एक चिकित्सिक के पास प्रतिदिन ऐसे रोगी भी आते हैं जिनकी स्वास्थ्य समस्या कुछ और होती है और रोगी बयाँ कुछ और करता है । ऐसी स्थिति में डॉक्टर का अनुभव ही होता है जो गलत उपचार से बचाता है ।
आइये देखते हैं ये कैसी कैसी स्थितियां होती है :
१) गैस सर में चढ़ जाती है :
अक्सर मरीज़ शिकायत करते हैं --डॉक्टर साहब , पेट में गैस बनती है और सर में चढ़ जाती है ।
असलियत में iऐसी न कोई गैस होती है , न कोई स्थिति । यह या तो मरीज़ का वहम होता है या उसे कोई और मानसिक तौर पर समस्या होती है जैसे एन्जाईटी।
पेट में गैस दो तरह से पैदा होती है । एक -- खाने के साथ हवा का प्रवेश । यह डकार के रूप में बाहर आती है ।
दूसरी खाने की पाचन क्रिया में और आंतों में मौजूद जीवाणुओं की प्रतिक्रिया से बनती है ।
इसके निष्कासन के बारे में फिल्म दबंग में सलमान खान द्वारा बोले गए डाय्लोग्स में सम्पूर्ण जानकारी मिलती है ।
पेट में अत्याधिक गैस बनना खाने की किस्म और मात्रा पर बहुत निर्भर करता है ।
लेकिन सबसे ज्यादा कॉमन कारण हैं --पेट में संक्रमण ।
अक्सर पेट में या तो कीड़े होते हैं या अमीबिक इन्फेक्शन होता है । हमारे देश में अधिकतर लोगों को यह शिकायत होती है ।
आखिर गोल गप्पे या चाट पापड़ी तो सभी खाते हैं ।
२) हड्डियों में बुखार रहता है ।
यह शिकायत ओ पी डी में बहुत सुनने को मिलती है । विशेष रूप से निम्न आय वर्ग की महिलाओं में ।
हकीकत : ऐसा कोई बुखार नहीं होता । बुखार होने पर त्वचा का तापमान बढ जाता है । आंतरिक सोफ्ट टिस्युज का तापमान भी बढ़ता है ।
लेकिन ऐसा नहीं होता कि हड्डियों का तापमान बढ़ जाए और त्वचा का सामान्य रहे ।
कारण : अक्सर ऐसे मरीजों को सामान्य कमजोरी होती है , या हाथ पैर में दर्द रहता है । विटामिन्स की कमी भी हो सकती है ।
३) बुखार में ठंडे पानी की पट्टियाँ करना : इसे कोल्ड स्पॉन्जिंग या हाइड्रोथेरपी कहते हैं ।
अक्सर यह सलाह दी जाती है कि बुखार में ठंडे पानी की पट्टियाँ करनी चाहिए ।
भ्रान्ति : I--ठंडा पानी
दरअसल बुखार में ठंडा पानी इस्तेमाल नहीं करना होता । स्पॉन्जिंग के लिए कक्ष के तापमान वाला सादा पानी लेना चाहिए ।
कुछ लोग अत्याधिक ठंडा पानी या बर्फ का प्रयोग करते हैं जो सर्वथा अनुचित है । इससे त्वचा की नसें सिकुड़ जाती हैं और लाभ की बजाय हानि हो सकती है ।
बुखार में स्पोंजिंग से त्वचा पर पानी की जो पर्त बनती है , वह शरीर से ऊष्मा लेकर वाष्पित होती है । यह वाष्पन ही त्वचा को ठंडा कर बुखार उतारने में सहायक होता है ।
भ्रान्ति II --पानी की पट्टी
स्पोंजिंग के लिए लोग अक्सर रुमाल या कोई कपडा लेकर पानी में भिगोकर , तह बनाकर माथे पर रख देते हैं । यह तरीका आंशिक रूप से ही फायदेमंद होता है ।
सही तरीका है --कपडे को सादे पानी में भिगोकर , हल्का सा निचोड़कर पूरे शरीर को पोंछें । इसे लगभग १० मिनट तक बार बार करने से बुखार नीचे आ जायेगा ।
स्पॉन्जिंग करने से निश्चित ही आराम मिलता है । हालाँकि दिन में कई बार करना पड़ सकता है ।
अब एक काम की बात :
उपरोक्त बातें न तो कोई सरकारी डॉक्टर बताएगा न प्राइवेट डॉक्टर । सरकारी डॉक्टर के पास टाइम नहीं होता और प्राइवेट तो कमाता ही ऐसे मरीजों से है । लेकिन इसका सबसे ज्यादा दुरूपयोग करते हैं--क्वैक्स ( नीम हकीम यानि नकली डॉक्टर )।
आइये देखते हैं ये कैसी कैसी स्थितियां होती है :
१) गैस सर में चढ़ जाती है :
अक्सर मरीज़ शिकायत करते हैं --डॉक्टर साहब , पेट में गैस बनती है और सर में चढ़ जाती है ।
असलियत में iऐसी न कोई गैस होती है , न कोई स्थिति । यह या तो मरीज़ का वहम होता है या उसे कोई और मानसिक तौर पर समस्या होती है जैसे एन्जाईटी।
पेट में गैस दो तरह से पैदा होती है । एक -- खाने के साथ हवा का प्रवेश । यह डकार के रूप में बाहर आती है ।
दूसरी खाने की पाचन क्रिया में और आंतों में मौजूद जीवाणुओं की प्रतिक्रिया से बनती है ।
इसके निष्कासन के बारे में फिल्म दबंग में सलमान खान द्वारा बोले गए डाय्लोग्स में सम्पूर्ण जानकारी मिलती है ।
पेट में अत्याधिक गैस बनना खाने की किस्म और मात्रा पर बहुत निर्भर करता है ।
लेकिन सबसे ज्यादा कॉमन कारण हैं --पेट में संक्रमण ।
अक्सर पेट में या तो कीड़े होते हैं या अमीबिक इन्फेक्शन होता है । हमारे देश में अधिकतर लोगों को यह शिकायत होती है ।
आखिर गोल गप्पे या चाट पापड़ी तो सभी खाते हैं ।
२) हड्डियों में बुखार रहता है ।
यह शिकायत ओ पी डी में बहुत सुनने को मिलती है । विशेष रूप से निम्न आय वर्ग की महिलाओं में ।
हकीकत : ऐसा कोई बुखार नहीं होता । बुखार होने पर त्वचा का तापमान बढ जाता है । आंतरिक सोफ्ट टिस्युज का तापमान भी बढ़ता है ।
लेकिन ऐसा नहीं होता कि हड्डियों का तापमान बढ़ जाए और त्वचा का सामान्य रहे ।
कारण : अक्सर ऐसे मरीजों को सामान्य कमजोरी होती है , या हाथ पैर में दर्द रहता है । विटामिन्स की कमी भी हो सकती है ।
३) बुखार में ठंडे पानी की पट्टियाँ करना : इसे कोल्ड स्पॉन्जिंग या हाइड्रोथेरपी कहते हैं ।
अक्सर यह सलाह दी जाती है कि बुखार में ठंडे पानी की पट्टियाँ करनी चाहिए ।
भ्रान्ति : I--ठंडा पानी
दरअसल बुखार में ठंडा पानी इस्तेमाल नहीं करना होता । स्पॉन्जिंग के लिए कक्ष के तापमान वाला सादा पानी लेना चाहिए ।
कुछ लोग अत्याधिक ठंडा पानी या बर्फ का प्रयोग करते हैं जो सर्वथा अनुचित है । इससे त्वचा की नसें सिकुड़ जाती हैं और लाभ की बजाय हानि हो सकती है ।
बुखार में स्पोंजिंग से त्वचा पर पानी की जो पर्त बनती है , वह शरीर से ऊष्मा लेकर वाष्पित होती है । यह वाष्पन ही त्वचा को ठंडा कर बुखार उतारने में सहायक होता है ।
भ्रान्ति II --पानी की पट्टी
स्पोंजिंग के लिए लोग अक्सर रुमाल या कोई कपडा लेकर पानी में भिगोकर , तह बनाकर माथे पर रख देते हैं । यह तरीका आंशिक रूप से ही फायदेमंद होता है ।
सही तरीका है --कपडे को सादे पानी में भिगोकर , हल्का सा निचोड़कर पूरे शरीर को पोंछें । इसे लगभग १० मिनट तक बार बार करने से बुखार नीचे आ जायेगा ।
स्पॉन्जिंग करने से निश्चित ही आराम मिलता है । हालाँकि दिन में कई बार करना पड़ सकता है ।
अब एक काम की बात :
उपरोक्त बातें न तो कोई सरकारी डॉक्टर बताएगा न प्राइवेट डॉक्टर । सरकारी डॉक्टर के पास टाइम नहीं होता और प्राइवेट तो कमाता ही ऐसे मरीजों से है । लेकिन इसका सबसे ज्यादा दुरूपयोग करते हैं--क्वैक्स ( नीम हकीम यानि नकली डॉक्टर )।