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Thursday, December 8, 2011

हर बीमारी का शर्तिया इलाज --डॉ पाबला जी भिलाई वाले.



ब्लोगिंग में अपनी एक आदत है --जो पोस्ट पसंद आए , मैं उस पर दोबारा ज़रूर जाता हूँ . कल वीरुभाई जी की एक पोस्ट पढ़ी -- नाश्ते के लिए अब वक्त कहाँ ? पढ़कर ऐसा लगा जैसे हमारी ही हालत बयाँ कर दी . दूसरों के विचार जानने की उत्सुकता बढ़ी तो दोबारा गए .

लगभग सभी ने इस बात का अनुमोदन किया . वैसे भी भाग दौड़ की शहरी जिंदगी में लोगों के पास सचमुच नाश्ते का भी समय नहीं होता .

लेकिन अशोक सलूजा जी की टिप्पणी ने ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया . लिखा था --वीरू भाई टिप्पणी गायब हो रही है ...उसे स्पैम से निकालें ऐसे ...साथ ही पाबला जी का एक लिंक भी दिया हुआ था --

http://www.blogmanch.com/viewtopic.php?f=7&t=25

इसे पढ़कर अपनी तो आँखें ही खुल गई .

सौ सौ साल जियो हमारे पाबला जी .

कई दिनों से ऐसा महसूस हो रहा था जैसे ब्लोगर्स में ब्लोगिंग के प्रति उदासीनता सी आ गई है . कई मित्रों की शिकायत आ रही थी की टिप्पणियां नहीं छप रही . मामला कुछ समझ नहीं आ रहा था . यह तो अंदेशा था की यह सब गूगल की करामात है लेकिन हल क्या है , यह समझ नहीं आ रहा था .


लेकिन वाह रे पाबला जी . लगता है जैसे उनके पास हर तकनीकि समस्या का हल है .सच पूछिए तो हम डॉक्टर्स के पास भी हर बीमारी का इलाज़ नहीं होता .
लिंक पर जाकर देखा --जैसा बताया गया था , वैसा किया --और यह क्या, पिछली ४-५ पोस्ट की ६५ टिप्पणियां स्पैम में पड़ी थी .

अब समझ आया क्यों टिप्पणीकार शिकायत कर रहे थे . लेकिन स्पैम हटाने से सारी टिप्पणियां प्रकाशित हो गई .
आशा करते हैं की एक बार स्पैम से हटाने के बाद दोबारा ऐसा नहीं होगा .

फ़िलहाल तो हम श्री पाबला जी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं . पाबला जी , हमारी ओर से आपकी एक ट्रीट निश्चित रही .


Thursday, August 12, 2010

आखिर क्यों हो गई दिल से लिखी पोस्ट स्वाहा ---

हमारे दादाजी घुड़सवारी के बड़े शौक़ीन थे । एक दिन उन्होंने एक शानदार घोड़ी खरीदी । देखने वालों में से किसी ने कहा --बड़ी किस्मत वाली घोड़ी है । देखना नौ महीने के अन्दर आपको पोता मिलेगा । वैसा ही हुआ --ठीक नौ महीने बाद मेरा जन्म हुआ । खानदान में अपनी पीढ़ी की सबसे बड़ी संतान ।

इस तरह पूरे खानदान के करीब १५ भाईयों के ३० बच्चों के हम जन्मजात ताऊ बन गए ।

११ अगस्त को हमारा जन्मदिन था । १० तारीख शाम को श्री पाबला जी का फोन आया --पहली बार फोन पर बात हुई । पहचानने का सवाल ही नहीं था । हम भी हैरान थे कि एक दिन पहले भला कौन हो सकता है बधाई देने वाला । और जब यही बात पाबला जी ने भी कही तो हम फ़ौरन ताड़ गए कि ऐसा व्यक्ति तो एक ही हो सकता है । और इस तरह हुई शुरुआत बधाई संदेशों की ।

हमने भी इस अवसर पर एक पोस्ट लिख डाली और सुबह के लिए सड्युल कर दी ।

अब देखिये इत्तेफाक पर इत्तेफाक ।

* १० अगस्त को ही मालूम पड़ा कि हमारीवाणी पर वायरस अटैक हुआ है ।
* उसी दिन हमने अपने हिंदी प्रेम को आगे बढ़ाते हुए फायर फोक्स का हिंदी वर्जन डाउन लोड कर लिया ।
* ११ अगस्त को ब्लोगिंग में पहचान बनने के बाद प्रथम जन्मदिन ।
* इसी दिन पोस्ट प्रकाशित । सोचा इस बार ब्लॉग दोस्तों के साथ ही मनाएंगे जन्मदिन ।

लेकिन फिर शुरू हुआ निराशाओं का दौर ।

पहली बार ऐसा हुआ कि पोस्ट पब्लिश होने के साढ़े तीन घंटे बाद पहली टिपण्णी आई -श्री रजनीश परिहार जी की। हालाँकि इस बीच श्री समीर लाल जी और ललित जी की इ-मेल आ चुकी थी ।

हमें लगा कि शायद हमारीवाणी का असर हमारे ब्लॉग पर भी पड़ गया है ।

इसी बीच इत्तेफ्क से अक्षिता पाखी की पोस्ट पर ध्यान गया और जाना कि कुछ प्रोब्लम है । लेकिन वहां श्री पाबला जी की जन्मदिन विशेष पोस्ट छपी थी --आज डॉ टी एस दराल का जन्मदिन है ।

लेकिन यह क्या , यहाँ तो टिप्पणियों की भरमार नज़र आ रही थी । सभी जाने माने ब्लोगर साथियों ने हमें अपनी बधाई और शुभकामनायें भेजी हुई थी । लेकिन इन दोस्तों में से सिर्फ खुशदीप सहगल और गोदियाल जी ने हमारी पोस्ट पढ़ी और बधाई दी । शाम को डॉ सिन्हा जी की भी टिप्पणी आई ।

अब यह तो और भी मिस्ट्री बन गई कि यह क्या हुआ कि एक तरफ तो ४२ बधाई सन्देश और दूसरी तरफ हमारे ब्लॉग पर मात्र ५ पुराने दोस्तों ने बधाई सन्देश भेजे ।

खैर बधाइयाँ तो मिल ही चुकी थी ।

लेकिन मिस्ट्री के चक्कर में दिल से लिखी गई एक पोस्ट स्वाहा हो गई ।

फिर भी इत्तेफाक यही ख़त्म नहीं हुआ ।

शाम को जन्मदिन मनाने का कार्क्रम तो था , बच्चों और विशेष मेहमानों के साथ ।
लेकिन ४ से ६ बजे तक इतनी बारिस हुई कि चारो ओर पानी भर गया । टी वी पर देखकर घर से बाहर निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई ।

और इस तरह हम घर में ही रहकर चाय के साथ पकौड़े खाते रहे ।

२५ साल पुरानी तमन्ना अब जाकर पूरी हुई --कि बाहर बारिस हो रही हो --हम हों वो हों और तीसरा कोई न हो---बालकनी में बैठे हों --साथ में चाय पकौड़े --और हाथ में सिगरेट ।

बस सिगरेट के ज़हर को छोड़ और सब साथ था ।

इस तरह मनाया हमने जन्मदिन ।

अब इसमें भी कोई ग्रहों का चक्र था या नहीं , यह तो संगीता पुरी जी ही बता सकती हैं ।


नोट : शाम को ललित शर्मा जी , राजीव तनेजा जी और यशवंत मेहता के साथ ठहाके लगाकर जन्मदिन का कार्यक्रम सम्पूर्ण हुआ ।

आप की बधाई और शुभकामनाओं के लिए सभी नए और पुराने मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ ।

अब एक सवाल :
* यदि आप किसी से प्यार करते हैं तो बोलिए आई लव यू ।
* कभी कभी प्यार करने वाला आई लव यू बोल नहीं पाता ।
* लेकिन यदि आप प्यार एक से करें और आई लव यू किसी दूसरे को बोलें तो ---

आपके ज़वाब का इंतजार रहेगा ।

अभी अभी पता चला है एक नए विश्व कीर्तिमान के बारे में । इस पर वार्ता अगली पोस्ट में ।