Monday, October 1, 2012

मेहनत और हिम्मत से विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है .


इससे पहले कि हम आपको यह बताएं कि दुबई से हमने क्या सीखा, थोड़ी और मस्ती हो जाये .



इनडोर एक्वेरियम में नाव की सवारी करने से पहले हमने पूजा अर्चना करना सही समझा . आखिर विदेश में चुल्लू भर पानी में डूबना कौन चाहेगा . हालाँकि हमने लोगों को ऐसा करते हुए भी देखा . ( यह शायद समझ न आए )


                                         टॉपर्स एट दा टॉप


                                   

                                         यह फोटो हमने स्वयं खिंची है .





                                         पानी में बुड्ढा मस्ती .





                                          महिलाएं तो ऐसे ही काम चला लेती हैं .




लेकिन पुरुषों को कौन रोक सकता है . फिर कैसे कहें पुरुष और महिला में कोई फर्क नहीं होता .


मस्ती के बाद अब कुछ काम की बात हो जाए :

                                           
 स्वच्छता :

दुबई की  आबादी 2 मिलियन से भी कम है जिसमे सिर्फ 20 % ही  वहां के मूल निवासी हैं . शेष 80 % दूसरे  देशों से आए हुए कामकाजी लोग हैं .  इनमे मुख्यतया भारतीय , पाकिस्तानी , बंगला देसी ,  फिलिस्तीनी और ईरानी लोग काम की तलाश में यहाँ भीषण गर्मी में मेहनत करते हैं।

लेकिन जो बात सबसे ज्यादा  प्रभावित करती है , वह है यहाँ की सड़कों पर साफ़ सफाई . गन्दगी फैलाना यहाँ भी अपराध है और वहां भी . लेकिन जो लोग यहाँ बेतकल्लुफी से गन्दगी फैलाते हैं , वही वहां जाकर अच्छे नागरिक बन जाते हैं .

वहां कोई सड़क पर या दीवारों पर या कोने में पान की पीक नहीं मारता . न ही खुले में पेशाब की धार मारता . यह अलग बात है कि वहां की गर्मी में और पानी की कमी से इसकी नौबत ही नहीं आती .

ट्रैफिक :

सड़क पर बस बड़ी बड़ी गाड़ियाँ ही दिखती हैं . कोई दोपहिया नहीं , न रिक्शा , न  साइकिल . बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी का तो सवाल ही नहीं उठता। जेब्रा क्रॉसिंग पर पहला हक़ पैदल यात्री का होता है। कूद फांद कर कोई सड़क पार नहीं करता .

कारों की फिटनेस हर वर्ष लेनी पड़ती पड़ती है . उसी समय सारे चलान भी भरने पड़ते हैं जिसकी रकम बहुत ज्यादा होती है .  इसलिए जो ड्राइवर यहाँ अपनी मर्ज़ी से गाड़ी चलाते हैं , वहां जाकर विश्व के सबसे शरीफ इंसान बन जाते हैं .

टैक्सी चालक के साथ कोई मगजमारी नहीं करनी पड़ती . गाड़ी के अन्दर ही मीटर लगा लगा होता है जो न सिर्फ काम करता है बल्कि रीडिंग भी सही देता है . 
                         


                     

पूरे शहर में ऊंची ऊंची बिल्डिंग्स और होटल्स की भरमार है . चमचमाती बिल्डिंग्स पूर्णतया सुरक्षित तरीके से बनाई गई हैं . यहाँ बिजली भी कभी नहीं जाती।


लेकिन ऐसा नहीं है कि सब अच्छा ही अच्छा है . पानी 30 रूपये और पेट्रोल 25 रूपये लीटर मिलता है . 
सभी दफ्तर के काम मूल निवासियों के जिम्मे हैं जबकि मजदूरी तथा अन्य मेहनत के काम बाहर के लोग करते हैं . बेहद गर्मी में काम भी सुबह शाम और रात में किये जाते हैं . 

यहाँ महिलाओं को बुर्के में रहना पड़ता है। खाना खाते समय भी पर्दा मूंह पर ही रहता है . हालाँकि उनको आदत तो पड़ ही जाती होगी . 

कुल मिलाकर दुबई वालों ने अपनी मेहनत से रेगिस्तान में महल और भव्य भवन खड़े करके यह साबित कर दिया कि मेहनत और हिम्मत से विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाया जा सकता है .     


 नोट : दुबई के कुछ और चित्र यहाँ देखें .

31 comments:

  1. वाकई, आधुनिकता और पिछड़ेपन के सह-अस्तित्व का बेजोड़ नमूना है यह शहर और यह देश।

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  2. दुबई की सैर ....और मस्ती मुबारक हो ......

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  3. चलिए बहुत कुछ पता चल गया दुबई के बारे में , पहली रपट में । अगली रपटों का इंतज़ार रहेगा सर ।

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  4. ...बहुत रोचक है दुबई-यात्रा,पर मेरे नसीब ऐसे कहाँ जो बाहर तक झाँक आऊँ ...!

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  5. सब कुछ बढ़िया है ..दुबई , मस्ती और काम की बातें ...

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  6. एक नया विश्व बसा है..

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  7. काफी रोचक जानकारियाँ और बेहतरीन फोटोग्राफ्स.... अपना भी मन बन रहा है दुबई घूमने का... :-)

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  8. दुबई घुमाने के लिए आभार ...
    :)

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  9. मस्ती के साथ रोचक जानकारी रोचकता से प्रस्तुत की ।

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  10. कई सारी जानकारियां मिली..... सच में यह तो मैन मेड वंडर ही है....

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  11. JCOctober 02, 2012 7:55 AM
    चलिए रोजमर्रा के जीवन में अनंत लिस्ट में डीज़ल, सब्जी, बस/ रेल यात्रा आदि आदि के बढ़ते दाम आदि के बारे में टीवी पर सुनते सुनते आप के ब्लॉग में दुबई यात्रा और मौज-मस्ती के बारे में पढ़ रेगिस्तान में नखलिस्तान पाने समान थोड़ी राहत मिली!!! धन्यवाद!

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  12. महिलाएं तो ऐसे ही चला लेती हैं में आम हिन्दुस्तानी जोड़ना था :)
    तस्वीरों की खुशमिजाजी बनी रहे !

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  13. अच्‍छे शहर की अच्‍छी तस्‍वीरें।

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  14. और भाई साहब यहाँ तो टैक्सियाँ धुलती भी हर घंटे बाद हैं .रसीद भी मिलती है किराए की .साफ़ साफाई इतनी की थूकने का जी ही नहीं करता अपने यहाँ गन्दगी इतनी की थूक खुद बा खुद आजाए .

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  15. सैर और मस्ती के लिये मुबारकबादी.

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  16. पानी से चलने वाली कार के ईजाद को लेकर हो रहे प्रयोग की ख़बर पढ़कर तो दुबई वालों की जान सांसत में पड़ जाती होगी!

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    1. अब तो टूरिज्म से भी बहुत कमा रहे हैं .

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  17. सबकुछ काल्पनिक सा लगा .....

    पर आप हैं तो सच भी है ....

    बधाई....! रब्ब ने इतनी खुबसूरत जगहें दिखाई आपको .....

    मस्ती देख मुस्कुरा रही हूँ .....:))

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    1. यह तो परोपकार हुआ . :)

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  18. काश अपने हिन्दुस्तान में भी ऐसी साफ सफाई होती

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  19. कहाँ हैं 'काम' की बात ?:-(

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  20. डिसिप्लीन ही सीख लें हम उनसे......
    या शायद डंडे का डर सिखाता/करवाता है सब.
    :-)

    रोचक और बढ़िया पोस्ट.
    सादर
    अनु

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  21. जी इस पोस्ट का सार ही यही है . डर आदमी को इन्सान बना देता है .

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  22. .



    आदरणीय डॉ दराल भाई साहब

    वाकई आनंद आ गया …
    मस्ती काबिले-तारीफ़ है …

    शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  23. .

    #
    कैसे कहें पुरुष और महिला में कोई फर्क नहीं होता !

    …संभल कर
    बुरा मानने वालों को ख़बर न हो जाए …
    :))

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  24. बात सिर्फ स्वदेश की है .:)

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  25. रोचक... हमारी दुबई यात्रा की यादें भी ताजा हुईं

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  26. लीजिये अगली किस्त भी तैयार है .

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  27. बहुत रोचक ,हम फ्री में दुबई घूम रहे हैं हार्दिक आभार

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