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Saturday, August 11, 2012

श्याम की बंसी पुकारे किसका नाम ---


देश विदेश में श्री कृष्ण जी का जन्मदिन जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है . श्री कृष्ण द्वापर में अवतरित हुए थे . कहते हैं , जिस दिन उन्होंने मानव देह का परित्याग किया , उसी दिन से कलियुग का प्रारंभ हुआ . गीतानुसार इसे करीब ५००० वर्ष पूर्व माना जाता है . हालाँकि प्रजापति ब्रह्मा कुमारियों के अनुसार सारी सृष्टि का काल ही ५००० वर्ष है यानि १२५० वर्ष के चार युग मिलाकर हर ५००० वर्ष में नई सृष्टि की रचना होती है . यदि इतिहास की दृष्टि से देखें तो ईसा पूर्व कुछ ही हज़ार वर्ष का इतिहास प्रमाणिक रूप
में उपलब्ध है .

सच्चाई कुछ भी हो , लेकिन जन्माष्टमी के दिन श्री कृष्ण के जन्मदिन पर सारे देश में खूब रौनक रहती है . स्कूलों , कॉलोनियों और मंदिरों में भक्तिपूर्ण वातावरण सबके दिल ओ दिमाग पर छा जाता है . बचपन में जब गाँव में रहते थे , हर जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते थे . दिन में तरह तरह के पकवान बनाये जाते लेकिन हम बस देखते ही रह जाते क्योंकि खाने को तो रात बारह बजे ही मिलते थे . दि
न में शाम के समय दूध के साथ फलाहार अवश्य होता था . लेकिन रात होते ही नींद आ जाती और नींद में ही उठाकर भोजन कराया जाता . तब तक भूख भी ख़त्म हो जाती . अगले दिन उठने पर याद नहीं आता, रात में खाना कब खाया था .

हमारी सोसायटी के मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव हर साल धूम धाम से मनाया जाता है .

हमारी याद में शायद पहली बार ऐसा हुआ -- जब दिन भर जन्माष्टमी का आनंद लेने के बाद रात १२ बजे जब सबने भोग लगाया , तब हमने केक काटा, अपने जन्मदिन का . और खाया खिलाया -- हम पति पत्नी ने एक दूसरे को. इत्तेफाक से १० अगस्त को हमारे ससुर जी का जन्मदिन होता है ,जिसे हमने दिन में ही मना लिया था .

केक खाते समय पत्नी ने हमें कान्हा कह कर पुकारा तो हमने पत्नी से एक सवाल पूछा -- आप हमारी रुक्मणी हैं, या राधा , या मीरा -- या फिर ऑल इन वन ? क्या होना चाहिए उनका ज़वाब ?


Sunday, September 5, 2010

भक्ति ऐसी कीजिये , जान सके ना कोय---

एक बार फिर जन्माष्टमी बड़ी धूम धाम से मनाई गई । तीन चार बजे के करीब तेज बारिस आ गई । पता चला कि बारिस का आना शुभ माना जाता है ।
हालाँकि इतनी बारिस से क्या शुभ होने वाला है , यह समझ नहीं आ रहा था ।

फिलहाल हम तो डेंगू और स्वाइन फ्लू से भरे अस्पतालों को देखकर यह सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि क्या हम किसी प्राकृतिक आपदा के लिए तैयार हैं ?

सोचिये यदि आप गंभीर रूप से बीमार हैं और अस्पताल में बेड ही खाली नहीं है , तो आप क्या करेंगे ।

यदि हजारों मरीज़ एक साथ आ जाएँ तो कहाँ भर्ती करेंगे ?

खैर बारिस का एक असर तो यह हुआ कि जहाँ हमारा मंदिर हर साल श्रधालुओं से भर जाता था , इस बार वहां कुछ ही लोग मौजूद थे । जो आये थे , उन्हें भी भीगी कुर्सियों पर बैठने में दिक्कत हो रही थी ।

शाम होते ही मंदिर जगमगा उठा । लाउड स्पीकर पर नए और पुराने हिंदी फिल्मों के गानों की धुनों पर संगीत झनझना उठा । हजारों वाट का शोर हवा में फैलने लगा ।

बाहर से विशेष तौर पर बुलाई गई भक्ति संगीत मण्डली ( म्यूजिकल ग्रुप ) ने चीख चीख कर भजन गाने शुरू कर दिए । फ़िल्मी धुनों पर संगीत के साथ भक्तजन भी भक्ति में झूमने लगे, नाचने लगे ।

आधी रात होते होते मण्डली ने धुनों को छोड़ , फ़िल्मी गाने ही गाने शुरू कर दिए ।

पहली बार सुना --
हैप्पी
बर्थडे टू यू --हैप्पी बर्थडे टू यू -- हैप्पी बर्थडे टू कृष्णा --हैप्पी बर्थडे टू यू --- बार बार दिन ये आए , बार बार दिल ये गाए ---

हम भी अगर , बच्चे होते --नाम हमारा होता ---और खाने को मिलते लड्डू --हैप्पी बर्थडे टू यू --
यह सब देखकर कुछ सवाल उठते हैं --

* क्या ईश्वर स्तुति के लिए हजारों वाट का शोर करना ज़रूरी है ?
सुनते आये हैं ---भक्ति ऐसी कीजिये , जान सके ना कोय । जैसे मेहंदी पात में , रंग रही दबकोय।

* भगवान तो कण कण में , रोम रोम में बसा हुआ है , फिर उसे मंदिरों में क्यों तलाशते हैं ?

* जिस पत्थर की मूर्ति को हम भगवान मानते हैं , उसको बनाने वाले मूर्तिकार अक्सर मुस्लिम होते हैं । फिर क्यों हिन्दू मुस्लिम आपस में झगड़ते हैं ?

* कुछ लोग मंदिर के आगे से जाते हुए हाथ जोड़कर शीश झुकाते हैं । भगवान तो सर्वव्यापी है , फिर वहीँ क्यों ?

ऐसा नहीं है कि मैं नास्तिक हूँ । भगवान में विश्वास रखता हूँ । एक सर्वशक्तिमान , सर्वव्यापी , अदृश्य शक्ति में विश्वास रखता हूँ । लेकिन आर्य समाजी होने के नाते मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखता ।

इस वर्ष सामान्य से अत्याधिक हुई बारिस , कहीं हमारे भ्रमित कर्मों का फल ही तो नहीं ?
इससे आने वाली विपदाओं से निज़ात कैसे पाई जाए ?

मेरे ख्याल से तो प्रभु के चरणों में जाने के सिवाय और कोई चारा नहीं । ऐसे में वही बेडा पार लगा सकते हैं ।

फिर कैसे मनाया हमने जन्माष्टमी का पावन पर्व ?

यह जानने के लिए अगली पोस्ट पढना मत भूलियेगा ।

नोट : ये मेरे व्यक्तिगत विचार हैं । ज़रूरी नहीं कि आप सहमत हों । कृपया अन्यथा न लें ।