2. भले ही बहुत कुछ सिखा गया कोरोना, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी है सीखना

    बहुत अच्छी सामयिक रचना

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  3. धन्यवाद शास्त्री जी ।

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