इत्तेफाक ही रहा कि होली के मौसम में कवियों की तरह हम भी बहुत व्यस्त रहे । कई मित्रों से होली पर शुभकामनाओं का आदान प्रदान भी न हो सका । आशा करता हूँ कि नाराज़ नहीं होंगे । ये रहे हमारी व्यस्ताओं के साक्षात नमूने :
१) ३ मार्च :अस्पताल में बाल रोग विभाग द्वारा स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । ३ मार्च को इसका उद्घाटन हुआ । उद्घाटन समारोह में अस्पताल के सभी उच्च प्रशासनिक अधिकारीगण उपस्थित थे ।
दीप प्रज्वलन करते हुए सभी अधिकारीगण ।कार्यक्रम का संचालन करते हुए हमने भी एक सन्देश छात्रों तक पहुंचा ही दिया । हमने कहा कि इस ट्रेनिंग के बाद आप परीक्षा पास करने में तो अवश्य सक्षम हो जायेंगे । लेकिन एक अच्छा डॉक्टर बनने से पहले एक अच्छा इन्सान बनना चाहिए । तभी आप एक अच्छे डॉक्टर बन पाएंगे । हमारे एक प्रोफ़ेसर कहा करते थे कि एक डॉक्टर में तीन गुण होने चाहिए --
१) availability २) affability ३) ability .२) ४ मार्च :रविवार को दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन द्वारा एक हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । इस का संचालन भी हमें ही करना था । लेकिन एन वक्त पर कुछ असमंजस्य की स्थिति उत्पन्न हो गई ।

हास्य कवि सम्मेलन से पहले डी एम ऐ के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट ( बाएं ), प्रेजिडेंट ( दायें ) और एक कवयित्री साहिबा के साथ गंभीर वार्तालाप करते हुए ।

खैर , हमने सभी मेहमान कवियों का स्वागत करते हुए और सभी औपचारिकतायें निभाते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया ।

फिर श्रोताओं के साथ बैठकर कवियों को सुना ।
इस बीच कवयित्री साहिबा ने हमें भी आमंत्रित किया कविता सुनाने के लिए । बेशक रंग तो खूब जमा ।

अंत में सब कवियों को शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया । कवियों में प्रमुख थे --
जानी मानी कवयित्री डॉ सरोजिनी प्रीतम और वयोवृद्ध ग़ज़लकार एवम व्यंगकार डॉ शेर जंग गर्ग ।और इस तरह सभी विवादों से बचते हुए हमने इस हास्य कवि सम्मेलन को सफल बनाया ।
३) ६ मार्च :आर्य समाज मंदिर में एक कवि सम्मेलन का आयोजन था । एक परिचित बुजुर्ग कवि को मंच संचालन करना था । हमें भी आमंत्रित कर लिया गया । बाद में पता चला जितने कवि बाहर से बुलाए गए थे उनसे ज्यादा आर्य समाज के सदस्य लोगों में से कविता सुनाने को आतुर थे । उस पर ग़ज़ब यह कि संचालक महोदय को लगा कि पता नहीं बाद में अवसर मिले या न मिले , इसलिए पहले स्वयं ही सुना डाला जाए । खैर किसी तरह कार्यक्रम निपट गया । शायद यह उनका पहला अवसर था । इसलिए कोई फोटो भी उ
पलब्ध नहीं हो सका । दरअसल, फोटोग्राफर था ही नहीं ।
४) ७ मार्च :अस्पताल में कार्य समाप्त करने के बाद घर के लिए प्रस्थान करने से पहले हमने एक छोटा सा होली मिलन रखा जिसमे सभी उच्च अधिकारियों समेत प्रशासनिक स्टाफ भी शामिल हुआ ।

गुलाल से चेहरे रंगने के बाद एक अलग ही नज़ारा नज़र आ रहा था ।
लोगों की फरमाइश थी कि कविता सुनाई जाए लेकिन एम एस साहब ने ही इतना लम्बा भाषण दे दिया कि फिर कुछ और सुनने की शक्ति ही नहीं बची ।
५ ) ८ मार्च :
होली वाले दिन पूर्वी दिल्ली के डॉक्टर्स संस्था के भवन में एकत्रित होकर होली खेलते हैं । खाना , पीना , हँसना , हँसाना --सब चलता है । इस बार बाहर से हास्य कलाकार बुलाए गए थे । जमकर हँसना हँसाना हुआ ।
नादान पत्नी :एक व्यक्ति होली खेल कर घर आया
आते ही घर का दरवाज़ा खटखटाया ।
अन्दर से पत्नी की आवाज़ आई
मैंने पहचाना नहीं , तुम कौन हो भाई ?
पति गुर्राया , अरे बंद करो ये टें टें
भई दरवाज़ा खोलो , ये तो मैं हूँ मैं ।
पत्नी बोली , हाय राम यदि आप खड़े हैं यहाँ
तो वो कौन है जो बैठा चाय पी रहा है वहां ।
पति बोला ,
अब ये डुप्लीकेट पति कहाँ से आ गया ।
पत्नी बोली ,
पता नहीं , पर बैठा बैठा दस गुज्जियाँ खा गया ।
अच्छा हुआ मैं सही वक्त पर चला आया
वर्ना ज़ालिम जाने क्या जुल्म कर जाता ।
पत्नी बोली हाँ जी ,
यदि आप थोड़ी देर और ना आते --
तो वो सारे गुलाबजामुन भी खा जाता ।
और इस तरह ख़त्म हुआ यह होली का सीजन । अब फिर वही अस्पताल , वही मरीज़ , वही मर्ज़ जो गर्मियां शुरू होने के साथ ही बढ़ने लगते हैं। प्राइवेट डॉक्टर्स के लिए भले ही यह कमाई का सीजन होता हो , हमारे लिए तो अत्यधिक काम का समय होता है । नोट : हमारे देश में होली के बाद सावन के आने तक कोई त्यौहार नहीं होता । तीज़ से पर्वों का सिलसिला फिर से शुरू हो जाता है । शायद इसका सम्बन्ध तपती गर्मी से रहा होगा ।