गाड़ी निकाली और पहुँच गए घर के सबसे पास वाले पार्क --मिलेनियम पार्क में । लेकिन डेढ़ किलोमीटर लम्बे पार्क में पार्किंग के लिए डेढ़ सौ गज ज़मीन भी नहीं थी । जाने क्या सोचा था होर्टीकल्चर डिपार्टमेंट ने । या शायद सोचा ही नहीं ।
खैर , हमने सोचा चलो पुराना किला चलकर बोटिंग करते हैं । यहाँ पार्किंग चिड़िया घर के सामने ही मिलती है । गेट पर पहुंचे तो पार्किंग अटेंडेंट ने पूछा --कहाँ जाना है । हमने कहा -- बोट क्लब । बोला ज़नाब --सब बंद हो चुके हैं --ज़ू भी , पुराना किला भी और बोट क्लब भी । सब साढ़े पांच बजे बंद हो जाते हैं । अज़ीब लगा लेकिन फिर सोचा --चलो चिल्ड्रन्स पार्क चलते हैं इण्डिया गेट पर । वैसे भी वहां बहुत हरियाली होती है ।
रास्ते में ये फूल नज़र आए तो हमने श्रीमती जी को दिखाकर अपना वायदा पूरा किया ।
लेकिन चिल्ड्रन्स पार्क के गेट पर पहुंचे तो गेट बंद पाया । हमने सामने बैठे चौकीदार से पूछा तो पता चला यह भी साढ़े पांच बजे बंद हो जाता है । खीजकर हमने उसी पर सारा गुस्सा निकाल दिया । फिर सोचा , चलो बाहर से ही कुछ फोटो लिए जाएँ अपने मोबाईल से ।
प्ले एरिया ।
मुख्य प्रवेश द्वार से एक नज़ारा ।
यह भी । दूर से ही देख , हम निकल पड़े इण्डिया गेट की ओर । शाम का धुंधलका हो चुका था ।
पश्चिम में सूरज डूब रहा था ।
डूबते सूरज की चमक , इण्डिया गेट की प्रष्ठ भूमि में ।
एक पेड़ के साथ भी ।
इण्डिया गेट पर भी एक बोट क्लब है । हालाँकि फव्वारा बंद था ।
श्रीमती जी की बड़ी तमन्ना थी कि बोटिंग की जाए , लेकिन भीड़ इतनी ज्यादा थी कि कई घंटे का इंतजार करना पड़ता ।इसलिए विचार त्याग दिया । इस बीच मेडम चना जोर गर्म ले आई । हमने श्रीमती जी से कहा --क्यों न चने खाते हुए एक फोटो हो जाए । लेकिन हमारी गाय्नेकोलोजिस्ट पत्नी के हाथ भले ही महिलाओं के पेट काटते हुए कभी नहीं कांपते , परन्तु हमारी फोटो खेंचते हुए ऐसे कांपे कि फोटो में हमारी जगह हमारा भूत नज़र आ रहा था ।
अब तक लाइट्स जल चुकी थी । सामने यह ठूंठ देखकर बड़ा अचरज़ हुआ ।
एक फोटो पीछे से लेकर हम निकल पड़े घर की ओर । लेकिन मेडम की पसंद की आलू कचालू चाट , और आईस क्रीम खाने के बाद ।नोट : ऐसा लगता है , सुरक्षा की दृष्टि से सभी पब्लिक एरिया जल्दी बंद कर दिए जाते हैं । हालाँकि गर्मियों में घर से शाम को ही निकला जा सकता है ।

