Friday, January 7, 2011

शहर में गाँव के ठाठ बाठ ---दिल्ली में दिल्ली हाट --

दिल्ली जैसे महानगर में रहने वाले लोगों को गाँव की जीवन शैली , खान पान और दस्तकारी व कलाकृतियों से परिचित कराने के उद्देश्य से दिल्ली के आई एन क्षेत्र में बना है , दिल्ली हाट । १९९४ में बना यह सांस्कृतिक व व्यवसायिक केंद्र देश भर से आए दस्तकारों और घरेलु उद्योग धंधे से जीविका उपार्जन करने वाले ग्रामीणों को एक प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है , अपनी हस्तकला और कौशल को प्रदर्शित करने का । तथा साथ ही उत्पादों की बिक्री करने का , सीधे उपभोगताओं को ।


यहाँ हर दिन हजारों पर्यटक और स्थानीय निवासी सैर सपाटे और मौज मस्ती के लिए आते हैं और एक साफ़ सुथरे वातावरण में खरीदारी का आनंद लेते हुए शहर में गाँव की आबो हवा का लुत्फ़ उठाते हैं ।


दिल्ली हाट का प्रवेश द्वार अक्सर यहाँ कोई कोई मेला चल रहा होता है

द्वार को खूबसूरती से सजाया गया है

यहाँ छप्पर नुमा स्थायी स्टाल्स बनाई गई हैं इसके अलावा अस्थाई स्टाल्स भी होती हैं जिन्हें १५ दिन के लिए किराये पर दिया जाता है

परिसर में एक मेले जैसा वातावरण बनाया गया है ।




बच्चों को लुभाने के लिए यह इकतारा वाला देखते ही बजाना शुरू कर देता है , अपनी मधुर तान




यहाँ भोजन के लिए देश के सभी राज्यों की स्टाल्स हैं जिनमे वहां का लोकप्रिय आहार परोसा जाता है । आप जिस प्रदेश का खाना खाना चाहें , वहीँ जाकर स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं ।




हाट को विभिन्न रूपों से सजाया गया है


इसकी एक विशेषता है --हरा भरा परिसर विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधों के बीच बनाई गई हैं , रंग बिरंगे कपड़ों और साज़ो सामान की दुकानें ।




आपके मनोरंजन के लिए ये लोक नर्तक भी हाज़िर हैं जो कहते ही मनमोहक मुद्रा में नृत्य करने लगते हैं


यहाँ एक ओपन एयर थियेटर भी है जहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम किये जाते हैं

यहीं एक बार लगान फिल्म के प्रोमो के लिए आए आमिर खान से मिलकर हमारी बिटिया बड़ी खुश हुई थी



पेड़ों के झुरमुट में लगे ये टेंट शायद सुरक्षा कर्मियों के हैं


दिल्ली हाट भारतीय संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए , सभी वर्ग के लोगों के लिए खरीदारी और मनोरंजन का एक उत्तम स्थान है ।


यदि दिल्ली आना हो तो एक बार यहाँ अवश्य जाइये

37 comments:

  1. सुंदर चित्रों के साथ बढ़िया प्रस्तुति

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  2. बहुत अच्छा लगा जी पहले पता होता तो हम दिल्ली मे दो दिन खुब बोर हुये थे, यहां घुम आते, चलिये अगली बार सही

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  3. sir ham to bass iske peechhe rahte hain..:)
    isliye hame to ghar ki murgi daal barabar jaisa lagta hai...:P

    waise aapne sahi kah...

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  4. हमने एक तारा तो नहीं पर उसके साथ मिलने वाली मिटटी के पहिये वाली गाड़ी खरीदी थी पहले बनारस में मिलती थी, काफी दिनों बाद उसे दिल्ली हाट में देखा तो बेटी के लिए ले लिया | यहा जाने का अनुभव अच्छा रहा|

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  5. बहुत ही सुन्दर्।

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  6. बहुत अच्छा लगा दिल्ली हाट के बारे में जानना.

    सादर

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  7. bahut hi achaa laga yah sab dekh kar........

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  8. १९७२ में एक बार प्रगति मैदान में एशिया ७२ देखा था ,अब आपने दिल्ली हाट की सैर करा दी ,घर-बैठे बैठे .धन्यवाद.

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  9. धन्यवाद फिर से सुन्दर तस्वीरों के साथ सैर कराने के लिए! अपने पास कैमरा नहीं है,,,याद दिलादी कि पिछले वर्ष अमेरिका से लड़की और नतिनी आये थे तब उसके साथ दिल्ली हाट भी देखा था जहां से उसने वस्त्रादि खरीदे, वहाँ के फोटो भी खींचे और बाद में साँझा भी किये हमसे,,,

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  10. अच्छी रिपोर्ट,तस्वीरें खूबसूरत हैं.

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  11. दिल्ली हाट की परिकल्पना जया जेटली की थी। उन्होने आर्टिसन मैप भी तैयार किया है, भारत के शिल्पकारों का।

    वैसे अच्छी जगह है घुमने के लिए। लेकिन जिन परम्परागत शिल्पकारों के उत्पाद को बेचने के लिए यह हाट बनाया गया था, उनकी जगह व्यापारी-दलाल ही दिखे मुझे।

    उम्दा चित्रों के लिए आभार

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  12. बहुत ही सुंदर चित्रों के साथ बढ़िया प्रस्तुति...

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  13. लगता है आप घर बैठे ही पूरी दिल्ली दिखा देंगे। ताकि आपको हमारी मेहमान नवाज़ी न करनी पडे। बहुत सुन्दर तस्वीरें और विवरण। बधाई।

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  14. बहुत बढ़िया सैर करवाई दिल्ली हाट की...बहुत बढ़िया लगी ये चित्रमय प्रस्तुति.

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  15. मुकेश कुमार सिन्हा जी , हम भी वहीँ रहे थे २० साल । सच है घर की मुर्गी दाल बराबर तो लगती है ।
    माथुर जी , १९७२ में एशिया ७२ हमने भी देखा था । तब हम स्कूल में होते थे ।
    ललित जी , अभी भी शिल्पकारों को जगह दी जाती है किराये पर । लेकिन इस महंगाई के ज़माने में उन्हें परेशानी तो होती ही होगी अपना माल बेचने में ।
    निर्मला जी , आप आइये तो सही । अभी बहुत सी दिल्ली बचा कर रखी है जी ।

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  16. सचमुच खुशनुमा होता है दिल्‍ली हाट.

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  17. दिल्ली दर्शन हेतु एक और नई जगह. देखिये कब संयोग बनता है यहाँ से कुछ खरीद पाने का.

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  18. ये अमीरों के चोंचले है जो झोपडी के मज़े भी शान से लेते हैं :(

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  19. प्रशाद जी , अमीरों के नहीं --शहरियों के ।
    शहर में रहने वाले सरसों का साग भी डेलिकेसी समझ कर खाते हैं ।
    विडम्बना यह है कि यहाँ छाछ भी पॉलीपैक में मिलता है ।

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  20. सर मेरे चित्र तो धरे ही रह गए। आधी दिल्ली वालो की तरह खुद तो पहली बार नहीं घूमा था किसी को घुमाने ही ले गया था। पर अब तो अक्सर जाना होता है। इस बार भी न्यूजीलैंड से आईं एक सिंगर को दिखाने ले गया था दिल्ली में गांव की फिलिंग कहां मिलेगी।

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  21. खूबसूरत चित्रों के साथ खूबसूरत सैर ..आभार.

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  22. अगली बार जब दिल्ली जाऊंगा तो यहां तो जाना ही होगा। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    फ़ुरसत में आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री के साथ

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  23. सुंदर सचित्र विवरण ,आभार ।

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  24. Daral saheb,
    kamaal ki prastuti hai.Kya kahen .aapka vyaktitv jhalakata hai aapki har prastuti mein.Badhai!!!

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  25. bahut sunder

    is bar mere blog par

    " मैं "
    kabhi yha bhi aaye

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  26. ... valuable post ... thanks !!

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  27. 'अमीरों' के लिए दिल्ली हाट के ठीक सामने ही आई एन ए मार्केट है,,,पहले जो बाबुओं की मार्केट होती थी और जहां पहले सस्ती सब्जियां आदि मिलती थीं,,,किन्तु धीरे धीरे इसकी सूरत बदल गयी जब चाणक्यपुरी आदि से विदेशी खरीदार अपनी गाड़ियों में आ खरीदारी करने लगे और दुकानदार उनकी आवश्यकता पूर्ति कर अधिक फलने फूलने लगे...अब यह अंतर-राष्ट्रिय बाज़ार हो गया है :)

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  28. सुंदर चित्रों के साथ बढ़िया प्रस्तुति|आभार|

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  29. चित्रात्मक प्रस्तुति अत्यंत प्रभावशाली व जानकारी भरी

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  30. सही कहा जे सी जी । हमने भी २० साल आई एन ए की मार्केट से ही सब्जियां खरीदी हैं ।
    वहां के छोले बटुरे अभी तक याद आते हैं ।

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  31. सुंदर चित्रों के साथ बढ़िया प्रस्तुति

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  32. मज़ा आ गया दिल्ली हाट की यात्रा कर के आपके साथ ... ;लाजवाब चित्र हैं डाक्टर साहब ...

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  33. सच दिल्ली तो दिल वालों की है ....आप जैसों की ....

    गुवाहाटी में भी कई बेहतरीन पार्क बनाये जा रहे हैं ....
    सोच रही हूँ कभी मैं भी तसवीरें लगा ही दूँ .....

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  34. दिल्ली की सैर घर बैठे

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  35. दराल सर,
    बड़े दिन से पत्नी और बच्चों को दिल्ली हाट ले जाने की इच्छा है, लेकिन संयोग नहीं बन पा रहा...सुना है आईएनए का मेट्रो स्टेशन भी बड़ा खूबसूरत बनाया गया है...वहां देश के प्रसिद्ध कलाकारों ने पेटिंग्स लगाने के लिए दी हैं...आपकी पोस्ट ने दिल्ली हाट जाने की इच्छा और तेज़ कर दी हैं...जल्दी ही प्रोग्राम बनाता हूं...

    जय हिंद...

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  36. मज़ा आ गया दिल्ली हाट की यात्रा कर के. सुंदर चित्रों के साथ बढ़िया प्रस्तुति

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