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Tuesday, March 15, 2011

डॉक्टर मुझे बचा लो , मैं अभी मरना नहीं चाहता ----

कभी कभी सोचता हूँ , जिंदगी भी कितनी अज़ीब चीज़ है । मनुष्य अभावों में रहकर जिंदगी गुजार देता है, अच्छे भविष्य की आस में । अपनी जिम्मेदारियां पूरी करते करते आदमी की जिंदगी पूरी हो जाती है । अभावों से छुटकारा मिलता है तो जिंदगी का भाव ख़त्म हो जाता है । उधर एक तरफ इच्छाएं बढती जाती हैं , दूसरी तरफ मन में जीने की लालसा भी बढती जाती है ।

प्रस्तुत है , जिंदगी की ऐसी ही एक कशमकश :


I)

डिस्पेंसरी के डॉक्टर से
बोला बीमार
सरकार ,
मुझे बचा लो
मैं अभी मरना नहीं चाहता ।

अभी करनी है बहन की शादी
घर में दादा दादी ,
और मात पिता का भार है ,
अभी जी भर के देखना संसार है ।

छोटे छोटे हैं बच्चे
उम्र में कच्चे ,
रोज चॉकलेट मांगते हैं ।
नादां नहीं जानते हैं
कितनी महंगाई है ,
फिर मैंने भी तो नई नई नौकरी पाई है ।
उस पर ये बीमारी
वर्ना नहीं कराहता
डॉक्टर मुझे बचालो
मैं अभी मरना नहीं चाहता ।

II)

डॉक्टर अब नर्सिंग होम में बैठा था
टेबल पर लेटा था ,
वही मरीज़ , कह रहा था
डॉक्टर मुझे बचा लो
मैं अभी मरना नहीं चाहता ।
बेटे के कॉलिज की फीस भरनी है
शादी भी करनी है ,
बेटी स्यानी हो गई है ।
ताउम्र
किराये पर रहकर ,
पत्नी भी दीवानी हो गई है ।
डी डी ए पर आँख लगाए बैठी है ,
एल टी सी लेकर
चार धाम यात्रा की आस लगाए बैठी है ।
पर लाचारी है
ये कैसी बीमारी है
मैं नहीं जानता ,
डॉक्टर मुझे बचा लो
मैं मरना नहीं चाहता ।

III)

डॉक्टर का नर्सिंग होम
अब बन गया है कॉर्पोरेट अस्पताल ,
दिल का हाल
प्राइवेट रूम में लेटा इस बार ,
सुना रहा है वही बीमार ।
इस दिल को संभालो ।
मैं अभी मरना नहीं चाहता
डॉक्टर मुझे बचा लो ।

बंगला नया बनाया है ,
अभी उद्घाटन भी नहीं कराया है ।
लगाया है ,
स्टॉक्स में कुछ पैसा
खरीदे कुछ गहने हैं ।
प्लॉट के रेट भी तो अभी बढ़ने हैं ।
बस दिल में एक स्टेंट डलवा लूँ ,
घुटने दोनों बदलवा लूँ ।
कटवा लूँ
टिकेट यू एस की ,
बेटे ने बुलावा भेजा है ।
देखना है पोते का चेहरा
दिल मेरा ,
बहुत करता है जाने का ।
अभी तो रंग देखना है जमाने का ।
दिल करता है लेने का
चैन की सांस ,
आस पास की तरक्की का अहसास ,
अब होने लगा है ।
दुनिया की रंगीनियों में अब
मन खोने लगा है ।

क्रूज , केसिनो , क्लब, रेस्तरां, एस्केलेटर
मेट्रो , मॉल , मोबाइल , टी थ्री ट्रेवेलेटर
हर कोई कितना नहीं सराहता ।
डॉक्टर मुझे बचा लो
मैं अभी मरना नहीं चाहता ।



नोट : बीता कल गुजर गया । भविष्य का किसी को पता नहीं । जो आज है , वही सच है । आज के एक एक क्षण को ख़ुशी से जीया जाए । बस यही फ़लसफ़ा है जिंदगी का ।