Monday, May 2, 2011

अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स सम्मेलन--भाग १

दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स सम्मेलन संपन्न हुआ । हमने तो ब्लोगिंग छोड़ने का मन बना लिया था । लेकिन छोड़ने का मन भी नहीं करता । इसलिए मित्रों से ही कहलवा लिया कि अभी न छोड़ें ।

ब्लोगिंग का नशा भी सिग्रेट जैसा होता है कितना ही छोड़ने की कोशिश करो लेकिन वह आपको नहीं छोडती । किसी ने कहा है --इट इज इज वेरी ईजी टू स्टॉप स्मोकिंग , एंड आई हैव डन ईट सो मेनी टाइम्स

सिग्रेट छोड़ना है इतना आसान
ज़रा मुझे ही देखो ,
मैं कितनी बार कर चुका हूँ ये काम ।

प्रस्तुत है एक रिपोर्ट --आँखों देखी ।

सर्दियों के दिन थे । हम किसी काम से अपने गाँव की ओर जा रहे थे । रोहतक रोड से पहले झंडेवालान के सामने एक स्कूल में लगा बैनर देखा । लिखा था --दिल्ली हंसोड़ दंगल के लिए आज ऑडिशन हो रहा है । हमें भी जाने क्या सूझा कि झट गाड़ी मोड़ दी और पहुँच गए ऑडिशन हॉल में । सोचा गाँव तो एक दो घंटे बाद भी पहुँच जायेंगे , क्यों न लगे हाथ हम भी दो चार जोक्स सुनाते चलें ।

अपना नाम लिखाया और लगे इंतज़ार करने अपनी बारी का ।
ऑडिशन लेने वाले को एक दो बार कहा भी कि हम डॉक्टर हैं और जल्दी में हैं , ज़रा जल्दी बुला लेंलेकिन बारी तो बारी पर ही आती है

खैर आखिर नंबर आ ही गया । हमने अपना सबसे बढ़िया जोक सुनाया और सोचा कि अब लगेंगे ठहाके

लेकिन यह क्या --एक भी बंदा नहीं हंसा । हमें थोडा धक्का सा लगा लेकिन फिर संभलते हुए अपना सबसे बढ़िया से भी बढ़िया दूसरा जोक निकाला और पेश किया ।

लेकिन फिर वही --एक चींटी तक के हंसने की भी आवाज़ नहीं आई । सब हमें ऐसे देख रहे थे जैसे कह रहे हों --जा यार जा --क्यों बोर कर रहा है ।

अब तो अपनी सारी फूंक निकल गई और औकात समझ गई तो चुपचाप खिसक लिए वहां से

घर आकर आत्मनिरीक्षण किया तो समझ आया कि भैया हँसता कौन । वहां श्रोता तो कोई था ही नहीं । सभी तो ऑडिशन देने वाले थे और अपनी बारी के इन्तज़ार में नर्वस से बैठे थे । कोई नाखून चबा रहा था , कोई हाथ मसल रहा था , किसी का मूंह सूख रहा था । सबको एक ही चिंता थी कि मेरा ऑडिशन ठीक ठाक हो जाए तो बात बने ।

और ऑडिशन लेने वाले को तो हंसने की मनाही थीज़ाहिर है , उन्हें तो बाद में स्टूडियो में बैठकर हँसना था।

खैर हमने इसे एक ख़राब ख्वाब समझ कर भूलने की कोशिश की ।

लेकिन कुछ दिन बाद हमारे पास फोन आया ।

कड़कदार आवाज़ --आपने हमारे प्रोग्राम में ऑडिशन दिया था ? हमने डरते डरते कहा --हाँ भाई दिया तो था । कोई गलती हो गई क्या ।
उसने थोडा नर्म पड़ते हुए कहा --नहीं नहीं , सर हमने तो आपको ये बताने के लिए फोन किया है कि आपको फाइनल्स के लिए सलेक्ट कर लिया गया है ।

मैंने कहा --कमाल है , सीधे फाइनल्स में ! अच्छा फाइनल्स का ऑडिशन अलग से होगा ! !

वो बोला --नहीं सर , आप समझे नहींआपको ऑडिशन के लिए नहीं , ऑडियंस के लिए सलेक्ट किया गया है

मैंने कहा --तो भाई ये कहो कि फ्री में तालियाँ बजाने के लिए बुला रहे हो

खैर हम गए भी , तालियाँ भी बजाई ।
इसके बाद एक छोटा सा इतिहास हमने भी रचा । लेकिन ये कहानी फिर कभी ।

नोट : आप सोच रहे होंगे कि इस संस्मरण का अंतर्राष्ट्रीय ब्लोगर्स सम्मेलन से क्या सम्बन्ध हैजानने के लिए अगला भाग पढना भूलें

44 comments:

  1. आपको फाइनल्स के लिए सलेक्ट कर लिया गया है । :)

    ReplyDelete
  2. आपसे मिलनें की इच्छा पूरी न हो सकी!

    ReplyDelete
  3. कमाल है डॉ साहब , बढ़िया जगहें ढून्ढ लेते हो ...आगे जब ऐसे मौके मिलें तो हमें भी ले चला करो !
    हंसने के शौक़ीन हम भी हैं !
    शुभकामनायें !

    ReplyDelete
  4. समां तो जबरदस्त बांध दिया है अब अगला भाग जल्दी लिख डालिए. जरा ख्याल रखियेगा कि तब तक सबका ब्लड प्रेसर ज्यादा ना बढ़ जाय.

    ReplyDelete
  5. उत्सुकता बढ़ गयी है ...कैसा रहा सम्मलेन !

    ReplyDelete
  6. आपकी महिमा ही निराली है डॉक्टर साहब.परसों आपके दर्शनों से वंचित रह गए इसका अफ़सोस है.आपकी अगली पोस्ट का इंतजार है.

    ReplyDelete
  7. लीजिये सारी कसर हम आज ही पूरी कर दे रहे हैं ...
    हा हा हा हा हा हा हा अहह हा हा हा हा हा हा हा हा हा
    अब मन खुश ? अगली तो वैसे भी पढ़ते आप न कहते तब भी :)

    ReplyDelete
  8. "जाते थे जापान पहुँच गए चीन,,,"!

    शाह रुख खान ने तत्कालीन प्रधान मंत्री बाजपाई जी की पुस्तक विमोचन के उपलक्ष्य में चुटकी लेते हुए कहा याद आगया कि इस देश का दुर्भाग्य है कि जिसे कवि होना चाहिए उसे प्रधान मंत्री बना दिया जाता है :D)

    ReplyDelete
  9. आज के ज़माने में कोई डॉ इतना फुर्सत में हो कि लोगों को हँसा सके.......तो उसके डॉ होने पर सन्देह होता है...हा हा हा हा

    ReplyDelete
  10. sir
    u said every thing without saying anything and its upto people to understand
    regds

    ReplyDelete
  11. एकदम झकास।

    ReplyDelete
  12. badhai ho....

    aglee kadi ka intijaar.....

    jai baba banaras...................

    ReplyDelete
  13. आपका इशारा समझ आ गया डाक्टर साहब ... अगली रिपोर्ट का इंतेज़ार है अब तो ...

    ReplyDelete
  14. .
    यही तो... !
    तालियाँ बजवाने और अपनी ताकत (?) दिखाने के लिये ब्लॉगर से अधिक सॉफ़्ट-टारगेट कौन मिलेगा ?
    यदि यशलोलुप बन्दा फ़्रेम में दिखने को लालायित रहते है, तो ठीक... वरना पुरस्कार का झुनझुना तो है ही !
    जो भी घटित हुआ, उसे एक बड़ी सीख के रूप में लिया जाना चाहिये ।
    डॉक्टर साहब वैसे आपने अपनी आपबीती से इसकी तुक खूब भिड़ायी !

    ReplyDelete
  15. ‘ब्लोगिंग का नशा भी सिग्रेट जैसा होता है । ’

    सही कहा डॊक्टर साहब, धुंआ भी निकलता दिखता है :)

    ReplyDelete
  16. इशारा किधर है ..समझ तो आ रहा है ..पर अगली कड़ी पढेंगे ज़रूर ...

    आपसे मुलाक़ात नहीं हुई इसका मलाल है

    ReplyDelete
  17. डाक्टर के यहाँ तो मरीजों को बारी का इंतजार करते देखा है कई बार ...यहाँ तो डाक्टर साहब अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे,मुझे तो ये कल्पना करके ही बहुत हंसी आई....वो मुए क्यूँ नही हँसे पता नही.....

    ReplyDelete
  18. By writing the second part first, now do you intend to release first part later !

    ReplyDelete
  19. ललित शर्मा said...
    आपको फाइनल्स के लिए सलेक्ट कर लिया गया है । :)
    ललित जी , फाइनल तो हो चुका । :)
    केवल राम जी , शुक्रिया लेकिन बधाई किस बात की ?
    शास्त्री जी , क्या करें आप सीट से उठे नहीं और हम बैठे नहीं । फिर मुलाकात कैसे होती ?
    क्या सतीश जी , आपको न्यौता तो दिया था लेकिन आप आए ही नहीं । अरे भाई यह भी एक ऐसा ही अवसर था ।

    ReplyDelete
  20. रचना जी , ब्लड प्रेशर तो जितना बढ़ना था सबका बढ़ चुका । अब तो नीचे आने की बारी है ।

    वाणी जी , सम्मलेन बहुत बढ़िया रहा , सच ।

    राकेश जी , कोई ऐसा मिला ही नहीं जो हम दोनों को पहचानता हो और मिला देता । खैर फिर सही ।

    क्या अरविन्द जी , अकेले हंस रहे हैं । अमां यहाँ आते तो हम भी साथ देते हंसने में ।

    सुशिल जी , अगली से पहले पिछली पर तो कुछ बोलते भाई ।

    ReplyDelete
  21. जे सी जी , शाहरुख़ खान तो बक बक ज्यादा करता है । वर्ना कवि होने के लिए न तो किसी पद की ज़रुरत होती है और न कहीं संविधान में यह लिखा है कि पी एम साहब कविता नहीं सुना सकते । :)

    हा हा हा ! अलबेला जी , डॉक्टर्स तो ऑप्रेशन करते हुए भी ठहाके लगाते रहते हैं । लेकिन अफ़सोस लोगों को ही हंसने की फुर्सत नहीं है । तभी तो जिसे देखो , माथे पर भ्रकुटियाँ तनी रहती हैं ।

    रचना जी सही कह रही हैं । आपकी समझ की दाद देता हूँ ।

    ReplyDelete
  22. डॉ अमर कुमार जी , जो सुनाई है वह अक्षरश : सत्य है । कल जो सुनायेंगे वह भी सच के सिवाय कुछ नहीं होगा ।
    वैसे ब्लोगिंग में झुनझुनों का क्या काम !

    प्रशाद जी , धुआं भी आग से ही निकलता है । :)

    संगीता जी , हम तो बस मुलाकात करने ही आए थे । लेकिन क्या करते मुलाकात के लिए समय ही कितना था ।

    हा हा हा ! रजनीश जी , अब हमारे हत्थे चढ़ गए थे तो कैसे नहीं हँसते । बस टाइमिंग की बात होती है ।

    काजल जी , हम ऐसे भी निष्ठुर नहीं हैं भाई । अगली पोस्ट में शहद है , लेकिन नमकीन । आनंद लीजियेगा ।

    ReplyDelete
  23. मुझे समझ नहीं आता कि सबको आपस में मिलने का मौका क्यों नहीं मिल सका ?

    कार्यक्रम के बाद भोजन के वक़्त क्या सब आमंत्रित नहीं थे ?
    आमंत्रण में तो दिल्ली के आसपास के हर ब्लोगर को न्यौता था ,
    लगभग ४०० लोगों को .

    वर्ष के गीतकार के रूप में मुझे भी आना था ...
    लेकिन माताजी के स्वास्थ्य के कारण टिकट कैंसिल कराने पड़े .

    हम तो कवि शायर हैं ... फिर भी किसी आयोजन में आ'कर आपसे मुलाक़ात कर लेंगे :)

    ReplyDelete
  24. हां , आपकी पोस्ट रोचक है ... अगली की प्रतीक्षा है .

    ReplyDelete
  25. बढ़िया रोचक प्रस्तुति ...

    ReplyDelete
  26. राजेन्द्र जी , आमंत्रित ब्लोगर्स तो कम ही आए थे । अधिकांश तो निमंत्रित ब्लोगर्स ही थे ।

    ReplyDelete
  27. wah bhai.... ji ab to AGLI ke bare me bahut utkantha hai......jai ho

    ReplyDelete
  28. आप भी पहेलिया बुझने लगे... जबाब आप का अगली पोस्ट मे पढ कर सच्ची मुच्ची मे बतायेगे कि हम ने सही सोचा था या गलत, यह फ़र्क भी समझा दे...आमंत्रित ब्लोगर्स मे ओर निमंत्रित ब्लोगर्स मे क्या अन्तर हे.

    ReplyDelete
  29. :) agli kadee ka intzaar karte hain.

    ReplyDelete
  30. दाराल साहब, बहुत ही सुन्दर व्यग्य है ये तो !

    ReplyDelete
  31. दूसरे भाग का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा!

    ReplyDelete
  32. इस घटना का ब्लॉगर सम्मेलन से क्या सम्बन्ध है, मैं समझ गया।

    ReplyDelete
  33. @ डॉ. दराल,
    वर्तमान परिप्रेक्ष्य से आपबीती की तुक भिड़ाने की बात हो रही है.. क्या सँयोग है !
    झुनझुना.. घरफूँक व स्वातः सुखाय लिखने वालों के लिये हर पुरस्कार झुनझुना ही है !

    ReplyDelete
  34. प्रस्तुति दिलचस्प है।

    ReplyDelete
  35. इसी तरह रचते रहिए इतिहास.

    ReplyDelete
  36. बढ़िया रोचक प्रस्तुति| धन्यवाद|

    ReplyDelete
  37. Beautifully written ! Curious to read the second part.

    ReplyDelete
  38. अच्छा किया सर आपने ताली बजा दी ... इससे अच्छा काम तो आजकल कोई दूसरा नहीं है ... सर हमको सलेक्ट कभी भी नहीं होना है हा हा ... पढ़कर आनंदित हो गया ... आभार

    ReplyDelete
  39. भाटिया जी ,
    आमंत्रण यानि आम लोगों को मौखिक बुलावा --आ सकें तो आइये , न आ सकें तो कोई बात नहीं ।
    निमंत्रण --औपचारिक तौर पर विशेष बुलावा --आना अनिवार्य --न आ सकें तो बताना अपेक्षित है ।

    ReplyDelete
  40. दराल साहब आप के लेखन का जवाब नहीं।

    ReplyDelete
  41. बतिया बड़ी गोल मोल
    आगे खुलेगी अब पोल

    ReplyDelete