
अक्सर ज्वाइंट बदलने की नौबत भी आ जाती है ।
अब ऐसा होने की सम्भावना तो कम ही लगती है कि नगर निगम के किसी अधिकारी ने हमारी पोस्ट पढ़ ली हो और तुरंत बात समझ में आ गई हो ।
लेकिन यह सच है कि कुछ ही महीनों बाद उस जगह का नज़ारा कुछ ऐसा था :

यह तो हुई न वही बात कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे ।
लेकिन यदि गौर से देखा जाए तो पता चलेगा कि पेड़ के तने के चारों ओर खाली जगह बहुत कम है । यानि पेड़ के विकास का भविष्य अभी भी खतरे में हैं ।
उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार एक बड़े पेड़ के चारों ओर कम से कम १.२ मीटर जगह छोडनी चाहिए , उसके फैलने के लिए ।
लेकिन चलिए हम इस पेड़ को छोटा पेड़ मान सकते हैं जिस पर यह नियम लागु नहीं होता ।
अब ज़रा इस चित्र को देखिये :
दिल्ली के पोस्टल कोड नंबर १ में स्थित यह पेड़ फुटपाथ के किनारे उगा है । फुटपाथ को भी डबल कर करीब २० फुट चौड़ा कर दिया गया है । तने के चारों ओर खाली जगह भी छोड़ी गई है ।लेकिन :
इस पेड़ की बदमाशी देखिये , २० में से १८ फुट जगह को ऐसे घेर लिया है जैसे दिल्ली में लोगों ने डी डी ऐ की ज़मीन पर अनाधिकृत कब्ज़ा कर रखा है।
शायद इसी वज़ह से मुख्यमंत्री साहिबा ने डी डी ऐ पर अविश्वास व्यक्त किया है ।
अब सवाल यह उठता है कि जहाँ मानव जाति को बचाने के लिए पर्यावरण की रक्षा की जाती है , वहीँ पर्यावरण का प्रतिनिधि यह पेड़ , जो स्वयं मानव जाति के लिए खतरा बना हुआ है , क्या यूँ ही ऊंची पहुँच वाले लोगों की तरह मज़े उड़ाता रहेगा।
ज़ाहिर है --बदमाश मनुष्य ही नहीं , पेड़ भी होते हैं ।
अब इनके साथ क्या व्यवहार किया जाए ?

