Monday, March 8, 2010

ऐसी होती है नारी ---

आज महिला दिवस के अवसर पर , एक छोटी सी रचना , नारी के विभिन्न रूपों को समर्पित :

मात पिता को पुत्री
बेटा बन कर संभालती
सेवाभाव में हारी ,
ऐसी होती है नारी।

कौर बांटे भाई से
त्याग की बने मूर्ती
रहे फ़र्ज़ पर बलिहारी ,
ऐसी होती है नारी।

पति प्रेम में प्रेयसी
समर्पण की है प्रतिमूर्ति
कभी शोला कभी चिंगारी ,
ऐसी होती है नारी।

ममतामयी आँचल की छाया
कोमल अहसास जो बिखेरती
सुख दुःख में वारी ,
ऐसी होती है नारी।

आज के दिन यदि हम अपने रिश्तों को मज़बूत कर सकें , तो शायद यही सच्चा महिला दिवस सैलीब्रेशन होगा।

22 comments:

  1. महिला दिवस पर एक बहुत अच्छी प्रस्तुती धन्यवाद

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  2. नारी के विभिन्न रूपों के बिना हमारा अस्तित्व ही क्या है ? बहुत बढ़िया डॉ दराल !

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  3. बहुत बढ़िया!!! और सही कहा !!!
    "मात पिता को पुत्री
    बेटा बन कर संभालती..."

    उपरोक्त मेरी दूसरी बेटी पर विशेषकर लागू है क्योंकि अन्य दो उच्च पढाई या कार्य की मजबूरी के कारण, अथवा विवाहोपरांत (सन '९९ तक, जब मेरी धर्मपत्नी मेरा साथ छोड़ गयी) हम दोनों के साथ रही और मजाक में उसकी बहनें उसको "श्रवण कुमारी" पुकारते थे :)

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  4. महिला दिवस पर बेहतरीन प्रस्तुती! बहुत खूब!

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  5. उम्दा प्रस्तुति!!

    विश्व की सभी महिलायों को अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.

    -उड़न तश्तरी

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  6. मातृ-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!

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  7. नारी के हर रूप को कविता के माध्यम से दर्शाया है...बहुत ही अच्छी प्रस्तुति....
    मैंने भी इसी नाम से एक पोस्ट लिखी है...
    "ऐसी है आज की नारी"
    www.rashmiravija.blogspot.com

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  8. महिला दिवस पर सही अभिव्यक्ति। शुभकामनायें।

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  9. डॉ साहब,उम्दा प्रस्तुति है.

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  10. बहुत बढ़िया... महिला शक्ति को नमन प्रणाम

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  11. सुंदर प्रस्तुति ,बधाई

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  12. यह असली नारी दिवस की कविता, बहुत अच्छी ओर भाव पुर्ण

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  13. सुंदर प्रस्तुति ,बधाई.....

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  14. सशक्त अभिव्यक्ति!

    नारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!

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  15. agar kaanoono kaa durupyog naa kare naari, to sach main 100% mahaan ho jaayegi naari.
    thanks.
    WWW.CHANDERKSONI.BLOGSPOT.COM

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  16. Avsaranusaar sundar abhivyakti....Dhanywaad!
    Happy Women's Day !!

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  17. सच कहा है डाक्टर साहब ..... अगर हम औरत को सम्मान, प्यार और पूरा महत्व दे सकें तो जीवन सुदार जाएगा ..... हर रूप में औरत का सम्मान होना चाहिए ... बहुत अच्छी रचना है ,,...

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  18. पहली बार आया हूँ इस गली
    बहुत अच्छा लगा
    आपके ज़ज्बात पड़कर
    कुछ अपना सा लगा
    यूँही पिरोते रहिये अपने दिले राज़
    अन्दर-बाहर अपने जैसा भी लगा


    कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
    http://qatraqatra.yatishjain.com/

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  19. महिला दिवस पर एक बहुत अच्छी प्रस्तुती धन्यवाद

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  20. सुन्दर प्रस्तुति

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