Tuesday, March 6, 2012

होलिका तो होलिका , कहीं रावण भी जल न पाए --



कुछ
वर्ष पहले दिल्ली में होली के अवसर पर मौसम में हुए बदलाव पर एक कविता लिखी थी जो शायद आज भी उतनी ही तर्कसंगत लगती है


जनता को चिंता सता रही थी ,

क्योंकि होली करीब आ रही थी।
पर पानी की किल्लत थी भारी
कैसे खेलेगी होली जनता बेचारी ।

ऊपर वाले ने आसमान से देखा,
धरा पर उड़ती धूल, तालों में सूखा।
मासूम चेहरे गर्मी से झुलस रहे थे ,
नाजुक पौधे धूप में सूख रहे थे।

मैली होकर सूख रही थी गंगा,
जमना का तल भी हो रहा था नंगा।
नल के आगे झगड़ रही थी ,
शान्ति,पारो और अमीना।

नाजुक बदन कोमल हाथों में लिए बाल्टी ,
मिस नीना चढ़ रही थी जीना।


ये तो कलियुग का प्रकोप है , उपरवाले ने सोचा,
और करूणावश पसीजने से अपने मन को रोका।
पर कलियुग पर आपके कर्मों का पलडा था भारी ,
इसीलिए धरती पर उतरी इन्द्र की सवारी।

फ़िर छमछम बरसा पानी , धरती की प्यास बुझाई ,
पर होलिका दहन में बड़ी मुसीबत आई।
मिट्टी के तेल से, मुश्किल से जली होली,

हमने सोचा इस बरस होली तो बस होली।

पर देखिये चमत्कार, कुदरत ने फ़िर से बदला रूप,
और होली के दिन बिखर गई, नर्म सुहानी धूप।
फ़िर जेम्स, जावेद, श्याम और संता ने मिल कर खेली होली,
और शहर में धर्मनिरपेक्षता की जम कर तूती बोली।

युवा है कलियुग अभी, कहीं जवां हो न जाए,
और मानव के जीवन में इक दिन ऐसा आए,
कि होलिका तो होलिका, रावण भी जल न पाये।
सत्कर्मों को अपनाइए,
बस यही है एक उपाय

आप सब को एक सौहार्दपूर्ण होली की हार्दिक शुभकामनायें

32 comments:

  1. आप सब को भी होली मंगलमय हो।

    ReplyDelete
  2. bahut sundar prastuti.............holi ki hardik shubhkamnayein.

    ReplyDelete
  3. लगे तो रहते हैं,पर कभी-कभार बहक ही जाते हैं कदम। होली के दौरान ख़ास तौर से!

    ReplyDelete
    Replies
    1. होली पर ग़र कदम न बहके तो कैसी होली !

      Delete
  4. होली के अवसर पर बहुत बढ़िया यथार्थ रचना.
    आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनायें..

    ReplyDelete
  5. रंगोत्सव पर आपको सपरिवार बधाई भाई जी !

    ReplyDelete
  6. पर देखिये चमत्कार, कुदरत ने फ़िर से बदला रूप,
    और होली के दिन बिखर गई, नर्म सुहानी धूप ।

    सुन्दर सामयिक रचना ... होली की शुभकामना और बधाई ...

    ReplyDelete
  7. होली मुबारक हो >-)))))

    ReplyDelete
  8. मौसम के बदलते स्वभाव पर सुन्दर कविता! धन्यवाद!
    होली सभी को मंगलमय हो!

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    रंगों की बहार!
    छींटे और बौछार!!
    फुहार ही फुहार!!!
    होली का नमस्कार!
    रंगों के पर्व होलिकोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ!!!!

    ReplyDelete
  10. holi ki fuhaar aur mausam ka badalta mijaaj aaj yahan bhi hai holi se ek din pahle to barish hai kal holika dahan ke vaqt dekhiye kya hota hai ....bahut achchi gahan abhivyakti liye prastuti.holi ki shubhkamnayen.

    ReplyDelete
  11. यही स्थिति आ गई है ... होली की शुभकामनायें

    ReplyDelete
  12. काश कि सच्ची धर्मनिरपेक्षता आ सके. एक अच्छी कविता के लिये धन्यवाद.

    ReplyDelete
  13. सुन्दर सन्देश! शुभ होली!

    ReplyDelete
  14. वाह! आपको भी सपरिवार होली की शुभकामनायें!

    ReplyDelete
  15. आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  16. होली की जबरिया शुभकामनायें...हालाँकि अबकी होली में इसके पक्के दावेदार चुनाव हारे हुए नेता हैं !

    ReplyDelete
    Replies
    1. जबरिया मायने --ज़बर्ज़स्त या ज़बर्ज़स्ती ? :):)

      Delete
    2. JCMar 6, 2012 10:00 PM
      'उत्तर भारत' में ठण्ड आरम्भ होने से पहले दिवाली अनादिकाल से मनाई जाती आ रही है... और उसी प्रकार गर्मी आने पर रंगों के त्यौहार होली...
      और, इन्हें "सत्य की असत्य पर विजय" के प्रतीक के रूप में, किसी स्वार्थी राक्षस के वध के रूप में किसी न किसी भगवान् विष्णु के अवतार / परोपकारी देवता के साथ जोड़ दिया गया देखा जा सकता है...
      कहानियां कई हो सकती हैं - उदाहरण के रूप में, दिवाली को अधिकतर राम-लक्ष्मण द्वारा शक्तिशाली लंकापति रावण की बहन सूर्पणखा की नाक काटने और तत्पश्चात रावण वध के बाद अयोध्या आगमन पर जनता द्वारा मनाया जाना... और होली को राक्षस हिरन्यकश्यप की वरदान प्राप्त बहन होलिका के अपने ही भतीजे प्रहलाद को मारने हेतु अग्नि में बैठ स्वयं जल जाने के रूप में, और राक्षस की भी अंततोगत्वा स्वयं अंत में नरसिंह के नाखूनों द्वारा पेट फाड़ मारा जाना माना जाता है...
      कलियुग में अज्ञानतावश देवता और राक्षश जबरिया (?) होली मनाते है...

      Delete
  17. युवा है कलियुग अभी, कहीं जवां हो न जाए,
    और मानव के जीवन में इक दिन ऐसा आए,
    कि होलिका तो होलिका, रावण भी जल न पाये।
    सत्कर्मों को अपनाइए, बस यही है एक उपाय
    बहुत saaf sandesh है is कविता में .
    Holi मुबारक !

    ReplyDelete
  18. संवेदनशील चिंतन ... होली के दिन को लेकर ..
    आपको और परिवार में सभी को होली की मंगल कामनाएं ...

    ReplyDelete
  19. .


    प्यारी रचना लिखी डॉक्टर साहब !

    ReplyDelete
  20. **♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**
    ~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~
    *****************************************************************
    ♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
    ♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



    आपको सपरिवार
    होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    *****************************************************************
    ~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~^~
    **♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**♥**

    ReplyDelete
  21. पर देखिये चमत्कार, कुदरत ने फ़िर से बदला रूप,
    और होली के दिन बिखर गई, नर्म सुहानी धूप।
    फ़िर जेम्स, जावेद, श्याम और संता ने मिल कर खेली होली,
    और शहर में धर्मनिरपेक्षता की जम कर तूती बोली।

    होली के पावन पर्व की आपको हार्दिक शुभकामनाये !

    ReplyDelete
  22. समयानुकूल रचना... बहुत बहुत बधाई...
    होली की शुभकामनाएं....

    ReplyDelete
  23. आपको सपरिवार होली की शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  24. भावपूर्ण अनुपम अभिव्यक्ति.
    आपकी शानदार प्रस्तुति के लिए आभार.
    होली के रंगारंग शुभोत्सव पर बहुत बहुत
    हार्दिक शुभकामनाएँ

    ReplyDelete
  25. ' मानव के जीवन में इक दिन ऐसा आए,
    कि होलिका तो होलिका, रावण भी जल न पाये।'
    - यही प्रश्न अगर मनों में उठने लगे तो ढर्रा ही बदल जाये !
    सपरिवार होली की शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  26. आप सभी का हार्दिक आभार ।
    और शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  27. कविताएं अख़बार की तरह होती हैं कभी भी पढ़ी लो वही बात मिलती है

    ReplyDelete