एक कार्यक्रम में शामिल होने गए तो नाम पता पूछने के बाद एक आयोजक युवक ने पूछा --सर आपकी उम्र क्या लिखूं । मैंने कहा भैया , यदि लिखना ज़रूरी है तो लिख लो
२५ +। यह सुनकर चौंककर उसकी आँखें ऐसे फ़ैल गई जैसी
हाइपरथायरायडिज्म के रोगी की होती हैं । बोला --सर आपको नहीं लगता कि आप कुछ उल्टा बोल रहे हैं । मैंने कहा भैया मैं बिल्कुल सुलटा बोल रहा हूँ । मैंने अभी हाल ही में अपने जन्मदिन की रजत जयंती ( सिल्वर जुबली ) मनाई है ,----- दूसरी बार ।
अब पहली हो या दूसरी , सिल्वर जुबली तो पच्चीस साल में ही होती है न । पिछले दिनों
दो बार सिल्वर जुबली मना चुके ऐसे
ही कुछ नौज़वानों से मुलाकात का अवसर मिला जब श्री
अरविंद मिश्र जी का दिल्ली आगमन हुआ । अरविन्द जी दो तीन बार दिल्ली आये भी तो मुलाकात न हो सकी । इसलिए इस बार जब पता चला कि उनका तीन दिन रुकने का कार्यक्रम है तो हमने भी मिलने का कार्यक्रम बना ही लिया ।
सतीश सक्सेना जी से बात हुई और मिलने का दिन , समय और स्थान निश्चित हो गया । तय हुआ कि ब्लोगर मिलन न होकर व्यक्तिगत रूप से मिलना करने के लिए बस दोनों ही चलेंगे ।
और हम पहुँच गए यू पी भवन जहाँ ४० साल से दिल्ली रहते हुए भी हम कभी नहीं गए थे ।
आखिर हम भी वी आई पी लोगों के अस्थायी निवास पर पहुँच गए । अरविंद
जी से पहली बार मिलना हो रहा था हालाँकि ब्लॉग पर तो अक्सर मिलते ही रहते हैं । लेकिन वीरुभाई के नाम से ब्लॉग लिखने वाले श्री वीरेंदर शर्मा जी से तो कभी ब्लॉग पर भी मुलाकात नहीं हुई थी ।

यू
पी भवन की लॉबी में दोनों से प्रथम परिचय हुआ । परिचय के दौरान वीरुभाई ने अनायास ही वही सवाल किया जो अक्सर मुझसे किया जाता है --
टी एस से क्या बनता है ? चिर परिचित सवाल सुनकर हमें भी वही घटना याद आ गई जिसका जिक्र
यहाँ है ।
लेकिन हम बस मुस्करा कर रह गए क्योंकि तब तक मन में एक विचार आ चुका था --बताने की बजाय दिखाने का ।

और हम सब तैयार हो गए , पिकनिक पर जाने के लिए ।
पहला पड़ाव था --
इण्डिया गेट । वहां तक पहुँचने में ड्राइव करते हुए बातों में मशगूल होते हुए सतीश जी ने दो बार यातायात के नियमों का उल्लंघन किया ।
लेकिन ब्लोगिरी का प्रभाव देखिये कि दोनों बार चार चार ब्लोगर्स को एक साथ देखकर बेचारे पुलिस वाले की हिम्मत ही नहीं पड़ी सिवाय हाथ जोड़कर राम राम करने के । 
इण्डिया गेट पर सतीश जी ने अपने एस एल आर कैमरे से जम कर शूटिंग की । शानदार कैमरा देखकर ही सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई ।
घूम घाम कर और इण्डिया गेट पर वह स्थान देखकर जहाँ हमारा नाम अंकित है , वीरुभाई को बड़ा आनंद आया । 
बाद में क्लब में बैठ बड़ी ही गंभीर मुद्रा में उन्होंने न जाने क्या सुनाया कि --

सतीश जी खिलखिला कर
हंस पड़े ।
लहलहाती घनी जुल्फों और काली मूंछों के साथ इस मुस्कान से उनके ही नहीं , सभी के चेहरे पर रौनक आ गई । इस बीच खान पान शुरू हो चुका था । आखिर क्लब में लोग जाते ही हैं गपियाते हुए खाना पानी ( खाने पीने ) का आनंद लेने ।
यहाँ अरविंद जी के
साथ ब्लडी मेरी वाला प्रसंग बड़ा दिलचस्प रहा । लेकिन उन्होंने भी
बखूबी ब्रह्मचर्य का पालन किया
( गीता अनुसार ) । अब यह समझ न आये तो टिप्पणियों में साफ किया जायेगा ।
अरविंद मिश्र : हम अरविंद जी की शुद्ध और सुसंस्कृत हिंदी के तो हमेशा कायल रहे ही हैं । साथ ही पोस्ट और टिप्पणियों में उनकी स्पष्टवादिता से भी हमेशा आनंदित रहे हैं ।
ब्लोगिंग में बनावटीपन हमें भी नहीं भाता ।
उनके यही गुण बहुत प्रभावित करते हैं ।
क्योंकि यह ब्लोगर मीट नहीं थी , इसलिए ब्लोगिंग पर कम और व्यक्तिगत बातें ज्यादा हुई और हमारा ध्येय
भी यही था ।
वीरुभाई : उम्र में भले ही हमसे १० साल बड़े हों , लेकिन जिंदगी के प्रति उनका उत्साह देखकर हम
भावी भूतपूर्व नौज़वानों को भी जिंदगी को जिन्दादिली से जीने की प्रेरणा मिली । बहुत ही हंसमुख इन्सान हैं । हों भी क्यों नहीं , आखिर लम्बे अर्से तक हरियाणा में कार्यरत जो रहे हैं ।
बस क्लब में शोर अधिक होने की वज़ह से हम उनकी कविता की फरमाइश पूरी नहीं कर सके । लेकिन वह फिर सही ।
सतीश सक्सेना : क्या कहें ! बेशक यारों के यार हैं । ब्लॉग जगत में सबसे चहेते ब्लोगर्स में से एक हैं । कारण आप मिलकर थोड़ी देर में ही जान सकते हैं । मानवीय भावनाओं की कद्र करना तो कोई सतीश जी से सीखे ।
और इस तरह शानदार गुजरी दिल्ली की एक शाम , जो हम सबको हमेशा याद रहेगी ।
नोट : ब्लॉगजगत में और भी बहुत से लोग हैं जिनसे दिल से मिलने का दिल करता है . इंतजार रहेगा आपका .