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Wednesday, January 1, 2020

नव वर्ष की शुभकामनायें --



1. 

गुजर गया एक और साल ,
जाते जाते देखो कर गया क्या हाल।
भारत तो कांग्रेस मुक्त हो ना सका ,
पर खांसी मुक्त हो गए केजरीवाल।

दिल्ली में बिजली पानी बसें मेट्रो सब मुफ्त हो गए ,
केजरीवाल मोदी को भूल चुनावों में मस्त हो गए।
रोज देते हैं अख़बारों में चार चार पेज के इश्तिहार,
पर भाजपा और कॉंग्रेस नेता जाने क्यों सुस्त हो गए।

शहर में प्रदुषण पड़ गया सब पर भारी ,
एक बार फिर आई ऑड इवन की बारी।
हम करते रहते सड़क पर खड़े उबर का इंतज़ार,
गाड़ियों में फुर्र से निकल जाती महिलाएं सारी।

दिल्ली में जब ऑड ईवन फिर से आया,
सरकार ने ऐसा मुश्किल फरमान सुनाया। 
पडोसी संग कार में बैठो पर पत्नी संग नहीं,
प्रदुषण घटाने का ये फंडा समझ नहीं आया।   

देश में साल भर रही चुनावों की भरमार,
केंद्र में बनी फिर एक बार मोदी सरकार।
भाजपा की अचानक कई राज्यों में हार हो गई ,
पर हार कर भी सीएम बने खट्टर फिर एक बार। 

प्रियंका का पसीना अमेठी की गलियों में बह गया ,
राहुल का पी एम का सपना फिर भी अधूरा रह गया।
महाराष्ट्र में भाजपा जीत कर भी हार गई जब ,
शिवसेना का ईमान कच्ची दिवार सा ढह गया।

आसाराम बेल की आस में दर दर भटकते रहे ,
चिदंबरम भी १०६ दिन तक जेल में टहलते रहे।
तिहाड़ जेल में नेताओं का आवागमन रहा जारी ,
राम रहीम साल भर जेल में ही हनी हनी रटते रहे।

प्रियंका जोनास का रोमांस साल भर तो रह गया ,
रणवीर सिंह भी दीपिका को पूरे साल सह गया।
रणबीर कपूर ने तो साथ आलिआ का पा लिया ,
पर सलमान इस साल भी कुंवारा ही रह गया।

नीरव मोदी पिछले साल ११००० करोड़ लेकर फरार हो गया ,
RBI का कर्जदारों पर १४ लाख करोड़ रुपया उधार हो गया। 
विजय माल्या ९००० करोड़ डकार कर खुद लंदन में बैठा है ,
पर किंगफिशर का २०२० का रंगीन कैलेंडर तैयार हो गया। 

मोदी जी कैब को का बनाने में कामयाब हो गये ,
देश में प्रदर्शन और झगड़े मगर बेहिसाब हो गए। 
दी दी भी करने लगी क का की की छ छा छी छी ,
गली गली में पत्थरबाज चैम्पियन निशानेबाज़ हो गए। 

पुलवामा अटैक से देश में फिर फैला आतंकवाद ,
वायुसेना ने बालाकोट के आतंकी अड्डे किये बर्बाद।
अभिनन्दन ने ऍफ़ १६ गिराकर तोड़ी पाक हेकड़ी,
जाँबाज जिन्दा लौटा लगाकर नारा भारत जिंदाबाद

इधर चीन भारत की डोकलाम कूटनीति से हारा ,
उधर यू एस ने बगदादी को बिल में घुसकर मारा।
किम जोंग पट्ठा कभी ख़ुशी कभी ग़म गाता रहा ,
पर ट्रम्प को पार्लियामेंट ने ट्रम्प्ड किया करारा।

2.

कामना करता हूँ कि --इस नए साल में ,
सलामत रहे-- बच्चों की मुस्कान, पंछियों की उड़ान।
फूलों के रंग, अपनों का संग।
बड़ों का दुलार, और भाई भाई का प्यार!
और सलामत रहे--
देश की आज़ादी, वीरों के हौसले फौलादी,
लोकतंत्र में अटल विश्वास, और रामराज्य की आस !
और कामना करता हूँ कि --
इस वर्ष ये नया साल , करदे दिलों का वो हाल,
कि ढह जायें सब नफरत और मज़हब की दीवारें,
और सर्व धर्म मिल कर पुकारें , मुबारक हो नया साल, मुबारक हो नया साल। 

जनता जब सुख चैन से सो पायेगी ,
बेटियां भी जब सुरक्षित हो जाएँगी, 
इंसान में जब इंसानियत जागेगी ,
नव वर्ष की कामना तभी शुभ हो पायेगी।    

Tuesday, January 1, 2013

गुजरे वर्ष का लेखा जोखा और नव वर्ष की शुभकामनायें --


वर्ष 2012 की अंतिम पोस्ट में ब्लॉगिंग का कच्चा चिट्ठा पढ़कर आप अवश्य आनंदित हुए होंगे। एक अच्छी बात यह हुई कि इसी बहाने हमें भी कई अच्छे ब्लॉगर्स से परिचय का अवसर मिला और हमने उनको फोलो करना भी आरम्भ कर दिया। वर्ष 2013 की पहली पोस्ट में हमेशा की तरह गुजरे वर्ष का लेखा जोखा प्रस्तुत  है :   

गुजर गया फिर एक और साल 
छोड़ गया देखो करके क्या हाल, 
अन्ना करते ही रह गए ना ना , पर 
पॉलिटिक्स में कूद गए केजरीवाल।  

केजरी टोपी कईयों की पगड़ी उतार गई 
भ्रष्टाचार से फिर भी मानवता हार गई,
पोलियो से हम बचे रहे पूरे साल
पर देश को मुई महंगाई मार गई।     

भुखमरी में छूटे पाकिस्तान से भी पीछे 
जनसँख्या में रह गए बस चीन से नीचे, 
डीजल पैट्रोल मिले ना मिले,  
हम तो अब दौड़ेंगे बी आर टी बसों के पीछे।    

राजा रानी की  निकली जेल से गाड़ी 
खुले घूम रहे हैं अब मिस्टर खिलाडी,
किंग की उड़ान में आ गई फिशर 
भला कब तक बचा पाती बियर ताड़ी।     

कसाब का आखिर हो गया हिसाब
पर अफज़ल को नहीं मिला ज़वाब,  
बना बैठा है वो मेहमान सरकारी
कर रहा जो देश के करोड़ों ख़राब।

बसों में घूम रहे दरिन्दे बलात्कारी 
लाठियां चला रहे बेरहम अत्याचारी ,  
फांसी दो निर्भया के गुनहगारों को 
गुहार लगा रही है रुष्ट दुनिया सारी।  

सांसों के दंगल में दामिनी हार गई
जिजीविषा में लेकिन बाज़ी मार गई,
देकर अपने युवा जीवन की कुर्बानी 
लाखों युवाओं की सोच को सुधार गई।    

जनता जब सुख चैन से सो पायेगी 
बेटियां भी जब सुरक्षित हो जाएँगी,  
इंसान में जब इंसानियत जागेगी 
नव वर्ष की कामना तभी शुभ हो पायेगी।     


Sunday, January 3, 2010

गत वर्ष की शुभकामनायें ---देखिये कितनी काम आई ---

आज ही के दिन, एक साल पहले , ३ जनवरी २००९ को मैंने पहली पोस्ट लिखी थी। नव वर्ष की शुभकामनायें ---

इस एक साल में कितनी कामनाएं पूर्ण हुई, आइये देखते हैं --

नव वर्ष के लिए शुभकामनाये कामना करता हूँ कि इस नए साल में सबके जीवन में :

हँसी के फुव्वारे हों ,

खुशी के गुब्बारे हों ,

न सीमा का विवाद हो,

न मुंबई सा आतंकवाद हो !

और इस नए साल में मुक्ति मिले --

भूखों को भूख से ,

घूसखोरों को घूस से ,

किसानो को कर्ज से ,

मरीजों को मर्ज से ।

गरीबों को कुपोषण से ,

शरीफों को शोषण से !

कंजूसों को खर्चों से,

छात्रों को पर्चों से ।

बाबुओं को फाइलों से,

अस्पतालों को घायलों से।

चुनाओं को फर्जी वोटों से ,

देश को नकली नोटों से !

और इस नए साल में सबको मुहँ मांगी मुराद मिले :-

नेताओं को मत मिले,

पार्टियों को बहुमत मिले।

जनता को चावल दाल मिले,

और दो रूपये किलो हर माल मिले!

आतंकवाद से निपटने के लिए :-

पुलिस को ऐ के ४७ मिले,

बुल्लेत्प्रूफ़ जैकेट मिले।

जैकेट भी असली हो,

पर न कोई एनकाउंटर नकली हो !

मोहब्बत की दुनिया में :-

सैफ को मिले करीना ,

सलमान को कटरीना ।

अभिषेक की ऐश रहे,

अमिताभ के हाथ में कैश रहे!

पर इस नए साल में मिले न मिले --

सलमान को कमीज,

पाकिस्तान को तमीज।

प्यासों को शराब,

भूखों को कबाब !

और रहे न रहे--

चाँद संग फिजा बनी अनुराधा,

पुलिस में आई जी पांडा बन के राधा।

शाहरुख़ के सिक्स पैक एब्स,

और मैंगलोर के मयखानों में पैग्स।

ये सब रहे न रहे, पर सलामत रहे--

बच्चों की मुस्कान,

पंछियों की उड़ान।

फूलों के रंग,

अपनों का संग।

बड़ों का दुलार,

और भाई भाई का प्यार!

और सलामत रहे--

देश की आज़ादी,

वीरों के हौसले फौलादी,।

लोकतंत्र में अटल विश्वास,

और रामराज्य की आस!

और कामना करता हूँ कि --

इस वर्ष ये नया साल ,

करदे दिलों का वो हाल,

कि ढह जायें सब नफरत और मज़हब की दीवारें,

और सर्व धर्म मिल कर पुकारें ,

मुबारक हो नया साल,

सबको मुबारक हो नया साल!