Tuesday, June 4, 2013

ये दफ्तर की बात है, घर में तो डांट हम खुद ही खाते हैं ---



सरकारी नौकरी में सेवा निवृति की आयु ६० वर्ष की है। हालाँकि कई बार लगा जैसे यह बढ़कर ६२ हो जाएगी लेकिन अभी दिल्ली दूर नज़र आ रही है। बहरहाल , ६० की आयु में सेवा निवृत होना ऐसा लगता है जैसे भरी ज़वानी में घर बिठा दिया गया हो। आखिर अब तो लाइफ़ एक्स्पेकटेंसी भी ७० के करीब है। अक्सर जब कोई हमारे यहाँ रिटायर होता है तो हम बड़ी धूम धाम से उसका फेयरवेल करते हैं। हमारे रहते फेयरवेल जैसे संजीदा माहौल में भी हास्य का पुट होना स्वाभाविक सा लगता है। प्रस्तुत है , इसी विषय पर पहली बार लिखी गई एक हास्य कविता :     
  
१)
एक बात हमको, बिल्कुल भी नहीं भाती है,
कि साठ की उम्र, इतनी जल्दी आ जाती है।

कहते हैं लोग सब साठ में सठियाने लगते हैं , 
पर पाण्डेय जी तो अभी तक ज़वान लगते हैं।  

सरकार ने वफादारी का ये कैसा सिला दिया है ,
भरी ज़वानी में जो परमानेंट तबादला किया है।  

जीवन भर तो करते रहे सरकार की नौकरी ,
अब करनी पड़ेगी घरेलु सरकार की चाकरी।  

जो रौब दफ्तर में अक्सर मारते थे सब पर ,
अब देखते हैं किस का हुक्म चलेगा घर पर।  

एक दिन पाण्डेय साब की पी ऐ जब ज्यादा लेट आई, 
साहब ने सबके सामने उसको जमकर डांट लगाईं।  

हमने कहा ज़नाब , क्यों बेचारी महिला को डांट लगाते हैं , 
वो बोले ये दफ्तर की बात है, घर में तो डांट हम खुद ही खाते हैं।   

सेवा निवृति के बाद साब खुद को डांट से बचा पायें , 
इसीलिए हम देते हैं सेवा निवृति पर शुभकामनायें।  


२)

इस सरकार ने रोजी दी ,
उस सरकार ने रोटी दी। 

इस रोजी ने घर गाँव छुड़ाया ,
उस रोजी ने घर बार बसाया।   

अब पाण्डेय जी को अपना फ़र्ज़ निभाना है , 
अब जीवन भर की रोटी का क़र्ज़ चुकाना है।  

पूर्ण हुई पाण्डेय जी की सरकारी जिम्मेदारी, 
अब घर परिवार और समाज की है बारी।  

आखिर जीवन के सब उपवन जब मुरझा जाते हैं , 
तब पति पत्नि ही इक दूजे का साथ निभाते हैं।  


नोट : पाण्डेय भी कोई भी हो सकते हैं लेकिन ये हालात सभी पर लागु होते हैं।  




  

37 comments:

  1. धीरे धीरे बहत्तर हो जायेगी, पाण्डेयजी तब भी काम में लगे रहेंगे।

    ReplyDelete
  2. ६२ का शगूफा सरकार थोड़े थोड़े दिनों में छोड़ती रहती है हालांकि यह चुनावी वर्ष है तरह तरह की चीज़ें ट्राई की जाएँगी. हो सकता है कुछ दिन /साल बोनस में मिल जाएँ.

    ReplyDelete
    Replies
    1. हम भी कब से आस लगाये बैठे हैं।

      Delete
  3. साठ साल में कर्मचारियों के लिए ,नेता तो ९० में नौजवान होते है.
    latest post मंत्री बनू मैं
    LATEST POSTअनुभूति : विविधा ३

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (05-06-2013) के "योगदान" चर्चा मंचःअंक-1266 पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    ReplyDelete
    Replies
    1. शुक्रिया शास्त्री जी।

      Delete
  5. जीवन भर तो करते रहे सरकार की नौकरी ,
    अब करनी पड़ेगी घरेलु सरकार की चाकरी।

    अब असली के लठ्ठ पडने का समय आगया लगता है.:)

    रामराम.

    ReplyDelete
  6. आखिर जीवन के सब उपवन जब मुरझा जाते हैं ,
    तब पति पत्नि ही इक दूजे का साथ निभाते हैं।

    ये जोरदार कही, आखिर उसके लठ्ठ में प्यार जो छुपा है, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

    ReplyDelete
    Replies
    1. सेवा निवृति के बाद लट्ठम लट्ठा ही होते रहेंगे। :)

      Delete
  7. बहुत सुंदर रचना,पर ये रिटायरमेंट की बात नेताओं पर लागू क्यों नही होती,,अगर नेता जीवित रहने तक चुनाव लड़ सकते है,तो कर्मचारियों को भी ६० के बाद इक्छानुसार नौकरी करने की छूट मिलनी चाहिए

    recent post : ऐसी गजल गाता नही,

    ReplyDelete
    Replies
    1. नेता जन सेवक होते हैं। :)

      Delete
  8. वाकई यही लगता है कि उम्र को क्या हो गया !!! कल नौकरी शुरू हुई थी आज ख़त्म भी हो गयी ..
    यही तो प्यारे जीवन है ..

    ReplyDelete
  9. जब नेता रिटायर नहीं होते है , हमारा भी मन नहीं करता कि नौकरी से हमे सरकार रिटायर करे हमे भी नेताओ कि तरह मृत्यु पर्यंत काम करने का अधिकार चाहते है ताकि आपसी जुगल बंदी बनी रहे

    ReplyDelete
  10. नौकरी कहाँ ख़तम होती है ...कुछ न कुछ काम चलता ही रहता है
    शानदार कहा है .

    ReplyDelete
  11. यहाँ कई प्रकार के पाण्डेय जी पाये जाते हैं। आप कविता लिखते हैं या कविता की आड़ में तीर चलाते हैं..! हम तो भरी ज़वानी में...हर्ट हुए जाते हैं। :)

    ReplyDelete
  12. 58 साल भी थी कभी रिटायरमेंट की उम्र ..... दोनों कवितायें अच्छी लगीं

    ReplyDelete
  13. विचारणीय सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .पूर्णतया सहमत बिल्कुल सही कहा है आपने ..आभार . धरती माँ की चेतावनी पर्यावरण दिवस पर
    साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

    ReplyDelete
  14. वाह, रिटायरमेंट के संजीदा मौके पर भी हंसी बिखेरना आसान काम नहीं है। हमने तो ट्रांसफर पर भी लोगों को आँसू बहाते देखा है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. अनुराग जी, हमने इस ट्रेंड को चेंज किया है।

      Delete
  15. हम रिटायरमेंट मुक्त हैं।

    ReplyDelete
  16. सर ये खबर तो हमने भी पढी थी कल और अब तो लगता है कि ये उम्र सीमा और बढाई जाएगी । ब्लॉगिरी का मज़ा तो रिटायरी के साथ दुगुना होता जाएगा सर ....बढिया है दोनों ही :)

    ReplyDelete
    Replies
    1. ये सही है , रिटायर्मेंट के बाद फुल टाइम ब्लॉगिंग ! :)

      Delete
  17. रिटायरमेंट की बात नेताओं पर लागू क्यों नही होती
    बहुत ही अच्छी लगी मुझे रचना........शुभकामनायें ।
    सुबह सुबह मन प्रसन्न हुआ रचना पढ़कर !

    ReplyDelete
  18. 'घर में तो डांट हम खुद ही खाते हैं'
    - सच तो यह है कि जो घर में डाँट खाते हैं वे सबके सामने कबूलने की हिम्मत कर ही नहीं पाते !

    ReplyDelete
    Replies
    1. जी , कवियों को छोड़कर। :)

      Delete
  19. सेवानिवृत्ति होगी तभी तो नयी पीढी को अवसर मिलेगा।

    ReplyDelete
  20. बढ़िया रचना...

    ReplyDelete

  21. आखिर जीवन के सब उपवन जब मुरझा जाते हैं ,
    तब पति पत्नि ही इक दूजे का साथ निभाते हैं।------

    जीवन का सच यही है------
    गहन अनुभूति
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सादर

    आग्रह है
    गुलमोहर------

    ReplyDelete
  22. दूसरी रोजी की संभावनाएं क्या नज़र नहीं आती हैं ? :p

    ReplyDelete
  23. बहुत सुंदर
    सठियाने की उम्र से हम भी दूर नहीं हैं

    ReplyDelete
    Replies
    1. लेकिन वर्मा जी आजकल आप कहाँ रहते हैं ?

      Delete
  24. बहुत बढ़िया :-)
    वैसे govt.डॉक्टर्स की रिटायर्मेंट age हमारे यहाँ तो 65 है :-)

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
    Replies
    1. अनु जी , ६५ सिर्फ प्रोफेसर्स की ही होती है। हमारी तो ६० ही है।

      Delete
  25. ये अंतर्संबंधों की कथा अंतर्मन से सरकारी नौकरी और घरु चाकरी को खुलकर बतलाती है आपका समुद्र मंथन सदैव धरावासियों को जीवन का संबल देती है प्रभु का प्रसाद आप बाँटते रहिये और माँ सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहे ...

    ReplyDelete
  26. पांडे ज तो अभी भी लगे हुए हैं ... अप क्यों सत्तर की चिंता लार रहे हैं ...
    मजा आया जी इस निर्मल हास्य में ...

    ReplyDelete