Wednesday, November 23, 2011

दिल्ली में आयोजित हुआ --काईट फेस्टिवल --एक झलक .



नई
दिल्ली की शताब्दी मनाने के लिए आजकल दिल्ली में तरह तरह के समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं कहीं कव्वाली , तो कहीं संगीत और कहीं नृत्य के कार्यक्रम

पिछले रविवार को इण्डिया गेट पर आयोजित किया गया --काईट फेस्टिवल जिसमे विभिन्न प्रकार की पतंगों की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।

प्रस्तुत हैं इस शाम की कुछ झलकियाँ :

इण्डिया गेट जहाँ हम पहुंचे शाम होने परतब तक प्रतियोगिता तो ख़त्म हो चुकी थी लेकिन शाम रंगीन हो चली थी


काईट फेस्टिवल का आयोजन किया दिल्ली टूरिज्म ने



एक पेड़ पर टंगी थी अनेक चरखियांपृष्ठभूमि में इण्डिया गेट रौशनी में नहाया हुआ



दूसरे एंगल सेपृष्ठभूमि में बस नीला आसमान


एक स्टाल पर पर्दर्शित रंग बिरंगी पतंगें



रात में पतंगों की यह लड़ी आकर्षण का केंद्र बनी



यह चाटवाला भी फेस्टिवल का आनंद ले रहा थाश्रीमती जी को यह चाट बहुत पसंद है , विशेषकर खट्टी खट्टी अमरक के साथ


खाने का विशेष प्रबंध भी था , एक मशहूर केटरर द्वारा

ऐसे में हम तो भल्ला पापड़ी और मेडम आलू टिक्की ही पसंद करती हैं



इस बीच इण्डिया गेट की पृष्ठभूमि में बने मंच पर रंगारंग कार्यक्रम चल रहे थे ।
पहले जादूगर ने जादू दिखाया ।
फिर शुरू हुआ पंजाबी अकादमी के कलाकारों द्वारा भांगड़ा और गीत संगीत ।
पंजाबी गानों की धुनों पर स्वयं ही श्रोताओं के पैर थिरकने लगते हैं ।
साथ में लेज़र शो भी समारोह में चार चाँद लगा रहा था ।




मंच को बड़ी बड़ी रंग बिरंगी पतंगों से सजाया गया था



उधर मैदान में अभी भी कुछ शौक़ीन अँधेरे में भी पतंग उड़ा रहे थे



कार्यक्रम के अंत में बाहर आइसक्रीम वालों की कतार लगी थी । लेकिन खाकर ऐसा लगा जैसे आइसक्रीम नकली हो ।



पूरे क्षेत्र में सुरक्षा का भी पूरा प्रबंध थाइसलिए सब बेख़ौफ़ इण्डिया गेट पर रात देर तक पिकनिक मना रहे थे

ज़ाहिर है , यूँ ही नहीं दिल्ली देश का दिल है

नोट : काईट फेस्टिवल की कुछ और तस्वीरें चित्रकथा पर देखिये

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36 comments:

  1. वाह यूँ लगा जैसे हम भी वहीं थे।

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  2. काश हम भी वहां होते ...एक से बढ़कर एक सुंदर तस्वीर

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  3. काईट फेस्टिवल की झलकिया देखकर मन प्रसन्न हो गया

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  4. वाह जबर्दस्त्त आयोजन लग रहा है यह तो ..शुक्रिया हमें भी इसमें शामिल करने का.
    बहुत ही खूबसूरत झलकियां हैं.

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  5. हर बुजुर्ग में एक बच्चा होता है, या कहिये उसका भूत होता है जो उसे अपने बचपन की याद दिला देता है...
    डॉक्टर साहिब धन्यवाद अपने मन में ही पतंग उड़ाने के दिनों की याद दिलाने के लिए :)

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  6. अद्भुत! अद्भुत!! अद्भुत!!!

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  7. फेस्टिवल के सुन्दर चित्र देखकर मन-प्रसन्न हो गया :)

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  8. @ "जाटदेवता" संदीप पवाँर said...

    हुए क्यों नहीं भाई ?
    चलिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में हो आइये , वर्ना अगली बार भी यही कहेंगे ।

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  9. दराल साहब मामा जी राजीव गाँधी अस्पताल के I.C.U. में भर्ती है वैंटिलेटर पर डालने की नौबत आ सकती है इस कारण कही जाने का विचार नहीं आ रहा है। अब तो बस 24 दिसम्बर को ही बाहर जाऊँगा। वही आपसे भी मुलाकात होगी।

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  10. वाह इन्द्रधनुषी रंगारंग कार्यक्रम

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  11. सत्ता के गलियारों में भी पतंग की डोर काटने की तिकड़म भिड़ाई ही जा रही है। सो आम आदमी को भी इसका रस मिलना चाहिए।

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  12. आपको तो और लोगों को भी ऐसी आईसक्रीम न खाने की ताकीद करनी चाहिए थी ,आपने खुद कैसे खा ली?विवरण आनंद दायक है। जाकर देखने की जहमत से बचाने के लिए आपको धन्यवाद ।

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  13. बेहतरीन फोटोग्राफ हम तो दिल्ली पहुच गए डाक्टर साहब खूबसूरत चित्रकथा लिखी

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  14. Trying again to post my unpublished comment:

    हर बुजुर्ग में एक बच्चा होता है, या कहिये उसका भूत होता है जो उसे अपने बचपन की याद दिला देता है...
    डॉक्टर साहिब धन्यवाद अपने मन में ही पतंग उड़ाने के दिनों की याद दिलाने के लिए :)

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  15. ओह ! संदीप जी , दुःख हुआ जानकर । आशा करता हूँ कि जल्दी ही ठीक होंगे ।

    माथुर जी , बहुत सालों के बाद ऐसा किया था । तब ऐसा नहीं होता था । लेकिन लगता है मिलावट का असर सब जगह देखने को मिल रहा है ।

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  16. JC said...

    Trying again to post my unpublished comment:

    हर बुजुर्ग में एक बच्चा होता है, या कहिये उसका भूत होता है जो उसे अपने बचपन की याद दिला देता है...
    डॉक्टर साहिब धन्यवाद अपने मन में ही पतंग उड़ाने के दिनों की याद दिलाने के लिए :)
    November 23, 2011 7:33 PM

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  17. इतना बडा आयोजन! मुझे पता नहीं था.. यहां हैदराबाद में जनवरी के माह में मकर संकरांति को पतंगों के उडाने का आयोजन होता है। चलो कुछ परिवारों का पेट भी पल जाता है॥ सुंदर चित्रों के लिए आभार डॉक्टर साहब॥

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  18. बहुत मनोरम चित्र लगाये हैं .. शानदार ..

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  19. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल आज 24-- 11 - 2011 को यहाँ भी है

    ...नयी पुरानी हलचल में आज ..बिहारी समझ बैठा है क्या ?

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  20. .


    एक से बढ़कर एक सुंदर तस्वीर !

    मन-प्रसन्न हो गया !

    वाकई , दिल्ली देश का दिल है… :)

    शुक्रिया हमें भी इसमें शामिल करने के लिए !

    आभार डॉक्टर साहब

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  21. आप ने कभी पतंग उड़ाई है?

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  22. खट्टी-मीठी कमरख देखकर पानी आ गया। आपके यहाँ अमरख कहते हैं क्‍या? अच्‍छा है पंतगबाजी का मेला।

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  23. बहुत समय निकाल लेते हैं आप भी !

    सुन्दर चित्र-वर्णन !

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  24. अच्छे चित्रों से सजा वर्णन है |आपने हमें भी उस समारोह में पहुंचा दिया |
    बधाई |
    आशा

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  25. ये कैट फेस्टिवल तो हमारे दुबई में भी धूम धाम से होता है .. मज़ा आ गया आपके चित्र देख के ... और पानी आ गया खाना देख के ...

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  26. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-708:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  27. द्विवेदी जी , ख्वाबों ख्यालों में तो रोज उड़ाते हैं । :)
    लेकिन हकीकत में हमने कभी नहीं उड़ाई ।
    लेकिन आपने पूछा क्यों ?

    त्रिवेदी जी , जहाँ चाह ,वहां राह । वैसे ब्लोगिंग का समय कम कर दो तो किसी भी काम के लिए वक्त निकल आएगा ।

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  28. आभार...लगा हम वहीं है!!

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  29. एक पेड़ पर टंगी थी अनेक चरखियां । पृष्ठभूमि में इण्डिया गेट रौशनी में नहाया हुआ ।
    ...यह चित्र तो इतना अच्छा लगा कि क्या कहूँ! ..वाह! इसे तो अभी लैपटॉप में सजाता हूँ।

    कुछ न पूछिये ब्लॉगिंग में कैसे मजे आ रहे हैं।
    लगता है हम भी दिल्ली में, पतंग उड़ा रहे हैं।

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  30. सुन्दर manohar छवियों vaalirt . behatreen ripo

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  31. वाह! मनभावन चित्र। वहाँ साक्षात होने की बात ही और है। बात पतंग की हो तो अपना दिल तो बरेली के पेंच और मांझे को याद करने लगता है।

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  32. शुक्रिया देवेन्द्र जी , वीरुभाई जी , अनुराग जी .
    अगली पोस्ट और भी पसंद आएगी , ऐसा विश्वास है .

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