उस दिन हमने भी एक सबक लिया कि कभी भी अंजान लोगों के साथ मिलकर दारू नहीं पीनी चाहिए ।
बचपन से लेकर अब तक और भी कई बातें सीखीं हैं जैसे :
* किसी अंजान व्यक्ति से लेकर कुछ खाना नहीं चाहिए विशेषकर सफ़र में ।
* किसी अंजान व्यक्ति पर आँख मूंदकर विश्वास नहीं करना चाहिए ।
* चापलूसों से सावधान रहना चाहिए विशेषकर जो ज़रुरत से ज्यादा मीठी मीठी बातें कर रहे हों ।
* गाड़ी में किसी को लिफ्ट नहीं देनी चाहिए विशेषकर अकेली महिला को ।
जब से मंच पर आने लगे हैं तब से पब्लिक स्पीकिंग के बारे में कई बातें सीखीं हैं । इसमें सबसे विशेष है कि कभी भी किसी व्यक्ति का मज़ाक इस तरह नहीं उड़ाना चाहिए कि उसे बुरा लगे ।
आखिर मज़ाक और उपहास में अंतर होता है ।
विशुद्ध हास्य में सौम्यता होती है न कि छिछोरापन ।
होली एक त्यौहार है मौज मस्ती का , रंगों उमंगों का , खाने खिलाने का , पीने पिलाने का , हंसने हंसाने का , मिलने मिलाने का और सबको प्यार से गले लगाने का ।
होली मनाने के तरीके भी अलग अलग होते हैं । कहीं रंग गुलाल से मनाई जाती है , कहीं पानी से । कहीं लठमार होली होती है तो कहीं कोलड़ा मार । कहीं कहीं गोबर और कीचड़ में सनकर भी होली खेली जाती है । हालाँकि ऐसी होली हमने कभी नहीं खेली ।
लेकिन इस होली पर कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ जब हमने एक अंजान ब्लोगर के आमंत्रित करने पर उनके ब्लॉग पर हास्य की चंद पंक्तियाँ भेज दीं । अब भले ही वो एक जाने माने ग़ज़लकार , हास्य कलाकार या व्यंगकार हों , लेकिन हमारे लिये वो और उनके लिए हम अंजान ही तो थे ।
फिर हमारे साथ कुछ ऐसा हादसा हुआ जो हम सोच भी नहीं सकते थे कि कोई ऐसा करने की सोच भी सकता है ।
अफ़सोस तो तब हुआ जब कुछ अपने मित्र भी वहां चुस्कियां लेते नज़र आए ।
आखिर एक बार फिर यही समझ आया कि ब्लोग्स पर भी किसी अंजान व्यक्ति पर भरोसा नहीं किया जा सकता ।
वैसे भी इस आभासी दुनिया में अक्सर लोगों की फितरत छुपी ही रहती है ।
नोट : हम जानते हैं कि अक्सर गलती करने वाले को गलती करने का अहसास नहीं होता । न ही अक्सर उसकी ऐसी मंशा होती है । लेकिन गलती से की गई गलती भी गलती ही कहलाएगी ।

