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Saturday, July 23, 2011

इसे पढ़कर आप भी डॉक्टर बन सकते हैं ---.

एक समाचार से पता चला की दिल्ली में हर तीसरा व्यक्ति इन दिनों वाइरल बुखार से ग्रस्त है .हालाँकि हालात इतने बुरे भी नहीं हैं , लेकिन यह सच है की बरसात के दिनों में वाइरल इन्फेक्शन बहुत बढ़ जाते हैं .

आम आदमी की जुबान में इन दिनों डॉक्टरों की चांदी हो जाती है .

लेकिन यदि आप वाइरल फीवर की चपेट में आ ही जाएँ , तो क्या करना चाहिए --आइये हम बताते हैं ( बिना किसी फीस के ).

बुखार :

अचानक बुखार होने का सबसे प्रमुख कारण है वाइरल इन्फेक्शन . यूँ तो वाइरस लाखों किस्म के होते हैं लेकिन इनमे से कुछ ही मनुष्य को प्रभावित करते हैं .
इनमे सबसे कॉमन है --राईनोवाइरस --जिससे कॉमन कोल्ड यानि जुकाम होता है .

१) कॉमन कोल्ड : यह सबसे कॉमन इन्फेक्शन है , बदलते मौसम में . सबसे पहले नाक बहने लगती है , फिर गला ख़राब और खांसी , साथ में बुखार . अक्सर बहती नाक २-३ दिन में रुक जाती है लेकिन खांसी यदि ज्यादा हो जाए तो दवा लेना ज़रूरी हो जाता है . बुखार भी २-४ दिन में उतर जाता है .
डॉक्टर्स इसे यु आर आई कहते हैं .

२) वाइरल फीवर : इसमें सिर्फ बुखार होता है , साथ में सर दर्द , बदन दर्द , कमजोरी और थकावट होती है . ज़ाहिर है , इस बुखार में जुकाम और खांसी नहीं होती . यह बुखार १--७ दिन में अपने आप उतर जाता है , बिना दवा लिए भी .

१ और २ नंबर के बुखार एयर बोर्न इन्फेक्शन हैं यानि इनके वाइरस वायु में रहते हैं और साँस के साथ शरीर में प्रवेश करते हैं . इसलिए इनसे बच पाना लगभग नामुमकिन है .

३) अन्य वाइरल फीवर : डेंगू , चिकनगुनिया , येल्लो फीवर आदि . इनमे से डेंगू और चिकनगुनिया कॉमन हैं , लेकिन ये बुखार मच्छर के काटने से होते हैं , इसलिए इनकी रोकथाम की जा सकती है . येल्लो फीवर भारत में नहीं होता .

४) मलेरिया : ठण्ड के साथ अचानक बुखार चढ़ जाता है . यह भी मच्छर के काटने से ही होता है . इसलिए रोकथाम की जा सकती है .

५) यदि ७ दिन तक बुखार न उतरे और रोगी की हालत सही न लग रही हो तो typhoid होने की सम्भावना बढ़ जाती है .

६) यदि खांसी के साथ हल्का बुखार २-३ सप्ताह से चल रहा हो तो टी बी हो सकती है .

बुखार के उपरोक्त कारण हमारे देश में मुख्य तौर पर पाए जाते हैं . इस तरह के संक्रमण मुख्यतया विकासशील देशों में ही होते हैं जहाँ रहन सहन का स्तर ज्यादा अच्छा नहीं है .

बुखार का घरेलु इलाज :

बुखार का इलाज स्वयं नहीं करना चाहिए . डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य होता है वर्ना बहुत बड़ा धोखा खा सकते हैं .
लेकिन जब तक डॉक्टर के पास जा पायें , तब तक घर में क्या उपचार किया जा सकता है , यह जानिए :

१) आराम : बुखार में पहला काम करें --आराम . इससे बुखार जल्दी उतरेगा .
२) दवा : यदि बुखार १०० के आस पास या ज्यादा है तो एक गोली पेरासिटामोल ले सकते हैं जिसे ४-६ घंटे में दोबारा लिया जा सकता है . यह सबसे सुरक्षित दवा है . कभी भी एस्पिरिन न लें , यह खतरनाक हो सकती है .
३) हाइड्रोथेरपी : बुखार १०१-१०२ या इससे ऊपर होने पर स्पोंजिंग करने से राहत मिलेगी .
४) खाना : हल्का खाना अवश्य खाएं . न खाने से कमजोरी ज्यादा आएगी .
५) पानी : बुखार में dehydration होने का खतरा रहता है . इसलिए द्रव्य जैसे पानी , दूध , चाय , शरबत आदि उचित मात्रा में पीते रहना चाहिए .
६) समय मिलते ही एक बार डॉक्टर को अवश्य मिल लें .

याद रहे वाइरल बुखार एक से सात दिन में बहुधा उतर जाता है . इससे ज्यादा चलने पर जांच आवश्यक हो जाती हैं .
कहते हैं वाइरल फीवर दवा लेने से एक सप्ताह में ठीक हो जाता है . दवा न लेने से सात दिन में उतर जाता है .
अब ज़रा सोचिये -- एक मरीज़ एक डॉक्टर से ६ दिन तक इलाज कराता रहा लेकिन बुखार नहीं उतरा . सातवें दिन उसने डॉक्टर बदल लिया . दूसरे डॉक्टर ने दवा दी और बुखार ख़त्म . दूसरा डॉक्टर मरीज़ की नज़र में काबिल डॉक्टर बन गया .

क्या करें हमारे देश में ऐसा ही होता है .